गगल में बोले भाजपा सांसद—लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय तथ्य सामने रखें विरोधी दल, मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर भी उठाए सवाल
गगल। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने मतदाता सूची में संशोधन और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव में हार मिलने के बाद चुनाव आयोग, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए तथ्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।
अनुराग ठाकुर रविवार को गगल में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि आखिर किन मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर आपत्ति जताई जा रही है। उनके अनुसार, यदि मृत व्यक्तियों, दोहरी प्रविष्टियों या दूसरे स्थानों पर जा चुके मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, तो इस प्रक्रिया पर विरोध करने वालों को अपनी आपत्तियों का स्पष्ट आधार बताना चाहिए।
भाजपा सांसद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है। किसी भी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए ठोस तथ्य सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना पर्याप्त आधार के आरोप लगाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
‘झूठ के पांव नहीं होते’
अनुराग ठाकुर ने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि झूठ के पांव नहीं होते और तथ्यहीन आरोप लंबे समय तक नहीं टिक सकते। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस जब चुनाव जीतती है, तब उसे ईवीएम, चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली में कोई खामी दिखाई नहीं देती, लेकिन चुनाव में हार मिलने के बाद वही संस्थाएं उसके निशाने पर आ जाती हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना कुछ विपक्षी नेताओं की राजनीतिक रणनीति बन गई है। उनके अनुसार, इस तरह के आरोपों से राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश करने के बजाय विपक्ष को अपनी हार के कारणों का विश्लेषण करना चाहिए और जनता के बीच अपनी नीतियों तथा कार्यक्रमों को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा सांसद ने कहा कि देश की जनता राजनीतिक दलों के बयानों और उनके व्यवहार को देख रही है। यदि किसी चुनाव या मतदाता सूची से जुड़े मामले में अनियमितता का संदेह है, तो संबंधित पक्ष को उसके समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने से किसी संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाने को लेकर विपक्ष को घेरा
चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर चलने वाली राजनीतिक बहस पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनावी नतीजे अनुकूल नहीं रहने पर कुछ नेता चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके प्रति जनता का भरोसा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। किसी भी संस्था के कामकाज पर आपत्ति होने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और तथ्यों के आधार पर जवाब मांगा जा सकता है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बिना ठोस आधार के सवाल उठाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
हालांकि, मतदाता सूची में संशोधन या चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी किसी विशिष्ट शिकायत का निपटारा संबंधित तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है। सांसद ने अपने बयान में विपक्ष से ऐसे मामलों में स्पष्ट जानकारी सामने रखने की मांग की।
मतदाता सूची से किन लोगों के नाम हटाए गए?
मतदाता सूची के मुद्दे पर भाजपा सांसद ने विपक्ष से सीधे सवाल किया कि आखिर किन मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सूची में ऐसे लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं या जो अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, तो विरोध करने वालों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें किस प्रक्रिया या निर्णय पर आपत्ति है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि मतदाता सूची को अद्यतन रखना चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय विशिष्ट मामलों की जानकारी और तथ्य सामने रखे जाने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन के मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप दिया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उस मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाकर उसका समाधान करवाया जाना चाहिए।
मतदाता सूची से नाम हटाने का विषय चुनावी अधिकारों से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण है। मृत मतदाताओं के नाम हटाने, दोहरी प्रविष्टियों को ठीक करने और स्थान परिवर्तन के बाद रिकॉर्ड अद्यतन करने जैसी प्रक्रियाओं के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होता है कि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति संबंधित मतदाता सूची और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है।
अनुराग ठाकुर ने विपक्ष से इसी आधार पर सवाल उठाने और ठोस जानकारी के साथ अपनी बात रखने की अपील की।
विदेशी ताकतों के एजेंडे का भी लगाया आरोप
भाजपा सांसद ने अपने बयान में आरोप लगाया कि कुछ लोग विदेशी ताकतों के एजेंडे के अनुरूप भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने और राजनीतिक आरोपों के माध्यम से व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने से लोकतंत्र को नुकसान पहुंच सकता है।
हालांकि, विदेशी ताकतों से जुड़े अपने आरोपों के समर्थन में उन्होंने बातचीत के दौरान किसी विशिष्ट व्यक्ति, संगठन या घटना का नाम नहीं बताया। उनका बयान विपक्ष की राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उठाए जाने वाले सवालों को लेकर उनकी आलोचना के संदर्भ में आया।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक विचारों और मतभेदों के बीच काम करती रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों को संस्थाओं की आलोचना करते समय जिम्मेदारी बरतनी चाहिए और अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का स्थान है, लेकिन किसी भी मुद्दे पर बहस का आधार तथ्यों और स्थापित प्रक्रियाओं को बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोध और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने के बीच अंतर समझना जरूरी है।
आंदोलन का अधिकार है, लेकिन नियमों का पालन भी जरूरी
आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में अनुराग ठाकुर ने कहा कि उन्होंने युवा मोर्चा से लेकर भाजपा तक अपने राजनीतिक सफर में विभिन्न आंदोलनों में हिस्सा लिया है। इस अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन के आयोजन में प्रशासन से अनुमति लेने और प्रतिभागियों की संख्या सहित जरूरी जानकारियां देने जैसी व्यवस्थाओं का पालन करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल को विरोध करने, प्रदर्शन आयोजित करने और अपनी मांगें उठाने का अधिकार है। लेकिन यह अधिकार कानून और निर्धारित नियमों के दायरे में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून और संवैधानिक संस्थाओं से ऊपर नहीं है।
भाजपा सांसद ने कहा कि आंदोलन के दौरान झूठे आरोप लगाकर या भ्रामक जानकारी फैलाकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से अपनी बात रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार आंदोलनों और आरोपों के माध्यम से व्यवस्था पर सवाल उठाने की कोशिश करते हैं। उनके अनुसार, यदि किसी नीति, निर्णय या संस्था की कार्यप्रणाली से असहमति है, तो उसे कानूनी और संवैधानिक माध्यमों से सामने लाया जाना चाहिए।
तथ्यों के आधार पर हो राजनीतिक बहस
अनुराग ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता का चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे मतदाता सूची, चुनाव आयोग और ईवीएम जैसे विषयों पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों को स्पष्ट करें।
उन्होंने दोहराया कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर आपत्ति जताने वालों को यह बताना चाहिए कि किन नामों या मामलों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, ठोस जानकारी के बिना राजनीतिक विवाद खड़ा करने से समस्या का समाधान नहीं निकल सकता।
भाजपा सांसद ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के बीच अपने कामकाज और नीतियों के आधार पर समर्थन हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।
गगल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनुराग ठाकुर का पूरा जोर इसी बात पर रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध का अधिकार बरकरार रहना चाहिए, लेकिन राजनीतिक बहस तथ्यपरक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और लोकतंत्र की मजबूती बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।



