दुबई से iPhone 18 Pro लाने पर customs कितना लगेगा, कितने फोन की इजाज़त है? जानें पूरा नियम

दुबई से iPhone 18 Pro लाने पर customs कितना लगेगा, कितने फोन की इजाज़त है? जानें पूरा नियम

भारत में नए आईफोन की कीमत देखकर कई लोग विदेश से इसे खरीदने का विकल्प तलाशते हैं। खासतौर पर दुबई में आईफोन की कीमत भारतीय बाजार के मुकाबले कम होने के कारण वहां से फोन खरीदकर भारत लाने का चलन काफी लोगों को आकर्षित करता है। ऐसे में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लेकर भी लोगों के मन में यही सवाल है कि दुबई से खरीदने के बाद इन्हें भारत लाते समय क्या कस्टम ड्यूटी देनी होगी?

भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत करीब 1,64,900 रुपये और iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत लगभग 1,79,900 रुपये बताई जा रही है। दूसरी ओर UAE में इनकी कीमत भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 1,32,000 रुपये और 1,42,400 रुपये के आसपास है। यानी कीमत में अच्छा खासा अंतर दिखाई देता है।

लेकिन सिर्फ कीमत का अंतर देखकर दुबई से कई आईफोन खरीद लेना हमेशा फायदेमंद नहीं हो सकता। भारत लौटते समय यात्रियों को कस्टम के नियमों का पालन करना होता है। खासतौर पर नए और सीलबंद फोन तथा व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए पहले से इस्तेमाल किए जा रहे फोन को एक ही श्रेणी में नहीं देखा जाता।

कितने iPhone भारत ला सकते हैं?

दुबई से भारत लौटने वाले यात्रियों के लिए ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है कि वे केवल एक निश्चित संख्या में ही आईफोन ला सकते हैं। यानी यह कहना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति केवल एक या दो आईफोन ही भारत ला सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि कोई यात्री जितने चाहे उतने नए आईफोन बिना किसी कस्टम प्रक्रिया के भारत ला सकता है। कस्टम अधिकारी सामान की संख्या के साथ उसकी कीमत, स्थिति और उसे भारत लाने के उद्देश्य को भी देख सकते हैं।

अगर किसी व्यक्ति के पास उसका अपना इस्तेमाल किया हुआ आईफोन है, तो वह व्यक्तिगत सामान की श्रेणी में आ सकता है। वहीं, कई नए और पैक्ड आईफोन साथ होने पर अधिकारी यह जानना चाह सकते हैं कि ये फोन किस उद्देश्य से खरीदे गए हैं।

अपने इस्तेमाल का फोन और नए फोन में अंतर

कस्टम नियमों को समझने के लिए Personal Effects और नए सामान के बीच अंतर जानना जरूरी है। यात्रा के दौरान इस्तेमाल किया जा रहा निजी सामान अलग तरीके से देखा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति दुबई में अपना नया फोन खरीदकर उसे वहीं इस्तेमाल करना शुरू कर देता है और उसी फोन के साथ भारत लौटता है, तो उसकी स्थिति कई नए सीलबंद फोन साथ लाने से अलग हो सकती है।

दूसरी तरफ अगर किसी यात्री के सामान में कई नए आईफोन हैं, जिनके बॉक्स तक नहीं खोले गए हैं, तो कस्टम अधिकारी यह जांच कर सकते हैं कि ये फोन व्यक्तिगत जरूरत के लिए हैं या किसी दूसरे व्यक्ति को देने अथवा किसी व्यावसायिक उद्देश्य से लाए जा रहे हैं। यही वजह है कि केवल फोन का बॉक्स खोल देना या उसे अपने बैग में रख लेना ही कस्टम नियमों से जुड़ी हर स्थिति का समाधान नहीं माना जा सकता।

75 हजार रुपये की ड्यूटी-फ्री सीमा

भारत आने वाले यात्रियों के लिए वर्तमान बैगेज नियमों में 75,000 रुपये तक की सामान्य Duty-Free allowance का प्रावधान है। यह सुविधा निर्धारित शर्तों के तहत हवाई या समुद्री रास्ते से भारत आने वाले भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के यात्रियों को मिलती है। पहले यह सीमा 50,000 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 75,000 रुपये किया गया है। लेकिन यहां यह समझना बहुत जरूरी है कि 75,000 रुपये की सीमा का अर्थ यह नहीं है कि 75,000 रुपये तक का कोई भी महंगा इलेक्ट्रॉनिक सामान अपने आप बिना किसी अन्य शर्त के भारत लाया जा सकता है।

व्यक्तिगत सामान और अन्य वस्तुओं पर लागू नियम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए iPhone जैसे महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान के मामले में यात्री को उसकी कीमत और अपनी स्थिति के आधार पर कस्टम नियम देखना चाहिए।

iPhone 18 Pro पर क्यों पड़ सकता है असर?

मान लीजिए दुबई में iPhone 18 Pro की कीमत करीब 1.32 लाख रुपये है। यह राशि 75,000 रुपये की सामान्य ड्यूटी-फ्री सीमा से अधिक है। ऐसे में यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि पूरा फोन बिना किसी कस्टम ड्यूटी के भारत आ जाएगा। अगर सामान संबंधित Duty-Free allowance के दायरे में नहीं आता है, तो लागू कस्टम नियमों के अनुसार शुल्क लग सकता है। कस्टम ड्यूटी की वास्तविक गणना सामान के मूल्यांकन और उस समय लागू शुल्क एवं नियमों के आधार पर होती है।

इसलिए विदेश से आईफोन खरीदने से पहले सिर्फ भारत और दुबई की कीमतों का अंतर देखना पर्याप्त नहीं है। संभावित कस्टम शुल्क को भी हिसाब में रखना चाहिए।

कई सीलबंद आईफोनों पर क्या होगा?

अगर कोई व्यक्ति दुबई से दो, तीन या उससे अधिक नए आईफोन खरीदकर भारत ला रहा है, तो स्थिति और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। खासतौर पर तब, जब सभी फोन नए और सीलबंद हों। कस्टम अधिकारी यह पूछ सकते हैं कि इतने फोन किसके इस्तेमाल के लिए हैं। यदि फोन परिवार या दोस्तों के लिए खरीदे गए हैं, तो भी उन्हें व्यक्तिगत सामान मानने की स्थिति स्वतः नहीं बनती। सामान के उद्देश्य और लागू नियमों के आधार पर कस्टम अधिकारी निर्णय ले सकते हैं।

वहीं अगर कोई व्यक्ति बड़ी संख्या में फोन लेकर आता है और सामान का संबंध व्यावसायिक गतिविधि से दिखाई देता है, तो उसे Personal Effects के रूप में नहीं माना जा सकता। ऐसे सामान के लिए अलग कस्टम नियम लागू हो सकते हैं।

क्या परिवार के सदस्यों की सीमा जोड़ सकते हैं?

कई लोग सोचते हैं कि अगर परिवार के चार लोग विदेश से भारत लौट रहे हैं, तो चारों की Duty-Free allowance को जोड़कर एक महंगा आईफोन या कई फोन आसानी से लाए जा सकते हैं। ऐसा मानना सही नहीं है।

Duty-Free allowance यात्री के लिए निर्धारित होती है और इसे दूसरे यात्री की allowance के साथ मनमाने तरीके से जोड़कर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर आईफोन की खरीद की योजना बनाने से पहले संबंधित नियमों को समझना जरूरी है। खास तौर पर अगर सभी फोन एक ही व्यक्ति के सामान में हैं या सभी नए और सीलबंद हैं, तो कस्टम जांच की स्थिति अलग हो सकती है।

कस्टम पर सामान की घोषणा कब करनी होगी?

भारत पहुंचने के बाद अगर यात्री के पास ऐसा सामान है जिसे कस्टम के सामने घोषित करना जरूरी है, तो उसकी जानकारी देना आवश्यक है। इसके लिए यात्रियों को निर्धारित कस्टम प्रक्रिया का पालन करना होता है।

एयरपोर्ट पर आमतौर पर Green Channel और Red Channel की व्यवस्था होती है। जिन यात्रियों के पास घोषित करने योग्य सामान है, उन्हें संबंधित नियमों के अनुसार declaration करना चाहिए। सिर्फ यह सोचकर Green Channel का इस्तेमाल करना उचित नहीं है कि सामान निजी है। यदि सामान लागू Duty-Free सीमा या छूट की शर्तों में नहीं आता है, तो उसकी घोषणा और कस्टम प्रक्रिया जरूरी हो सकती है।

Atithi पोर्टल से मिल सकती है जानकारी

भारत में आने वाले यात्रियों के लिए कस्टम से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए CBIC का Atithi सिस्टम भी मौजूद है। यात्रा से पहले यात्री बैगेज और कस्टम से जुड़े नियमों की जानकारी ले सकते हैं।

महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ यात्रा करने वाले लोगों के लिए पहले से नियमों को देख लेना बेहतर रहता है। इससे एयरपोर्ट पर कस्टम जांच के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचने में मदद मिल सकती है।

बच्चों के नाम पर फोन लाने से नहीं बढ़ेगी सीमा

कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि परिवार में बच्चे या छोटे बच्चे होने पर अतिरिक्त Duty-Free allowance का इस्तेमाल करके महंगे आईफोन लाए जा सकते हैं। लेकिन बच्चों और शिशुओं से जुड़े बैगेज प्रावधानों को भी अलग से समझना जरूरी है।

छोटे बच्चों के इस्तेमाल किए हुए निजी सामान के लिए नियम मौजूद हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी बच्चे के नाम पर नया और महंगा आईफोन लाकर सामान्य कस्टम नियमों से बचा जा सकता है। इसलिए किसी बच्चे या परिवार के अन्य सदस्य के नाम पर फोन खरीदने से पहले संबंधित बैगेज प्रावधानों की जांच करना जरूरी है।

दुबई से iPhone खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

अगर आप दुबई से iPhone 18 Pro या iPhone 18 Pro Max खरीदकर भारत लाने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले फोन की कीमत और खरीद की रसीद संभालकर रखें। इसके अलावा यह भी स्पष्ट रखें कि फोन किसके इस्तेमाल के लिए खरीदा गया है। अगर एक से अधिक नए फोन हैं, तो उनके संबंध में खरीद का बिल और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने पास रखना उपयोगी रहेगा। साथ ही भारत पहुंचने से पहले यह देख लें कि आपका सामान Duty-Free allowance और Personal Effects से जुड़े नियमों में आता है या नहीं।

किसी भी सामान को सिर्फ उसकी कम कीमत के कारण विदेश से खरीदना हमेशा बचत वाला सौदा नहीं होता। अगर उस पर भारत पहुंचने के बाद कस्टम ड्यूटी देनी पड़ती है, तो दुबई और भारत की कीमत का अंतर काफी कम हो सकता है।

दुबई से iPhone 18 Pro भारत लाने के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नियम केवल फोन की संख्या पर आधारित नहीं हैं। सामान की कीमत, उसका व्यक्तिगत इस्तेमाल, वह नया है या पहले से इस्तेमाल किया हुआ है और उसे भारत लाने का उद्देश्य जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। एक इस्तेमाल किया हुआ निजी फोन और कई नए सीलबंद आईफोन को एक जैसा नहीं माना जा सकता। इसी तरह 75,000 रुपये की Duty-Free allowance को हर महंगे आईफोन पर मिलने वाली अलग छूट समझना भी सही नहीं है।

इसलिए दुबई से iPhone 18 Pro खरीदने वाले यात्रियों को भारत लौटने से पहले लागू Baggage Rules और Customs declaration की शर्तों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। अगर सामान निर्धारित छूट के बाहर है, तो भारत पहुंचने पर लागू कस्टम प्रक्रिया और शुल्क का पालन करना जरूरी हो सकता है।

(Photo: AI Generated)