भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर अटका पेंच, ग्रीर बोले- अभी समझौते की तारीख तय नहीं; गोयल के ‘लगभग पूरा’ बयान से बढ़ी उलझन

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर अटका पेंच, ग्रीर बोले- अभी समझौते की तारीख तय नहीं; गोयल के ‘लगभग पूरा’ बयान से बढ़ी उलझन

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता एक बार फिर चर्चा में है। दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत जारी रहने और कई अहम मुद्दों पर प्रगति के बावजूद अब अमेरिकी पक्ष की ओर से साफ संकेत मिला है कि डील तत्काल होने वाली नहीं है। अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा है कि दोनों देशों ने बातचीत में बचे हुए प्रमुख मुद्दों की पहचान कर ली है और अधिकारी उन पर तेजी से काम कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल किसी तत्काल समझौते की उम्मीद नहीं है। दूसरी ओर, भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कुछ दिन पहले इस बातचीत को लगभग अंतिम चरण में बताया था। इसी वजह से भारत-अमेरिका ट्रेड डील की मौजूदा स्थिति को लेकर अलग-अलग संकेत सामने आ रहे हैं।

ग्रीर का यह बयान अमेरिका के मिल्वौकी में आयोजित G20 ट्रेड मिनिस्टर्स मीटिंग के बाद आया है। यहां उनकी भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ बातचीत हुई थी। ग्रीर ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और अधिकारियों का संपर्क भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बातचीत के दौरान कुछ ऐसे मुद्दों की पहचान हो चुकी है जो समझौते को अंतिम रूप देने में रुकावट पैदा कर रहे हैं। अब दोनों सरकारें इन्हीं बिंदुओं को सुलझाने पर ध्यान दे रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इन चर्चाओं का मतलब यह नहीं है कि समझौता तुरंत घोषित कर दिया जाएगा।

ग्रीर के बयान से क्या बदला?

अमेरिकी अधिकारी का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले भारत की ओर से ट्रेड डील को लेकर काफी सकारात्मक संकेत दिए गए थे। ग्रीर के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अभी कुछ ऐसे विषय बाकी हैं जिन पर सहमति बनना जरूरी है। उन्होंने यह संकेत दिया कि बातचीत अंतिम दिशा में आगे बढ़ रही है, मगर अभी ऐसा कोई चरण नहीं आया है जहां समझौते को तुरंत घोषित किया जा सके। यानी बातचीत बंद नहीं हुई है, बल्कि बाकी बचे मुद्दों को लेकर मंथन जारी है।

यही अंतर दोनों देशों के बयानों में दिखाई दे रहा है। भारत की ओर से पिछले दिनों पीयूष गोयल ने कहा था कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि अंतिम रूप देने के लिए भारतीय निर्यातकों को उनके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में उचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलना जरूरी है। ऐसे में भारत की तरफ से बातचीत को काफी आगे बढ़ा हुआ बताया गया, जबकि अमेरिका की ओर से कहा गया कि अभी कुछ महत्वपूर्ण अड़चनें मौजूद हैं।

गोयल ने क्या कहा था?

सितंबर के अंत में पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लगभग पूरा बताते हुए कहा था कि अब मुख्य जरूरत भारतीय कारोबारियों के लिए सही प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति सुनिश्चित करने की है। उनका तर्क था कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को उन देशों के मुकाबले ऐसा टैरिफ लाभ मिलना चाहिए, जिनसे भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। उन्होंने कहा था कि जैसे ही यह मुद्दा सुलझता है, समझौते को तेजी से लागू किया जा सकता है।

गोयल इससे पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत केवल समझौता करने के लिए किसी भी शर्त को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। भारत की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि समझौते से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में व्यावहारिक फायदा मिले। खासतौर पर उन देशों के संदर्भ में यह मुद्दा महत्वपूर्ण है जिनके साथ अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धा करती हैं। इसीलिए टैरिफ और बाजार पहुंच से जुड़े प्रावधान बातचीत के अहम हिस्से बने हुए हैं।

फरवरी में तय हो चुका था शुरुआती फ्रेमवर्क

भारत और अमेरिका ने इस साल फरवरी में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक ट्रेड फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। उस समय दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने और व्यापक समझौते की दिशा में काम करने की उम्मीद मजबूत हुई थी। लेकिन बाद में अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था और वैश्विक व्यापार परिस्थितियों में हुए बदलावों के कारण बातचीत के कुछ हिस्सों पर दोबारा चर्चा करनी पड़ी।

टैरिफ ढांचे में बदलाव ने बातचीत को पहले से ज्यादा जटिल बना दिया है। अमेरिका की ओर से अलग-अलग देशों के लिए शुल्क व्यवस्था और व्यापार संबंधी नीतियों में बदलाव किए गए हैं, जबकि भारत अपने निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धी शर्तें हासिल करना चाहता है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच केवल एक व्यापक राजनीतिक सहमति काफी नहीं है। अंतिम समझौते में टैरिफ, बाजार पहुंच और दूसरे व्यापारिक प्रावधानों पर ठोस सहमति जरूरी होगी।

G20 बैठक में आमने-सामने हुई बातचीत

मिल्वौकी में हुई G20 ट्रेड मिनिस्टर्स मीटिंग भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के दौरे पर हैं और इस दौरान उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत की। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, उनके दौरे का उद्देश्य व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाना है।

ग्रीर ने गोयल के साथ अपनी बातचीत को सकारात्मक बताया है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का चैनल खुला हुआ है और वार्ता में रुकावट के बावजूद संवाद जारी है। हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने यह भी साफ किया है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए अभी बचे हुए मुद्दों को सुलझाना होगा।

भारत के लिए टैरिफ लाभ क्यों अहम?

भारत की बातचीत में टैरिफ प्रतिस्पर्धा एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। गोयल ने सितंबर में कहा था कि अमेरिकी बाजार में भारत को ऐसा शुल्क ढांचा चाहिए जिससे उसके उत्पाद प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले नुकसान में न रहें। उनके मुताबिक, अगर दूसरे देशों को भारतीय उत्पादों की तुलना में बेहतर शुल्क व्यवस्था मिलती है तो भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

इसका असर कई भारतीय निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए वहां शुल्क की दरों में अंतर कारोबार की लागत और प्रतिस्पर्धा दोनों को प्रभावित कर सकता है। भारत की कोशिश इसी वजह से ऐसी व्यवस्था हासिल करने की है जिसमें भारतीय निर्यातकों को दूसरे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में बेहतर या कम से कम प्रतिस्पर्धी स्थिति मिले।

भारत तेजी से बढ़ा रहा FTA नेटवर्क

अमेरिका के साथ बातचीत के समानांतर भारत कई दूसरे देशों और समूहों के साथ भी व्यापार समझौतों पर काम कर रहा है। पीयूष गोयल के मुताबिक, भारत ने पिछले वर्षों में नौ FTA को अंतिम रूप दिया है और इन समझौतों के जरिए करीब 60 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त GDP वाले बाजारों तक प्राथमिकता वाली पहुंच मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य आगे चलकर अपने व्यापार समझौतों के नेटवर्क के जरिए वैश्विक व्यापार के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से वाले बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाना है।

भारत कनाडा, मैक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिणी अफ्रीकी कस्टम्स यूनियन, खाड़ी सहयोग परिषद और इजरायल समेत कई अन्य देशों और समूहों के साथ भी व्यापारिक समझौतों पर काम कर रहा है। इसके अलावा कुछ पुराने व्यापार समझौतों की समीक्षा और बाजार पहुंच को बेहतर बनाने के विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है।

ट्रेड डील पर अब आगे क्या?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता रुकी नहीं है। दोनों पक्षों के अधिकारी बातचीत कर रहे हैं और बचे हुए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश जारी है। लेकिन जेमिसन ग्रीर के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि बातचीत को अंतिम समझौते में बदलने के लिए अभी कुछ चरण बाकी हैं। दूसरी ओर, पीयूष गोयल के पहले के बयान बताते हैं कि भारत की नजर भी जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर है, बशर्ते भारतीय निर्यातकों को स्वीकार्य प्रतिस्पर्धात्मक शर्तें मिलें।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों देशों के बीच जिन मुद्दों को अभी ‘स्टिकिंग पॉइंट्स’ माना जा रहा है, उन पर कितनी जल्दी सहमति बनती है। अमेरिका तत्काल घोषणा की संभावना से इनकार नहीं कर रहा कि बातचीत जारी है, लेकिन उसने फिलहाल किसी जल्दबाजी वाले समझौते का संकेत भी नहीं दिया है। भारत की तरफ से भी टैरिफ और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को अंतिम समझौते की अहम शर्त माना जा रहा है। इसलिए आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के अधिकारियों की बातचीत और राजनीतिक स्तर पर होने वाले संपर्क इस डील की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर मौजूदा स्थिति को ‘बातचीत अंतिम दौर में, लेकिन समझौता अभी बाकी’ के तौर पर समझा जा सकता है। एक तरफ भारत ने इसे काफी आगे बढ़ा हुआ बताया है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने कहा है कि अभी कुछ महत्वपूर्ण अड़चनें दूर की जानी हैं। इसलिए दोनों देशों के बयानों में अंतर के बावजूद एक बात स्पष्ट है कि वार्ता जारी है और अगला चरण इन्हीं बचे हुए व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनाने का होगा।