हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज के चालक के बेटे को विदेश भेजने का दावा कर करीब 50 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पानीपत के एक एजेंट ने अमेरिका भेजने के नाम पर रकम लेने के बाद युवक को पहले फ्रांस और फिर मैक्सिको पहुंचा दिया। बाद में युवक को अमेरिका में प्रवेश कराने की कोशिश की गई, जहां अमेरिकी पुलिस ने उसे पकड़ लिया। करीब 14 महीने तक कैंप में रहने के बाद दिसंबर 2025 में उसे भारत वापस भेज दिया गया।
मामले को लेकर चालक राकेश कुमार ने हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज से शिकायत कर एजेंट के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में राकेश ने आरोप लगाया है कि जब उसने अपनी रकम वापस मांगी तो एजेंट ने उसे जान से मारने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। मामले में पानीपत के ओल्ड इंडस्ट्रियल थाने में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता राकेश कुमार गोहाना की गौतम नगर कॉलोनी के रहने वाले हैं और हरियाणा सरकार में चालक के पद पर कार्यरत हैं। हाल ही में उनकी तैनाती कैबिनेट मंत्री अनिल विज के निवास पर चालक के तौर पर हुई है। राकेश का छोटा बेटा नवीन वर्मा सीनियर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है। बेटे के बेहतर भविष्य और विदेश में रोजगार की उम्मीद में परिवार ने एजेंट से संपर्क किया था।
राकेश के अनुसार, उनके साले के एक दोस्त मनोज कुमार के जरिए उनकी मुलाकात पानीपत निवासी एजेंट कुलदीप से हुई। आरोप है कि कुलदीप ने नवीन को अमेरिका भेजने का भरोसा दिलाया और इसके लिए करीब 40 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। एजेंट की बातों पर विश्वास करते हुए परिवार ने अलग-अलग समय पर उसे रकम देना शुरू कर दिया।
शिकायत के मुताबिक, शुरुआत में एजेंट को पांच लाख रुपये एडवांस दिए गए। इसके बाद अक्टूबर 2024 में पासपोर्ट से संबंधित प्रक्रिया के लिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये और मांगे गए। राकेश का कहना है कि यह रकम पानीपत में नकद दी गई थी। इसके कुछ दिन बाद 19 अक्टूबर को वीजा प्रक्रिया के नाम पर आठ लाख रुपये लिए गए।
राकेश ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी एजेंट की ओर से अलग-अलग कारण बताकर पैसे मांगे जाते रहे। परिवार ने कुछ रकम डिजिटल माध्यम से भी भेजी। शिकायत के अनुसार, विभिन्न तारीखों में गूगल-पे के जरिए भी भुगतान किया गया। इस तरह कुल मिलाकर परिवार की ओर से एजेंट को करीब 50 लाख रुपये दिए जाने का आरोप है।
परिवार का कहना है कि एजेंट ने शुरुआत में नवीन को अमेरिका भेजने का आश्वासन दिया था। बाद में उसकी योजना बदलती रही। आरोप है कि पहले युवक को फ्रांस भेजने की बात कही गई, लेकिन अंततः उसे मैक्सिको पहुंचा दिया गया। वहाँ से नवीन को अमेरिका में प्रवेश कराने की कोशिश की गई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, अमेरिका में प्रवेश के बाद नवीन को वहां की पुलिस ने पकड़ लिया। इसके बाद उसे करीब 14 महीने तक कैंप में रहना पड़ा। परिवार के लिए यह अवधि बेहद मुश्किल रही और उन्हें बेटे की स्थिति को लेकर लगातार चिंता बनी रही। आखिरकार दिसंबर 2025 में नवीन को डिपोर्ट कर भारत वापस भेज दिया गया।
भारत लौटने के बाद राकेश ने एजेंट से अपनी रकम वापस करने की मांग की। उनका आरोप है कि एजेंट ने शुरुआत में पैसे लौटाने का आश्वासन दिया और पंचायत के सामने एक महीने का समय भी लिया। परिवार को उम्मीद थी कि तय समय के भीतर रकम वापस कर दी जाएगी, लेकिन आरोप है कि समय बीतने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया।
राकेश के अनुसार, इसके बाद एजेंट ने फोन उठाना भी बंद कर दिया। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने मामले को पुलिस और प्रशासन के समक्ष उठाने का फैसला किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब रकम वापस मांगने पर एजेंट की ओर से उन्हें धमकियां दी जा रही हैं।
राकेश ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है। इसके साथ ही उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। राकेश ने इस पूरे मामले में अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
उन्होंने कैबिनेट मंत्री अनिल विज से मांग की है कि मामले में आरोपित एजेंट और उसके सहयोगी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि उन्होंने अपने बेटे के भविष्य के लिए अपनी मेहनत की कमाई एजेंट को दी थी, लेकिन विदेश भेजने की प्रक्रिया के नाम पर उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकायतकर्ता से कितनी रकम ली गई, रकम किन माध्यमों से भेजी गई और विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया में आरोपितों की क्या भूमिका थी।
जांच में भुगतान से जुड़े दस्तावेज, नकद लेनदेन, गूगल-पे ट्रांजेक्शन, पासपोर्ट और वीजा से संबंधित कागजात तथा विदेश यात्रा के रिकॉर्ड अहम साक्ष्य हो सकते हैं। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि युवक को फ्रांस और मैक्सिको भेजने के पीछे एजेंट की क्या योजना थी और उसे अमेरिका पहुंचाने की प्रक्रिया किस तरह की गई।
इस मामले ने एक बार फिर विदेश भेजने के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विदेश में पढ़ाई या रोजगार के लिए जाने वाले युवाओं और उनके परिवारों को अक्सर एजेंटों के माध्यम से वीजा और यात्रा संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है। कई मामलों में आकर्षक वादों के आधार पर बड़ी रकम वसूलने के बाद एजेंटों पर शर्तें बदलने या प्रक्रिया पूरी न करने के आरोप लगते रहे हैं।
राकेश के परिवार का आरोप है कि उनके बेटे को अमेरिका भेजने का भरोसा देकर उनसे भारी रकम ली गई, लेकिन जिस तरीके से उसे अलग-अलग देशों के रास्ते अमेरिका पहुंचाया गया, उससे अंततः युवक को परेशानी का सामना करना पड़ा और उसे भारत वापस लौटना पड़ा।
अब पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपितों ने किस उद्देश्य से रकम ली थी, विदेश भेजने के लिए कौन सी व्यवस्था की गई थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और संबंधित तथ्यों एवं दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
राकेश कुमार ने मांग की है कि जांच जल्द पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनकी कथित तौर पर ठगी गई रकम वापस दिलाई जाए। साथ ही उन्होंने परिवार को धमकी दिए जाने के आरोपों को देखते हुए सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की है।




