भारतीय शेयर बाजार में इस साल का सबसे बड़ा आईपीओ त्योहारी सीजन में दस्तक दे सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड अपने मेगा पब्लिक इश्यू को लेकर तेजी से तैयारियां कर रही है। कंपनी की योजना करीब ₹37,800 करोड़ जुटाने की है। अगर यह इश्यू तय आकार के साथ बाजार में आता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ को नवरात्र या दिवाली के आसपास लॉन्च करने के विकल्प पर विचार कर रही है। त्योहारी अवधि में बाजार में आमतौर पर निवेशकों की सक्रियता बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनी इस समय का फायदा उठाकर घरेलू और विदेशी निवेशकों के बीच अपने आईपीओ को पेश करना चाहती है।
इस साल नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इसके बाद नवंबर में धनतेरस और दिवाली का त्योहार आएगा। धनतेरस 6 नवंबर और दिवाली 8 नवंबर को है। ऐसे में अगर जियो नवरात्र के दौरान इश्यू नहीं ला पाती है, तो दिवाली के आसपास बाजार में उतरने का विकल्प उसके पास मौजूद रहेगा।
आईपीओ की तारीख जल्द तय होने की संभावना
जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आईपीओ की टाइमलाइन को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अगले एक से दो सप्ताह के दौरान इश्यू से जुड़ी तारीखों को तय कर सकती है। इसके बाद निवेशकों से संपर्क करने का सिलसिला तेज किया जाएगा।
कंपनी की योजना सिर्फ भारतीय निवेशकों तक सीमित रहने की नहीं है। आईपीओ से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स विदेशी संस्थागत निवेशकों को भी कंपनी की कारोबारी स्थिति, भविष्य की योजनाओं और वित्तीय संभावनाओं के बारे में जानकारी देगी।
इसके लिए करीब तीन सप्ताह तक इंटरनेशनल रोडशो चलाए जाने की संभावना है। इन बैठकों के जरिए कंपनी दुनिया के बड़े फंड मैनेजरों और संस्थागत निवेशकों को अपने प्रस्तावित इश्यू के बारे में जानकारी देगी।
विदेशी निवेशकों के साथ रोडशो पूरा होने के बाद कंपनी भारत में भी निवेशकों से मुलाकात करेगी। घरेलू संस्थागत निवेशकों और रिटेल इन्वेस्टर्स तक पहुंच बनाने के लिए करीब दो सप्ताह तक मीटिंग्स और प्रेजेंटेशन आयोजित किए जाने की योजना बताई जा रही है।
इस तरह आईपीओ लॉन्च से पहले कंपनी लगभग पांच सप्ताह तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ संपर्क अभियान चला सकती है।
27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार ही नहीं, बल्कि नए शेयरों की संख्या भी होगी। कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP के अनुसार, पब्लिक इश्यू में करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाने की योजना है।
ये नए शेयर कंपनी की पोस्ट-इश्यू शेयर कैपिटल का लगभग 2.9% हिस्सा होंगे। प्रस्तावित इश्यू का कुल आकार करीब ₹37,800 करोड़ रहने की स्थिति में यह भारतीय बाजार में अब तक के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड बना सकता है।
इतने बड़े आकार का इश्यू निवेशकों के साथ-साथ पूरे शेयर बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जियो देश की सबसे बड़ी डिजिटल और टेलीकॉम कंपनियों में शामिल है और उसके आईपीओ को लेकर लंबे समय से बाजार में चर्चा होती रही है।
रिलायंस समूह की कंपनियों में जियो प्लेटफॉर्म्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कंपनी के कारोबार में टेलीकॉम, डिजिटल सेवाओं और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे में प्रस्तावित आईपीओ के जरिए आम और संस्थागत निवेशकों को कंपनी में हिस्सेदारी लेने का अवसर मिलेगा।
आईपीओ की रकम का बड़ा हिस्सा जाएगा कर्ज घटाने में
जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी योजना स्पष्ट की है। प्रस्तावित फंड का सबसे बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड यानी RJIL से जुड़े कर्ज को कम करने में इस्तेमाल किया जाएगा।
DRHP के अनुसार, करीब ₹27,500 करोड़ की राशि कर्ज के भुगतान या प्रीपेमेंट के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। यानी आईपीओ से जुटाई जाने वाली कुल रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी की वित्तीय देनदारियों को कम करने में लगाया जाएगा।
यह रकम सीधे तौर पर विभिन्न तरीकों से RJIL तक पहुंचाई जा सकती है। इसके लिए इक्विटी, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर्स या लोन जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
बाकी रकम को सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए रखा जाएगा। इसका इस्तेमाल कंपनी की अन्य कारोबारी आवश्यकताओं और संचालन से जुड़े खर्चों में किया जा सकता है।
कर्ज घटाने की योजना को कंपनी के वित्तीय ढांचे के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। आईपीओ के जरिए मिलने वाली बड़ी रकम से RJIL की देनदारियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
विदेशी निवेशकों की पहले से मजबूत मौजूदगी
जियो प्लेटफॉर्म्स में कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की पहले से ही बड़ी हिस्सेदारी है। कंपनी में दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी और निवेश कंपनियों ने भारी निवेश किया हुआ है।
मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स में बड़े विदेशी निवेशकों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 30.9% है। इनमें सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा से जुड़ी जादू होल्डिंग्स की लगभग 9.98% हिस्सेदारी बताई गई है।
इसके अलावा गूगल इंटरनेशनल के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की करीब 7.73% हिस्सेदारी है। जियो में इन दोनों वैश्विक टेक कंपनियों का निवेश कंपनी की अंतरराष्ट्रीय निवेशक अपील को दर्शाता है।
अन्य प्रमुख निवेशकों में सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड यानी PIF, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, जनरल अटलांटिक और KKR जैसे बड़े ग्लोबल निवेश समूह शामिल हैं। अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी यानी ADIA से जुड़े फंड्स की भी कंपनी में मौजूदगी है।
इन बड़े निवेशकों की भागीदारी के कारण जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ भारत के साथ-साथ वैश्विक निवेश बाजार में भी चर्चा का विषय बन सकता है।
रिकॉर्ड तोड़ सकता है जियो का पब्लिक इश्यू
यदि जियो प्लेटफॉर्म्स करीब ₹37,800 करोड़ के आकार के साथ बाजार में उतरती है, तो यह अब तक के सबसे बड़े भारतीय आईपीओ का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है।
इतने बड़े इश्यू के कारण बाजार में इसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता है। कंपनी का मूल्यांकन, शेयर की संभावित कीमत, निवेशकों की प्रतिक्रिया और आईपीओ के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स की बाजार स्थिति जैसे मुद्दों पर भी नजर रहेगी।
कंपनी के लिए यह आईपीओ सिर्फ पूंजी जुटाने का माध्यम नहीं होगा, बल्कि जियो के कारोबार को सार्वजनिक बाजार के निवेशकों के सामने रखने का भी बड़ा कदम होगा।
त्योहारी सीजन में आईपीओ लाने की संभावित रणनीति भी महत्वपूर्ण है। नवरात्र से लेकर दिवाली तक भारत में खरीदारी और निवेश गतिविधियां बढ़ती हैं। शेयर बाजार में भी इस अवधि के दौरान निवेशकों की भागीदारी पर कंपनियां नजर रखती हैं।
जून में जमा हुआ था ड्राफ्ट पेपर
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए इस साल जून में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI के पास DRHP दाखिल किया था। इसके बाद नियामकीय प्रक्रिया आगे बढ़ी और 28 अगस्त को कंपनी को पब्लिक इश्यू के लिए SEBI की मंजूरी मिल गई।
अब मंजूरी मिलने के बाद कंपनी के सामने अगला बड़ा चरण आईपीओ की तारीख, प्राइस बैंड और अन्य अंतिम विवरण तय करने का है। साथ ही संभावित निवेशकों के साथ रोडशो और बैठकें भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होंगी।
अगर कंपनी अपनी तैयारियों के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो सितंबर के दौरान आईपीओ की टाइमलाइन को लेकर ज्यादा स्पष्टता सामने आ सकती है। इसके बाद अक्टूबर में नवरात्र के दौरान इश्यू लाने की संभावना पर फैसला हो सकता है।
हालांकि, अगर नवरात्र की समयसीमा में आईपीओ लॉन्च नहीं होता है, तो नवंबर में धनतेरस और दिवाली के आसपास बाजार में उतरने का विकल्प कंपनी के पास रहेगा।
इस तरह जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा घटनाक्रम बनने की तैयारी में है। करीब ₹37,800 करोड़ का संभावित इश्यू, 27 करोड़ नए शेयर, कर्ज घटाने के लिए ₹27,500 करोड़ के इस्तेमाल की योजना और दुनिया के बड़े निवेशकों की मौजूदगी इसे खास बनाती है। अब निवेशकों की नजर कंपनी की अंतिम तारीखों और आईपीओ से जुड़े अन्य विवरणों के आधिकारिक ऐलान पर रहेगी।




