सुबह की शुरुआत अगर पैरों में दर्द, एड़ी में चुभन या तलवों में खिंचाव के साथ होती है, तो इसे केवल थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई लोगों को रातभर आराम करने के बाद जैसे ही वे बिस्तर से नीचे पैर रखते हैं, तलवों में तेज दर्द महसूस होता है। शुरुआत के कुछ कदम चलना भी मुश्किल लग सकता है। हालांकि, थोड़ी देर चलने के बाद दर्द में कमी आ जाती है और व्यक्ति सामान्य तरीके से अपने काम करने लगता है। लेकिन दिनभर अधिक चलने, सीढ़ियां चढ़ने या लंबे समय तक खड़े रहने के बाद यही परेशानी दोबारा सामने आ सकती है। अगर आपके साथ भी ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसके पीछे पैरों के टिश्यू पर बढ़ता दबाव, गलत जूते पहनने की आदत या प्लांटर फैसिआइटिस जैसी समस्या हो सकती है।
पैरों में होने वाले इस दर्द की वजह हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। कुछ मामलों में यह सामान्य थकान और अधिक शारीरिक गतिविधि के कारण हो सकता है, जबकि दूसरे मामलों में पैरों की मांसपेशियों, टेंडन या अन्य टिश्यू से जुड़ी परेशानी इसकी वजह बन सकती है। इसलिए दर्द कब होता है, किस जगह महसूस होता है और कितनी देर तक बना रहता है, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। आइए जानते हैं कि सुबह उठते ही तलवों में दर्द क्यों हो सकता है, इससे राहत पाने के लिए क्या किया जा सकता है और किन परिस्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
सुबह के समय दर्द बढ़ने की क्या है वजह?
सुबह उठने के बाद तलवों में दर्द होने का एक प्रमुख कारण प्लांटर फैसिआइटिस हो सकता है। पैर के तलवे में एक मजबूत और मोटा टिश्यू होता है, जिसे प्लांटर फैसिया कहा जाता है। यह एड़ी की हड्डी से शुरू होकर पैर की उंगलियों की ओर फैला रहता है। चलने, खड़े होने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह टिश्यू पैर के आर्च यानी तलवे के बीच वाले घुमाव को सहारा देने के साथ-साथ हर कदम पर पड़ने वाले दबाव को संभालने में भी मदद करता है।
जब प्लांटर फैसिया पर लगातार जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है, तो उसमें जलन और छोटे-छोटे नुकसान हो सकते हैं। इस स्थिति को प्लांटर फैसिआइटिस कहा जाता है। रात में सोते समय पैरों को आराम मिलता है और टिश्यू की स्थिति में बदलाव आता है। सुबह पहला कदम रखते समय इस हिस्से पर दोबारा खिंचाव पड़ता है, जिससे एड़ी या तलवे के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस हो सकता है।
इस समस्या में आमतौर पर एड़ी के आसपास दर्द ज्यादा होता है। कुछ लोगों को तलवे के बीच के हिस्से में भी परेशानी महसूस हो सकती है। शुरुआत में दर्द अधिक रहने और थोड़ी देर चलने के बाद कम होने का पैटर्न इस समस्या में देखा जा सकता है। हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी का फैसला नहीं करना चाहिए, क्योंकि तलवों में दर्द होने के दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
आरामदायक जूते नहीं पहनने से बढ़ सकती है परेशानी
पैरों की सेहत पर फुटवियर का सीधा असर पड़ता है। अगर आप ऐसे जूते या चप्पल पहनते हैं, जिनमें तलवों को पर्याप्त सहारा नहीं मिलता, तो चलते समय पैरों पर दबाव बढ़ सकता है। बहुत पतले तलवे वाली चप्पल, घिस चुके जूते या ऐसे फुटवियर जिनमें कुशनिंग कम हो, लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर परेशानी पैदा कर सकते हैं।
यह समस्या उन लोगों में ज्यादा महसूस हो सकती है, जिन्हें काम के सिलसिले में लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है। कठोर फर्श पर लगातार चलने से भी एड़ी और तलवों पर दबाव बढ़ सकता है। यदि जूते पैरों के आकार के अनुसार नहीं हैं या पैर के आर्च को पर्याप्त सहारा नहीं देते, तो असुविधा और बढ़ सकती है।
इससे बचने के लिए ऐसे जूते चुनना बेहतर है, जिनमें आरामदायक कुशनिंग हो और एड़ी को उचित सहारा मिले। जूते न तो बहुत तंग होने चाहिए और न ही इतने ढीले कि चलते समय पैर बार-बार आगे-पीछे खिसके। घर में भी यदि नंगे पैर चलने से दर्द बढ़ता है, तो आरामदायक और सहारा देने वाली चप्पल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ज्यादा देर खड़े रहने से तलवों पर पड़ता है दबाव
दिनभर लगातार खड़े रहना या जरूरत से ज्यादा पैदल चलना भी पैरों में दर्द का कारण बन सकता है। दुकानों, अस्पतालों, फैक्ट्रियों, रसोई या अन्य कार्यस्थलों पर लंबे समय तक खड़े रहने वाले लोगों को अक्सर पैरों में थकान और भारीपन महसूस होता है। यदि इस दौरान पैरों को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो तलवों और एड़ी पर लगातार दबाव बना रह सकता है।
इसी तरह अचानक रोजाना चलने की दूरी बढ़ा देना या बिना तैयारी के दौड़ना शुरू कर देना भी पैरों के टिश्यू पर अतिरिक्त तनाव डाल सकता है। जो लोग लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियों से दूर रहते हैं और फिर एकदम से कठिन व्यायाम करने लगते हैं, उन्हें भी तलवों में दर्द की शिकायत हो सकती है।
इसलिए व्यायाम की शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए। यदि आपका काम लंबे समय तक खड़े रहने वाला है, तो संभव होने पर बीच-बीच में बैठकर आराम करें और शरीर की स्थिति बदलते रहें। लगातार दर्द होने पर उसे सहन करते हुए गतिविधियां जारी रखना उचित नहीं है।
वजन बढ़ने का भी हो सकता है असर
शरीर का वजन बढ़ने पर पैरों को हर कदम के साथ अधिक भार संभालना पड़ता है। इसका असर एड़ी, तलवों और उन्हें सहारा देने वाले टिश्यू पर पड़ सकता है। यदि पहले से प्लांटर फैसिया में परेशानी है, तो अतिरिक्त दबाव के कारण दर्द बढ़ सकता है।
हालांकि, तलवों में दर्द होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति का वजन अधिक ही होगा। सामान्य वजन वाले लोगों को भी गलत फुटवियर, अधिक गतिविधि, पैरों की बनावट या दूसरी शारीरिक समस्याओं के कारण यह परेशानी हो सकती है।
अगर वजन कम करने की जरूरत है, तो संतुलित भोजन और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाना उपयोगी हो सकता है। लेकिन दर्द के कारण चलना मुश्किल हो रहा हो, तो खुद पर अधिक व्यायाम करने का दबाव न डालें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेकर सुरक्षित गतिविधियां चुनना बेहतर होगा।
सुबह उठने से पहले करें पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग
यदि सुबह पहला कदम रखते ही तलवों में दर्द होता है, तो बिस्तर से उठने से पहले पैरों को धीरे-धीरे हिलाना कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकता है। पैरों की उंगलियों को आराम से अपनी तरफ खींचकर कुछ सेकंड रोकें और फिर छोड़ दें। इस दौरान एड़ी और तलवे पर पड़ने वाले खिंचाव को महसूस करें। इसके अलावा टखनों को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने से भी पैरों को हल्का मूवमेंट मिल सकता है।
स्ट्रेचिंग करते समय किसी भी तरह का तेज दर्द होने पर तुरंत रुक जाना चाहिए। जबरदस्ती पैर खींचना या दर्द वाले हिस्से पर अधिक दबाव डालना परेशानी बढ़ा सकता है। यदि दर्द बार-बार हो रहा है, तो फिजियोथेरेपिस्ट से सही स्ट्रेचिंग तकनीक सीखना उपयोगी रहेगा।
दिनभर में भी पैरों को जरूरत के अनुसार आराम दें। अचानक लंबी दूरी तक चलने या कठिन व्यायाम करने से बचें। गतिविधियों को धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है, ताकि पैरों को नए दबाव के अनुसार ढलने का समय मिल सके।
बर्फ से मिल सकती है अस्थायी राहत
तलवों या एड़ी में दर्द होने पर ठंडी सिकाई से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है। इसके लिए बर्फ को सीधे त्वचा पर रखने के बजाय साफ कपड़े में लपेटकर दर्द वाले हिस्से पर लगभग 15 से 20 मिनट तक लगाया जा सकता है। यदि त्वचा में सुन्नपन, जलन या असहजता महसूस हो, तो सिकाई बंद कर दें। जिन लोगों को पैरों में संवेदना कम महसूस होती है या रक्त संचार से जुड़ी समस्या है, उन्हें ठंडी सिकाई करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
दर्द के दौरान आरामदायक फुटवियर पहनना और ऐसी गतिविधियों को सीमित करना भी जरूरी है, जिनसे परेशानी बढ़ती है। ध्यान रखें कि बर्फ लगाने से हर प्रकार के दर्द का कारण दूर नहीं होता। यदि दर्द लगातार बना रहता है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय उसकी सही वजह का पता लगाना चाहिए।
किन लक्षणों में डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
अगर तलवों में दर्द कई दिनों तक बना रहता है, बार-बार लौटता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित करने लगता है, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है। खासकर यदि दर्द इतना ज्यादा हो कि सामान्य तरीके से चलना मुश्किल हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पैर में अचानक तेज दर्द, स्पष्ट सूजन, लालिमा, गर्माहट, चोट के बाद दर्द या पैर पर वजन न रख पाने जैसी स्थिति में जल्द चिकित्सकीय सहायता लें। यदि पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या संवेदना में बदलाव महसूस हो, तो भी जांच जरूरी हो सकती है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों को पैरों में किसी नए घाव, सूजन या लगातार दर्द होने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर अन्य परीक्षणों की मदद से दर्द की वजह समझ सकते हैं। उपचार समस्या के कारण पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में गतिविधियों में बदलाव, सही फुटवियर और विशेष व्यायाम से सुधार हो सकता है, जबकि दूसरी स्थितियों में अलग उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
पैरों के दर्द से बचने के लिए इन आदतों पर दें ध्यान
पैरों को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है। सही आकार के जूते पहनें, घिस चुके फुटवियर बदलें और ऐसे जूते चुनें जो एड़ी तथा तलवे को पर्याप्त सहारा दें। लंबे समय तक खड़े रहने पर बीच-बीच में आराम करें और व्यायाम की तीव्रता अचानक न बढ़ाएं। यदि किसी गतिविधि से दर्द बढ़ता है, तो कुछ समय के लिए उसमें बदलाव करें।
सबसे जरूरी बात यह है कि सुबह उठते ही एड़ी या तलवों में दर्द को हमेशा सामान्य थकान न मानें। कभी-कभार होने वाली हल्की परेशानी आराम से ठीक हो सकती है, लेकिन नियमित रूप से होने वाला दर्द किसी ऐसी समस्या का संकेत भी हो सकता है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है। सही समय पर जांच, उचित फुटवियर और जरूरत के अनुसार उपचार अपनाकर पैरों की परेशानी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
(Photo : AI Generated)




