एशियन गेम्स के 12वें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने कई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक की उम्मीदों को मजबूत किया है। सबसे बड़ी सफलता तीरंदाजी से आई, जहां भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने चीन को 238-234 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनिपार्थी और पृथिका प्रदीप की तिकड़ी ने फाइनल में बेहद सटीक निशाने लगाए और पूरे मुकाबले में दबाव के बावजूद बढ़त बनाए रखी। भारत ने इस जीत के साथ एशियन गेम्स में महिला कंपाउंड टीम का खिताब लगातार दूसरी बार अपने नाम किया। 238 अंक का स्कोर बनाकर भारतीय टीम ने उस विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली, जो दक्षिण कोरिया ने 2014 में बनाया था। तीरंदाजी में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस पूरे एशियाड में लगातार चर्चा में रहा है और बुधवार को भी उन्होंने अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखी।
महिला कंपाउंड टीम की जीत में ज्योति सुरेखा वेन्नम और पृथिका प्रदीप की सटीकता खास तौर पर देखने को मिली। फाइनल के महत्वपूर्ण चरणों में भारतीय तीरंदाजों ने लगातार परफेक्ट 10 के निशाने लगाए और चीन को वापसी का मौका नहीं दिया। मुकाबले के अंतिम हिस्से में भारत ने अपनी बढ़त को कायम रखा और 238-234 के अंतर से मुकाबला जीत लिया। इस जीत का एक और महत्व इसलिए है क्योंकि महिला कंपाउंड टीम इवेंट में भारत ने पिछले एशियन गेम्स की सफलता को दोहराया है। ज्योति सुरेखा एक बार फिर उस टीम का हिस्सा हैं जिसने भारत को इस स्पर्धा में स्वर्ण दिलाया। 2014 में एशियन गेम्स में कंपाउंड तीरंदाजी को शामिल किए जाने के बाद से भारतीय महिला टीम इस स्पर्धा में लगातार पदक जीतती रही है।
दिन के दूसरे बड़े तीरंदाजी मुकाबले में भारत की मिक्स्ड टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव की जोड़ी ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को बेहद करीबी मुकाबले में पीछे छोड़ा। थाईलैंड की जोड़ी ने आखिरी एंड में दोनों तीरों से 10-10 अंक हासिल कर कुल स्कोर को 155 तक पहुंचाया, जिससे भारतीय टीम पर दबाव बढ़ गया। भारत को जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने अंतिम दो निशानों में 20 अंक हासिल करने की जरूरत थी। चिकिता तनिपार्थी ने 10 अंक का निशाना लगाया और इसके बाद साहिल जाधव ने भी परफेक्ट 10 हासिल किया। इस तरह भारत ने मुकाबला अपने नाम कर फाइनल में जगह बनाई। शूट-ऑफ और निर्णायक निशानों में भारतीय खिलाड़ियों ने जिस तरह संयम दिखाया, वह उनके प्रदर्शन की मजबूती को दर्शाता है।
चिकिता तनिपार्थी के लिए यह एशियन गेम्स खास तौर पर महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। महिला टीम के गोल्ड के बाद मिक्स्ड टीम में भी स्वर्ण की दौड़ में पहुंचकर उन्होंने अपनी पदक संभावनाओं को मजबूत किया। तेलंगाना के किसान परिवार से आने वाली चिकिता ने कम उम्र में तीरंदाजी शुरू की थी। उनके पिता ने उन्हें इस खेल के लिए प्रेरित किया और उन्होंने धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 2025 में वर्ल्ड आर्चरी यूथ चैंपियनशिप में अंडर-21 महिला व्यक्तिगत वर्ग का गोल्ड जीतना उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। दूसरी ओर साहिल जाधव ने भी निर्णायक मुकाबलों में सटीक निशाने लगाकर टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ज्योति सुरेखा वेन्नम का नाम भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी में लंबे समय से प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल है। आंध्र प्रदेश के चल्लापल्ली में जन्मी ज्योति ने शुरुआती दौर में तैराकी भी की थी, लेकिन बाद में तीरंदाजी को अपना करियर बनाया। 2023 के एशियन गेम्स में उन्होंने तीन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। अब 2026 एशियन गेम्स में भी उनकी मौजूदगी भारतीय टीम के लिए अहम साबित हुई है। पृथिका प्रदीप अभी युवा हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने तेजी से अपनी जगह बनाई है। तमिलनाडु के नागरकोइल में जन्मीं पृथिका की परवरिश महाराष्ट्र में हुई और उन्होंने स्कूल के दिनों में तीरंदाजी शुरू की थी। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के बाद अब उन्होंने सीनियर स्तर पर भी अपनी क्षमता दिखाई है।
तीरंदाजी के अलावा शूटिंग में भी भारत की नजर एक और गोल्ड पर है। नीरू ढांडा और किनान चेनाई की भारतीय जोड़ी ने ट्रैप मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल में जगह बनाई। क्वालिफिकेशन में भारतीय जोड़ी ने 136 का स्कोर किया और शीर्ष चार टीमों में रहते हुए फाइनल का टिकट हासिल किया। चीन, कतर और ईरान की टीमें क्वालिफिकेशन में भारत से आगे रहीं, लेकिन भारतीय जोड़ी ने अंतिम चरण के लिए अपनी जगह सुरक्षित कर ली। नीरू ढांडा पहले ही महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं, इसलिए मिक्स्ड टीम में उनके प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। ट्रैप मिक्स्ड टीम का फाइनल भी भारत के लिए पदक बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मौका है।
कुश्ती में भी भारतीय पहलवानों ने अलग-अलग मुकाबलों में अपनी दावेदारी पेश की। पुरुषों के ग्रीको-रोमन 87 किलोग्राम वर्ग में सुनील कुमार ने शुरुआती मुकाबले में ताजिकिस्तान के मुहम्मद सुल्तोनजोडा को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। हालांकि सेमीफाइनल में उन्हें जापान के ताइजो योशिदा के खिलाफ 0-11 से हार का सामना करना पड़ा। जापानी पहलवान ने तकनीकी श्रेष्ठता से मुकाबला अपने नाम किया। सुनील के लिए प्रतियोगिता यहीं खत्म नहीं हुई और अब उनके पास ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले के जरिए पदक हासिल करने का अवसर है। पिछले एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन को देखते हुए भारत को उनसे पदक की उम्मीद बनी हुई है।
महिला 68 किलोग्राम वर्ग में निशा का मुकाबला भी काफी रोमांचक रहा। उत्तर कोरिया की पाक सोल गुम के खिलाफ मुकाबला निर्धारित समय के बाद 4-4 की बराबरी पर समाप्त हुआ, जिसके बाद क्राइटेरिया के आधार पर फैसला हुआ। दोनों पहलवानों ने चार-चार अंक बनाए थे, लेकिन पाक ने एक ही एक्शन में चार अंक हासिल किए थे, जबकि निशा के अंक दो अलग-अलग मौकों से आए। इसी आधार पर टाईब्रेकर में उत्तर कोरियाई पहलवान को विजेता घोषित किया गया। इस मुकाबले में भारतीय पहलवान को मामूली अंतर से हार मिली।
जूडो में अस्मिता डे ने अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ की। महिला 48 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने वियतनाम की हा न्गोक ची को इप्पोन के जरिए हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। मुकाबले के शुरुआती हिस्से में दोनों खिलाड़ियों को शिदो यानी पेनल्टी मिली, लेकिन इसके बाद अस्मिता ने आक्रामक अंदाज अपनाया। मुकाबला खत्म होने से करीब 38 सेकंड पहले उन्होंने प्रतिद्वंद्वी के दोनों कंधों को मैट पर टिकाकर इप्पोन हासिल किया। हालांकि क्वार्टर फाइनल में उन्हें कजाखस्तान की अबीबा अबू जाकिनोवा से हार मिली। अबीबा पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 और वर्ल्ड चैंपियनशिप की पदक विजेता रही हैं। अस्मिता के पास रेपेचाज के जरिए प्रतियोगिता में वापसी और ब्रॉन्ज मेडल की दौड़ में बने रहने का मौका है।
स्क्वॉश में भारतीय महिला टीम ने भी पदक पक्का कर लिया। क्वार्टर फाइनल में भारत ने सिंगापुर को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। तंवी खन्ना ने वाई इयून ऑ येओंग को 3-1 से हराया। उन्होंने 11-6, 5-11, 15-13 और 11-1 से मुकाबला जीता। दूसरे गेम में पिछड़ने के बाद तंवी ने वापसी करते हुए मैच पर नियंत्रण हासिल किया। इसके बाद अनाहत सिंह ने वाई य्हान ऑ येओंग को सीधे गेमों में 3-0 से हराया। अनाहत ने 11-7, 11-3 और 11-4 से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारतीय महिला स्क्वॉश टीम ने कम से कम एक पदक सुनिश्चित कर लिया है।
भारत के लिए एशियन गेम्स का यह चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विभिन्न खेलों में पदक की संख्या लगातार बढ़ रही है। 30 सितंबर के मुकाबलों में तीरंदाजी, शूटिंग, कुश्ती, स्क्वॉश और हॉकी समेत कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के सामने पदक जीतने के मौके हैं। दिन की शुरुआत ही कंपाउंड तीरंदाजी के मुकाबलों से हुई और महिला टीम के गोल्ड ने भारतीय अभियान को नई मजबूती दी। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को मिक्स्ड कंपाउंड टीम, पुरुष कंपाउंड टीम, शूटिंग के ट्रैप मिक्स्ड टीम और कई अन्य स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ी पदक की दौड़ में हैं।
महिला कंपाउंड टीम का गोल्ड भारत के लिए दिन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। चीन के खिलाफ 238-234 की जीत ने न सिर्फ खिताब बरकरार रखा, बल्कि भारतीय तीरंदाजी की निरंतरता को भी सामने रखा। इसके बाद मिक्स्ड टीम में चिकिता और साहिल की जोड़ी की सफलता ने भारत की उम्मीदें और बढ़ा दीं। शूटिंग में नीरू ढांडा और किनान चेनाई की फाइनल में एंट्री, स्क्वॉश में महिला टीम का पदक पक्का होना और कुश्ती-जूडो में रेपेचाज के जरिए पदक की संभावनाएं यह बताती हैं कि एशियन गेम्स के इस चरण में भारतीय दल के पास कई मोर्चों पर आगे बढ़ने के अवसर हैं। भारत के लिए अब नजर उन मुकाबलों पर है जहां इन खिलाड़ियों की मेहनत को पदक में बदलने का मौका मिलेगा।




