नकली दवा की पहचान कैसे करें? जानिए पैकेट से लेकर QR कोड तक किन चीजों की जांच जरूरी है

नकली दवा की पहचान कैसे करें? जानिए पैकेट से लेकर QR कोड तक किन चीजों की जांच जरूरी है

दवा खरीदते समय ज्यादातर लोग केवल डॉक्टर की पर्ची और दवा के नाम पर ध्यान देते हैं। पैकेट की सील, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट या लेबल में किसी तरह की गड़बड़ी है या नहीं, इसकी जांच बहुत कम लोग करते हैं। लेकिन कर्नाटक में सामने आया नकली दवाओं का मामला बताता है कि दवा खरीदते समय थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।

कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नकली और कथित तौर पर मिलावटी दवाओं की खरीद, बिक्री और सप्लाई से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने कुल 24 दवा लाइसेंसों के खिलाफ कदम उठाया है। इनमें 16 लाइसेंस रद्द किए गए हैं, जबकि 8 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। कार्रवाई का दायरा बेंगलुरु के साथ-साथ हुबली और बेलगावी तक बताया गया है।

मामला सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नकली दवाओं का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसकी सप्लाई किन-किन जगहों तक पहुंची थी।

फार्महाउस पर छापे के बाद खुला पूरा मामला

इस पूरे मामले की जांच में अहम मोड़ 18 अगस्त को आया। एफडीए के औषधि प्रवर्तन दल ने बेंगलुरु के पास बिदादी इलाके के कुरुबरकेरनहल्ली स्थित एक फार्महाउस पर छापा मारा। अधिकारियों को वहां दवाओं की संदिग्ध पैकिंग और दोबारा लेबलिंग से जुड़ी कई चीजें मिलीं।

छापेमारी के दौरान दवाओं के साथ-साथ पैकिंग सामग्री, नकली लेबल, मुहरें और इंजेक्शन भरने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी बरामद की गईं। विभाग के मुताबिक जब्त सामान और दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 5.05 करोड़ रुपये है।

जांच में यह भी सामने आया कि इस स्थान का कथित तौर पर इस्तेमाल दवाओं को एक पैकेज से दूसरे पैकेज में डालने और उन पर नए लेबल लगाने के लिए किया जा रहा था। हालांकि, जब्त दवाओं की गुणवत्ता और वास्तविक रासायनिक संरचना को लेकर अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

सस्ती दवा को महंगे ब्रांड के नाम पर बेचने का आरोप

प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित तौर पर दूसरे राज्यों से कम कीमत वाली दवाएं मंगाई जाती थीं। इसके बाद उन्हें अलग शीशियों में भरकर महंगी और जीवनरक्षक दवाओं के नाम से पैक किए जाने की आशंका जताई गई है।

छापे के दौरान कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम वाले कथित फर्जी लेबल भी बरामद हुए। इनमें Pfizer के नाम से जुड़े लेबल भी बताए गए हैं। अधिकारियों ने कुछ पैकेजों पर मौजूद क्यूआर या सत्यापन कोड की जांच की तो वे काम नहीं कर रहे थे।

हालांकि, किसी पैकेज का क्यूआर कोड काम न करना अकेले इस बात का अंतिम प्रमाण नहीं है कि दवा नकली ही है। यही वजह है कि जब्त दवाओं के नमूने सरकारी प्रयोगशालाओं को भेजे गए हैं। इनकी जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दवाओं में कौन से पदार्थ मौजूद हैं, उनकी गुणवत्ता कैसी है और वे निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

जब्त सामान में हजारों इंजेक्शन भी शामिल

एफडीए की कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में इंजेक्शन और अन्य चिकित्सा सामग्री बरामद होने की बात सामने आई है। जब्त सामान में 5,640 शीशियां CEFIAVIGENT 2.5 इंजेक्शन की बताई गई हैं। इसके अलावा HIZLAM इंजेक्शन की 1,531 शीशियां भी मिलीं।

जांच अधिकारियों के अनुसार 264 शीशियाँ EMBLAVEO की थीं, जिन पर Pfizer का लेबल लगा हुआ बताया गया। इसके अलावा अन्य इंजेक्शन और लगभग 30 डिब्बे एक्सपायर्ड दवाएं भी बरामद किए गए।

दवाओं की दोबारा पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनों, लेबल और मुहरों की बरामदगी ने जांच को और महत्वपूर्ण बना दिया है। एफडीए ने संबंधित दवाओं के बैच नंबरों को अपने सिस्टम में ब्लॉक कर दिया है, ताकि इनकी आगे बिक्री या सप्लाई को रोका जा सके।

24 दवा लाइसेंसों पर कार्रवाई

इस मामले में FDA ने कुल 24 लाइसेंसों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 16 लाइसेंस रद्द कर दिए गए, जबकि 8 को निलंबित किया गया है।

रद्द किए गए लाइसेंसों में बेंगलुरु की कई दवा कंपनियां और मेडिकल प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। इनमें Avesco Healthcare, Bangalore Speciality Pharma, Patel Medi Trade, Rajarajeshwari Pharma, N.S. Pharma, Surya Speciality Pharma, SWS Pharma, Krupa Healthcare, St. Philomena Hospital Drug Centre, Sagar Pharma, Jaimus Pharma, Fortune Medical Solutions, Excelcare Pharma और Patel Medicals के नाम सामने आए हैं।

इसके अलावा Bangalore Speciality Pharma के चामराजपेट स्थित प्रतिष्ठान का लाइसेंस भी रद्द किया गया है।

जिन प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, उनमें Med Pharma, Surya Speciality Hospital, Sagar Pharma Unit-2, Vivantha Pharmaceuticals, Maruthi Medicals, Viva Pharma, High-5 Pharma और नेलमंगला स्थित Pfizer के C&F डिपो का नाम शामिल है।

आम ग्राहक कैसे बच सकते हैं नकली दवा से?

नकली दवा का पता लगाना हमेशा आसान नहीं होता। इसलिए दवा खरीदते समय कुछ सामान्य सावधानियां अपनाना जरूरी है।

पहली सावधानी- लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही खरीदारी करें

किसी अनजान व्यक्ति, संदिग्ध ऑनलाइन विक्रेता या बिना लाइसेंस वाली दुकान से दवा लेने से बचें। नियमित रूप से दवा लेने की जरूरत हो तो ऐसे मेडिकल स्टोर का इस्तेमाल करें जहां दवाओं की खरीद-बिक्री नियमों के अनुसार होती हो।

दूसरी सावधानी- हर खरीद का बिल लें

दवा खरीदने के बाद बिल लेना जरूरी है। बिल में दवा का नाम, कीमत और खरीद से संबंधित जानकारी दर्ज होती है। भविष्य में दवा को लेकर कोई शिकायत सामने आती है तो यह खरीद का प्रमाण भी बन सकता है।

तीसरी सावधानी- पैकेट को गौर से देखें

दवा का पैकेट खोलने से पहले उस पर लिखी जानकारी पढ़ें। निर्माता का नाम, दवा की मात्रा, बैच नंबर, निर्माण की तारीख और एक्सपायरी डेट की जांच करें।

अगर पैकेजिंग पर प्रिंट धुंधला दिखाई दे, शब्दों की स्पेलिंग गलत हो, सील टूटी हुई हो या लेबल असामान्य तरीके से चिपका हुआ लगे, तो दवा को लेकर सतर्क हो जाएं।

चौथी सावधानी- क्यूआर या वेरिफिकेशन कोड की जांच करें

कुछ दवाओं की पैकिंग पर क्यूआर कोड या अन्य सत्यापन व्यवस्था दी जाती है। जहां ऐसी सुविधा उपलब्ध हो, वहां उसका इस्तेमाल करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है।

लेकिन केवल कोड स्कैन न होने के आधार पर दवा को नकली मान लेना भी सही नहीं है। संदेह होने पर निर्माता, फार्मासिस्ट या संबंधित औषधि विभाग से पुष्टि करें।

पांचवीं सावधानी- असामान्य रूप से कम कीमत पर ध्यान दें

अगर किसी महंगी दवा को बाजार की सामान्य कीमत से काफी कम दाम में देने की बात कही जा रही है, तो तुरंत खरीदने के बजाय इसकी पुष्टि करें। हर कम कीमत वाली दवा नकली नहीं होती, क्योंकि छूट और अलग-अलग विक्रेताओं की कीमतों के कई वैध कारण हो सकते हैं। फिर भी बहुत ज्यादा कीमत में अंतर होने पर सावधानी रखना जरूरी है।

छठी सावधानी- शक होने पर खुद से दवा न लें

अगर पैकेट, दवा के नाम, लेबल या गुणवत्ता को लेकर कोई संदेह हो तो बिना सलाह के उसका इस्तेमाल न करें। डॉक्टर या योग्य फार्मासिस्ट से जानकारी लें और जरूरत पड़ने पर संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग को शिकायत करें।

सरकार की जांच किन पहलुओं पर केंद्रित है?

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर के अनुसार, जांच के दौरान कथित तौर पर बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं। अधिकारियों द्वारा दूसरे राज्यों से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है।

मंत्री के मुताबिक, जांच में जो लोग भी इस नेटवर्क से जुड़े पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल या सप्लाई की जाने वाली दवाओं को लेकर भी जांच की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई के दौरान एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी से जुड़े स्टॉक को जब्त किया गया है। कंपनी की ओर से जांच में सहयोग नहीं करने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, इन दावों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और जांच के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।

कानून के तहत भी हो सकती है कार्रवाई

FDA ने मामले में Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत कार्रवाई शुरू की है। विभाग ने संबंधित दवाओं को कानून की धारा 17B के तहत कथित तौर पर नकली दवाओं की श्रेणी में रखा है।

ऐसी दवाओं के निर्माण, बिक्री, भंडारण या वितरण से जुड़े मामलों में कानून की धारा 27 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। आगे की कार्रवाई जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

जांच पूरी होने के बाद तस्वीर होगी साफ

फिलहाल विशेष जांच दल कथित नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने में लगा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्ध दवाएं कहां से हासिल की गईं, उन्हें किस जगह पर दोबारा पैक किया गया और फिर किन दुकानों या डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों के जरिए आगे भेजा गया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब्त दवाओं की प्रयोगशाला जांच से उनकी वास्तविक गुणवत्ता और संरचना के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिलेगी।

इसलिए आम लोगों को किसी भी वायरल सूची या सोशल मीडिया संदेश के आधार पर दवा को नकली मानने के बजाय अधिकृत स्रोत से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

दवा खरीदते समय कुछ मिनट की सावधानी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। दुकान की विश्वसनीयता देखें, पक्का बिल लें, पैकेजिंग और सील जांचें, बैच नंबर व एक्सपायरी डेट पढ़ें और किसी भी असामान्य चीज पर तुरंत सवाल करें। यदि दवा संदिग्ध लगे, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर, फार्मासिस्ट या संबंधित औषधि नियंत्रण अधिकारी से पुष्टि करना सुरक्षित तरीका है।