पिता की ऑटो पार्ट्स फैक्ट्री को आर्थिक संकट से निकालकर 130 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार तक पहुंचाया, अब महिलाओं के हुनर, रोजगार और सामाजिक उत्थान पर विशेष ध्यान
किसी महिला को रोजगार उपलब्ध करवाना केवल उसकी आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसके पूरे परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और बेहतर भविष्य की नींव रखने का माध्यम भी है। जब महिला अपने हुनर के दम पर कमाई करने लगती है, तो परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उसकी भूमिका बढ़ती है। साथ ही उसका आत्मविश्वास मजबूत होता है और वह अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने में अधिक सक्षम बनती है। इसी सोच को आधार बनाकर लुधियाना की संदीप मिनी रियात महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
संदीप मिनी रियात का प्रयास महिलाओं को केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है। वह उन्हें कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने, काम सीखने के लिए बेहतर वातावरण देने और औद्योगिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने पर जोर देती हैं। उनकी फैक्ट्री में करीब 250 महिलाएं काम कर रही हैं, जबकि 100 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने और नियमित आय का साधन विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
उनका मानना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए रोजगार के अवसरों के साथ ऐसा कार्यस्थल भी जरूरी है, जहां वे सहज महसूस करें और बिना किसी झिझक के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी फैक्ट्री में करीब 35 प्रतिशत रोजगार महिलाओं को दिया है। यह पहल औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के साथ उन्हें अपने हुनर और मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर भी देती है।
रोजगार के साथ हुनर विकसित करने पर जोर
महिलाओं को रोजगार देने के साथ उन्हें काम की बारीकियां सिखाना भी संदीप मिनी रियात की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं को कार्यक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया जाता है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपनी जिम्मेदारियां संभाल सकें। कौशल सीखने से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और वे अपने काम में दक्षता हासिल कर सकती हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं के लिए नियमित रोजगार विशेष महत्व रखता है। इससे वे घरेलू खर्चों में योगदान देने के साथ बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद कर सकती हैं। परिवार की आमदनी में भागीदारी बढ़ने से महिलाओं की स्थिति मजबूत होती है और उन्हें परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।
संदीप मिनी रियात के अनुसार, महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि वे आत्मनिर्भर बनें। इसके लिए उन्हें व्यावहारिक अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग देना जरूरी है। जब किसी महिला को अपनी योग्यता साबित करने का मौका मिलता है, तो वह न केवल अपने लिए बेहतर रास्ता बनाती है, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
आर्थिक संकट के बीच संभाली कारोबार की जिम्मेदारी
महिलाओं को संघर्ष के बावजूद आगे बढ़ने का अवसर देने की उनकी सोच के पीछे उनके अपने जीवन का अनुभव भी है। संदीप मिनी रियात ने उस दौर को करीब से देखा है, जब उनके पिता की ऑटो पार्ट्स फैक्ट्री आर्थिक संकट से गुजर रही थी। कारोबार पर कर्ज का दबाव बढ़ गया था और स्थिति ऐसी बन गई थी कि फैक्ट्री बंद होने की नौबत आ गई थी।
ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में उन्होंने कारोबार की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। किसी भी व्यवसाय को मुश्किल परिस्थितियों से निकालना आसान नहीं होता। इसके लिए आर्थिक प्रबंधन, लगातार मेहनत, सही निर्णय और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप काम करने की क्षमता की जरूरत होती है। संदीप मिनी रियात ने इन चुनौतियों का सामना करते हुए कारोबार को संभालने और आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।
उनकी मेहनत और सूझबूझ से कारोबार ने धीरे-धीरे प्रगति की और आज यह करीब 130 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच गया है। यह सफर उनके लिए केवल व्यावसायिक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने का अनुभव भी रहा है।
कारोबार को संकट से निकालने के इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि सही अवसर और हुनर मिलने पर मुश्किल हालात को बदला जा सकता है। यही विचार अब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उनके प्रयासों में भी दिखाई देता है। जिस तरह उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कारोबार की जिम्मेदारी उठाई, उसी तरह वह दूसरी महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर देना चाहती हैं।
विधवा महिलाओं और जरूरतमंद बच्चों के लिए भी प्रयास
संदीप मिनी रियात की गतिविधियां फैक्ट्री और रोजगार तक सीमित नहीं हैं। वह सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भी योगदान दे रही हैं। कंपनी के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कोष के माध्यम से विधवा महिलाओं के उत्थान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसी महिलाओं को सहयोग देना है, जिन्हें जीवन की परिस्थितियों के कारण आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
विधवा महिलाओं के लिए आर्थिक सहारा और आत्मनिर्भरता के अवसर विशेष महत्व रखते हैं। आय का साधन होने से वे अपनी तथा अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकती हैं। ऐसे प्रयास महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से उबरने और सम्मान के साथ जीवन आगे बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।
इसके अलावा, गरीब और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए भी काम किया जा रहा है। आर्थिक तंगी के कारण कई बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शिक्षा संबंधी सहयोग उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति उनकी प्रतिभा और आगे बढ़ने की संभावनाओं के आड़े न आए।
सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े इन प्रयासों के पीछे यह सोच है कि समाज की प्रगति तभी व्यापक हो सकती है, जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलें। महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना तथा जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग देना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
महिला की आर्थिक मजबूती से बदलती है परिवार की तस्वीर
संदीप मिनी रियात का मानना है कि जब किसी महिला के पास नियमित आमदनी का साधन होता है, तो उसका सकारात्मक असर पूरे परिवार पर पड़ता है। वह घर के खर्चों में सहयोग करने के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे परिवार को आर्थिक दबाव से निपटने में मदद मिलती है और भविष्य की योजनाएं बनाना आसान हो सकता है।
महिला की आर्थिक आत्मनिर्भरता का असर केवल पैसों तक सीमित नहीं रहता। नियमित आय से उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने में अधिक सक्षम बनती है। कामकाजी माहौल में मिलने वाला अनुभव उसकी कार्यक्षमता, कौशल और सामाजिक भागीदारी को भी मजबूत कर सकता है।
उनके अनुसार, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समाज और उद्योग जगत को मिलकर प्रयास करने चाहिए। उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें प्रशिक्षण देने और उनके लिए अनुकूल कार्यस्थल तैयार करने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे महिलाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप काम करने और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
संदीप मिनी रियात की पहल इस विचार को सामने रखती है कि महिला सशक्तीकरण का वास्तविक अर्थ केवल किसी एक महिला को नौकरी देना नहीं, बल्कि उसे इस योग्य बनाना है कि वह अपनी जिंदगी की दिशा तय कर सके और जरूरत पड़ने पर दूसरी महिलाओं का भी सहारा बन सके।
उनकी कारोबारी यात्रा और सामाजिक प्रयास इस बात को रेखांकित करते हैं कि आर्थिक सफलता का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब उसके साथ समाज के दूसरे वर्गों को आगे बढ़ाने की सोच भी जुड़ी हो। करीब 250 महिलाओं को रोजगार, 100 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण और जरूरतमंद परिवारों के लिए सामाजिक पहल के जरिए वह महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं।
महिलाओं को हुनर, अवसर और आत्मविश्वास उपलब्ध करवाने की यह सोच परिवारों को मजबूत बनाने के साथ समाज में आत्मनिर्भरता की भावना को भी बढ़ावा देती है। जब महिलाओं को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलता है, तो उसका लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और व्यापक समाज को भी मिलता है।




