कैग रिपोर्ट पर सुक्खू सरकार घिरी, जयराम बोले- वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की खुली पोल

कैग रिपोर्ट पर सुक्खू सरकार घिरी, जयराम बोले- वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की खुली पोल

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कैग रिपोर्ट में सामने आए वित्तीय प्रबंधन से जुड़े तथ्यों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट ने सरकार की वित्तीय कार्यप्रणाली की खामियों और सत्ता के संरक्षण में चल रहे कथित भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शिमला स्थित गंज मंदिर में दर्शन करने पहुंचे जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार के कामकाज को लेकर आने वाले समय में कई और तथ्य सामने आएंगे और तब सरकार की वास्तविक तस्वीर प्रदेश की जनता के सामने होगी।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऑनलाइन टेंडरिंग से लेकर सरकारी खरीद में पारदर्शिता और टैक्स वसूली तक कई मामलों में सरकार अपेक्षित परिणाम हासिल करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के फैसलों का प्रतिकूल असर सीधे सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल जनहित और विकास कार्यों के बजाय सरकार की मित्र मंडली तथा कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कैग रिपोर्ट में बजट और सरकारी खर्च से संबंधित आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार करीब 438 करोड़ रुपये ऐसे खर्च किए गए, जिनके लिए बजट में प्रावधान नहीं था। दूसरी ओर करीब 673 करोड़ रुपये की योजनाओं के लिए बजट में राशि निर्धारित होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया। जयराम ठाकुर ने कहा कि एक तरफ बिना बजट प्रावधान के करोड़ों रुपये खर्च होना और दूसरी तरफ स्वीकृत राशि का इस्तेमाल नहीं किया जाना सरकार की वित्तीय योजना और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप संसाधनों का व्यवस्थित आवंटन और निर्धारित योजनाओं पर समयबद्ध खर्च सुनिश्चित करना होता है। ऐसे में बजट प्रावधानों के बाहर जाकर राशि खर्च करना और स्वीकृत योजनाओं के लिए उपलब्ध धन का इस्तेमाल नहीं कर पाना वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन दोनों मामलों में प्रदेश की जनता के सामने स्पष्ट किया जाए कि राशि किन परिस्थितियों में खर्च की गई और जिन योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया था, उन पर पैसा खर्च क्यों नहीं किया गया।

जयराम ठाकुर ने सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में खरीद तथा टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वस्तुओं, सेवाओं और विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम में कथित अनियमितताओं का मामला बेहद गंभीर है। उनके अनुसार कुछ टेंडरों में एक ही आईपी एड्रेस से अलग-अलग बोलियां दाखिल किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में विभागीय आईपी एड्रेस का इस्तेमाल करके बोलियां लगाई गईं। इन बोलियों में रकम का अंतर भी बेहद कम था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि अलग-अलग कंपनियों या ठेकेदारों की ओर से स्वतंत्र रूप से निविदाएं दाखिल की गई थीं, तो एक ही आईपी एड्रेस से बोलियां आने का मामला जांच का विषय बनता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कार्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर ई-टेंडर डालना सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती। उनके मुताबिक यदि ऐसा हुआ है तो विभागीय अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के बीच संभावित मिलीभगत की जांच जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ई-टेंडरिंग व्यवस्था को लागू करने का मुख्य उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाना था। यदि इसी प्रक्रिया में तकनीकी संसाधनों के दुरुपयोग या मिलीभगत की संभावना सामने आती है तो इससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। जयराम ठाकुर ने सरकार से ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य पर लगातार बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच सरकारी धन का विवेकपूर्ण इस्तेमाल और वित्तीय अनुशासन बेहद जरूरी है। उन्होंने राजस्व और राजकोषीय घाटे से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को खर्च पर प्रभावी नियंत्रण रखने के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने के ठोस उपाय करने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीतियों और खर्च प्रबंधन में गंभीर खामियां दिखाई दे रही हैं, जिसका असर प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सीधे सवाल करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार जिस ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का दावा करके सत्ता में आई थी, क्या कैग रिपोर्ट में सामने आए तथ्य उसी व्यवस्था परिवर्तन का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्ता संभालने से पहले पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अब वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह देते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष के सवालों से बचने के बजाय उनका जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकार का रवैया लगातार कठोर होता जा रहा है और मुख्यमंत्री को तानाशाहीपूर्ण कार्यशैली छोड़कर संविधान एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा के अनुरूप काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक विरोध को दरकिनार करते हुए प्रदेश के व्यापक हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी खजाने में आने वाला प्रत्येक रुपया प्रदेश की जनता का है और उसके इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी धन का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया से हटकर किया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बजट से बाहर जाकर खर्च की गई राशि किन परिस्थितियों में स्वीकृत हुई और जिन योजनाओं के लिए बजट रखा गया था, उनका क्रियान्वयन क्यों नहीं हो पाया।

मानसून सत्र के अंतिम दिन कैग रिपोर्ट विधानसभा में रखे जाने के बाद अब इसके विभिन्न बिंदुओं को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। विपक्ष ने रिपोर्ट को सरकार के वित्तीय प्रबंधन के खिलाफ बड़ा मुद्दा बना लिया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि कैग की टिप्पणियों और रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को प्रत्येक सवाल का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि कैग रिपोर्ट ने विपक्ष की ओर से सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों को और मजबूती दी है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में रिपोर्ट से जुड़े अन्य पहलुओं को भी राजनीतिक मंच पर उठाया जाएगा। दूसरी ओर, अब सरकार की ओर से कैग रिपोर्ट में सामने आए वित्तीय मामलों पर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

विधानसभा सत्र के समापन के साथ ही कैग रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में सरकार और विपक्ष के बीच एक नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। विपक्ष जहां इसे सरकार के वित्तीय प्रबंधन की विफलता के तौर पर पेश कर रहा है, वहीं सरकार के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि रिपोर्ट में सामने आए खर्च, बजट प्रावधान और ई-प्रोक्योरमेंट से जुड़े मामलों को लेकर उसका क्या पक्ष है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।