नेपाल बाढ़ की तबाही में 1068 मौतें, 4600 से ज्यादा अब भी लापता: शवों की पहचान के लिए DNA जांच का सहारा

नेपाल बाढ़ की तबाही में 1068 मौतें, 4600 से ज्यादा अब भी लापता: शवों की पहचान के लिए DNA जांच का सहारा

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। पहाड़ी इलाकों से लेकर नदी किनारे बसे क्षेत्रों तक तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे, कीचड़ और पानी के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। हालांकि, भारी मात्रा में जमा मलबे और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू अभियान में लगातार मुश्किलें सामने आ रही हैं।

इस प्राकृतिक आपदा ने हजारों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई लोगों ने अपने पूरे परिवार को खो दिया, जबकि बड़ी संख्या में परिवार ऐसे हैं जिन्हें अभी तक अपने लापता परिजनों के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां एक तरफ जीवित बचे लोगों तक मदद पहुंचाने में लगी हैं, तो दूसरी ओर लापता लोगों की खोज और बरामद शवों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है।

अब तक की जानकारी के मुताबिक नेपाल में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में 1,068 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से करीब 400 मामलों में शवों के पूरे शरीर के बजाय केवल आंशिक अवशेष बरामद किए जा सके हैं। इसके अलावा लगभग 4,606 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों की संख्या भी काफी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 500 विदेशी नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

तबाही के बीच अपनों की तलाश में हजारों परिवार

बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों की पहचान करना है, जिनके शव बेहद खराब स्थिति में बरामद हुए हैं। कई शव लंबे समय तक पानी और गाद के संपर्क में रहे। कुछ शव मलबे के नीचे दबे मिले, जबकि कई बहकर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच गए। इस वजह से शवों की पहचान पारंपरिक तरीके से करना बेहद कठिन हो गया है।

कई परिवार राहत शिविरों और प्रशासनिक केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि कहीं से उनके लापता रिश्तेदार के बारे में कोई जानकारी मिल जाए। लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी हजारों परिवारों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जगह-जगह मलबे के ढेर लगे हुए हैं। सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और कई इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है। यही कारण है कि बचाव दल को लापता लोगों की तलाश के लिए काफी सावधानी से अभियान चलाना पड़ रहा है।

चीनी नागरिकों का भी नहीं मिला सुराग

नेपाल में बाढ़ की चपेट में आए लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। इनमें कई चीनी नागरिक शामिल हैं, जो नेपाल में सड़क निर्माण और हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े काम कर रहे थे।

चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल सका है। इन लोगों के परिवार भी अपने परिजनों की स्थिति जानने के लिए लगातार जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

नेपाल में चल रही कई निर्माण और ऊर्जा परियोजनाओं के आसपास बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। इन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों से संपर्क टूटने के बाद उनके लापता होने की खबर सामने आई। अब दोनों देशों के प्रभावित परिवारों की मुख्य मांग यही है कि प्रशासन लापता लोगों की स्थिति को लेकर स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराए।

एक लड़की ने खो दिए परिवार के 17 सदस्य

इस आपदा की भयावहता का अंदाजा उस नेपाली लड़की की कहानी से लगाया जा सकता है, जिसने बाढ़ में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। इतने बड़े पैमाने पर अपनों को खोने के बाद भी वह बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ अस्थायी शिविर में रहने को मजबूर है।

बिदुर इलाके में बड़ी संख्या में परिवार अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और अस्थायी शिविरों में पहुंच गए हैं। इन लोगों के सामने फिलहाल दोहरी परेशानी है। एक तरफ वे अपने घर और संपत्ति गंवा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर दोबारा भारी बारिश और बाढ़ आने का डर लगातार बना हुआ है।

राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा और भविष्य को लेकर है। कई परिवारों को नहीं पता कि वे अपने घर वापस कब लौट पाएंगे और वहां लौटने के बाद रहने की स्थिति कैसी होगी। बाढ़ ने मकानों, सड़कों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।

यूपी में मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव

नेपाल की बाढ़ से जुड़ी एक अन्य घटना में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद किए गए नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर नेपाल को सौंप दिए गए।

बताया गया कि ये सभी लोग नेपाल में अचानक आई बाढ़ के दौरान पानी के तेज बहाव में बह गए थे। बाद में उनके शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद हुए। शवों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया।

बरामद शवों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। इस तरह सीमा पार से शवों की बरामदगी ने यह भी दिखाया है कि बाढ़ का प्रभाव केवल नेपाल के भीतर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेज बहाव के कारण लोगों के शव दूसरे क्षेत्रों तक भी पहुंच गए।

शवों को जलाने के बजाय दफनाने का फैसला

बाढ़ के बाद नेपाल प्रशासन के सामने एक और गंभीर चुनौती शवों के अंतिम संस्कार और उनकी पहचान की है। बड़ी संख्या में ऐसे शव मिले हैं, जिनकी पहचान तुरंत संभव नहीं हो पा रही है। इन शवों को फिलहाल जलाने के बजाय दफनाने का फैसला लिया जा रहा है।

इसके पीछे सबसे अहम वजह DNA जांच है। प्रशासन चाहता है कि अज्ञात शवों के अवशेष सुरक्षित रखे जाएं, ताकि बाद में वैज्ञानिक तरीके से उनकी पहचान की जा सके। DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान होने के बाद उनके अवशेष संबंधित परिवारों को सौंपे जा सकते हैं।

यदि अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार तुरंत कर दिया जाता, तो बाद में उनकी वैज्ञानिक पहचान करना मुश्किल हो सकता था। इसलिए प्रशासन के लिए शवों को सुरक्षित रखने के बजाय दफनाना फिलहाल ज्यादा व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।

पानी और कीचड़ ने बिगाड़ी शवों की हालत

बाढ़ में बहने या लंबे समय तक पानी और कीचड़ में दबे रहने के कारण कई शवों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। पानी के संपर्क में रहने से शरीर फूलने और सड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके चलते चेहरे और शरीर की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है।

कई मामलों में केवल शरीर के कुछ हिस्से ही बरामद हो सके हैं। यही कारण है कि करीब 400 मृतकों के मामलों में पूरे शव के बजाय आंशिक अवशेष मिलने की बात सामने आई है।

प्रशासन के सामने समस्या केवल शवों की पहचान तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण शवगृह और अस्थायी शव रखने के स्थान भी भर चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सामूहिक कब्रों में दफनाने का विकल्प अपनाया जा रहा है।

परिवारों को DNA जांच से उम्मीद

अज्ञात शवों को दफनाने के बाद उनके अवशेषों की पहचान के लिए DNA जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यही है कि किसी भी परिवार को बिना पहचान के अपने परिजन के अंतिम संस्कार की स्थिति का सामना न करना पड़े।

हजारों लोगों के लापता होने के कारण आने वाले दिनों में भी शव मिलने का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में पहचान की प्रक्रिया लंबे समय तक चलने की संभावना है। परिवारों के लिए यह समय बेहद मुश्किल है, क्योंकि एक तरफ उन्हें अपने लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ लगातार बरामद हो रहे शव उनकी चिंता और बढ़ा रहे हैं।

नेपाल में आई इस बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। 1,068 मौतों और 4,606 से अधिक लोगों के लापता होने के आंकड़े आपदा की गंभीरता को दिखाते हैं। वहीं विदेशी नागरिकों के लापता होने से मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गया है।

फिलहाल राहत और बचाव दलों की प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना, बरामद शवों की पहचान करना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है। मलबे और कीचड़ के बीच जारी यह तलाश हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बनी हुई है।