ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच भारत को मिला नया बाजार, अर्जेंटीना ने दवा कंपनियों के लिए खोले रास्ते

ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच भारत को मिला नया बाजार, अर्जेंटीना ने दवा कंपनियों के लिए खोले रास्ते

अमेरिकी बाजार में टैरिफ और व्यापारिक नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत अपने निर्यात के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। इसी दिशा में अर्जेंटीना के साथ हुई बातचीत को भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अर्जेंटीना ने भारतीय दवा कंपनियों के लिए अपने बाजार में प्रवेश को आसान बनाने और नियामकीय अड़चनों को कम करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।

भारत के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, अर्जेंटीना अपने फार्मास्युटिकल रेगुलेटरी सिस्टम में भारत की स्थिति को ‘एनेक्स II’ से ‘एनेक्स I’ में अपग्रेड करने पर सहमत हुआ है। इसके अलावा दोनों देशों ने दवा क्षेत्र में बाजार तक पहुंच से जुड़ी बाधाओं को कम करने पर भी चर्चा की है। इससे भारतीय कंपनियों को अर्जेंटीना में अपने उत्पादों का विस्तार करने के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

भारत के लिए यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए प्रमुख बाजारों में शामिल रहा है। ऐसे में दक्षिण अमेरिकी देशों में कारोबार का विस्तार भारतीय कंपनियों को अपने निर्यात बाजार में विविधता लाने का मौका दे सकता है।

अर्जेंटीना में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ने की उम्मीद

भारतीय फार्मा कंपनियां दुनिया के कई देशों में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की आपूर्ति के लिए जानी जाती हैं। अर्जेंटीना की ओर से नियामकीय व्यवस्था में भारत की स्थिति बेहतर करने की पहल से वहां भारतीय दवाओं के लिए संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अर्जेंटीना ने अपने फार्मास्युटिकल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में भारत को उच्च श्रेणी में शामिल करने का भरोसा दिया है। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश से संबंधित प्रक्रियाओं को अपेक्षाकृत सरल बनाना है।

अगर इन प्रक्रियाओं में व्यावहारिक स्तर पर भी आसानी आती है, तो भारतीय दवा निर्माताओं को अर्जेंटीना में अपने उत्पादों का पंजीकरण, बाजार विस्तार और कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दूसरी तरफ अर्जेंटीना के लोगों को भी कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं के अधिक विकल्प मिलने की संभावना है।

ब्यूनस आयर्स में हुई अहम बातचीत

इस पूरे मामले पर चर्चा इसी सप्ताह भारत और अर्जेंटीना के अधिकारियों के बीच हुई। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स पहुंचे थे। उनकी यात्रा के दौरान भारत-अर्जेंटीना जॉइंट ट्रेड कमिटी यानी JTC की बैठक आयोजित की गई।

24 अगस्त 2026 को ब्यूनस आयर्स के पलासियो सैन मार्टिन में हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत हुई। फार्मास्युटिकल सेक्टर में बाजार तक पहुंच का विषय भी इसी बैठक के दौरान प्रमुखता से सामने आया।

बैठक का फोकस केवल दवा उद्योग तक सीमित नहीं रहा। दोनों देशों ने ऐसे कई क्षेत्रों पर चर्चा की, जहां आने वाले समय में व्यापार और निवेश को तेजी दी जा सकती है।

6.5 अरब डॉलर के पार पहुंचा कारोबार

भारत और अर्जेंटीना के आर्थिक रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 6.5 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। मंत्रालय के अनुसार, इसमें सालाना आधार पर 17 प्रतिशत से ज्यादा की लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

व्यापार में बढ़ोतरी के साथ अब दोनों देश निवेश के मोर्चे पर भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। माइनिंग, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों को संभावनाओं वाले प्रमुख सेक्टर के तौर पर देखा जा रहा है।

अर्जेंटीना प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण देश है। खास तौर पर वहां मौजूद लिथियम भंडार भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज और आधुनिक ऊर्जा तकनीकों में लिथियम की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत अर्जेंटीना के खनिज क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

लिथियम प्रोजेक्ट में KABIL की बढ़ी सक्रियता

अर्जेंटीना में भारत की सरकारी कंपनी KABIL की लिथियम से जुड़ी गतिविधियां भी चर्चा में रहीं। मंत्रालय ने बताया कि कैटामार्का प्रांत में भारत की कंपनी की लिथियम माइनिंग पहल में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

इस परियोजना से जुड़े दूसरे चरण की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है। इसे भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

लिथियम मौजूदा समय में दुनिया की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इलेक्ट्रिक कारों से लेकर ऊर्जा भंडारण प्रणालियों तक में इसका इस्तेमाल होता है। भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी निर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ देश के लिए लिथियम की विश्वसनीय आपूर्ति भी अहम होती जा रही है।

अर्जेंटीना में KABIL की मौजूदगी भारत को इस रणनीतिक खनिज की वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकती है।

सिर्फ दवा नहीं, इन सेक्टरों पर भी नजर

भारत और अर्जेंटीना के बीच सहयोग का दायरा अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है। दोनों देशों ने बातचीत के दौरान एविएशन, अंतरिक्ष तकनीक, टेलीकम्युनिकेशन और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने पर जोर दिया।

तकनीकी क्षेत्र में 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे। इन क्षेत्रों में भारत की तेजी से बढ़ती तकनीकी क्षमता और अर्जेंटीना की लैटिन अमेरिकी बाजार में स्थिति दोनों देशों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकती है।

अगर डिजिटल सेवाओं और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाया जाता है, तो भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए भी अर्जेंटीना के साथ कारोबार बढ़ाने के रास्ते खुल सकते हैं।

भारत-मर्कोसुर व्यापार को भी मिल सकती है रफ्तार

अर्जेंटीना के साथ बातचीत का एक बड़ा पहलू भारत और मर्कोसुर के बीच व्यापारिक संबंधों से भी जुड़ा है। मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का प्रमुख क्षेत्रीय व्यापार समूह है। इसमें अर्जेंटीना के अलावा ब्राजील, उरुग्वे और पैराग्वे शामिल हैं।

भारत और मर्कोसुर के बीच प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट यानी PTA पहले से लागू है। यह समझौता 1 जून 2009 से प्रभावी हुआ था। अब दोनों पक्ष इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

PTA के विस्तार से भारत को दक्षिण अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं मर्कोसुर देशों के लिए भी भारतीय बाजार में अपने उत्पादों को आगे बढ़ाने के अवसर बढ़ेंगे।

भारत के लिए दक्षिण अमेरिका एक ऐसा क्षेत्र है जहां आने वाले समय में निर्यात के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। खासकर फार्मा, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी सेवाओं और अन्य औद्योगिक उत्पादों के लिए इस क्षेत्र में संभावनाएं देखी जा रही हैं।

व्यापार को आसान बनाने पर जोर

दोनों पक्षों के बीच व्यापार को अधिक सुगम बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर भी काम आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। मंत्रालय के मुताबिक, ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ से जुड़े मुद्दों पर प्रगति हुई है।

इसके अलावा डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन को अपनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। व्यापार में यह दस्तावेज यह साबित करने में मदद करता है कि किसी उत्पाद का निर्माण किस देश में हुआ है।

डिजिटल प्रक्रिया लागू होने से कागजी कामकाज कम किया जा सकता है और सीमा पार व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेज किया जा सकता है। इससे कंपनियों के लिए निर्यात और आयात की प्रक्रिया अधिक कुशल बनने की उम्मीद है।

अमेरिका पर निर्भरता घटाने का अवसर

अमेरिका भारतीय दवा उद्योग के सबसे बड़े निर्यात बाजारों में से एक है। इसलिए अमेरिकी व्यापार नीति में होने वाला बदलाव भारतीय कंपनियों पर सीधा असर डाल सकता है। टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच कंपनियां नए बाजारों की तलाश कर रही हैं।

ऐसे समय में अर्जेंटीना के साथ नियामकीय और व्यापारिक सहयोग बढ़ना भारत के लिए रणनीतिक फायदा साबित हो सकता है। हालांकि अर्जेंटीना का बाजार अमेरिका की तुलना में छोटा है, लेकिन इसे दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र में प्रवेश के एक महत्वपूर्ण दरवाजे के रूप में देखा जा सकता है।

अगर भारत-अर्जेंटीना व्यापार समझौते और मर्कोसुर के साथ मौजूदा PTA को आगे विस्तार मिलता है, तो भारतीय कंपनियों के लिए सिर्फ अर्जेंटीना ही नहीं बल्कि व्यापक दक्षिण अमेरिकी बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है।

आने वाले समय में बढ़ सकती है साझेदारी

भारत और अर्जेंटीना के बीच हालिया बातचीत से संकेत मिलता है कि दोनों देश अपने रिश्तों को केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रखना चाहते। फार्मास्युटिकल्स से लेकर लिथियम, ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, एविएशन और डिजिटल तकनीक तक सहयोग के कई नए क्षेत्र सामने आए हैं।

भारतीय दवा कंपनियों के लिए अर्जेंटीना में नियामकीय स्थिति बेहतर होना इस पूरी साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। इससे भारतीय कंपनियों को दक्षिण अमेरिकी बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिलेगा।

दूसरी ओर अर्जेंटीना को भारत की कम लागत वाली दवाओं, तकनीकी क्षमता और निवेश का लाभ मिल सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापारिक सहयोग आने वाले वर्षों में एक बड़े आर्थिक रिश्ते का आधार बन सकता है।

अमेरिकी टैरिफ नीतियों के बीच भारत जिस तरह अपने व्यापारिक साझेदारों का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, उसमें अर्जेंटीना की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। फार्मा के साथ-साथ लिथियम, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भारत को दक्षिण अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का नया अवसर दे रहा है।