नवरात्रि में व्रत रखने से पहले डायबिटीज और हाई BP के मरीज जान लें ये जरूरी बातें, लापरवाही किडनी पर पड़ सकती है भारी

नवरात्रि में व्रत रखने से पहले डायबिटीज और हाई BP के मरीज जान लें ये जरूरी बातें, लापरवाही किडनी पर पड़ सकती है भारी

नवरात्रि के दिनों में बड़ी संख्या में लोग मां दुर्गा की आराधना करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन बिना अन्न ग्रहण किए रहते हैं, जबकि कई लोग फलाहार या सीमित भोजन के साथ उपवास करते हैं। हालांकि, व्रत रखने का फैसला हर व्यक्ति की सेहत को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए खानपान और दवाओं में लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे मरीजों के लिए लंबे समय तक भूखे रहना, पर्याप्त तरल पदार्थ न लेना या नियमित दवाओं के समय में बदलाव करना जोखिम भरा हो सकता है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर में असंतुलन होने के साथ शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में इसका असर किडनी की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति पहले से इन बीमारियों की दवाएं ले रहा है या उसकी किडनी की जांच में गड़बड़ी सामने आई है, तो उसे व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से अपनी स्थिति पर चर्चा करनी चाहिए।

व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी को न करें नजरअंदाज

डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को उपवास के दौरान सबसे पहले शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक पानी नहीं पीने या जरूरत के मुताबिक तरल पदार्थ नहीं लेने से डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में कमजोरी, चक्कर आना, थकान और पेशाब की मात्रा कम होने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। गंभीर डिहाइड्रेशन में किडनी तक पहुंचने वाले रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज के कुछ मरीजों में ब्लड शुगर बढ़ने के कारण भी शरीर से अधिक पानी निकल सकता है। वहीं, किडनी या दिल की बीमारी वाले कुछ लोगों को डॉक्टर सीमित मात्रा में तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं। इसलिए सभी मरीजों के लिए एक जैसी मात्रा में पानी पीने का नियम सही नहीं है। व्रत के दौरान कितना पानी पीना चाहिए, यह व्यक्ति की बीमारी, दवाओं और मेडिकल रिपोर्ट पर निर्भर करता है। यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थों की कोई सीमा तय की है, तो उसका पालन करना जरूरी है।

ब्लड शुगर में अचानक गिरावट या बढ़ोतरी बन सकती है परेशानी

डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक भोजन नहीं करना कई बार ब्लड शुगर को असामान्य स्तर तक पहुंचा सकता है। विशेष रूप से इंसुलिन या कुछ ऐसी दवाएं लेने वाले लोगों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा रहता है। पसीना आना, हाथ कांपना, तेज भूख लगना, घबराहट, चक्कर आना और भ्रम की स्थिति इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। गंभीर मामलों में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है। दूसरी ओर, अगर व्रत खोलते समय बहुत अधिक मीठे फल, मिठाइयां, मीठे पेय या बड़ी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन खाया जाए, तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए व्रत रखने वाले मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से शुगर की जांच करनी चाहिए। जांच का समय और उसकी आवृत्ति उनकी दवाओं तथा बीमारी की स्थिति के अनुसार तय की जा सकती है। मरीजों को अपने पास ग्लूकोज जांचने की सुविधा रखनी चाहिए और शुगर कम होने पर क्या करना है, इसकी जानकारी पहले से होनी चाहिए। बेहोशी या निगलने में परेशानी की स्थिति में व्यक्ति को मुंह से भोजन या पेय नहीं देना चाहिए और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

हाई बीपी के मरीज फलाहार चुनते समय बरतें सावधानी

नवरात्रि में व्रत रखने वाले लोग अक्सर साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, आलू, नमकीन और बाजार में मिलने वाले व्रत के पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खाते हैं। इनमें से कुछ चीजों में नमक, तेल या कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए अधिक नमक का सेवन रक्तचाप को नियंत्रित करने में बाधा बन सकता है। वहीं, तले हुए खाद्य पदार्थ और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से वजन तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। फलाहार का मतलब यह नहीं है कि किसी भी खाद्य पदार्थ को बिना मात्रा का ध्यान रखे खाया जा सकता है। मरीज अपनी जरूरत के अनुसार ताजे फल, उपयुक्त सब्जियां और कम नमक वाले घर पर तैयार किए गए विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, यदि डायबिटीज भी है, तो फलों की मात्रा और प्रकार का चुनाव ब्लड शुगर को ध्यान में रखकर करना चाहिए। पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना और अतिरिक्त नमक वाले खाद्य पदार्थों से बचना उपयोगी हो सकता है। डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ मरीज की बीमारी के मुताबिक उपयुक्त भोजन की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं।

किडनी की बीमारी वाले मरीजों के लिए खानपान के नियम अलग हो सकते हैं

डायबिटीज और हाई बीपी दोनों ही लंबे समय में किडनी को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं। यदि इन बीमारियों को नियंत्रित नहीं रखा जाए, तो किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे समय के साथ किडनी की कार्यक्षमता कम होने की आशंका रहती है। जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक किडनी डिजीज है, उनके लिए व्रत के दौरान भोजन का चुनाव और भी सावधानी से करना जरूरी है। ऐसे मरीजों को पोटैशियम, फॉस्फोरस, सोडियम और तरल पदार्थों की मात्रा पर ध्यान देना पड़ सकता है। हालांकि, हर किडनी मरीज के लिए इन सभी पोषक तत्वों को पूरी तरह बंद कर देना सही नहीं है। किस चीज की मात्रा सीमित करनी है, यह किडनी की बीमारी के चरण, खून की जांच और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, कुछ मरीजों को पोटैशियम की मात्रा नियंत्रित रखने की जरूरत होती है, जबकि दूसरे मरीजों को ऐसी पाबंदी की आवश्यकता नहीं होती। इसी तरह फल और सब्जियां चुनते समय भी व्यक्तिगत मेडिकल सलाह महत्वपूर्ण है। किडनी की समस्या वाले लोगों को केवल सामान्य व्रत के नियमों के आधार पर अपना पूरा आहार तय नहीं करना चाहिए।

व्रत के लिए अपनी मर्जी से दवाओं का समय न बदलें

उपवास के दौरान एक बड़ी गलती यह हो सकती है कि मरीज भोजन नहीं करने के कारण अपनी दवाएं छोड़ दें या उनकी मात्रा कम-ज्यादा कर लें। डायबिटीज की दवाओं और इंसुलिन का संबंध भोजन तथा ब्लड शुगर के स्तर से हो सकता है। दूसरी ओर, हाई बीपी और किडनी की बीमारी के लिए दी जाने वाली कुछ दवाओं का असर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन पर पड़ सकता है। ऐसे में बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद करना या उसका समय बदलना खतरनाक साबित हो सकता है। कुछ दवाओं के साथ भोजन करना जरूरी होता है, जबकि कुछ दवाएं खाली पेट ली जाती हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि व्रत के कारण सभी दवाओं को एक ही तरीके से लेना चाहिए। व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं की जानकारी दें और पूछें कि उपवास के दौरान उनकी खुराक या समय में किसी बदलाव की आवश्यकता है या नहीं। यदि पूरे दिन भोजन और पानी से दूर रहना आपकी दवाओं के साथ सुरक्षित नहीं है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्रत के तरीके में बदलाव करना या उपवास न रखना अधिक उचित हो सकता है।

किन लक्षणों पर व्रत जारी रखना ठीक नहीं?

व्रत के दौरान शरीर में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर उन्हें केवल भूख या थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अत्यधिक कमजोरी, लगातार चक्कर आना, कंपकंपी, ठंडा पसीना, उल्टी, भ्रम, बेहोशी या पेशाब की मात्रा में स्पष्ट कमी जैसे लक्षण परेशानी का संकेत हो सकते हैं। यदि ब्लड शुगर बहुत कम हो जाए, बहुत अधिक बढ़ जाए या ब्लड प्रेशर के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई अथवा अचानक तेज सिरदर्द जैसी गंभीर समस्या हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। ऐसी स्थिति में धार्मिक नियमों के कारण इलाज में देरी करना उचित नहीं है। मरीज को अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए आपातकालीन निर्देशों का पालन करना चाहिए। विशेष रूप से बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या अचानक मानसिक स्थिति बदलने पर नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करना चाहिए। यदि व्रत के दौरान तबीयत बिगड़ती है, तो उपवास रोकना और जरूरत के अनुसार उपचार लेना प्राथमिकता होनी चाहिए।

नवरात्रि में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से क्या पूछें?

डायबिटीज, हाई बीपी या किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से कुछ महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट कर लेनी चाहिए। सबसे पहले यह जानें कि आपकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति में उपवास करना सुरक्षित है या नहीं। इसके बाद ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की निगरानी कितनी बार करनी है, दवाएं किस समय लेनी हैं और शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं, इस पर चर्चा करें। यदि हाल की जांच में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित पाई गई है, तो नेफ्रोलॉजिस्ट यानी किडनी विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर क्रिएटिनिन, ईजीएफआर, पेशाब में एल्ब्यूमिन और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसी जांचों के आधार पर जोखिम का आकलन कर सकते हैं। हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के अनुभव या खानपान की नकल करना सही नहीं है।

नवरात्रि में भक्ति और आस्था के साथ स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को अपनी बीमारी की स्थिति, दवाओं और किडनी की सेहत को ध्यान में रखकर ही व्रत का निर्णय लेना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार भोजन, पानी और दवाओं का प्रबंधन करने से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। यदि उपवास आपकी मौजूदा बीमारी के लिए सुरक्षित नहीं है, तो अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है।

(Photo : AI Generated)