देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को संतुलित बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नए आदेश जारी करते हुए औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत श्रेणी के बड़े ईंधन उपभोक्ताओं (बल्क यूजर्स) के लिए रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू की गई है, हालांकि परिस्थितियों को देखते हुए इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।
सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में कई क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों के माध्यम से ईंधन की बिक्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई। जांच में सामने आया कि थोक और खुदरा दरों के बीच बड़ा अंतर होने के कारण कई बड़े उपभोक्ता अपने निर्धारित बल्क सप्लाई चैनलों को छोड़कर सीधे रिटेल आउटलेट्स से खरीदारी कर रहे थे। इससे आम नागरिकों के लिए उपलब्ध ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी।
केवल अधिकृत थोक केंद्रों से ही मिलेगी सप्लाई
नए नियमों के अनुसार, उद्योगों, बड़ी कंपनियों, टेलीकॉम टावर संचालकों, निर्माण कंपनियों, परिवहन बेड़ों और अन्य संस्थागत उपभोक्ताओं को अब अपनी ईंधन जरूरतें केवल अधिकृत थोक बिक्री केंद्रों (Bulk Sale Points) या अपने उपभोक्ता पंपों के माध्यम से पूरी करनी होंगी। उन्हें सामान्य पेट्रोल पंपों से बड़े स्तर पर पेट्रोल या डीजल खरीदने की अनुमति नहीं होगी।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी प्रकार की कमी के कारण नहीं बल्कि ईंधन वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खुदरा पंपों पर आम वाहन चालकों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध रहे।
अंतरराष्ट्रीय हालात ने बढ़ाई चिंता
सरकार के अनुसार, दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति, समुद्री परिवहन और पेट्रोलियम उत्पादों की लॉजिस्टिक्स प्रभावित हुई हैं। ऐसे माहौल में देश के भीतर ईंधन वितरण को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी हो गया है।
मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण आपूर्ति शृंखला पर दबाव है। इसी दौरान कुछ इलाकों में खुदरा पंपों से असामान्य मात्रा में डीजल और पेट्रोल की बिक्री देखी गई, जिसने सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद स्थिति की समीक्षा कर नया आदेश जारी किया गया।
क्यों बढ़ी रिटेल पंपों पर खरीदारी?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण थोक और खुदरा कीमतों के बीच मौजूद भारी अंतर है। उदाहरण के तौर पर राजधानी दिल्ली में खुदरा डीजल की कीमत लगभग 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक उपभोक्ताओं के लिए यही कीमत करीब 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच रही है। यानी दोनों कीमतों के बीच लगभग 39.30 रुपये प्रति लीटर का अंतर है।
ऐसी स्थिति में कई बड़े उपभोक्ताओं के लिए रिटेल आउटलेट्स से ईंधन खरीदना अधिक सस्ता पड़ रहा था। इससे थोक बाजार की मांग कम होने लगी और खुदरा पंपों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया। सरकार का कहना है कि इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करना जरूरी था, क्योंकि लंबे समय तक ऐसा जारी रहने से आम उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती थी।
आम लोगों को राहत देने के लिए कम रखी गई थीं कीमतें
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला। आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा गया।
दूसरी ओर, बड़े संस्थागत और औद्योगिक ग्राहकों के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू रही। इसी वजह से थोक और खुदरा कीमतों के बीच अंतर लगातार बढ़ता गया और कई बड़े उपभोक्ताओं ने सस्ती दरों का लाभ लेने के लिए रिटेल पंपों का रुख करना शुरू कर दिया।
डीजल खरीद पर भी तय की गई सीमा
नए आदेश में केवल बल्क यूजर्स पर रोक ही नहीं लगाई गई है, बल्कि खुदरा स्तर पर डीजल की खरीद को लेकर भी कुछ नई सीमाएं तय की गई हैं। अब रिटेल आउटलेट्स से डीजल केवल वाहन के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही दिया जाएगा।
इसके अलावा किसी एक ग्राहक या वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही बेचा जा सकेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह खरीदे गए ईंधन का पुनर्विक्रय पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आवश्यक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर थोक उपभोक्ता खुदरा पंपों से ईंधन खरीदते रहे तो स्थानीय स्तर पर आपूर्ति असंतुलित हो सकती है। इससे परिवहन, आपातकालीन सेवाओं, कृषि गतिविधियों और दैनिक उपयोग के लिए ईंधन प्राप्त करने वाले सामान्य नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
यही कारण है कि सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए ईंधन वितरण को नियंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और नए नियम उसी दिशा में उठाया गया कदम हैं।
निगरानी की जिम्मेदारी तेल कंपनियों को
इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों तथा अन्य अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को सौंपी गई है। सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे रिटेल आउटलेट्स पर बिक्री की निगरानी करें और नियमों के पालन को सुनिश्चित बनाएं।
इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं ईंधन की जमाखोरी, अवैध बिक्री, अनधिकृत खरीद या ब्लैक मार्केटिंग जैसी गतिविधियां सामने आती हैं तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
उल्लंघन करने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नए आदेश की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नियम तोड़ने वाले व्यक्तियों या संस्थानों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माने से लेकर अन्य कानूनी दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं।
मंत्रालय का मानना है कि सख्त प्रवर्तन के बिना इस व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। इसलिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी सक्रिय रहने को कहा गया है।
जरूरत पड़ने पर मिल सकती है विशेष छूट
हालांकि सरकार ने कुछ लचीलापन भी रखा है। आदेश में प्रावधान किया गया है कि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार किसी खास उपभोक्ता, उद्योग, क्षेत्र या लेनदेन श्रेणी को इन नियमों से छूट प्रदान कर सकती है। इसके लिए अलग से सरकारी आदेश जारी किया जाएगा।
यह व्यवस्था उन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जहां राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं, आपातकालीन सेवाओं या विशेष उद्योगों को तत्काल ईंधन आपूर्ति की आवश्यकता हो सकती है।
कौन आते हैं बल्क यूजर की श्रेणी में?
बल्क यूजर वे बड़े उपभोक्ता होते हैं जो प्रतिदिन या नियमित रूप से बड़ी मात्रा में डीजल और पेट्रोल का उपयोग करते हैं। इनमें ट्रांसपोर्ट कंपनियां, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर, बस और ट्रक फ्लीट संचालक, मोबाइल टावर चलाने वाली टेलीकॉम कंपनियां, बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान, निर्माण क्षेत्र की कंपनियां तथा अपने बिजली उत्पादन के लिए डीजल जनरेटर चलाने वाले संस्थान शामिल हैं।
इन ग्राहकों के लिए तेल कंपनियां सामान्य खुदरा मूल्य के बजाय बाजार आधारित दरों पर ईंधन उपलब्ध कराती हैं। सरकार का मानना है कि इन उपभोक्ताओं को उनके निर्धारित थोक चैनलों से ही ईंधन खरीदना चाहिए, ताकि खुदरा नेटवर्क का उपयोग आम जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सके।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम देशभर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने, संभावित कमी की आशंकाओं को रोकने और आम उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। फिलहाल यह नियम 90 दिनों तक प्रभावी रहेगा और आगे की स्थिति का आकलन करने के बाद इसके बारे में अगला निर्णय लिया जाएगा।




