पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियानों को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा सामने आया है। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने कहा है कि खैबर पख्तूनख्वा के अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा बलों ने 21 आतंकियों को मार गिराया है। सेना के मुताबिक, ये कार्रवाई कई स्थानों पर की गई मुठभेड़ों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाए गए अभियानों के दौरान हुई।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत का नाम भी जोड़ने की कोशिश की है। ISPR ने दावा किया कि देश के भीतर सक्रिय कुछ आतंकियों को कथित तौर पर भारत का समर्थन हासिल है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में पाकिस्तानी सेना की ओर से कोई ठोस सार्वजनिक सबूत पेश किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। भारत पहले भी पाकिस्तान की ओर से लगाए जाने वाले ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है।
पाकिस्तानी सेना का यह दावा ऐसे समय आया है, जब अफगानिस्तान से लगी सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों और घुसपैठ को लेकर इस्लामाबाद लगातार चिंता जाहिर करता रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पार मौजूद आतंकी समूह उसके सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अलग-अलग इलाकों में चलाए गए अभियान
ISPR के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा के कई हिस्सों में आतंकियों की मौजूदगी के बारे में मिली जानकारी के बाद अभियान शुरू किया। इन अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों और संदिग्ध आतंकियों के बीच अलग-अलग जगहों पर मुठभेड़ हुई।
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, सबसे बड़ी कार्रवाई उत्तरी वजीरिस्तान में हुई। सेना का कहना है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के करीब आतंकियों के एक समूह की गतिविधियों का पता चला था। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में कार्रवाई की और 10 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया।
उत्तरी वजीरिस्तान पाकिस्तान के उन इलाकों में शामिल है, जहां लंबे समय से आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों और सुरक्षा बलों के अभियानों की खबरें सामने आती रही हैं। अफगानिस्तान की सीमा से नजदीकी के कारण यह क्षेत्र पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील माना जाता है।
एक ही इलाके में दूसरी मुठभेड़ का दावा
ISPR ने उत्तरी वजीरिस्तान में एक अन्य मुठभेड़ का भी जिक्र किया है। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, सीमा के पास संदिग्ध आतंकियों के एक और समूह की गतिविधियों पर नजर रखी गई थी। सुरक्षा बलों ने इसके बाद कार्रवाई की और इस मुठभेड़ में सात लोगों के मारे जाने का दावा किया।
इस तरह उत्तरी वजीरिस्तान में दो अलग-अलग अभियानों में कुल 17 आतंकियों के मारे जाने की बात पाकिस्तान की सेना ने कही है। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा के ही कोहाट और डेरा इस्माइल खान में भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जानकारी दी गई है।
सेना के अनुसार, इन दोनों स्थानों पर हुई अलग-अलग झड़पों में चार और आतंकी मारे गए। इन आंकड़ों को मिलाकर पाकिस्तानी सेना ने कुल 21 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया है।
हालांकि, सैन्य अभियानों से जुड़े ऐसे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अक्सर मुश्किल होता है, खासकर तब जब संबंधित इलाकों में मीडिया और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की पहुंच सीमित हो। पाकिस्तान की ओर से जारी आंकड़े फिलहाल सेना के आधिकारिक बयान पर आधारित हैं।
घुसपैठ की कोशिश को लेकर भी बड़ा दावा
पाकिस्तानी सेना ने अपने बयान में 31 अगस्त और 1 सितंबर की रात हुई एक अन्य मुठभेड़ का भी उल्लेख किया। ISPR के अनुसार, उस दौरान कुछ आतंकियों ने पाकिस्तान में घुसने की कोशिश की थी। सुरक्षा बलों ने कथित घुसपैठ को नाकाम करते हुए 15 आतंकियों को मार गिराया था।
सेना ने कहा कि बाद की कार्रवाई को मिलाकर पाकिस्तान में प्रवेश की कोशिश के दौरान मारे गए आतंकियों की संख्या 25 तक पहुंच गई है।
पाकिस्तान की ओर से यह दावा मुख्य रूप से अफगानिस्तान से लगी सीमा पर केंद्रित है। इस्लामाबाद लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन से सक्रिय कुछ आतंकी संगठन पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की योजना बनाते हैं और सीमा पार करके देश में दाखिल होने की कोशिश करते हैं।
अफगान तालिबान सरकार पर पाकिस्तान का निशाना
आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देने के साथ-साथ पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर भी निशाना साधा। ISPR ने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद के लिए होने से रोकने में प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही है।
पाकिस्तानी सेना के बयान में कहा गया कि सीमा पर बार-बार होने वाली घटनाओं ने इस्लामाबाद की चिंताओं को और बढ़ाया है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान प्रशासन आतंकवादी संगठनों को नियंत्रित करने में विफल रहा है।
ISPR ने यह भी कहा कि अफगान अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे प्रभावी सीमा प्रबंधन सुनिश्चित करें और आतंकवाद के खिलाफ अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करें। पाकिस्तान का कहना है कि जब तक सीमा पर आतंकियों की गतिविधियों को रोका नहीं जाता, तब तक उसके लिए सुरक्षा चुनौती बनी रहेगी।
भारत का नाम जोड़कर पाकिस्तान ने क्या कहा?
पूरे बयान में सबसे ज्यादा ध्यान उस हिस्से ने खींचा, जिसमें पाकिस्तान की सेना ने भारत का संदर्भ दिया। ISPR ने दावा किया कि पाकिस्तान के खिलाफ सक्रिय कुछ आतंकियों को कथित तौर पर भारत का समर्थन प्राप्त है।
पाकिस्तानी सेना ने कहा कि सुरक्षा बल देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और ऐसे तत्वों के खिलाफ अभियान जारी रखेंगे। बयान में ‘भारतीय समर्थन’ से सक्रिय आतंकियों को खत्म करने की बात कही गई।
इस तरह पाकिस्तान ने अपने सैन्य अभियानों को केवल घरेलू आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश करने के बजाय भारत से जोड़ने की कोशिश भी की। हालांकि, भारत के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों को लेकर कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक तौर पर सामने आने की बात नहीं कही गई है।
पाकिस्तान और भारत के बीच लंबे समय से आतंकवाद को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की सेना के ताजा बयान को भी इसी व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा संदर्भ में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय कार्य योजना का भी दिया हवाला
ISPR ने अपने अभियानों को पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि ये कार्रवाई राष्ट्रीय कार्य योजना की केंद्रीय शीर्ष समिति से अनुमोदित ढांचे के तहत की जा रही है।
सेना ने ‘अज़म-ए-इस्तेहकाम’ ढांचे का भी उल्लेख किया। पाकिस्तान में आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने के लिए सुरक्षा अभियानों को इसी व्यापक नीति के तहत आगे बढ़ाने की बात कही जाती रही है।
पाकिस्तानी सेना का कहना है कि सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकवादी नेटवर्क और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। सेना के अनुसार, ऐसे अभियानों का उद्देश्य आतंकियों की गतिविधियों पर रोक लगाना और देश की सीमाओं को सुरक्षित बनाना है।
सीमा पर बढ़ता तनाव बना बड़ी चुनौती
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बनी हुई है। पाकिस्तान जहां सीमा पार से होने वाले आतंकवादी हमलों के लिए अफगानिस्तान में मौजूद समूहों को जिम्मेदार ठहराता है, वहीं अफगान तालिबान पाकिस्तान के कई आरोपों को स्वीकार नहीं करता।
सीमा पर सुरक्षा, आतंकियों की आवाजाही और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दे दोनों पक्षों के बीच विवाद का कारण रहे हैं। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी सेना को अपनी सीमा के भीतर आतंकियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाना पड़ रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा इस संघर्ष का सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। उत्तरी वजीरिस्तान, कोहाट और डेरा इस्माइल खान जैसे इलाकों में पहले भी आतंकवादी गतिविधियों और सैन्य अभियानों की खबरें आती रही हैं।
21 आतंकियों के मारे जाने के दावे का मतलब क्या?
पाकिस्तानी सेना द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, ताजा अभियानों में 21 आतंकी मारे गए हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या उत्तरी वजीरिस्तान से बताई गई है। इसके अलावा कोहाट और डेरा इस्माइल खान में हुई मुठभेड़ों को भी इस कार्रवाई में शामिल किया गया है।
साथ ही सेना ने हाल की घुसपैठ की एक कोशिश में 15 आतंकियों को मारने का अलग दावा किया है और कहा है कि सीमा पार से पाकिस्तान में दाखिल होने की कोशिश में मारे गए आतंकियों की कुल संख्या 25 हो गई है।
फिलहाल इन सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है। खास बात यह है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देते हुए एक बार फिर भारत और अफगानिस्तान दोनों को अपने सुरक्षा संकट से जोड़ने की कोशिश की है।
ISPR का बयान तीन प्रमुख संदेश देने की कोशिश करता है—पहला, पाकिस्तानी सेना आतंकवादियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रही है; दूसरा, अफगानिस्तान से लगी सीमा को सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है; और तीसरा, पाकिस्तान अपने यहां सक्रिय आतंकवाद के लिए कथित ‘भारतीय समर्थन’ का आरोप लगा रहा है।
हालांकि, भारत से जुड़े आरोपों के लिए ठोस सबूत सामने आना इस दावे की विश्वसनीयता के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से सामने आई जानकारी मुख्य रूप से उसके सैन्य मीडिया विंग के बयान पर आधारित है।




