दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में हुई हिंसक घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले से जुड़े कई नए पहलू सामने आ रहे हैं। 30 सितंबर को उड़ान के दौरान ओमानी मूल के को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर कथित तौर पर हमला कर दिया था। इसके बाद विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगा और कुछ ही समय में करीब 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक पहुंच गया। हालात इतने गंभीर हो गए कि विमान के हाईजैक होने या दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका पैदा हो गई। घायल होने के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू किया। बाद में विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया।
नेतन्याहू का दावा- को-पायलट पर कट्टरपंथी विचारों का असर था
घटना के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने को-पायलट की विचारधारा को लेकर गंभीर दावा किया। उन्होंने कहा कि आरोपी पर इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा का प्रभाव था और उसका ब्रेनवॉश किया गया था। नेतन्याहू के मुताबिक, हमले के पीछे की पूरी वजह अभी जांच का विषय है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी की गतिविधियों और उसके कथित विचारों से मामले को सामान्य कॉकपिट विवाद मानना उचित नहीं होगा।
इजराइली अधिकारियों की ओर से यह भी दावा किया गया है कि आरोपी के सोशल मीडिया व्यवहार में यहूदी विरोधी टिप्पणियों के संकेत मिले थे। एक इजराइली अधिकारी ने बताया कि को-पायलट सोशल मीडिया पर यहूदियों की हत्या जैसी बातें करता था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। अभी आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है और जांच एजेंसियां उसके अतीत तथा संभावित मकसद की पड़ताल कर रही हैं।
पकड़े जाने के बाद कथित तौर पर बोला- मुझे मार दो
हमले के बाद आरोपी को जब यात्रियों और क्रू ने काबू किया, तब उसके कथित व्यवहार को लेकर भी जानकारी सामने आई है। नेतन्याहू ने यात्रियों से बातचीत के आधार पर कहा कि आरोपी ने पकड़े जाने के बाद कथित तौर पर ‘मुझे मार दो’ जैसी बात कही। इजराइली प्रधानमंत्री ने इसे उसके मानसिक और वैचारिक हालात से जोड़कर देखा, हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी हमले के अंतिम मकसद की पुष्टि नहीं की है।
सहकर्मी ने बताए आरोपी के अलग व्यवहार
आरोपी के साथ काम कर चुके एक पायलट ने भी उसके व्यवहार को लेकर दावा किया है। इजराइली मीडिया से बातचीत में उस सहकर्मी ने कहा कि आरोपी धार्मिक रूप से बेहद कट्टर व्यवहार करता था। उसके मुताबिक, वह महिलाओं से हाथ मिलाने से भी परहेज करता था और उसके व्यवहार को लेकर पहले से ही अलग तरह की बातें महसूस होती थीं। हालांकि सहकर्मी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है और उसके दावों की भी जांच की जा रही है।
सहकर्मी ने यह सवाल भी उठाया कि इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी वाले व्यक्ति को विमान के कॉकपिट तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली। घटना के बाद फ्लाईदुबई की भर्ती और सुरक्षा जांच प्रक्रिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
174 यात्रियों को लेकर तेल अवीव जा रहा था विमान
फ्लाईदुबई की बोइंग 737 मैक्स 8 फ्लाइट दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। विमान में 174 लोग सवार थे और ज्यादातर यात्री इजराइली थे। भारत तथा UAE के नागरिक भी इसमें मौजूद थे। उड़ान के दौरान जब कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच संघर्ष हुआ, तब यात्रियों को काफी देर तक यह समझ नहीं आया कि विमान के अंदर वास्तव में क्या हो रहा है। बाद में यात्रियों को पता चला कि कॉकपिट में गंभीर स्थिति बन चुकी है।
चाकू से हमले के बाद विमान ने अचानक खोई ऊंचाई
बताया गया कि उड़ान के करीब ढाई घंटे बाद को-पायलट और कैप्टन के बीच विवाद शुरू हुआ। स्थिति हाथापाई तक पहुंची और इसके बाद भारतीय कैप्टन पर चाकू से हमला किया गया। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे आने लगा। फ्लाइट ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, विमान लगभग एक मिनट में 33 हजार फीट की ऊंचाई से करीब 17 हजार फीट पर आ गया था। यानी हजारों फीट की ऊंचाई बहुत कम समय में कम हुई।
हमले में कैप्टन घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। यही कदम बाद में विमान को बचाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। दरवाजा खुलते ही कुछ यात्री और अन्य लोग कॉकपिट में पहुंचे और हमलावर को नियंत्रण में लिया। विमान में मौजूद दो अन्य पायलटों ने बाद में विमान की कमान संभाली और उसे सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा।
इमरजेंसी के दौरान भेजे गए 7700 और 7500 कोड
घटना के दौरान विमान से दो महत्वपूर्ण इमरजेंसी कोड भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। फ्लाइट ट्रैकिंग सेवा के मुताबिक, पहले 7700 कोड का इस्तेमाल किया गया, जो विमान में सामान्य आपात स्थिति का संकेत देता है। इसके बाद 7500 कोड भेजा गया। विमानन क्षेत्र में 7500 कोड का इस्तेमाल अवैध हस्तक्षेप या संभावित हाईजैक जैसी स्थिति की सूचना देने के लिए किया जाता है।
इन संकेतों के बाद जमीन पर मौजूद एजेंसियों को भी विमान में असामान्य स्थिति की जानकारी मिली। इसी दौरान विमान की ऊंचाई तेजी से घटने लगी थी, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई थी।
यात्रियों ने खुद कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को पकड़ा
घटना के दौरान यात्रियों ने असाधारण साहस दिखाया। कुछ लोग कॉकपिट तक पहुंचे और हमलावर को काबू करने में मदद की। यात्री असफ राजुआन ने बताया कि उस समय किसी को पूरी तरह समझ नहीं आ रहा था कि स्थिति किस दिशा में जा रही है। सभी लोग अपने परिवार और अपनी जान बचाने के लिए प्रतिक्रिया दे रहे थे। एक अन्य यात्री ने बताया कि विमान के अचानक नीचे जाने से लोगों को लगा कि अब बड़ा हादसा हो सकता है।
भारतीय कैप्टन की भूमिका को भी इस पूरी घटना में महत्वपूर्ण बताया गया है। गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिससे यात्रियों को अंदर पहुंचने का रास्ता मिला। भारत के दूतावास ने बाद में बताया कि कैप्टन मच्छर का इलाज किया जा रहा था और उनकी हालत स्थिर बताई गई थी। बाद की जानकारी में उनके स्वस्थ होने की बात सामने आई।
कॉकपिट में हथियार पहुंचने को लेकर सुरक्षा जांच
घटना के बाद एक बड़ा सवाल यह भी है कि हमले में इस्तेमाल हथियार कॉकपिट के अंदर पहुंचा कैसे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जिस वस्तु से हमला किया गया, वह विमान के आपातकालीन उपकरणों का हिस्सा थी या उसे किसी अन्य तरीके से कॉकपिट तक पहुंचाया गया था।
साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि आरोपी की सुरक्षा जांच के दौरान कोई चूक हुई थी या नहीं। फ्लाइट में ड्यूटी करने वाले पायलटों की पहचान और उनके बैकग्राउंड की जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
करीब 9 महीने पहले फ्लाईदुबई में शामिल हुआ था आरोपी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओमानी को-पायलट ने लगभग नौ महीने पहले फ्लाईदुबई में काम शुरू किया था। घटना के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ओमानी नागरिक को इजराइल जाने वाली फ्लाइट के कॉकपिट में ड्यूटी कैसे मिली, जबकि इजराइल और ओमान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
इजराइली अधिकारियों ने घटना के बाद आने वाले विमानों के पायलटों की पहचान और सुरक्षा जांच को और सख्त करने की बात कही है। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि इजराइली सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन के बीच पायलटों की जांच की जिम्मेदारी को लेकर समीक्षा की जा रही है।
UAE में होगी जांच, आतंकवादी साजिश का एंगल भी देखा जाएगा
सऊदी अरब में आपात लैंडिंग के बाद आरोपी को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उसे UAE के अधिकारियों को सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। अब UAE की एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि कॉकपिट में हुई हिंसा केवल व्यक्तिगत हमला था या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की योजना थी। मामले में आतंकवाद से जुड़े संभावित पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने घटना को जिहादी आतंकवादी हमला बताया है, जबकि UAE और अन्य एजेंसियां अभी जांच के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा है कि आरोपी के ईरान से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी ईरानी भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है।
पांच देशों की एजेंसियां जांच में जुटीं
इस घटना की जांच अब केवल विमानन सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। UAE, सऊदी अरब, इजराइल, ओमान और अमेरिका से जुड़े अधिकारी अलग-अलग पहलुओं पर जानकारी जुटा रहे हैं। जांच में आरोपी की पृष्ठभूमि, उसके संपर्क, कथित वैचारिक झुकाव, विमान में हथियार पहुंचने की स्थिति और हमले के वास्तविक मकसद को देखा जा रहा है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या को-पायलट ने अकेले यह कदम उठाया था या इसके पीछे किसी संगठन, व्यक्ति या बाहरी नेटवर्क की भूमिका थी। जब तक जांच एजेंसियां इन सवालों के जवाब नहीं देतीं, तब तक हमले को लेकर सामने आ रहे कई दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। इतना जरूर है कि कैप्टन की सूझबूझ, यात्रियों के हस्तक्षेप और दूसरे पायलटों की मदद से एक संभावित बड़े विमान हादसे को टाल दिया गया।




