चंडीगढ़: हरियाणा सरकार वर्ष 2047 तक राज्य को विकसित, समृद्ध और समावेशी बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न विभागों की प्रगति, सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की विकास रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘हरियाणा विजन-2047’ के तहत तैयार किए जा रहे रोडमैप की समीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना था कि राज्य की विकास योजनाएं समयबद्ध, पारदर्शी और परिणामोन्मुख तरीके से आगे बढ़ें।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास मॉडल की सफलता तभी मानी जाएगी, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सुविधाएं बिना किसी भेदभाव और अनावश्यक देरी के पहुंच सकें। इसके लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीक का उपयोग और नियमित निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
‘हरियाणा विजन-2047’ को लेकर तैयार हो रहा व्यापक विकास रोडमैप
बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष ‘हरियाणा विजन-2047’ के विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुति दी। इस विजन के माध्यम से राज्य के आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, तकनीकी नवाचार, डिजिटल प्रशासन और ग्रामीण विकास जैसे कई क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। ऐसे में विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ हरियाणा को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियां तैयार कर रही है, जिनका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्रों में दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करें और यह सुनिश्चित करें कि विकास का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों और समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे।
जनकल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर
बैठक में सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा अंत्योदय विभाग (SEWA) द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के लाभार्थियों की सही पहचान, समय पर सहायता और पारदर्शी प्रक्रिया सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी पात्र व्यक्ति को केवल प्रक्रियागत कारणों से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों को अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही तय की जाए और समय-समय पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन भी किया जाए।
नशा मुक्त हरियाणा के लिए व्यापक जनभागीदारी की जरूरत
बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत हरियाणा में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक दृष्टि से भी गंभीर चुनौती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रशासन, शिक्षा संस्थानों, सामाजिक संगठनों, पंचायतों और अभिभावकों की संयुक्त भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जागरूकता कार्यक्रम केवल औपचारिक अभियान तक सीमित न रहें, बल्कि स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और शहरी क्षेत्रों में नियमित रूप से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक वर्ग इस अभियान से जुड़ता है, तो नशे के खिलाफ प्रभावी वातावरण तैयार किया जा सकता है।
डिजिटल तकनीक से मजबूत होगी सेवा वितरण प्रणाली
मुख्यमंत्री ने बैठक में सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से योजनाओं की निगरानी, लाभार्थियों का सत्यापन, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए ताकि आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी और लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में ई-गवर्नेंस को और अधिक प्रभावी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां तैयार करने पर चर्चा
बैठक में वर्तमान योजनाओं के साथ-साथ भविष्य की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई नीतिगत पहलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बदलते आर्थिक परिवेश, रोजगार के नए अवसरों, तकनीकी बदलावों और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप कई सुझाव प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और समय के साथ योजनाओं में आवश्यक सुधार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का मूल्यांकन केवल खर्च के आधार पर नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव और परिणामों के आधार पर किया जाए।
सामाजिक समावेशन और समान अवसरों पर सरकार का फोकस
बैठक के दौरान यह भी दोहराया गया कि हरियाणा विजन-2047 का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। सरकार सामाजिक समावेशन, समान अवसर, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के कौशल विकास, बुजुर्गों के कल्याण और कमजोर वर्गों के उत्थान को भी समान महत्व दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिले। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।
अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी विभागों के अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करे और निर्धारित समयसीमा के भीतर योजनाओं को पूरा करने का प्रयास करे।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाया जाना चाहिए। अधिकारियों को जनहित से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए ताकि लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा करती रहेगी और आवश्यकतानुसार नीतियों में सुधार भी किए जाएंगे।
विकसित हरियाणा के लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, प्रशासन और समाज के सामूहिक प्रयासों से हरियाणा वर्ष 2047 तक विकास, सुशासन, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है और प्रत्येक विभाग को स्पष्ट लक्ष्य दिए जा रहे हैं। विकास की इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, जनभागीदारी, तकनीकी नवाचार और प्रभावी प्रशासन को समान महत्व दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निगरानी, विभागीय समन्वय और नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, तो ‘हरियाणा विजन-2047’ केवल एक दस्तावेज नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला साबित होगा। आने वाले वर्षों में इसी दिशा में विभिन्न विभागों की कार्ययोजनाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक विकास और सुशासन के लक्ष्यों को भी समान रूप से प्राप्त किया जा सके।




