देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच अब दूध की कीमतों में भी एक और बढ़ोतरी देखने को मिली है। वेरका द्वारा दूध के दाम बढ़ाने के बाद अब मदर डेयरी ने भी अपने विभिन्न दूध उत्पादों की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि करने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार नई दरें 30 अप्रैल से प्रभावी हो गई हैं और इन्हें उन सभी बाजारों में लागू किया जाएगा जहां मदर डेयरी अपने दूध और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति करती है।
दूध की कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जब गर्मी के मौसम में उत्पादन लागत, पशुओं के चारे का खर्च, परिवहन व्यय और अन्य परिचालन लागत में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कंपनी का कहना है कि लागत में लगातार वृद्धि के कारण कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। नई कीमतों का असर रोजमर्रा के उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल, रेस्तरां, चाय विक्रेताओं और अन्य व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं पर भी पड़ सकता है।
फुल क्रीम और टोंड दूध की नई कीमतें लागू
मदर डेयरी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार फुल क्रीम दूध की कीमत 67 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 69 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं टोंड दूध अब 54 रुपये प्रति लीटर के बजाय 56 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध होगा।
कंपनी ने बताया कि यह वृद्धि सीमित स्तर पर की गई है ताकि लागत में आए बदलाव का कुछ हिस्सा ही उपभोक्ताओं पर डाला जाए। नई कीमतें कंपनी के अधिकृत बूथों, रिटेल स्टोर्स, डेयरी आउटलेट्स और अन्य बिक्री केंद्रों पर लागू हो चुकी हैं।
किन क्षेत्रों में लागू होंगी नई दरें?
मदर डेयरी ने स्पष्ट किया है कि संशोधित कीमतें उन सभी क्षेत्रों में प्रभावी रहेंगी जहां कंपनी नियमित रूप से दूध की आपूर्ति करती है। विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर कंपनी का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है, जहां प्रतिदिन लाखों परिवार मदर डेयरी के दूध का उपयोग करते हैं।
इसके अलावा कंपनी के उत्पाद विभिन्न शहरों में अधिकृत वितरकों, सुपरमार्केट, किराना स्टोर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाते हैं। जहां-जहां मदर डेयरी की आपूर्ति होती है, वहां नई कीमतों के अनुसार ही दूध की बिक्री की जाएगी।
दिल्ली-एनसीआर में रोजाना होती है बड़ी मात्रा में बिक्री
मदर डेयरी देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों में से एक है। कंपनी के अनुसार केवल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ही प्रतिदिन लगभग 35 लाख लीटर दूध की बिक्री होती है। यह दूध कंपनी के अपने बूथों, रिटेल दुकानों, आधुनिक सुपरमार्केट और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार अपनी दैनिक जरूरतों के लिए मदर डेयरी के दूध पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कीमतों में किया गया यह बदलाव सीधे तौर पर लाखों उपभोक्ताओं के मासिक घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है।
कंपनी ने बढ़ती लागत को बताया मुख्य कारण
मदर डेयरी का कहना है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान दूध उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के अनुसार औसतन 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की अतिरिक्त लागत का दबाव महसूस किया गया है।
कंपनी ने बताया कि दूध संग्रहण, कोल्ड चेन प्रबंधन, परिवहन, ऊर्जा खर्च और पशुपालकों को दिए जाने वाले भुगतान सहित कई क्षेत्रों में लागत बढ़ी है। इसी वजह से कीमतों में संशोधन का निर्णय लिया गया।
गर्मी के मौसम का भी पड़ा असर
कंपनी के अनुसार गर्मियों के दौरान दूध उत्पादन पर मौसम का सीधा प्रभाव पड़ता है। अधिक तापमान के कारण पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है, वहीं उनके रखरखाव और पोषण पर होने वाला खर्च भी बढ़ जाता है।
इसके अलावा भीषण गर्मी के दौरान दूध को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेशन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। इन सभी कारणों से उत्पादन और वितरण लागत में वृद्धि देखी गई है।
वेरका के बाद दूसरी बड़ी डेयरी कंपनी ने भी बढ़ाए दाम, उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा असर
वेरका ने भी हाल ही में बढ़ाई थीं कीमतें
मदर डेयरी से पहले वेरका ने भी अपने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। कंपनी द्वारा नई दरें लागू किए जाने के बाद विभिन्न श्रेणी के दूध उत्पाद पहले की तुलना में महंगे हो गए हैं।
वेरका की ओर से कीमतों में वृद्धि के बाद अब मदर डेयरी ने भी समान स्तर पर मूल्य संशोधन किया है। इससे संकेत मिलता है कि डेयरी उद्योग पर बढ़ती लागत का असर कई प्रमुख कंपनियों पर दिखाई दे रहा है।
सभी प्रकार के दूध उत्पादों पर पड़ सकता है प्रभाव
दूध की कीमतों में वृद्धि का असर केवल एक या दो श्रेणियों तक सीमित नहीं रह सकता। विभिन्न डेयरी कंपनियां समय-समय पर अपने उत्पादों की लागत की समीक्षा करती हैं और उसी आधार पर मूल्य तय करती हैं।
यदि उत्पादन और आपूर्ति लागत में बढ़ोतरी का दबाव बना रहता है तो भविष्य में अन्य दूध श्रेणियों या डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि प्रत्येक कंपनी अपने व्यावसायिक निर्णय और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार मूल्य निर्धारण करती है।
घरेलू बजट पर बढ़ेगा अतिरिक्त खर्च
दूध अधिकांश परिवारों की दैनिक आवश्यकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उपयोग चाय, कॉफी, बच्चों के पोषण, दही, पनीर, मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में नियमित रूप से किया जाता है। ऐसे में प्रति लीटर 2 रुपये की वृद्धि लंबे समय में मासिक खर्च को प्रभावित कर सकती है।
विशेष रूप से बड़े परिवारों, होटल व्यवसाय, कैफे, रेस्तरां और डेयरी उत्पादों का उपयोग करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए यह बढ़ोतरी परिचालन लागत में अतिरिक्त इजाफा कर सकती है।
डेयरी उद्योग में लागत बढ़ने के प्रमुख कारण
डेयरी क्षेत्र में लागत कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती है। इनमें पशुओं के चारे की कीमत, ईंधन खर्च, बिजली की लागत, दूध संग्रहण केंद्रों का संचालन, परिवहन व्यवस्था और कोल्ड चेन सिस्टम प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा असर अंतिम उत्पाद की कीमत पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों के दौरान दूध उत्पादन बनाए रखने के लिए पशुपालकों को अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है। कंपनियां किसानों से दूध खरीदने के लिए भी समय-समय पर खरीद मूल्य में संशोधन करती हैं, जिसका प्रभाव बाजार मूल्य पर दिखाई देता है।
कहां से खरीद सकते हैं मदर डेयरी का दूध?
मदर डेयरी के दूध और अन्य डेयरी उत्पाद देश के कई प्रमुख शहरों में उपलब्ध हैं। उपभोक्ता इन्हें कंपनी के अधिकृत बूथों, डेयरी स्टोर्स, किराना दुकानों, सुपरमार्केट और विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीद सकते हैं।
नई कीमतें सभी अधिकृत बिक्री केंद्रों पर लागू कर दी गई हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि खरीदारी करते समय पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की जांच अवश्य करें और केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उत्पाद खरीदें।
बाजार में दूध की मांग बनी हुई है मजबूत
दूध भारतीय परिवारों की दैनिक खपत का एक प्रमुख खाद्य उत्पाद है और इसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। गर्मियों के मौसम में भी दूध और उससे बनने वाले उत्पादों की खपत में कोई बड़ी कमी नहीं आती। इसी कारण डेयरी कंपनियां उत्पादन, आपूर्ति और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लगातार निवेश करती हैं।
मदर डेयरी और वेरका जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा कीमतों में किया गया यह संशोधन बढ़ती लागत और बाजार की परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में दूध की कीमतों और डेयरी उद्योग से जुड़े अन्य फैसलों पर उपभोक्ताओं की नजर बनी रहेगी।



