राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों विदेश दौरे पर हैं। अमेरिका और कनाडा के बाद उनका अगला पड़ाव ब्रिटेन है, जहां वे विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और बौद्धिक समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। ब्रिटेन में उनके दौरे को RSS की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए जा रहे आउटरीच कार्यक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है।
भागवत बुधवार को लंदन पहुंचे थे। इसके बाद गुरुवार से उन्होंने अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेना शुरू किया। उनके कार्यक्रम में धार्मिक नेताओं के अलावा शिक्षाविदों, रिसर्चर्स, कारोबारियों, प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों और ब्रिटेन के सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से बातचीत शामिल है। रविवार को उनके दौरे का सबसे प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किया जाना है, जिसमें वह भारतीय मूल के लोगों और अन्य समुदायों के बीच अपने विचार रखेंगे।
हालांकि, भागवत के ब्रिटेन पहुंचने के साथ ही उनके दौरे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है। ब्रिटेन के करीब 20 सिविल सोसाइटी संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र भेजकर RSS से जुड़े कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की अपील की है। इन संगठनों ने ग्रेटर लंदन अथॉरिटी से भी अनुरोध किया है कि RSS से जुड़े आयोजनों के लिए किसी तरह की सरकारी जगह उपलब्ध न कराई जाए।
मंदिर और गुरुद्वारे से शुरू हुआ ब्रिटेन दौरा
मोहन भागवत ने अपने ब्रिटेन दौरे की शुरुआत धार्मिक स्थलों की यात्रा से की। वे विल्सडन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर पहुंचे। इसके अलावा उन्होंने खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे में भी जाकर धार्मिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
उनके कार्यक्रम में एक जैन मंदिर की यात्रा भी शामिल है। इन मुलाकातों को अंतरधार्मिक संवाद के तौर पर पेश किया जा रहा है। दौरे का उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समुदायों के लोगों के साथ संवाद स्थापित करना बताया गया है।
ब्रिटेन में भागवत के दौरे का समन्वय करने वाले संगठन इंटीग्रल UK के संयोजक रोहित अंबेकर के मुताबिक, भागवत यहां ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार को सामने रखेंगे। इसका अर्थ पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने से है।
आयोजकों के अनुसार, RSS प्रमुख के दौरे का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद धारणाओं पर संवाद करना भी है।
रविवार को होगा ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’
भागवत के ब्रिटेन दौरे का मुख्य कार्यक्रम रविवार को रखा गया है। इसका विषय ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ यानी एकता का उत्सव है। इस दौरान सामुदायिक नेताओं के स्वागत समारोह के साथ ‘सभ्यतागत संवाद’ का आयोजन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम की शुरुआत ब्रिटेन में लंबे समय से सक्रिय हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) UK ने की है। HSS UK की स्थापना 1966 में हुई थी। कार्यक्रम को इंटीग्रल UK का भी समर्थन प्राप्त है।
आयोजकों की ओर से दावा किया गया है कि इस आयोजन में ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों से 310 से अधिक सामुदायिक संगठनों और एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में रविवार का कार्यक्रम भागवत के पूरे दौरे में सबसे व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है।
उनका सार्वजनिक संबोधन प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए होगा और इसके लाइव प्रसारण की भी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।
दौरे से पहले RSS को लेकर विरोध
एक तरफ जहां आयोजक भागवत के दौरे को संवाद और एकता के संदेश से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ब्रिटेन के कुछ संगठनों ने RSS को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।
करीब 20 सिविल सोसाइटी संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर RSS के कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की मांग की है। इन संगठनों ने ग्रेटर लंदन अथॉरिटी से RSS के कार्यक्रमों के लिए स्थान उपलब्ध नहीं कराने की अपील भी की है।
विरोध करने वाले समूहों ने RSS की विचारधारा और इतिहास को लेकर सवाल उठाए हैं। ‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों ने RSS को ‘तानाशाही और सैन्यवादी संगठन’ बताया है। उनका आरोप है कि RSS की विचारधारा पर यूरोपीय फासीवाद का प्रभाव रहा है।
विरोध करने वाले संगठनों ने ब्रिटिश प्रशासन से देश के बहुसांस्कृतिक समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। इस तरह भागवत का दौरा धार्मिक और सामुदायिक संवाद के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।
RSS की ओर से कहा- बातचीत के लिए तैयार हैं
भागवत के दौरे को लेकर उठ रही आपत्तियों पर RSS की ओर से भी प्रतिक्रिया दी गई है। RSS से जुड़े सुनील अंबेकर ने कहा कि संगठन का उद्देश्य शांति, एकीकरण और एकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और आवाजें होना स्वाभाविक है।
उनके मुताबिक, RSS हर तरह के लोगों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को लेकर कई तरह की गलतफहमियां हैं और इसके पीछे RSS की बुनियादी विचारधारा को पर्याप्त रूप से नहीं समझा जाना एक कारण है।
सुनील अंबेकर ने भारत की अवधारणा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत को केवल एक आधुनिक राजनीतिक राष्ट्र-राज्य के नजरिए से नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसकी पहचान एक सांस्कृतिक अवधारणा के रूप में भी है।
उन्होंने हिंदुत्व को लेकर कहा कि इसे किसी एक स्थिर या सीमित परिभाषा में बांधना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, हिंदुत्व में विभिन्न धर्मों और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान तथा सत्य में विश्वास की भावना शामिल है।
RSS की ओर से उम्मीद जताई जा रही है कि भागवत का ब्रिटेन दौरा संगठन और उसकी विचारधारा को लेकर लोगों के बीच मौजूद सवालों और गलत धारणाओं पर सीधे संवाद का अवसर देगा।
बंद कमरे में हुई अहम बैठक
ब्रिटेन पहुंचने के बाद भागवत ने सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहले एक ‘क्लोज्ड डोर राउंड टेबल मीटिंग’ में हिस्सा लिया। गुरुवार को हुई इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
इसके बाद भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिकों और प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रभावशाली लोगों की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इसमें कारोबार, राजनीति और कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी बताई गई।
आयोजकों के अनुसार, बैठक में ब्रिटेन के नेता, संसद से जुड़े लोग, कारोबारी और बड़े कॉरपोरेट समूहों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। FTSE 100 कंपनियों तथा अन्य कॉरपोरेट संस्थानों से जुड़े लोगों के भी इसमें पहुंचने की बात कही गई।
हालांकि, बैठक में मौजूद लोगों के नामों को सार्वजनिक नहीं किया गया। आयोजकों ने कहा कि बैठक को जानबूझकर गोपनीय रखा गया था ताकि सभी प्रतिभागी बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें और खुलकर चर्चा कर सकें।
सुनील अंबेकर के मुताबिक, ब्रिटेन में लोगों के बीच RSS को समझने में काफी रुचि दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान लोगों की ओर से उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर भागवत ने चर्चा की।
ब्रिटिश सांसद ने किया भागवत के दौरे का समर्थन
जहां कुछ ब्रिटिश संगठन भागवत के दौरे का विरोध कर रहे हैं, वहीं ब्रिटेन के कंजर्वेटिव सांसद बॉब ब्लैकमैन ने RSS प्रमुख के दौरे का समर्थन किया है।
ब्लैकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भागवत से मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें RSS प्रमुख के विचार और संगठन के भविष्य से जुड़े उनके सुझाव सुनकर खुशी हुई।
उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब भागवत के दौरे को लेकर ब्रिटेन में अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। इससे यह साफ है कि भागवत की यात्रा को लेकर ब्रिटेन में समर्थन और विरोध, दोनों तरह की आवाजें मौजूद हैं।
17 दिन के विदेश दौरे पर हैं भागवत
मोहन भागवत का यह विदेश दौरा कुल 17 दिनों का बताया गया है। वे 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। अमेरिका के बाद उन्होंने कनाडा का दौरा किया और अब ब्रिटेन में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
RSS की शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में आयोजित इस विदेश यात्रा को संगठन के वैश्विक आउटरीच अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। ब्रिटेन में धार्मिक स्थलों की यात्रा, सामुदायिक नेताओं से संवाद, बंद कमरे में बैठक और रविवार का सार्वजनिक कार्यक्रम इसी अभियान का हिस्सा हैं।
भागवत के ब्रिटेन दौरे का अगला बड़ा पड़ाव रविवार का ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ कार्यक्रम होगा। इस आयोजन के जरिए RSS और उससे जुड़े संगठन भारतीय मूल के लोगों तथा ब्रिटिश समाज के अन्य वर्गों के साथ अपने विचार साझा करने की कोशिश करेंगे।
दूसरी ओर, RSS की विचारधारा और उसके इतिहास को लेकर उठ रहे सवाल इस दौरे को सिर्फ एक सामुदायिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहने दे रहे हैं। आने वाले दिनों में भागवत के सार्वजनिक संबोधन और उनके संदेश पर ब्रिटेन में राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर रहेगी।




