सिर्फ मोबाइल और लैपटॉप नहीं, ये रोज की आदतें भी बिगाड़ सकती हैं आंखों की सेहत; आज ही बदलें अपनी दिनचर्या

सिर्फ मोबाइल और लैपटॉप नहीं, ये रोज की आदतें भी बिगाड़ सकती हैं आंखों की सेहत; आज ही बदलें अपनी दिनचर्या

आंखों में जलन, थकान, भारीपन, खुजली या बार-बार पानी आने जैसी परेशानियों को देखते ही ज्यादातर लोगों का ध्यान सबसे पहले मोबाइल फोन, कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर जाता है। इसमें कोई शक नहीं कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने, लगातार काम करने और बीच-बीच में आंखों को आराम न देने से डिजिटल आई स्ट्रेन जैसी समस्या हो सकती है। लेकिन आंखों की परेशानी की वजह सिर्फ स्क्रीन टाइम ही नहीं होती। हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली और कुछ ऐसी आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं, जिन पर आमतौर पर हमारा ध्यान नहीं जाता।

आंखें शरीर के बेहद संवेदनशील अंगों में शामिल हैं। इनकी सेहत पर नींद, पानी की मात्रा, रोशनी, स्वच्छता, खान-पान और धूप में रहने की आदत तक का असर पड़ सकता है। कई बार छोटी-सी लापरवाही लंबे समय तक जारी रहने पर आंखों में सूखापन, जलन और असहजता जैसी परेशानियां बढ़ा सकती है। इसलिए जरूरी है कि केवल स्क्रीन से दूरी बनाने के बजाय आंखों की देखभाल से जुड़ी पूरी दिनचर्या पर ध्यान दिया जाए।

आंखों को बार-बार रगड़ना बन सकता है परेशानी की वजह

आंखों में खुजली या थकान होने पर उन्हें हाथों से रगड़ना बहुत सामान्य आदत है। कई लोग इसे आंखों को आराम देने का आसान तरीका मानते हैं, लेकिन बार-बार या जोर लगाकर आंखें मलना नुकसानदायक हो सकता है। आंखों की बाहरी सतह काफी नाजुक होती है और लगातार रगड़ने से उसमें जलन या अन्य तरह की परेशानी पैदा हो सकती है।

खास तौर पर अगर हाथ साफ नहीं हैं तो आंखों को छूने या रगड़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। धूल, गंदगी और बैक्टीरिया हाथों के जरिए आंखों तक पहुंच सकते हैं। अगर आंखों में लगातार खुजली रहती है, लालिमा बनी रहती है या बार-बार उन्हें रगड़ने का मन करता है, तो केवल हाथ से राहत पाने के बजाय इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है। ऐसी स्थिति बार-बार हो तो आंखों के विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

कॉन्टेक्ट लेंस इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा सावधानी जरूरी

कॉन्टेक्ट लेंस आंखों की देखभाल में अतिरिक्त सावधानी की मांग करते हैं। लेंस को साफ किए बिना इस्तेमाल करना, लंबे समय तक पहने रहना या गंदे हाथों से आंखों को छूना संक्रमण और जलन जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए लेंस लगाने और निकालने से पहले हाथों की सफाई करना जरूरी है।

लेंस की सफाई और रखरखाव से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। अगर लेंस पहनने के बाद आंखों में दर्द, लालिमा, जलन, पानी आना या देखने में परेशानी महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कम रोशनी में पढ़ने की आदत छोड़ें

आंखों पर असर डालने वाली एक आम आदत है खराब या अपर्याप्त रोशनी में पढ़ना और काम करना। कई लोग रात में कमरे की लाइट बंद करके फोन चलाते हैं और सिर्फ स्क्रीन की रोशनी में काफी देर तक उसे देखते रहते हैं। इसी तरह कम रोशनी में किताब पढ़ने या लैपटॉप पर काम करने से भी आंखों पर अनावश्यक दबाव महसूस हो सकता है।

जब आसपास का वातावरण बहुत अंधेरा हो और सामने कोई चमकदार स्क्रीन या वस्तु हो, तो आंखों को रोशनी के इस अंतर के साथ लगातार तालमेल बैठाना पड़ता है। इससे आंखों में थकान, असहजता और कभी-कभी सिरदर्द महसूस हो सकता है। इसलिए पढ़ाई, ऑफिस के काम या मोबाइल के इस्तेमाल के दौरान कमरे में पर्याप्त और संतुलित रोशनी रखना बेहतर है।

इसका मतलब यह नहीं है कि कम रोशनी में पढ़ने से आंखों की रोशनी सीधे खत्म हो जाती है, लेकिन लंबे समय तक असुविधाजनक रोशनी में काम करने से आंखों पर तनाव जरूर बढ़ सकता है। इसलिए काम करने की जगह की लाइटिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नींद पूरी न होना भी आंखों को कर सकता है परेशान

आज की व्यस्त दिनचर्या में देर रात तक जागना और नींद का समय लगातार बदलते रहना आम हो गया है। इसका असर सिर्फ शरीर की ऊर्जा और मूड पर नहीं पड़ता, बल्कि आंखों पर भी थकान दिखाई दे सकती है। पर्याप्त नींद के दौरान शरीर को आराम और रिकवरी का समय मिलता है। अगर लगातार नींद पूरी नहीं होती, तो आंखें भारी, थकी हुई या सूखी महसूस हो सकती हैं।

देर रात तक मोबाइल या दूसरे डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल भी इस समस्या को बढ़ा सकता है, खासकर जब व्यक्ति पर्याप्त नींद लेने के बजाय स्क्रीन के सामने समय बिताता रहे। इसलिए आंखों की सेहत के लिए स्क्रीन टाइम कम करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी नियमित और पर्याप्त नींद लेना भी है।

अगर सुबह उठने के बाद आंखों में लगातार भारीपन, जलन या सूखापन महसूस होता है, तो अपनी नींद की अवधि और सोने-जागने के समय पर भी ध्यान देना चाहिए।

शरीर में पानी की कमी को भी न करें नजरअंदाज

आंखों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए शरीर का हाइड्रेटेड रहना महत्वपूर्ण है। कम पानी पीने की आदत से शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है और कुछ लोगों को आंखों में सूखापन अधिक महसूस हो सकता है। यह परेशानी खास तौर पर उन लोगों में ज्यादा महसूस हो सकती है जो लंबे समय तक एयर कंडीशन वाले कमरे में रहते हैं।

एसी वाले वातावरण में हवा अपेक्षाकृत शुष्क हो सकती है, जिससे आंखों में ड्राइनेस या जलन की शिकायत बढ़ सकती है। ऐसे में पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना उपयोगी आदत हो सकती है।

हालांकि, आंखों के सूखने के पीछे केवल पानी की कमी ही कारण नहीं होती। लगातार स्क्रीन देखना, कुछ दवाएं, वातावरण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए लगातार बनी रहने वाली ड्राई आई की समस्या को केवल पानी कम पीने से जोड़ना सही नहीं है।

खान-पान में लापरवाही का असर भी आंखों पर पड़ सकता है

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार भी महत्वपूर्ण है। रोज के खाने में पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा न होना शरीर के अलग-अलग हिस्सों की तरह आंखों की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल जंक फूड या एक ही तरह के भोजन पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग पोषक खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना चाहिए।

हरी सब्जियां, मौसमी फल, पर्याप्त प्रोटीन और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। किसी विशेष विटामिन या सप्लीमेंट को बिना जरूरत और चिकित्सकीय सलाह के लेना जरूरी नहीं है। बेहतर तरीका यही है कि रोज के भोजन को संतुलित रखा जाए और अगर किसी पोषक तत्व की कमी का संदेह हो तो विशेषज्ञ से सलाह ली जाए।

धूप में आंखों की सुरक्षा भी जरूरी

आंखों की देखभाल सिर्फ घर और ऑफिस तक सीमित नहीं है। तेज धूप में बाहर निकलते समय आंखों को पराबैंगनी यानी UV किरणों से बचाना भी महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक तेज धूप के संपर्क में रहने पर आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

धूप में बाहर निकलते समय ऐसे सनग्लास का इस्तेमाल करना बेहतर है जिसमें उचित UV protection हो। सिर्फ गहरे रंग का चश्मा होना पर्याप्त नहीं है। चश्मे की गुणवत्ता और UV सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। सस्ते या ऐसे चश्मे जिनकी UV protection के बारे में जानकारी स्पष्ट न हो, उन्हें आंखों की सुरक्षा का विकल्प मानना ठीक नहीं है।

आंखों को लगातार काम में लगाए रखना भी सही नहीं

किसी भी काम के दौरान आंखों को लगातार एक ही दूरी और दिशा में लगाए रखना थकान बढ़ा सकता है। खासकर कंप्यूटर या मोबाइल पर लंबे समय तक काम करने वालों को बीच-बीच में आंखों को आराम देना चाहिए। कुछ देर के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर दूर की चीजों को देखना और नियमित ब्रेक लेना आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।

सिर्फ स्क्रीन की ब्राइटनेस कम कर देना पर्याप्त नहीं है। बैठने की दूरी, कमरे की रोशनी, स्क्रीन की स्थिति और काम के दौरान ब्रेक लेने की आदत भी महत्वपूर्ण हैं। इस तरह छोटी-छोटी सावधानियों को रोज की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

इन लक्षणों को सामान्य समझकर न छोड़ें

आंखों से जुड़ी कुछ परेशानियां थोड़े आराम या दिनचर्या में बदलाव से कम हो सकती हैं, लेकिन हर लक्षण को नजरअंदाज करना सही नहीं है। अगर धुंधला दिखाई देने लगे, आंखों में लगातार दर्द या लालिमा रहे, बार-बार पानी आए, देखने की क्षमता में अचानक बदलाव महसूस हो या सिरदर्द और आंखों की परेशानी लगातार बनी रहे, तो आंखों की जांच करानी चाहिए।

खास तौर पर अचानक दृष्टि में बदलाव, तेज आंखों के दर्द या गंभीर लालिमा जैसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। आंखों की किसी समस्या को सिर्फ मोबाइल, लैपटॉप या टीवी को जिम्मेदार मानकर छोड़ देना उचित नहीं है।

आंखों की बेहतर सेहत के लिए स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के साथ-साथ पर्याप्त नींद, सही रोशनी, पर्याप्त पानी, पौष्टिक आहार, स्वच्छता और धूप से सुरक्षा जैसी आदतों पर भी ध्यान देना चाहिए। रोज की मामूली लगने वाली लापरवाहियां लंबे समय में परेशानी का कारण बन सकती हैं, इसलिए समय रहते अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव करना आंखों के लिए फायदेमंद हो सकता है।