भारतीय क्रिकेट टीम के चार खिलाड़ियों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद अहम रहने वाले हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ प्रस्तावित टी-20 सीरीज से पहले तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह समेत चार क्रिकेटरों की फिटनेस को परखा जाएगा। इसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने मैच सिमुलेशन और प्रैक्टिस मुकाबलों का कार्यक्रम तैयार किया है।
जसप्रीत बुमराह के साथ हर्षित राणा, वॉशिंगटन सुंदर और नीतीश रेड्डी इन मुकाबलों में हिस्सा लेंगे। इन खिलाड़ियों के मैच प्रदर्शन और शरीर की प्रतिक्रिया को देखने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि वे अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं। प्रैक्टिस मैचों का आयोजन 4 से 9 सितंबर के बीच किया जाना है।
चारों खिलाड़ियों को हाल के दिनों में अलग-अलग चोटों और फिटनेस संबंधी परेशानियों से गुजरना पड़ा है। यही वजह है कि केवल मेडिकल टेस्ट में फिट घोषित किए जाने के बाद उन्हें सीधे इंटरनेशनल मुकाबले में उतारने के बजाय अब मैच जैसी परिस्थितियों में उनकी क्षमता को जांचा जा रहा है।
बुमराह के लिए सबसे अहम होगा यह फिटनेस टेस्ट
इन चारों खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा नजर जसप्रीत बुमराह पर रहेगी। भारतीय टीम के सबसे महत्वपूर्ण तेज गेंदबाजों में शामिल बुमराह को अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज के लिए टीम में जगह मिली है। हालांकि उनकी उपलब्धता पूरी तरह फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर मानी जा रही है।
बुमराह की फिटनेस को लेकर टीम मैनेजमेंट किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। उनकी गेंदबाजी पर लंबे समय से भारतीय टीम का काफी दारोमदार रहा है और पिछले कुछ वर्षों में उन्हें चोटों के कारण कई अहम मुकाबलों से बाहर भी रहना पड़ा है। ऐसे में मेडिकल टीम के साथ-साथ टीम मैनेजमेंट भी यह देखना चाहता है कि वह इंटरनेशनल क्रिकेट का दबाव झेलने के लिए कितने तैयार हैं।
मैच सिमुलेशन के दौरान उनकी गेंदबाजी की गति, लगातार गेंदबाजी करने की क्षमता, स्पेल के बीच रिकवरी और मैच के दौरान शरीर पर पड़ने वाले दबाव पर विशेष नजर रखी जा सकती है। खासकर उनके घुटने और बैक से जुड़ी पुरानी परेशानियों को देखते हुए यह आकलन महत्वपूर्ण होगा।
केवल मेडिकल फिटनेस काफी नहीं, मैदान पर भी साबित करना होगा
CoE की मेडिकल टीम ने चारों खिलाड़ियों की स्थिति को लेकर सिलेक्टर्स के साथ जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक खिलाड़ियों को क्लिनिकली फिट माना जा रहा है, लेकिन मैच जैसी परिस्थितियों में उनकी फिटनेस का अंतिम परीक्षण अभी बाकी था।
यही कारण है कि प्रैक्टिस मैचों को महज ट्रेनिंग सेशन नहीं माना जा रहा। इन मुकाबलों के जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि खिलाड़ी लगातार क्रिकेट खेलने के लिए तैयार हैं या नहीं।
किसी खिलाड़ी का स्कैन और मेडिकल टेस्ट सामान्य आना एक बात है, जबकि वास्तविक मैच में कई ओवर गेंदबाजी करना, तेजी से दौड़ना, बल्लेबाजी करना, फील्डिंग के दौरान दिशा बदलना और लगातार शारीरिक मेहनत करना अलग चुनौती है। इसलिए भारतीय क्रिकेट की मेडिकल और सिलेक्शन टीम इन खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल में परखना चाहती है।
हर्षित राणा और नीतीश रेड्डी पर भी नजर
जसप्रीत बुमराह के अलावा हर्षित राणा भी इस फिटनेस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। युवा तेज गेंदबाज ने भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाने की दिशा में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन चोट और फिटनेस से जुड़ी स्थिति के कारण उनकी वापसी को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है।
तेज गेंदबाजों के लिए मैच फिटनेस का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि उनकी गेंदबाजी में शरीर के कई हिस्सों पर एक साथ काफी दबाव पड़ता है। ऐसे में हर्षित का प्रैक्टिस मुकाबलों में प्रदर्शन यह तय करने में मदद करेगा कि वह टी-20 सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार हैं या उन्हें अभी और समय की जरूरत है।
नीतीश रेड्डी भी इन मैच सिमुलेशन मुकाबलों में अपनी फिटनेस साबित करेंगे। ऑलराउंडर होने के कारण उनसे बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में योगदान की उम्मीद की जाती है। इसलिए उनकी फिटनेस का आकलन केवल एक स्किल के आधार पर नहीं होगा।
मैच के दौरान गेंदबाजी करने के बाद बल्लेबाजी और फील्डिंग में उनकी ऊर्जा कैसी रहती है, शरीर कितनी जल्दी रिकवर करता है और लगातार मुकाबलों का भार उठाने की स्थिति में वह कितने तैयार हैं, इन पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
वॉशिंगटन सुंदर की वापसी भी अहम
वॉशिंगटन सुंदर भी इस सूची में शामिल हैं। ऑफ स्पिन ऑलराउंडर भारतीय टीम के लिए खास तौर पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में उपयोगी खिलाड़ी रहे हैं। बल्लेबाजी के साथ-साथ उनकी ऑफ स्पिन टीम को अतिरिक्त विकल्प देती है।
चोट के बाद किसी ऑलराउंडर की वापसी सामान्य खिलाड़ी की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि उसे एक से अधिक क्रिकेटिंग गतिविधियों में फिटनेस साबित करनी पड़ती है। सुंदर के मामले में भी यही देखा जाएगा कि वह मैच की पूरी अवधि में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं या नहीं।
अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 मुकाबलों में भारतीय टीम को परिस्थितियों के अनुसार स्पिन ऑलराउंडर की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए सुंदर की फिटनेस और उपलब्धता टीम के संयोजन को प्रभावित कर सकती है।
4 से 9 सितंबर के बीच होंगे मैच सिमुलेशन
BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने इन खिलाड़ियों के लिए 4 से 9 सितंबर के बीच प्रैक्टिस मुकाबलों की योजना बनाई है। इन मैचों का उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों में उतारकर उनकी वास्तविक मैच फिटनेस का आकलन करना है।
ऐसे मुकाबलों में खिलाड़ियों को उस तरह का भार दिया जाता है, जो इंटरनेशनल मैच में आने की संभावना होती है। तेज गेंदबाजों के लिए गेंदबाजी का वर्कलोड, बल्लेबाजों के लिए लंबे समय तक क्रीज पर रहना और सभी खिलाड़ियों के लिए फील्डिंग का दबाव महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
मेडिकल टीम इस दौरान खिलाड़ियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकती है। मुकाबले के बाद रिकवरी का समय, शरीर में किसी तरह की परेशानी या दर्द और अगले दिन ट्रेनिंग करने की क्षमता भी फिटनेस मूल्यांकन का हिस्सा बन सकती है।
अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज से पहले अंतिम फैसला
भारत और अफगानिस्तान के बीच टी-20 सीरीज 13 सितंबर से शुरू होनी है। ऐसे में 4 से 9 सितंबर के बीच होने वाले प्रैक्टिस मैच चयनकर्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं मुकाबलों के आधार पर खिलाड़ियों की स्थिति को लेकर अंतिम तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है।
यदि चारों खिलाड़ी अपेक्षित स्तर पर प्रदर्शन करते हैं और मेडिकल टीम को भी किसी तरह की चिंता नहीं रहती, तो उनके सीरीज के लिए उपलब्ध रहने की संभावना मजबूत होगी। दूसरी तरफ अगर किसी खिलाड़ी को मैच के दौरान परेशानी महसूस होती है या रिकवरी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहती, तो टीम मैनेजमेंट उसके मामले में अतिरिक्त सावधानी बरत सकता है।
बुमराह के मामले में यह फैसला और भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि भारतीय टीम उनके वर्कलोड को लेकर लंबे समय से सतर्क रही है।
लगातार चोटों ने BCCI के सामने बढ़ाई चुनौती
भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। अलग-अलग समय पर प्रमुख खिलाड़ियों के उपलब्ध नहीं होने से टीम संयोजन प्रभावित हुआ है। इसी वजह से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका भी चर्चा में आती रही है।
हाल में मुंबई में हुई BCCI की रिव्यू मीटिंग के बाद सचिव देवजीत सैकिया ने भी व्यस्त क्रिकेट कार्यक्रम और खिलाड़ियों की चोटों के बीच संभावित संबंध की ओर इशारा किया था। उनका कहना था कि लगातार बढ़ते क्रिकेट कैलेंडर का खिलाड़ियों की फिटनेस पर असर पड़ सकता है।
भविष्य में फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम यानी FTP तैयार करते समय खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम और तैयारी का अवसर देने पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की बात सामने आई है। इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार बढ़ते मैचों के बीच खिलाड़ियों को रिकवरी का समय देना अब टीम मैनेजमेंट के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बुमराह की नजर टेस्ट क्रिकेट पर भी
बुमराह के लिए यह फिटनेस टेस्ट सिर्फ अफगानिस्तान की टी-20 सीरीज तक सीमित नहीं माना जा रहा। उनके लिए आने वाला घरेलू और इंटरनेशनल कार्यक्रम इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
बुमराह ने करीब एक साल से रेड-बॉल क्रिकेट नहीं खेला है। इसलिए टीम मैनेजमेंट चाहता है कि टेस्ट क्रिकेट में उनकी संभावित वापसी से पहले उन्हें मैच परिस्थितियों का पर्याप्त अनुभव मिल सके।
न्यूजीलैंड दौरे पर साल के आखिर में टेस्ट क्रिकेट में लौटने की संभावना को देखते हुए उनकी फिटनेस का लंबा आकलन जरूरी होगा। टेस्ट मैच में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल करने पड़ते हैं और कई दिनों तक शरीर पर लगातार दबाव बना रहता है। इसलिए केवल टी-20 मैच की फिटनेस से यह साबित नहीं होता कि कोई खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
टीम मैनेजमेंट खास तौर पर यह देखना चाहता है कि बुमराह का घुटना फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के लंबे स्पेल और पूरे मैच के वर्कलोड को संभालने की स्थिति में है या नहीं।
बैकअप विकल्प भी तैयार
भारतीय टीम ने बुमराह की फिटनेस को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी है। उनके बैकअप के तौर पर प्रिंस यादव को तैयार माना जा रहा है। प्रिंस ने इसी साल जून में भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था।
इससे साफ है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट किसी एक खिलाड़ी की फिटनेस पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय विकल्प तैयार रखना चाहता है। खासकर तेज गेंदबाजों के मामले में वर्कलोड मैनेजमेंट और चोट से बचाव को प्राथमिकता दी जा रही है।
अब सभी की नजर 4 से 9 सितंबर के बीच होने वाले मैच सिमुलेशन पर होगी। इन मुकाबलों के बाद ही पता चलेगा कि बुमराह, हर्षित राणा, वॉशिंगटन सुंदर और नीतीश रेड्डी अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं। वहीं बुमराह के प्रदर्शन से यह भी संकेत मिलेगा कि वह आगे रेड-बॉल क्रिकेट में वापसी के लिए कितने तैयार हो चुके हैं।




