ऊना। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला ऊना के हरोली में प्रदेश के पहले इलेक्ट्रिक बस डिपो ने रविवार से औपचारिक रूप से काम शुरू कर दिया। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने हरोली पहुंचकर प्रदेश के पहले ई-बस डिपो का लोकार्पण किया। इसी अवसर पर हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन और ई-चार्जिंग स्टेशन का शुभारंभ भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने चार नई बस सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
हरोली में ई-बस डिपो की शुरुआत को प्रदेश में परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जहां यात्रियों को बेहतर और आरामदायक परिवहन सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है, वहीं डीजल आधारित बसों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे प्रदूषण कम करने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
हरोली बस अड्डा परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार एचआरटीसी को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार केवल परिवहन व्यवस्था में बदलाव नहीं है, बल्कि हिमाचल को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में आगे ले जाने का प्रयास भी है। सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में प्रदेश के अधिक से अधिक रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाए।
मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि एचआरटीसी के बेड़े में शामिल की जा रही 297 इलेक्ट्रिक बसों में से 115 बसें हमीरपुर संसदीय क्षेत्र को मिली हैं। इनमें से 20 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हरोली डिपो से किया जाएगा। इसके अलावा पूरे ऊना जिले में करीब 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। इससे जिले के विभिन्न क्षेत्रों के बीच सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को मजबूत करने के साथ-साथ यात्रियों को आधुनिक बस सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
उपमुख्यमंत्री ने इस मौके पर हरोली से माता श्री चिंतपूर्णी धाम के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से चिंतपूर्णी का विशेष महत्व है और यहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में हरोली और चिंतपूर्णी के बीच इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा। इस सेवा से दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क और बेहतर होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए केवल बसें उपलब्ध करवाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चार्जिंग की पर्याप्त व्यवस्था भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से हरोली में ई-चार्जिंग स्टेशन की शुरुआत की गई है। डिपो में बसों के संचालन और चार्जिंग की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। इससे इलेक्ट्रिक बसों के नियमित संचालन में सुविधा होगी और लंबी अवधि में प्रदेश में ई-मोबिलिटी के विस्तार का आधार मजबूत होगा।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हरोली के बाद प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इलेक्ट्रिक बस डिपो स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि ठियोग, नाहन और नादौन में भी ई-बस डिपो तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा के आग्रह पर कांगड़ा में भी इलेक्ट्रिक बस डिपो स्थापित करने की घोषणा की गई। इससे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इलेक्ट्रिक परिवहन नेटवर्क को विस्तार देने की सरकार की योजना का संकेत मिलता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सार्वजनिक परिवहन का विशेष महत्व है। बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के काम, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बसों पर निर्भर हैं। ऐसे में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इलेक्ट्रिक बसों को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में यात्रियों को बेहतर सुविधाओं के साथ अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन उपलब्ध करवाने पर जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन बबलू की ओर से क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न मांगें भी रखी गईं। इन मांगों पर उपमुख्यमंत्री ने अंब बस अड्डे को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि अंब बस अड्डे का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे अंब और आसपास के क्षेत्रों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। बस अड्डे के विकसित होने से स्थानीय परिवहन व्यवस्था को भी व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
चिंतपूर्णी धार्मिक क्षेत्र के विकास को लेकर भी उपमुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर के जीर्णोद्धार और विकास का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। इसके लिए करीब 250 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी केवल ऊना ही नहीं बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा तथा क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
चिंतपूर्णी में मंदिर के विकास के साथ-साथ परिवहन सुविधाओं को बढ़ाने की घोषणा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरोली से इलेक्ट्रिक बस सेवा और अंब बस अड्डे के निर्माण से क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों को परिवहन के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने हरोली और ऊना क्षेत्र से जुड़े औद्योगिक विकास के मुद्दों पर भी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरोली में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क के लिए प्रदेश सरकार 1000 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएगी। बल्क ड्रग पार्क को क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक गतिविधियों के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है। इसी क्रम में जिले में टायर रिट्रेडिंग प्लांट स्थापित करने की योजना भी है। इस तरह की औद्योगिक परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
ऊना शहर के पुराने बस अड्डे को लेकर भी उपमुख्यमंत्री ने योजना साझा की। उन्होंने कहा कि पुराने बस अड्डे को आधुनिक सिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य शहर के पुराने और महत्वपूर्ण क्षेत्र को नई जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है। सिटी सेंटर के रूप में विकास होने से क्षेत्र में बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एचआरटीसी के बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा रहा है। डिपो, बस अड्डों और चार्जिंग स्टेशनों के विकास के साथ बस बेड़े को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन में तकनीकी बदलाव का सीधा लाभ आम यात्रियों को मिलना चाहिए और इसी उद्देश्य से नई बस सेवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि सोमवार को ऊना से इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसके साथ ही जिले में ई-बस संचालन का दायरा और बढ़ेगा। सरकार की योजना के तहत ऊना जिले में कुल 50 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है।
हरोली में शुरू हुआ ई-बस डिपो केवल एक नए परिवहन केंद्र के रूप में ही नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार की शुरुआत भी है। इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन, डिपो और संचालन व्यवस्था तैयार होने के बाद भविष्य में दूसरे जिलों में भी इसी तरह के मॉडल को लागू करने की संभावना बढ़ गई है। हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्यक्रम में एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन बबलू, डेरा बाबा सोमनाथ के महंत बाबा शिवनाथ, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणजीत सिंह राणा, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देशराज गौतम, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हरोली के अध्यक्ष संदीप अग्निहोत्री, जिला परिषद सदस्य केवल सिंह औजला, सुलिंदर पाल कौर और ज्योति बाला, महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुमन ठाकुर, एसटीए सदस्य अशोक ठाकुर, सतीश बिट्टू, विनोद बिट्टू, सुभद्रा चौधरी, मधु धीमान, रमन कुमारी, उर्मिला देवी, सुनीता बग्गा, यशपाल जस्सा और मेहताब ठाकुर सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों में उपायुक्त ऊना जतिन लाल, एसडीएम हरोली विशाल शर्मा, डीएसपी मोहन रावत, एचआरटीसी के मुख्य महाप्रबंधक पंकज सिंघल, महाप्रबंधक पवन महाजन और डीएम राजकुमार पाठक समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हरोली में प्रदेश के पहले ई-बस डिपो के उद्घाटन के साथ ऊना जिला हिमाचल में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन के नए चरण का केंद्र बन गया है। अब हरोली से 20 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और पूरे जिले में 50 बसों की योजना के जरिए परिवहन नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। साथ ही चिंतपूर्णी के लिए ई-बस सेवा, अंब बस अड्डे का निर्माण, मंदिर के जीर्णोद्धार और औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणाओं से क्षेत्र के परिवहन, धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास को एक साथ गति देने की कोशिश की गई है।




