फूलों की महक, दीपों की रोशनी और गुरबाणी की गूंज… पहले प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में दिखा अद्भुत नजारा

फूलों की महक, दीपों की रोशनी और गुरबाणी की गूंज… पहले प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में दिखा अद्भुत नजारा

अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब में शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व बेहद श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक भावना के साथ मनाया गया। इस पवित्र अवसर पर पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे। सुबह से ही श्री दरबार साहिब परिसर में संगत की चहल-पहल बनी रही। श्रद्धालुओं ने गुरु घर में नतमस्तक होकर अरदास की और गुरबाणी कीर्तन सुनकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।

प्रकाश पर्व के मौके पर श्री हरिमंदिर साहिब सहित आसपास के प्रमुख गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों की आकर्षक सजावट, दीपमाला और रोशनी से पूरा परिसर बेहद सुंदर नजर आ रहा था। सजावट ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। धार्मिक वातावरण के बीच गुरबाणी की मधुर ध्वनि और संगत की मौजूदगी ने अमृतसर को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

नगर कीर्तन ने बढ़ाई धार्मिक शोभा

प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में निकले इस नगर कीर्तन की अगुवाई पांच प्यारों ने की। श्रद्धालु पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ नगर कीर्तन में शामिल हुए। धार्मिक जयकारों और गुरबाणी के गायन के बीच नगर कीर्तन विभिन्न रास्तों से होते हुए श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ।

नगर कीर्तन के दौरान रास्ते में जगह-जगह संगत के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी। लोगों ने सेवा भाव के साथ श्रद्धालुओं को भोजन और अन्य प्रसाद वितरित किया। कई स्थानों पर सिख युवाओं ने गतका के जौहर दिखाए। पारंपरिक युद्धकला के प्रदर्शन ने नगर कीर्तन में शामिल लोगों का उत्साह बढ़ाया। गतका के दौरान युवाओं की फुर्ती और साहस को देखकर बड़ी संख्या में लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया।

नगर कीर्तन के साथ विभिन्न रागी और धार्मिक जत्थों ने गुरबाणी का गायन किया। शबद-कीर्तन की स्वर लहरियों से पूरा माहौल आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। संगत भी कीर्तन में शामिल होकर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करती रही।

प्रमुख धार्मिक हस्तियों ने की शिरकत

इस विशेष धार्मिक आयोजन में सिख धर्म की कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं। श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने प्रकाश पर्व के अवसर पर संगत के बीच उपस्थिति दर्ज कराई।

नगर कीर्तन के दौरान पांच प्यारों, निशानची और नगाड़ची सिंहों की सेवाओं का भी सम्मान किया गया। प्रमुख धार्मिक हस्तियों ने उन्हें सिरोपे भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान गुरु घर की मर्यादा और परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम संपन्न हुए। संगत ने भी धार्मिक सेवाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

गुरबाणी को जीवन का आधार बनाने का संदेश

प्रकाश पर्व के अवसर पर मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह ने संगत को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाएं मनुष्य को सही जीवन जीने की दिशा दिखाती हैं। गुरबाणी को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए उसे अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। गुरु की वाणी इंसान को सत्य, सेवा, विनम्रता और सद्भावना के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है।

एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी संगत को प्रकाश पर्व की बधाई दी। उन्होंने गुरबाणी को मानवता के लिए मार्गदर्शन देने वाली महान शक्ति बताया। उनके अनुसार गुरु साहिब की शिक्षाएं किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता को आपसी प्रेम, भाईचारे और समानता का संदेश देती हैं।

उन्होंने संगत से गुरु साहिब की शिक्षाओं को अपने व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। सेवा, सिमरन और सदाचार को अपनाकर ही प्रकाश पर्व की भावना को वास्तविक रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।

श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में हुआ विशेष समागम

प्रकाश पर्व के अवसर पर श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में विशेष गुरमत समागम भी आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न धार्मिक जत्थों ने हिस्सा लिया। रागी जत्थों ने शबद-कीर्तन के माध्यम से संगत को गुरु की वाणी से जोड़ा। इसके अलावा ढाडी और कविशर जत्थों ने भी धार्मिक प्रस्तुतियां दीं।

समागम के दौरान गुरु साहिब के जीवन, उनकी शिक्षाओं और सिख परंपराओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संगत को संदेश दिया गया। श्रद्धालु शांत भाव से धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुए और गुरबाणी का श्रवण किया। कई श्रद्धालुओं ने लंबे समय तक दीवान हॉल में बैठकर कीर्तन और धार्मिक विचार सुने।

गुरमत समागम का उद्देश्य संगत को गुरु साहिब की शिक्षाओं से जोड़ना और प्रकाश पर्व के आध्यात्मिक महत्व को समझाना रहा। कार्यक्रम के दौरान गुरु जस का गायन होने से माहौल और भी श्रद्धापूर्ण हो गया।

तीन प्रमुख गुरुद्वारों में खास सजावट

प्रकाश पर्व को देखते हुए श्री हरिमंदिर साहिब के साथ-साथ श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में भी विशेष सजावट की गई। फूलों से की गई सजावट ने धार्मिक स्थलों की सुंदरता को और बढ़ा दिया। शाम के समय दीपमाला और रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा।

श्री हरिमंदिर साहिब की सजावट विशेष आकर्षण का केंद्र रही। फूलों की अलग-अलग डिजाइन और दीपों की रोशनी के बीच पवित्र परिसर का दृश्य श्रद्धालुओं को बेहद मनमोहक लगा। बड़ी संख्या में संगत ने इस अद्भुत दृश्य को देखा और गुरु घर में माथा टेककर आशीर्वाद लिया।

सजावट के साथ-साथ धार्मिक मर्यादा और वातावरण का विशेष ध्यान रखा गया। परिसर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सेवा और अन्य व्यवस्थाएं भी की गईं। संगत ने अपनी क्षमता के अनुसार विभिन्न सेवाओं में योगदान दिया।

सेवा और लंगर में जुटी संगत

प्रकाश पर्व के दौरान अमृतसर में सेवा की भावना भी देखने को मिली। नगर कीर्तन के मार्ग में कई जगहों पर लंगर लगाए गए। स्थानीय संगत और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था की।

लंगर के दौरान छोटे-बड़े सभी लोग सेवा करते नजर आए। किसी ने भोजन परोसा तो किसी ने बर्तन साफ करने और पानी की सेवा संभाली। सिख परंपरा में सेवा और लंगर के महत्व को इस अवसर पर एक बार फिर देखा गया। नगर कीर्तन में शामिल लोगों ने भी जगह-जगह रुककर लंगर ग्रहण किया।

इस दौरान युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ गतका प्रदर्शन में युवाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इससे नई पीढ़ी के बीच सिख परंपराओं और विरासत को लेकर जुड़ाव का संदेश भी दिखाई दिया।

देश-विदेश से पहुंची संगत

पहले प्रकाश पर्व को लेकर श्री हरिमंदिर साहिब में सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ देखने को मिली। पंजाब के अलग-अलग जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग अमृतसर पहुंचे। विदेशों में रहने वाली सिख संगत ने भी इस पवित्र अवसर पर गुरु घर में हाजिरी लगाई।

श्रद्धालुओं ने श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेका, पवित्र सरोवर की परिक्रमा की और गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया। कई परिवारों ने प्रकाश पर्व के अवसर पर विशेष रूप से अमृतसर पहुंचकर गुरु घर में अरदास की।

पूरे दिन श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। कहीं कीर्तन की आवाज सुनाई दी तो कहीं संगत सेवा करते नजर आई। नगर कीर्तन, गुरमत समागम, लंगर और विशेष सजावट ने मिलकर इस अवसर को और खास बना दिया।

इस तरह श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व श्रद्धा और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। प्रकाश पर्व ने एक बार फिर गुरु साहिब की वाणी, सेवा, सिमरन, समानता और मानवता के संदेश को केंद्र में रखा। श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ी संगत ने गुरु घर में नतमस्तक होकर इन शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।