कुल्लू में नशे के खिलाफ कंगना का सख्त संदेश, बोलीं- तस्करों की जड़ तक पहुंचे प्रशासन

कुल्लू में नशे के खिलाफ कंगना का सख्त संदेश, बोलीं- तस्करों की जड़ तक पहुंचे प्रशासन

कुल्लू। मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद कंगना रनौत ने कुल्लू जिले में बढ़ते नशे के मामलों को लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सोमवार को कुल्लू में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने नशे के बढ़ते कारोबार को गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए कहा कि युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति आने वाली पूरी पीढ़ी के भविष्य के लिए खतरा बन रही है।

सांसद ने अधिकारियों से कहा कि हिमाचल प्रदेश की शांत और सुरक्षित पहचान को नशे के अवैध कारोबार से प्रभावित नहीं होने दिया जा सकता। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से नशे की बिक्री और तस्करी के खिलाफ केवल औपचारिक कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उसके खिलाफ प्रभावी अभियान चलाने को कहा।

कंगना रनौत ने बैठक में स्पष्ट किया कि नशे की समस्या को केवल कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे काम कर रहे पूरे तंत्र की पहचान करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से यह पता लगाने को कहा कि नशे की आपूर्ति कहां से हो रही है, इसे जिले में कौन पहुंचा रहा है और इसके कारोबार से जुड़े लोगों का नेटवर्क कितना व्यापक है।

युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा असर

सांसद ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने वाले युवाओं की संख्या बढ़ना किसी एक परिवार या व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। युवा वर्ग किसी भी राज्य की ताकत होता है, इसलिए उन्हें नशे से दूर रखना सरकार, प्रशासन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो इसका असर युवाओं की शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर पड़ सकता है। हिमाचल जैसे राज्य में इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए शुरुआती स्तर पर ही कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

कंगना ने अधिकारियों से कहा कि नशे की उपलब्धता को कम करने के लिए केवल सड़क स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। अवैध सप्लाई चैन, तस्करी से जुड़े लोगों और कारोबार को संरक्षण देने वाले संभावित तत्वों तक भी जांच पहुंचनी चाहिए।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

बैठक के दौरान सांसद ने नशे के खुले कारोबार को लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में नशे की अवैध बिक्री लंबे समय तक जारी रहती है तो यह व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ कार्रवाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि कार्रवाई का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए और लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि प्रशासन नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ गंभीरता से काम कर रहा है।

कंगना ने यह भी कहा कि केवल छोटी मात्रा में नशा बरामद कर कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। पुलिस को उन लोगों तक पहुंचना होगा जो पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं।

बार-बार अपराध करने वालों पर सख्ती की मांग

सांसद ने बार-बार नशे से जुड़े अपराधों में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों में नरम रवैया अपनाने के बजाय कानून के तहत उपलब्ध सख्त प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाए।

उन्होंने नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की जरूरत बताई। संपत्ति जब्त करने जैसे कदमों से नशे के कारोबार में शामिल लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सकता है और दूसरे लोगों के लिए भी स्पष्ट संदेश दिया जा सकता है कि इस तरह की गतिविधियों से होने वाला लाभ सुरक्षित नहीं रहेगा।

कंगना ने सवाल उठाया कि यदि किसी क्षेत्र में नशे का नेटवर्क लगातार सक्रिय है तो उसके पीछे काम करने वाले मुख्य लोगों तक पुलिस की कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही है। उन्होंने अधिकारियों से नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाने को कहा।

संरक्षण देने वालों की भी हो पहचान

सांसद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नशे के कारोबार में केवल प्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों पर कार्रवाई करने से काम पूरा नहीं होगा। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इस नेटवर्क को कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या समूह का संरक्षण तो नहीं मिल रहा।

उन्होंने प्रशासन से नशे के कारोबार की पूरी श्रृंखला पर नजर रखने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने को कहा। उनका कहना था कि नशे के खिलाफ लड़ाई में खुफिया तंत्र और स्थानीय स्तर पर निगरानी को मजबूत करना जरूरी है।

कंगना ने अधिकारियों को यह संदेश भी दिया कि नशे के मामले में किसी भी स्तर पर राजनीतिक, सामाजिक या अन्य दबाव को कार्रवाई में बाधा नहीं बनने दिया जाना चाहिए। कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।

सख्त कानून की जरूरत पर दिया जोर

कंगना रनौत ने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के साथ-साथ मजबूत कानूनी व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के साथ समन्वय कर नशे के खिलाफ सख्त प्रावधानों को प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि केवल मौजूदा व्यवस्था के भरोसे रहकर इस समस्या को पूरी तरह समाप्त करना मुश्किल हो सकता है। बदलते समय के साथ नशे के कारोबार के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए कानून और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

सांसद ने प्रशासन से नशे की तस्करी और बिक्री पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे इलाकों की पहचान करने को कहा जहां इस तरह की गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

निगरानी तंत्र मजबूत करने पर जोर

बैठक में नशे के खिलाफ निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। कंगना ने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल के बिना नशे के नेटवर्क को खत्म करना मुश्किल होगा।

उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं को गंभीरता से लेने और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा। साथ ही नशे की रोकथाम के लिए केवल कानून-व्यवस्था से जुड़े उपायों पर निर्भर रहने के बजाय जागरूकता और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।

उनका कहना था कि परिवारों, शिक्षण संस्थानों और समाज के विभिन्न वर्गों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना भी जरूरी है।

हिमाचल की छवि बचाने की चुनौती

कंगना रनौत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान लंबे समय से शांतिपूर्ण वातावरण, प्राकृतिक सुंदरता और सुरक्षित सामाजिक माहौल के लिए रही है। ऐसे में नशे के बढ़ते कारोबार को इस पहचान के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के हर वर्ग को मिलकर इसके खिलाफ काम करना होगा। पुलिस को तस्करों पर कार्रवाई करनी होगी, प्रशासन को निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी और परिवारों तथा समाज को युवाओं में जागरूकता बढ़ानी होगी।

सांसद ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ अभियान में परिणाम दिखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि खानापूर्ति या केवल आंकड़ों तक सीमित कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा।

जड़ पर प्रहार करने की जरूरत

बैठक में कंगना का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई सतही स्तर से आगे बढ़कर पूरे नेटवर्क को निशाना बनाए। उन्होंने कहा कि जब तक नशे की आपूर्ति करने वाले मुख्य लोगों और उनके आर्थिक स्रोतों तक पहुंच नहीं बनाई जाती, तब तक इस समस्या पर स्थायी नियंत्रण मुश्किल रहेगा।

उन्होंने पुलिस और प्रशासन से नियमित समीक्षा, बेहतर समन्वय और मजबूत निगरानी के माध्यम से कार्रवाई को प्रभावी बनाने को कहा। साथ ही दोबारा अपराध करने वालों के खिलाफ सख्ती और नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक हितों पर चोट करने की आवश्यकता भी बताई।

कुल्लू की दिशा बैठक में सांसद द्वारा नशे के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने से साफ है कि जिले में नशे की समस्या अब प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। आने वाले समय में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई और उसके परिणामों पर निगाह रहेगी। कंगना ने अधिकारियों से स्पष्ट तौर पर कहा कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ठोस और निरंतर कार्रवाई जरूरी है, ताकि युवाओं को इस संकट से बचाया जा सके और हिमाचल की सुरक्षित पहचान कायम रहे।