अडानी ग्रुप से जुड़ी पांच सूचीबद्ध कंपनियों के खिलाफ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से चल रही नियामकीय कार्यवाही अब निपट गई है। सेबी के निपटान आदेश के अनुसार, समूह की पांच कंपनियों ने कुल मिलाकर करीब 1.5 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि का भुगतान किया है। इसके बाद संबंधित मामलों में चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया है।
इस मामले में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अडानी टोटल गैस लिमिटेड, एब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड शामिल थीं। इनमें से कुछ कंपनियों के नाम समय के साथ बदले भी हैं। एब्ल्यूएल एग्री बिजनेस को पहले अडानी विल्मर लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, जबकि अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का पुराना नाम अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड था।
सेबी की कार्यवाही में मुख्य रूप से कुछ संबंधित पक्षों के साथ हुए लेनदेन की जानकारी सार्वजनिक करने और ऑडिट से जुड़े नियमों के पालन से संबंधित मुद्दे शामिल थे। निपटान आदेश में इन मामलों को लेकर लगाए गए आरोपों से संबंधित नियामकीय कार्यवाही को सेटलमेंट के जरिए समाप्त किया गया है।
पांचों कंपनियों ने कितनी राशि दी?
सेबी के आदेश के मुताबिक, सबसे बड़ी सेटलमेंट राशि अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने जमा की। कंपनी की ओर से 76.05 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसके बाद अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने 45.50 लाख रुपये की राशि से मामले को निपटाया। बाकी तीन कंपनियों में अडानी टोटल गैस लिमिटेड, एब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड शामिल हैं। इन तीनों कंपनियों ने अलग-अलग 9.75 लाख रुपये का भुगतान किया।
इस तरह पांचों कंपनियों द्वारा जमा की गई कुल राशि लगभग 1.5 करोड़ रुपये बैठती है। सेबी के निपटान आदेश के तहत भुगतान किए जाने के बाद इन कंपनियों के खिलाफ संबंधित कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया।
यहां यह समझना जरूरी है कि सेटलमेंट किसी मामले में नियामकीय कार्यवाही को तय शर्तों पर समाप्त करने की प्रक्रिया होती है। इसलिए केवल सेटलमेंट राशि के भुगतान को अदालत की ओर से आरोप सिद्ध होने के समान नहीं माना जाना चाहिए। इस मामले में सेबी के आदेश में जिन नियामकीय मुद्दों और कथित उल्लंघनों का उल्लेख किया गया था, उन्हीं के आधार पर कार्यवाही का निपटारा किया गया है।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद बढ़ी थी निगरानी
अडानी ग्रुप की कंपनियों से जुड़ा यह मामला उस समय की व्यापक नियामकीय जांच के संदर्भ में सामने आया, जब अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने जनवरी 2023 में अडानी ग्रुप को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी।
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली थी। रिपोर्ट में कॉरपोरेट गवर्नेंस, शेयरों की कीमत और समूह से जुड़े विभिन्न कारोबारी पहलुओं पर कई आरोप लगाए गए थे। अडानी ग्रुप ने रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन किया था और उन्हें गलत तथा भ्रामक बताया था।
इसके बाद अडानी समूह से जुड़ी कंपनियों के कामकाज, बाजार से संबंधित गतिविधियों और नियामकीय अनुपालन को लेकर अलग-अलग स्तर पर जांच और समीक्षा हुई। सेबी ने भी समूह से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की थी।
मौजूदा निपटान आदेश उसी व्यापक जांच और नियामकीय प्रक्रिया से जुड़े मामलों में से एक से संबंधित है। जांच के दौरान सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू नियमों और उस समय लागू लिस्टिंग एग्रीमेंट से जुड़े प्रावधानों के संभावित उल्लंघन के पहलुओं को भी देखा गया था।
संबंधित पक्षों के लेनदेन का मुद्दा क्या था?
सेबी की कार्यवाही में जिन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया, उनमें कुछ संबंधित पक्षों के साथ हुए लेनदेन की जानकारी के खुलासे से जुड़ा मामला भी था। शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए संबंधित पक्षों के साथ होने वाले लेनदेन को लेकर पारदर्शिता और खुलासे के कई नियम लागू होते हैं। ऐसे लेनदेन के बारे में निर्धारित परिस्थितियों में शेयरधारकों और बाजार को जानकारी देना जरूरी होता है।
सेबी के निपटान आदेश के अनुसार, संबंधित मामले में कुछ संबद्ध-पक्ष लेनदेन के खुलासे को लेकर सवाल उठाए गए थे। नियामक की कार्यवाही इसी तरह के कथित गैर-प्रकटीकरण से संबंधित थी। इसका मतलब यह है कि जांच का एक हिस्सा इस बात से जुड़ा था कि संबंधित पक्षों के साथ हुए कुछ कारोबारी लेनदेन के बारे में नियामकीय नियमों के मुताबिक जानकारी उपलब्ध कराई गई थी या नहीं।
हालांकि, निपटान प्रक्रिया के तहत कंपनियों ने सेबी के साथ मामले को तय शर्तों पर समाप्त करने का रास्ता अपनाया। सेटलमेंट राशि जमा किए जाने के बाद संबंधित कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया गया।
ऑडिट रिपोर्ट को लेकर भी उठे सवाल
इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कंपनियों की ऑडिट और लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट से संबंधित था। सेबी के आदेश में ऐसी ऑडिट फर्मों द्वारा रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए जाने का मुद्दा भी शामिल था, जिनके पास वैध पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट नहीं होने की बात कार्यवाही में उठाई गई थी। पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट ऑडिटिंग क्षेत्र में पेशेवर गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित ऑडिट फर्म निर्धारित पेशेवर प्रक्रियाओं और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों का पालन कर रही है।
सेबी की कार्यवाही में आरोप यह था कि संबंधित कंपनियों की कुछ ऑडिट या लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट ऐसी ऑडिट फर्मों की ओर से साइन की गई थीं, जिनके पास वैध पीयर रिव्यू प्रमाणपत्र नहीं था। यानी इस मामले में केवल कंपनी के कारोबारी लेनदेन का खुलासा ही मुद्दा नहीं था, बल्कि ऑडिट से जुड़े अनुपालन को भी जांच के दायरे में रखा गया था।
अडानी एंटरप्राइजेज पर सबसे ज्यादा राशि
सेटलमेंट की रकम पर नजर डालें तो पांच कंपनियों में अडानी एंटरप्राइजेज ने सबसे अधिक राशि का भुगतान किया है। कंपनी की ओर से 76.05 लाख रुपये जमा किए गए। इसके बाद अडानी ग्रीन एनर्जी का नंबर आता है, जिसने 45.50 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं अडानी टोटल गैस, एब्ल्यूएल एग्री बिजनेस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 9.75-9.75 लाख रुपये की राशि जमा की।
इन सभी भुगतानों को जोड़ने पर कुल रकम लगभग 1.5 करोड़ रुपये होती है। सेबी के निपटान आदेश में प्रत्येक कंपनी से संबंधित कार्यवाही और उसके निपटान की शर्तों का उल्लेख किया गया है।
किन कंपनियों के पुराने नाम भी जुड़े हैं?
इस मामले में शामिल कंपनियों के नामों को लेकर भी एक बात महत्वपूर्ण है। एब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड को पहले अडानी विल्मर लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। इसी तरह अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड का पुराना नाम अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड था।
मामले में शामिल पांच कंपनियां अडानी समूह के अलग-अलग कारोबारी क्षेत्रों से जुड़ी हैं। अडानी एंटरप्राइजेज समूह की फ्लैगशिप कंपनी है, जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में काम करती है। अडानी टोटल गैस गैस वितरण कारोबार से जुड़ी है और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस बिजली ट्रांसमिशन तथा संबंधित ऊर्जा बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काम करती है।
इस वजह से सेबी के निपटान आदेश में शामिल कंपनियां समूह के अलग-अलग कारोबारी हिस्सों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
जांच का व्यापक संदर्भ क्या था?
जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप से जुड़े कई मामलों ने भारतीय शेयर बाजार और नियामकीय संस्थाओं का ध्यान खींचा था। रिपोर्ट के बाद समूह की कंपनियों के बाजार मूल्य में बड़ी हलचल देखने को मिली थी। इसके बाद अडानी समूह से संबंधित विभिन्न मामलों में नियामकीय स्तर पर जांच और कार्रवाई हुई। सेबी ने समूह की कंपनियों से जुड़े कई पहलुओं को अपनी जांच में शामिल किया था।
मौजूदा मामला विशेष रूप से सूचीबद्धता से जुड़े नियमों, संबंधित पक्षों के लेनदेन के खुलासे और ऑडिट रिपोर्ट से जुड़े अनुपालन के मुद्दों पर केंद्रित था। अब पांच कंपनियों द्वारा सेटलमेंट राशि जमा किए जाने के बाद इस विशेष कार्यवाही का निपटारा हो गया है। इसका अर्थ यह है कि सेबी के आदेश में शामिल इन मामलों से संबंधित कार्यवाही तय प्रक्रिया के तहत समाप्त हो गई है।
कुल मिलाकर, अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों ने सेबी के साथ करीब 1.5 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि देकर नियामकीय विवाद से जुड़े इस मामले को समाप्त किया है। इस कार्यवाही में संबंधित पक्षों के कुछ लेनदेन के खुलासे और पीयर रिव्यू प्रमाणपत्र से जुड़े ऑडिट अनुपालन जैसे मुद्दे शामिल थे। यह मामला 2023 में हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी समूह से संबंधित व्यापक नियामकीय जांच के संदर्भ में सामने आया था।




