बैंकॉक में बारिश बनी आफत, सड़कें बनीं नदियां; 50 जिलों में इमरजेंसी, PM ने बीच में छोड़ा लंदन दौरा

बैंकॉक में बारिश बनी आफत, सड़कें बनीं नदियां; 50 जिलों में इमरजेंसी, PM ने बीच में छोड़ा लंदन दौरा

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक इस समय भारी बारिश और बाढ़ की दोहरी मार झेल रही है। लगातार हुई बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव इतना बढ़ गया है कि सड़कें पानी में डूब गई हैं। कई जगह कारें आधी से ज्यादा पानी में फंस गईं, जबकि बसों के भीतर तक पानी पहुंच गया। कुछ इलाकों में हालात ऐसे हैं कि लोगों को घुटनों से लेकर कमर तक पानी के बीच रास्ता तय करना पड़ रहा है।

बाढ़ के बीच शहर में सांप दिखाई देने की घटनाओं ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें जलभराव वाले इलाकों में सांप तैरते या सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए बैंकॉक के सभी 50 जिलों में आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी है।

मौसम विभाग ने भी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। आने वाले दिनों में कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। ऐसे में प्रशासन को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो पहले से जलमग्न इलाकों में परेशानी और बढ़ सकती है।

प्रधानमंत्री ने लंदन का दौरा बीच में छोड़ा

बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुटिन चार्नविराकुल ने अपना लंदन दौरा बीच में ही समाप्त करने का फैसला किया। वह स्थिति की समीक्षा करने के लिए वापस देश लौट आए हैं।

प्रधानमंत्री के अचानक लौटने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब राजधानी में बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठाए जा रहे हैं। बैंकॉक प्रशासन प्रभावित इलाकों से पानी निकालने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है।

सरकार की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। जिन इलाकों में पानी ज्यादा भर गया है, वहां अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने को कहा गया है।

233 राहत शिविरों में पहुंचाए गए लोग

बैंकॉक में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए बड़ी संख्या में अस्थायी राहत केंद्र तैयार किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, शहर में 233 अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं। इन केंद्रों में अब तक करीब 4,200 लोग शरण ले चुके हैं।

राहत शिविरों का इस्तेमाल उन लोगों को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है, जिनके घरों या आसपास के इलाकों में पानी भर गया है। प्रशासन प्रभावित आबादी की जरूरतों को देखते हुए राहत व्यवस्था को बढ़ाने की तैयारी में भी है।

बाढ़ के कारण कुछ क्षेत्रों में रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के लिए भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दुकानों में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता कम होने की खबरें हैं। हालात को देखते हुए लोग खाने-पीने और दूसरी आवश्यक चीजों की खरीदारी के लिए दुकानों पर पहुंच रहे हैं।

पूर्वी बैंकॉक में सबसे ज्यादा परेशानी

राजधानी के पूर्वी हिस्से के कई इलाकों में जलभराव ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। तस्वीरों और वीडियो में लोग पानी के बीच चलते दिखाई दे रहे हैं। कहीं पानी घुटनों तक पहुंचा हुआ है तो कुछ स्थानों पर लोगों को कमर तक पानी में आगे बढ़ना पड़ रहा है।

जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। कई मोटरसाइकिलें पानी में बंद होने के बाद लोग उन्हें हाथ से धक्का देकर निकालते दिखाई दिए। कारों के पहिए और निचला हिस्सा पानी में डूबा नजर आया।

कई सार्वजनिक परिवहन वाहनों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है। कुछ बसों के अंदर पानी भर गया, जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई। प्रशासन ने जलभराव वाली सड़कों पर विशेष सावधानी बरतने को कहा है।

स्कूलों को भी स्थिति के अनुसार बंद रखने का निर्णय लिया गया है। सोमवार को स्कूल बंद रखने की व्यवस्था की गई, ताकि बच्चों और कर्मचारियों को जलभराव वाले रास्तों से होकर यात्रा न करनी पड़े।

बाढ़ के पानी में सांपों ने बढ़ाई चिंता

शहर के कुछ बाढ़ प्रभावित इलाकों में सांप दिखाई देने की घटनाएं भी सामने आई हैं। पानी भरने के बाद जमीन पर रहने वाले जीवों के सुरक्षित स्थानों की तलाश में दूसरी जगहों की ओर जाने की संभावना रहती है। इसी वजह से जलमग्न क्षेत्रों में लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

सड़कों और पानी से भरे इलाकों में सांपों के दिखाई देने वाले वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है। प्रशासन लोगों को ऐसे स्थानों से दूर रहने की सलाह दे रहा है जहां पानी अधिक गहरा है या जहां मलबा और अन्य चीजें पानी के भीतर मौजूद हो सकती हैं।

सिर्फ बैंकॉक ही नहीं, 21 प्रांत प्रभावित

बाढ़ का असर राजधानी तक सीमित नहीं है। थाईलैंड के आपदा रोकथाम और राहत विभाग के अनुसार, शनिवार तक देश के 21 प्रांतों में बाढ़ जैसी स्थिति सामने आई थी।

मौसम विभाग ने देश के अधिकांश हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। लगातार बारिश के कारण पहले से प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

हालांकि, कुछ इलाकों में बारिश की तीव्रता कम होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने पानी निकालने का काम तेज किया है। पंपों और ड्रेनेज सिस्टम के जरिए जमा पानी को हटाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर आने वाले समय में बारिश में कमी आती है तो जलस्तर धीरे-धीरे नीचे जा सकता है।

फिलहाल मौसम की स्थिति प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। लगातार बारिश होने पर जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और नए इलाकों में भी पानी जमा होने की संभावना है।

सितंबर में औसत से करीब दोगुनी बारिश

बैंकॉक में इस बार सितंबर के दौरान हुई बारिश ने भी हालात को गंभीर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। राजधानी के ड्रेनेज और सीवरेज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, महीने के शुरुआती 25 दिनों में ही सामान्य औसत से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

आंकड़ों के अनुसार, 1 से 25 सितंबर के बीच बैंकॉक में कुल 487 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं, 1991 से 2020 के बीच इसी अवधि में बारिश का औसत लगभग 269 मिलीमीटर रहा था।

इस तुलना से पता चलता है कि इस बार सितंबर के शुरुआती हिस्से में राजधानी में बारिश सामान्य स्तर से काफी अधिक रही। जब कम समय में बड़ी मात्रा में बारिश होती है तो शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। बैंकॉक जैसे घनी आबादी वाले महानगर में इसका असर सड़क यातायात, सार्वजनिक परिवहन और सामान्य जनजीवन पर तेजी से दिखाई देता है।

सितंबर बैंकॉक में बारिश के मौसम का सबसे सक्रिय दौर माना जाता है। इसलिए इस महीने बारिश होना असामान्य नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक इस बार जलभराव और लगातार बारिश की स्थिति ने सामान्य परिस्थितियों की तुलना में ज्यादा परेशानी पैदा की है।

कई दिनों की लगातार बारिश से बिगड़े हालात

बैंकॉक के एक 63 वर्षीय निवासी अनुटिन मीचामनान ने बताया कि उन्होंने शहर में कई वर्षों के दौरान बारिश के मौसम देखे हैं, लेकिन इस बार की स्थिति उनके लिए अलग रही। उनके मुताबिक, कई दिनों तक लगातार बारिश होने से पानी जमा होता गया और हालात बिगड़ते चले गए।

लगातार बारिश का असर केवल सड़कों पर ही नहीं पड़ा, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। वाहन चलाने, पैदल आने-जाने और बाजारों तक पहुंचने में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

बैंकॉक की मौजूदा स्थिति में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ पहले से जमा पानी को निकालना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के कारण नए जलभराव का खतरा बना हुआ है।

प्रशासन की नजर मौसम पर

अधिकारियों का ध्यान अब बारिश के अगले दौर पर है। यदि बारिश रुकती या कम होती है तो जलनिकासी के जरिए प्रभावित इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है। लेकिन लगातार तेज बारिश होने पर राहत और बचाव अभियान के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

फिलहाल शहर के सभी 50 जिलों में आपातकालीन व्यवस्था लागू है। राहत शिविरों में लोगों को सुरक्षित रखने, जलभराव वाले क्षेत्रों में आवाजाही नियंत्रित करने और पानी निकालने का काम जारी है।

प्रधानमंत्री के देश लौटने के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा और राहत कार्यों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। बैंकॉक में रहने वाले लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा रही है।

बारिश कम होने पर शहर में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौट सकती है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी के चलते फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में खतरा पूरी तरह टला नहीं है।