हरियाणा में स्कूलों की जमीनी हकीकत जांचने निकले शिक्षा मंत्री, गंदगी पर अधिकारियों को लगाई फटकार

हरियाणा में स्कूलों की जमीनी हकीकत जांचने निकले शिक्षा मंत्री, गंदगी पर अधिकारियों को लगाई फटकार

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने सोमवार को अंबाला और करनाल जिलों का दौरा किया। मंत्री ने बिना पूर्व सूचना के तीन सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया और कक्षाओं से लेकर पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य जरूरी सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जहां कुछ व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, वहीं खामियां सामने आने पर मंत्री ने अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

अंबाला जिले के साहा स्थित पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री का ध्यान स्कूल परिसर में स्वच्छता की स्थिति की ओर गया। शौचालय परिसर के आसपास गंदगी और दुर्गंध मिलने पर उन्होंने स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई। मंत्री ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब स्कूल में जिम्मेदार अधिकारी मौजूद हैं तो फिर इस तरह की अव्यवस्था कैसे बनी हुई है।

महीपाल ढांडा ने कहा कि स्कूल ऐसा स्थान है जहां बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा बिताते हैं और वहां स्वच्छ वातावरण होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक और अधिकारी खुद किसी स्थान पर खड़े होकर असहज महसूस करें तो यह समझना चाहिए कि वहां पढ़ने वाले बच्चों को कितनी परेशानी होती होगी। उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने और आवश्यक मरम्मत कार्य करवाने के निर्देश दिए।

शिक्षा मंत्री ने स्कूल में पेयजल की सुविधा का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वाटर कूलर के आसपास की व्यवस्था को देखा और पाया कि पानी की निकासी के लिए उचित इंतजाम नहीं है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को तत्काल ड्रेनेज व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए, ताकि पानी जमा न हो और विद्यार्थियों को साफ-सुथरा पेयजल उपलब्ध कराने के साथ परिसर में स्वच्छता भी बनी रहे।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने केवल अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय खुद व्यवस्थाओं को परखा। उन्होंने वाटर कूलर से स्वयं पानी पीकर पेयजल की व्यवस्था की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए और छोटी-छोटी कमियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

साहा के स्कूल के बाद शिक्षा मंत्री करनाल जिले के नीलोखेड़ी क्षेत्र में पहुंचे। उन्होंने रायपुर रोडान गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय हाई स्कूल का निरीक्षण किया। दोनों स्कूलों में उन्होंने अलग-अलग कक्षाओं का दौरा किया और विद्यार्थियों के साथ सीधे बातचीत की।

मंत्री ने बच्चों से उनकी पढ़ाई को लेकर सवाल किए। उन्होंने पूछा कि उन्हें कौन-कौन से शिक्षक पढ़ाते हैं, कक्षा में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम उन्हें समझ में आता है या नहीं और पढ़ाई के दौरान उन्हें किस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान विद्यार्थियों से किताबों की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली गई।

महीपाल ढांडा ने छात्रों से यह जानने की कोशिश की कि स्कूल में शिक्षा का माहौल कैसा है और क्या उन्हें पाठ्यक्रम के अनुसार पर्याप्त मार्गदर्शन मिल रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर शिक्षकों की कार्यप्रणाली और पढ़ाई की गुणवत्ता का फीडबैक लिया। मंत्री ने कहा कि बच्चों से सीधे बातचीत करने पर स्कूल की वास्तविक स्थिति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिलती है।

उन्होंने स्कूल प्रबंधन से विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं, शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षाओं की स्थिति और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े किसी भी जरूरी संसाधन की कमी नहीं होनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे राज्य की जिम्मेदारी हैं और उन्हें निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की तरह ही बेहतर शैक्षणिक वातावरण और मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में केवल पढ़ाई पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों की समस्याओं को लेकर केवल कागजी रिपोर्ट तैयार न की जाए, बल्कि मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल में अगर कोई कमी सामने आती है तो उसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए, ताकि उसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर न पड़े।

महीपाल ढांडा ने कहा कि स्कूलों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सरकार लगातार काम कर रही है और इसके लिए जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत किया जा रहा है। औचक निरीक्षण इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बिना पूर्व सूचना के स्कूलों का निरीक्षण किया जाता रहेगा।

शिक्षा मंत्री इससे पहले भी सरकारी शिक्षण संस्थानों की स्थिति का जायजा लेने के लिए औचक दौरे कर चुके हैं। सोमवार के निरीक्षण से पहले वह प्रदेश के तीन राजकीय कॉलेजों और पांच सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान उन्होंने शिक्षण व्यवस्था, विद्यार्थियों की सुविधाओं और संस्थानों में मौजूद कमियों की जानकारी ली थी।

मंत्री के लगातार औचक निरीक्षणों को शिक्षा विभाग में जवाबदेही बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को यह संदेश दिया जा रहा है कि केवल रिकॉर्ड में सुविधाओं का उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका वास्तविक रूप से विद्यार्थियों तक पहुंचना भी जरूरी है।

सरकारी स्कूलों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई बार शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्री का खुद स्कूलों में जाकर शौचालय, पेयजल और कक्षाओं की स्थिति देखना विभागीय अधिकारियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि इन मामलों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

साहा स्कूल में गंदगी मिलने के बाद मंत्री द्वारा तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाने से यह भी स्पष्ट हुआ कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां गिनाना नहीं, बल्कि मौके पर समाधान की प्रक्रिया शुरू करवाना भी है। इसी तरह पेयजल निकासी की समस्या को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को तुरंत व्यवस्था सुधारने के लिए कहा गया।

करनाल के स्कूलों में विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान मंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने बच्चों से सीधे सवाल पूछकर यह समझने का प्रयास किया कि सरकारी स्कूलों में उन्हें पढ़ाई के दौरान किस तरह का अनुभव मिल रहा है। किताबों और पाठ्यक्रम को लेकर छात्रों की प्रतिक्रिया भी ली गई।

शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को पढ़ाई के लिए आवश्यक किताबों या अन्य संसाधनों की कमी का सामना नहीं करना चाहिए। स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि बच्चों की जरूरतों को समय पर पूरा किया जाए।

सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बुनियादी ढांचे के विकास के साथ शिक्षण व्यवस्था की निगरानी, शिक्षकों की जवाबदेही और विद्यार्थियों से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को भी महत्व दिया जा रहा है।

महीपाल ढांडा ने कहा कि औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे और इनका उद्देश्य किसी अधिकारी या शिक्षक को परेशान करना नहीं, बल्कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाकर उसमें सुधार करना है। उन्होंने कहा कि जहां अच्छा काम हो रहा है, उसे प्रोत्साहित किया जाएगा और जहां कमियां मिलेंगी, वहां सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

शिक्षा मंत्री के अंबाला और करनाल दौरे से यह संकेत मिला है कि विभाग अब सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं की निगरानी को लेकर अधिक सक्रिय रुख अपनाने की तैयारी में है। स्वच्छता, पेयजल और विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़े संसाधनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक माहौल भी मिले। आने वाले दिनों में होने वाले औचक निरीक्षणों से यह पता चलेगा कि इन निर्देशों का स्कूल स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और कमियों को दूर करने की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।