SIR के बाद वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए EC का विशेष अभियान, 20 राज्यों में छूटे मतदाताओं की होगी पहचान

SIR के बाद वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए EC का विशेष अभियान, 20 राज्यों में छूटे मतदाताओं की होगी पहचान

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान अगर किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो उसे दोबारा सूची में जोड़ने के लिए चुनाव आयोग विशेष अभियान चलाएगा। आयोग ने SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं की पहचान कर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान का फायदा उन लोगों को भी मिलेगा जो हाल ही में 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके हैं और पहली बार मतदाता बनने के योग्य हुए हैं। आयोग के मुताबिक ऐसे नागरिक सामान्य प्रक्रिया के तहत Form 6 भरकर मतदाता सूची में नाम शामिल करा सकेंगे।

घर-घर जाकर छूटे मतदाताओं की जानकारी जुटाई जाएगी

आयोग की योजना केवल ऑनलाइन आवेदन तक सीमित नहीं रहेगी। जिन लोगों के नाम SIR के दौरान छूट गए हैं, उन्हें चिन्हित करने के लिए राज्यों के CEO, जिला निर्वाचन अधिकारी और ERO स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO संबंधित मतदाता के घर जाकर जानकारी और जरूरी दस्तावेज जुटा सकेंगे। इसके बाद आवेदन को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR पूरा हो जाने के बाद भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी। यानी किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट जाने के कारण उसका मतदाता बनने का अधिकार खत्म नहीं होगा।

20 राज्यों में SIR पूरा, बाकी राज्यों में प्रक्रिया जारी

चुनाव आयोग के अनुसार अब तक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है। इनमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। दूसरी ओर कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरे चरण के तहत पुनरीक्षण की प्रक्रिया अभी चल रही है। आयोग ने कहा है कि बाकी क्षेत्रों में अंतिम मतदाता संख्या संबंधित चरण की अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए अभी देशभर में हटाए गए या जोड़े गए मतदाताओं की अंतिम संख्या को अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में शामिल नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय भी बनी रही है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से बाहर होना नहीं है। संबंधित व्यक्ति को दावे और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम शामिल कराने का अवसर मिलता है।

महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर

महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है और यहां ड्राफ्ट मतदाता सूची में पिछले रिकॉर्ड की तुलना में करीब 2.07 करोड़ नाम शामिल नहीं थे। यह आंकड़ा अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इन मामलों में दावे, आपत्तियां और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया जारी है।

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट सूची में बड़ी संख्या में ऐसे रिकॉर्ड भी सामने आए हैं जिनमें मतदाता की ओर से दर्ज रिश्तेदारों की जानकारी पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। करीब 62.48 लाख रिकॉर्ड रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारी में विसंगति वाले पाए गए, जबकि करीब 59.75 लाख मतदाताओं का पुराने रिकॉर्ड में किसी रिश्तेदार से मिलान नहीं हो सका। इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर लगभग 1.22 करोड़ रिकॉर्ड आगे की जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 1.22 करोड़ लोगों को स्वतः अपात्र नहीं माना गया है। प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच और प्रक्रिया के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

महाराष्ट्र में नाम हटाने से पहले पूरी जांच जरूरी

महाराष्ट्र में चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी पात्र मतदाता का नाम जल्दबाजी में मतदाता सूची से बाहर न किया जाए। विशेष रूप से मुंबई शहर और मुंबई उपनगर में अधिकारियों को कहा गया है कि किसी रिकॉर्ड पर अंतिम फैसला लेने से पहले संबंधित मतदाता को पर्याप्त अवसर दिया जाए। उसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने और अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया जाएगा।

आयोग ने यह भी कहा है कि पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए और उसके मतदान के अधिकार में अनावश्यक बाधा नहीं आनी चाहिए। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख अब 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है, जबकि इन मामलों के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक की गई है।

नोटिस मिलने पर दफ्तर जाने की जरूरत कम होगी

SIR में जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड को ‘अनमैप्ड’ या किसी तरह की ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के कारण जांच के लिए चिन्हित किया गया है, उनके लिए प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। ऐसे लोगों को हर मामले में व्यक्तिगत रूप से ERO के सामने उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी।

BLO जरूरत पड़ने पर मतदाता के घर जाकर दस्तावेज इकट्ठा करेंगे। इसके बाद इन दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड कर ERO के पास जांच के लिए भेजा जाएगा। ERO उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के आधार पर फैसला करेंगे। अगर दस्तावेजों से स्थिति स्पष्ट नहीं होती है, तो संबंधित व्यक्ति को अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने का एक और अवसर दिया जा सकता है। अंतिम रूप से नाम हटाने का निर्णय आवश्यक जांच और सुनवाई के बाद ही किया जाएगा।

अक्टूबर में महाराष्ट्र के कई इलाकों में विशेष कैंप

महाराष्ट्र में नोटिस पाने वाले लोगों की मदद के लिए विशेष कैंप भी आयोजित किए जाएंगे। मुंबई से संबंधित चुनाव अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने और उन्हें दस्तावेज जमा करने की सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जिन्हें सुनवाई की प्रक्रिया के लिए बार-बार चुनाव कार्यालय जाने में परेशानी हो सकती है।

आयोग की कोशिश है कि BLO स्तर पर ही अधिक से अधिक दस्तावेज एकत्र कर लिए जाएं और उन्हें डिजिटल माध्यम से संबंधित अधिकारी तक पहुंचाया जाए। इससे एक तरफ मतदाताओं की परेशानी कम होगी, वहीं दूसरी ओर ERO को किसी नाम पर अंतिम निर्णय लेने से पहले पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा।

Form 6 में SIR वाला अतिरिक्त हिस्सा हटाया गया

SIR से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव Form 6 को लेकर हुआ है। जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां Form 6 से SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। अब नए मतदाताओं को सामान्य वैधानिक Form 6 के जरिए ही मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा।

पहले Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी जा रही थी। इसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड में नाम होने से संबंधित जानकारी मांगी जाती थी। इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आई थीं। बाद में SIR पूरा हो चुके राज्यों में इस अतिरिक्त घोषणा को हटाने का फैसला किया गया।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट भी सामने आई

SIR के बीच चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटा तक पहुंच और डिजिटल सिस्टम से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि SIR समेत आयोग के फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद यह भी स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे। इसलिए आंतरिक मतभेद से संबंधित रिपोर्टों और आयोग की आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।

ECINet सिस्टम की भी होगी समीक्षा

चुनाव आयोग ने ECINet सिस्टम की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया है। इसमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारी के साथ IIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किए जाने की बात कही गई है। जरूरत के अनुसार सॉफ्टवेयर और संबंधित तकनीकी व्यवस्था में बदलाव किए जाएंगे।

आयोग का कहना है कि IT सिस्टम और पोर्टल में सुधार के लिए राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और दस्तावेजों की प्रक्रिया में तकनीकी स्तर पर अनावश्यक दिक्कत न आए।

छूटे मतदाताओं और नए वोटरों के लिए खुला रहेगा रास्ता

चुनाव आयोग के नए निर्देशों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि SIR पूरा हो जाने के बाद भी मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया बंद नहीं होगी। जिन पात्र लोगों का नाम पुनरीक्षण के दौरान छूट गया है, वे नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसी तरह 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवा और पहली बार मतदान करने वाले नागरिक भी सामान्य Form 6 के माध्यम से मतदाता सूची में शामिल हो सकेंगे।

गोवा में आयोग ने छूटे मतदाताओं तक पहुंचने के लिए घर-घर अभियान का उदाहरण भी दिया है। वहां 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 ने Form 6 के जरिए नाम शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने राज्यों को इसी तरह जरूरतमंद मतदाताओं तक पहुंचने और आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरी कवायद का अंतिम उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र नागरिकों को उसमें शामिल करने की प्रक्रिया को पूरा करना है। SIR के दौरान जिन रिकॉर्ड में किसी तरह की कमी, विसंगति या पुरानी सूची से मिलान न होने की समस्या सामने आई है, उनका फैसला दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। वहीं, जिन लोगों का नाम छूट गया है, उनके लिए लगातार अपडेट और विशेष अभियान के जरिए दोबारा नाम जोड़ने का रास्ता खुला रहेगा।