साइकिल के पहियों पर देश जोड़ने निकले सोमेन देबनाथ, चंडीगढ़ में दिया हरियाली और युवा शक्ति का संदेश

साइकिल के पहियों पर देश जोड़ने निकले सोमेन देबनाथ, चंडीगढ़ में दिया हरियाली और युवा शक्ति का संदेश

पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता, युवा सशक्तीकरण और खेलों को बढ़ावा देने का संदेश लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके साइकिलिस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोमेन देबनाथ गुरुवार को चंडीगढ़ पहुंचे। वह अपने सालभर चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान ‘रीयूनियन भारत-वन ट्री, वन लाइफ, इंडियन यूथ एंड स्पोर्ट्स’ के तहत देश के विभिन्न हिस्सों की साइकिल यात्रा पर हैं। इस अभियान के दौरान उनका लक्ष्य देश के सभी 28 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों को साइकिल के माध्यम से कवर करना है।

देबनाथ की यह यात्रा केवल लंबी दूरी तय करने का अभियान नहीं है, बल्कि इसके जरिए वह समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, युवाओं में सकारात्मक सोच, खेलों के प्रति रुचि और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका संदेश है कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल सरकार या किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

चंडीगढ़ पहुंचने पर सोमेन देबनाथ ने शहर के वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मेयर सौरभ जोशी, वित्त सचिव दीपर्वा लाकरा, पर्यावरण निदेशक सौरभ कुमार, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार और उपायुक्त निशांत कुमार यादव सहित अन्य अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों के साथ अपने अभियान के उद्देश्यों और देशभर में यात्रा के दौरान लोगों से मिल रहे अनुभवों को साझा किया।

देबनाथ ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों को साइकिल के माध्यम से जोड़ना उनके अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत की भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझने के साथ-साथ वह लोगों तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं कि विविधताओं के बावजूद देश एक साझा भावना से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने के लिए लोगों के बीच संवाद और एक-दूसरे की संस्कृति को समझना बेहद जरूरी है।

उनके अभियान का प्रमुख केंद्र पर्यावरण संरक्षण भी है। देबनाथ ने चंडीगढ़ के लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे को पेड़ बनने तक उसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। साथ ही जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, कचरे को कम करना और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल जैसी आदतों को भी जीवनशैली में शामिल करना जरूरी है।

उन्होंने टिकाऊ जीवनशैली अपनाने पर विशेष जोर दिया। देबनाथ के मुताबिक, वर्तमान पीढ़ी जिस तरह प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करती है, उसका सीधा प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। इसलिए विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास शुरू करें, क्योंकि सामूहिक रूप से किए गए छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।

युवाओं को खेलों से जोड़ना भी उनके अभियान का अहम हिस्सा है। उनका मानना है कि खेल केवल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने या पदक जीतने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं के शारीरिक और मानसिक विकास में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। खेलों से अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और कठिन परिस्थितियों से निपटने का साहस विकसित होता है।

देबनाथ ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों और खेलों को स्थान दें। उन्होंने साइकिल चलाने को स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी बताया। उनके अनुसार, साइकिल एक ऐसा साधन है जो प्रदूषण नहीं फैलाता और व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने में भी मदद करता है। इसी कारण उनकी यात्रा स्वयं भी उनके अभियान के संदेश का हिस्सा बनी हुई है।

सोमेन देबनाथ की साइकिल यात्रा का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी बेहद उल्लेखनीय रहा है। वह इससे पहले 19 वर्षों में दुनिया के सातों महाद्वीपों के 191 देशों की साइकिल यात्रा कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न देशों और समाजों को करीब से देखा तथा सामाजिक मुद्दों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया। अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं और समृद्ध विरासत को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

191 देशों की यात्रा के अनुभव के बाद अब उन्होंने अपना ध्यान भारत के भीतर व्यापक जनसंपर्क और जागरूकता अभियान पर केंद्रित किया है। उनका वर्तमान अभियान देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने पर आधारित है। यात्रा के दौरान वह स्थानीय लोगों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से जुड़कर पर्यावरण, खेल और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

चंडीगढ़ प्रवास के दौरान उन्होंने शहर की हरित पहचान और पर्यावरणीय महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी शहर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाए रखने में प्रशासन के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, पेड़ों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तभी प्रभावी हो सकता है जब नागरिक स्वयं इन गतिविधियों का हिस्सा बनें।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को किसी विशेष दिवस तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण को नियमित जीवन का हिस्सा बनाना होगा। बच्चों और युवाओं को बचपन से ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में वे अधिक जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

देबनाथ ने राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया। देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर लोगों से मिलने का उनका अनुभव यह दर्शाता है कि भारत की विविधता उसकी ताकत है। विभिन्न भाषाओं, खान-पान, परंपराओं और संस्कृतियों के बावजूद लोगों में देश के प्रति समान भावना मौजूद है। उनका प्रयास है कि साइकिल यात्रा के माध्यम से इस जुड़ाव को और मजबूत किया जाए।

उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार और शिक्षा के नजरिए से देखने के बजाय उन्हें सामाजिक बदलाव का सक्रिय भागीदार बनाना चाहिए। यदि युवा पर्यावरण संरक्षण, खेल और सामाजिक सेवा से जुड़ते हैं तो इसका व्यापक प्रभाव समाज पर पड़ सकता है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए उनके अभियान में युवा और खेल दोनों को विशेष स्थान दिया गया है।

देबनाथ की वर्तमान यात्रा का उद्देश्य लोगों को यह समझाना भी है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों की जरूरत नहीं होती। व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में कई छोटे बदलाव करके प्रकृति के संरक्षण में योगदान दे सकता है। साइकिल का इस्तेमाल, पेड़ लगाना, पानी बचाना, बिजली की खपत कम करना और कचरे को नियंत्रित करना ऐसे कदम हैं जिन्हें आम नागरिक आसानी से अपना सकता है।

चंडीगढ़ में अपने संदेश के दौरान उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना केवल वर्तमान पीढ़ी का दायित्व नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि आज प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में लोगों को गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

सोमेन देबनाथ की राष्ट्रव्यापी साइकिल यात्रा अब आगे भी जारी रहेगी। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जोड़ने के उनके लक्ष्य के साथ यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, युवा भागीदारी, खेल संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का संदेश अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। सातों महाद्वीपों और 191 देशों की यात्रा के बाद भारत के भीतर शुरू किया गया उनका यह अभियान लोगों को यह संदेश देता है कि सकारात्मक बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी और छोटे-छोटे प्रयासों से भी की जा सकती है।