हिमाचल की पंचायतों में 300 करोड़ के विकास कार्यों का हिसाब लंबित, उपयोगिता प्रमाणपत्र न मिलने से अगली किस्त पर असर

हिमाचल की पंचायतों में 300 करोड़ के विकास कार्यों का हिसाब लंबित, उपयोगिता प्रमाणपत्र न मिलने से अगली किस्त पर असर

15वें वित्त आयोग के तहत खर्च की गई राशि का रिकॉर्ड केंद्र को नहीं भेजा गया; बिलों सहित प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश, नए पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में देरी को बताया जा रहा कारण

शिमला। हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च की गई राशि का हिसाब केंद्र सरकार तक पहुंचाने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। 15वें वित्त आयोग के तहत करवाए गए करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक जमा नहीं करवाए गए हैं। इससे पंचायतों में खर्च की गई धनराशि का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया लंबित है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों और उन पर खर्च हुई राशि का रिकॉर्ड मांगा है।

इतनी बड़ी राशि के विकास कार्यों से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित होने से पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, कार्यों की निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने संबंधित पंचायतों को आवश्यक दस्तावेज तैयार कर बिलों सहित उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि पुराने वित्तीय वर्ष के कार्यों का रिकॉर्ड पूरा करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

पंचायतों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि का निर्धारित उद्देश्यों पर इस्तेमाल सुनिश्चित करना और खर्च का प्रमाण प्रस्तुत करना जरूरी होता है। ऐसे में उपयोगिता प्रमाणपत्रों का लंबित रहना प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण विषय बन गया है। हालांकि, प्रमाणपत्र जमा नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरी राशि का दुरुपयोग हुआ है। इसके लिए प्रत्येक कार्य के रिकॉर्ड, खर्च के विवरण और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी।

पंचायत चुनाव में देरी से प्रभावित हुई प्रक्रिया

उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं होने के पीछे पंचायतों में नए प्रतिनिधियों के चुनाव की प्रक्रिया में लगे समय को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पंचायतों में प्रतिनिधियों के चयन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के हस्तांतरण के कारण पिछले वित्तीय वर्ष के विकास कार्यों का रिकॉर्ड तैयार करने तथा उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा करवाने में देरी हुई।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंचायतों में करवाए गए कार्यों के लिए खर्च की गई राशि का विवरण तैयार करना जरूरी है। इसमें संबंधित कार्यों का ब्यौरा, खर्च की गई रकम, बिल और अन्य वित्तीय दस्तावेज शामिल होते हैं। इन सभी रिकॉर्ड को संकलित करने के बाद ही उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने की प्रक्रिया पूरी होती है।

पंचायत स्तर पर दस्तावेजों को तैयार करने और उनका सत्यापन करने में देरी होने से विभाग के सामने लंबित रिकॉर्ड को पूरा करवाने की चुनौती है। करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों से जुड़े प्रमाणपत्रों का जमा नहीं होना इस प्रक्रिया की व्यापकता को दर्शाता है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि पंचायतों से संबंधित दस्तावेज समय पर प्राप्त हों और उनमें किसी प्रकार की कमी रहने पर उसे दूर किया जाए। इससे केंद्र सरकार को विकास कार्यों पर हुए खर्च की वास्तविक स्थिति की जानकारी उपलब्ध करवाई जा सकेगी।

क्या होता है उपयोगिता प्रमाणपत्र?

उपयोगिता प्रमाणपत्र किसी सरकारी योजना या अनुदान के तहत जारी धनराशि के इस्तेमाल का आधिकारिक दस्तावेज होता है। इसके माध्यम से यह प्रमाणित किया जाता है कि संबंधित राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया है। इसमें कार्यों का विवरण, खर्च का हिसाब और आवश्यक वित्तीय रिकॉर्ड शामिल होते हैं।

पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली धनराशि का उपयोग निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार करना होता है। संबंधित कार्य पूरा होने या निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया के अनुसार खर्च किए जाने के बाद उसका विवरण प्रस्तुत करना जरूरी होता है।

उपयोगिता प्रमाणपत्र के साथ बिल और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करवाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन का उपयोग वास्तविक कार्यों पर हुआ है। इससे संबंधित विभाग और केंद्र सरकार खर्च की निगरानी कर सकते हैं तथा जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड का सत्यापन कर सकते हैं।

यदि प्रमाणपत्रों में कोई कमी पाई जाती है या दस्तावेज अधूरे होते हैं, तो उन्हें पूरा करवाने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए पंचायतों के लिए केवल कार्य करवाना ही नहीं, बल्कि उसके खर्च का सही रिकॉर्ड रखना और समय पर प्रस्तुत करना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

पेयजल और स्वच्छता जैसे कार्यों के लिए था अनुदान

15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिलने वाले अनुदान का बड़ा हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए निर्धारित था। इन कार्यों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाना और स्थानीय स्तर पर विकास को गति देना है।

अनुदान की शेष राशि पंचायतों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार निर्धारित नियमों के तहत खर्च की जा सकती थी। इससे पंचायतों को अपने क्षेत्र की प्राथमिकताओं के अनुसार विकास कार्य करवाने का अवसर मिलता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता, स्वच्छता व्यवस्था और जल संरक्षण से जुड़े कार्य लोगों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में इन योजनाओं के तहत खर्च हुई राशि का रिकॉर्ड समय पर तैयार करना जरूरी है, ताकि कार्यों की प्रगति और धनराशि के उपयोग की स्थिति स्पष्ट रह सके।

करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित होने के कारण अब इन कार्यों से संबंधित दस्तावेजों को संकलित करने और उनका सत्यापन करवाने पर जोर दिया जा रहा है। विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पंचायतें निर्धारित प्रारूप में आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाएं।

अगली किस्तों की प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर

सरकारी अनुदान निर्धारित शर्तों और वित्तीय नियमों के अनुसार जारी किए जाते हैं। ऐसे में पहले जारी की गई राशि के उपयोग का रिकॉर्ड अधूरा रहने पर आगे की किस्तों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उपयोगिता प्रमाणपत्रों का समय पर जमा होना अनुदान के उपयोग और वित्तीय जवाबदेही से जुड़ी महत्वपूर्ण शर्त है।

हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से जुड़े प्रमाणपत्र लंबित होने के कारण अगली किस्तों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यदि निर्धारित शर्तों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो संबंधित अनुदान की अगली किस्त जारी करने की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है।

हालांकि, उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित होने से हर मामले में धनराशि स्वतः रुक जाना तय नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव संबंधित अनुदान की शर्तों, उपलब्ध रिकॉर्ड और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। इसलिए सभी लंबित प्रमाणपत्रों को एक ही स्थिति में मानने के बजाय संबंधित मामलों की अलग-अलग समीक्षा जरूरी है।

पंचायतों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे कार्यों पर हुए वास्तविक खर्च और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच समन्वय स्थापित करें। यदि बिलों या अन्य रिकॉर्ड में कोई कमी है, तो उसे समय रहते पूरा किया जाना चाहिए, ताकि अनुदान से संबंधित वित्तीय प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

विभाग ने दिए बिलों सहित प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों को जमा करवाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। पंचायतों को कहा गया है कि वे संबंधित विकास कार्यों के बिलों सहित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें, ताकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के खर्च का रिकॉर्ड पूरा किया जा सके।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी पाल रासु ने कहा कि पुराने वित्तीय वर्ष के करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाए जाने हैं। इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

विभाग के सामने अब लंबित दस्तावेजों को प्राप्त करने, उनकी जांच करने और खर्च का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी है। पंचायतों से अपेक्षा की जा रही है कि वे संबंधित कार्यों का विवरण और वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध करवाकर इस प्रक्रिया को पूरा करें।

समय पर रिकॉर्ड उपलब्ध होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि 15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त धनराशि किन कार्यों पर खर्च की गई और संबंधित योजनाओं के निर्धारित उद्देश्यों को किस सीमा तक पूरा किया गया।

वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना होगी चुनौती

पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का सही हिसाब रखना स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उपयोगिता प्रमाणपत्र केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल का प्रमाण होते हैं। इनके माध्यम से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि अनुदान का उपयोग निर्धारित कार्यों के लिए किया गया है और खर्च का रिकॉर्ड उपलब्ध है।

हिमाचल प्रदेश में करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित होने के बाद विभाग के लिए यह जरूरी हो गया है कि दस्तावेज जमा करवाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। साथ ही, पंचायत स्तर पर वित्तीय रिकॉर्ड तैयार करने और उसे समय पर प्रस्तुत करने की व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम लंबित प्रमाणपत्रों को बिलों सहित जमा करवाना और संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन करना है। इससे विकास कार्यों पर खर्च हुई राशि की स्थिति स्पष्ट होगी और अनुदान से जुड़ी आगे की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।