जिम में एक्सरसाइज करते समय, डांस करते हुए या सामान्य दिनचर्या के बीच किसी युवा की अचानक मौत की खबर अक्सर लोगों को हैरान कर देती है। देखने में स्वस्थ और कम उम्र के व्यक्ति के साथ ऐसी घटना होने पर सवाल उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान से जुड़े शोधकर्ताओं के एक अध्ययन ने इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। शोध में सामने आया है कि कम उम्र में हार्ट अटैक या शरीर में खून का थक्का बनने के पीछे कई ऐसे जोखिम कारक हो सकते हैं, जिन्हें समय रहते पहचाना जा सकता है।
यह अध्ययन उन लोगों पर किया गया, जिन्हें गंभीर स्थिति के बावजूद समय पर चिकित्सा सहायता मिलने के कारण बचाया जा सका। शोधकर्ताओं ने ऐसे मामलों का विश्लेषण करके यह समझने की कोशिश की कि 18 से 45 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने या रक्त प्रवाह बाधित होने जैसी घटनाओं की संभावना किन कारणों से बढ़ सकती है। अध्ययन में आनुवंशिक इतिहास, पहले से मौजूद बीमारियां और धूम्रपान जैसे कारकों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण पाया गया।
25 अस्पतालों के मरीजों पर हुआ अध्ययन
ICMR के शोध में देश के 25 बड़े अस्पतालों से 18 से 45 वर्ष की आयु के कुल 767 मरीजों को शामिल किया गया। शोध का उद्देश्य यह पता लगाना था कि अपेक्षाकृत कम उम्र में गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं और रक्त के थक्के से जुड़ी समस्याओं के पीछे कौन-कौन से कारण भूमिका निभा सकते हैं।
अध्ययन में शामिल मरीजों में 432 लोग यानी करीब 56.3 प्रतिशत ऐसे थे, जिन्हें हार्ट अटैक आया था। वहीं 198 मरीजों यानी लगभग 25.8 प्रतिशत में दिमाग की नस में रक्त प्रवाह रुकने की समस्या देखी गई। इन दोनों तरह की घटनाओं को मिलाकर अध्ययन में शामिल करीब 82 प्रतिशत मरीज इन्हीं गंभीर स्थितियों से प्रभावित थे।
शोध में यह भी सामने आया कि अधिकांश मरीज अपेक्षाकृत अधिक उम्र वाले युवा वर्ग से थे। कुल 614 मरीज यानी लगभग 80.1 प्रतिशत की उम्र 31 से 45 वर्ष के बीच थी। इसका मतलब यह नहीं है कि हर युवा को ऐसी समस्या का खतरा है, बल्कि शोध उन परिस्थितियों की पहचान करने में मदद करता है, जिनमें किसी व्यक्ति का जोखिम सामान्य आबादी की तुलना में अधिक हो सकता है।
पहले खून का थक्का बन चुका है तो जोखिम बेहद ज्यादा
अध्ययन के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से एक उन लोगों से जुड़ा है, जिन्हें पहले कभी रक्त का थक्का बनने की समस्या हो चुकी थी। शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसे मरीजों में हार्ट अटैक का जोखिम करीब 60 गुना अधिक था।
शरीर में रक्त का थक्का यानी ब्लड क्लॉट कई अलग-अलग परिस्थितियों में बन सकता है। यदि यह थक्का किसी महत्वपूर्ण रक्त वाहिका में रुकावट पैदा करता है, तो शरीर के किसी हिस्से तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। स्थिति गंभीर होने पर यह दिल या मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।
इसी वजह से यदि किसी व्यक्ति को पहले ब्लड क्लॉट की समस्या रही है, तो उसे इसे मामूली घटना समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी स्थिति की निगरानी करानी चाहिए और किसी नए लक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए।
दूसरी बीमारी होने पर भी बढ़ता है खतरा
ICMR के अध्ययन में पहले से किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहे मरीजों में भी हार्ट अटैक का खतरा अधिक पाया गया। ऐसे लोगों में जोखिम करीब 4.6 गुना ज्यादा था।
यह निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करता है कि केवल उम्र कम होना किसी व्यक्ति को हृदय संबंधी गंभीर घटनाओं से पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाता। यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है, तो उसकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति का आकलन जरूरी हो जाता है।
युवाओं में अक्सर यह धारणा होती है कि कम उम्र होने के कारण उन्हें हार्ट अटैक जैसी परेशानी नहीं हो सकती। लेकिन अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि उम्र के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
धूम्रपान को लेकर भी चेतावनी
अध्ययन में धूम्रपान करने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण चेतावनी सामने आई। शोधकर्ताओं के अनुसार, धूम्रपान करने वाले मरीजों में हार्ट अटैक का जोखिम करीब 3.5 गुना अधिक पाया गया।
धूम्रपान हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक माना जाता है। यह रक्त वाहिकाओं पर प्रतिकूल असर डाल सकता है और हृदय से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए युवाओं में भी धूम्रपान को केवल लंबे समय बाद होने वाली बीमारी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
खास तौर पर वे लोग जो नियमित रूप से जिम जाते हैं या शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उन्हें यह समझना जरूरी है कि एक्सरसाइज करना अपने आप में धूम्रपान से होने वाले नुकसान को खत्म नहीं करता। स्वस्थ जीवनशैली के लिए व्यायाम के साथ धूम्रपान से दूरी भी महत्वपूर्ण है।
परिवार का मेडिकल इतिहास भी महत्वपूर्ण
शोध में आनुवंशिक या पारिवारिक इतिहास को भी एक अहम जोखिम कारक पाया गया। जिन लोगों के परिवार में पहले किसी सदस्य को रक्त का थक्का बनने की समस्या रही थी, उनमें हार्ट अटैक का जोखिम करीब 3.3 गुना अधिक पाया गया।
इससे पता चलता है कि परिवार में पहले हुई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी डॉक्टर को देना उपयोगी हो सकता है। कई बार लोग अपने माता-पिता या भाई-बहन की पुरानी बीमारियों को सामान्य पारिवारिक जानकारी मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन कुछ स्थितियों में यह जानकारी किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करने में मदद कर सकती है।
इसलिए यदि परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक, रक्त का थक्का या इसी तरह की गंभीर समस्या का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर से बातचीत करते समय इसकी जानकारी साझा करना बेहतर है।
कोविड के बाद भी सामने आया संबंध
अध्ययन में उन लोगों के स्वास्थ्य इतिहास पर भी ध्यान दिया गया, जो कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हो चुके थे। शोध में ऐसे लोगों में रक्त का थक्का बनने से जुड़ी घटनाएं भी देखी गईं।
कोविड संक्रमण के दौरान और उसके बाद रक्त के थक्के बनने की समस्या पर पहले भी चिकित्सा जगत में चर्चा होती रही है। हालांकि किसी व्यक्ति में ऐसी समस्या का कारण केवल एक ही कारक मान लेना उचित नहीं है। प्रत्येक मरीज की स्थिति, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जोखिमों का अलग-अलग आकलन आवश्यक होता है।
ICMR के अध्ययन में कोविड टीकाकरण को लेकर भी एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया। उपलब्ध अध्ययन के अनुसार कोविड वैक्सीन से लोगों को ऐसी घटनाओं के संदर्भ में कोई नुकसान नहीं पाया गया। इसलिए अचानक होने वाली हर हृदय संबंधी घटना को कोविड वैक्सीन से जोड़ना वैज्ञानिक आधार पर उचित नहीं माना जा सकता।
क्या जिम या डांस करना खतरनाक है?
अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि जिम जाना, डांस करना या एक्सरसाइज करना युवाओं के लिए खतरनाक है। नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य तौर पर स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समस्या तब हो सकती है जब किसी व्यक्ति में पहले से मौजूद जोखिम कारकों की जानकारी न हो और वह अपनी क्षमता से अधिक शारीरिक दबाव डालता रहे।
जिम में भारी वजन उठाने या लंबे समय तक अत्यधिक मेहनत करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति को समझना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से हृदय संबंधी परेशानी, रक्त के थक्के का इतिहास या कोई अन्य गंभीर बीमारी है, तो व्यायाम की शुरुआत या उसमें बड़ा बदलाव करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना समझदारी है।
इसी तरह डांस या अन्य हाई-इंटेंसिटी गतिविधियों के दौरान शरीर पर अचानक बहुत अधिक दबाव डालने से बचना चाहिए। व्यायाम की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
युवाओं में भी सीने में तेज या लगातार दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी, असामान्य धड़कन, शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी या बोलने में परेशानी जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
ऐसे लक्षणों का मतलब हर बार हार्ट अटैक या ब्लड क्लॉट होना नहीं है, लेकिन यदि वे अचानक और गंभीर रूप से सामने आएं तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। खासकर उन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, जिनमें पहले से कोई जोखिम कारक मौजूद है।
युवाओं के लिए क्या संदेश है?
ICMR का यह अध्ययन युवाओं को डराने के बजाय जोखिम को समझने और समय रहते सावधान होने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है। किसी व्यक्ति की उम्र कम होने का अर्थ यह नहीं कि वह हर प्रकार की हृदय या रक्त संबंधी समस्या से सुरक्षित है।
पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री, पहले हुई ब्लड क्लॉट की समस्या, अन्य बीमारियां और धूम्रपान जैसी आदतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित जीवनशैली, धूम्रपान से दूरी और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जोखिम कम करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिम, डांस या किसी अन्य गतिविधि के दौरान हुई हर अचानक मौत को केवल एक्सरसाइज का परिणाम मान लेना सही नहीं है। ICMR के अध्ययन से संकेत मिलता है कि कई मामलों के पीछे पहले से मौजूद जोखिम कारक हो सकते हैं। इसलिए अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझना, चेतावनी संकेतों को पहचानना और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज लेना बेहद जरूरी है।
(Photo : AI Generated)




