बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना पड़ सकता है भारी, जानें किन गलतियों से शरीर को पहुंच सकता है नुकसान

बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना पड़ सकता है भारी, जानें किन गलतियों से शरीर को पहुंच सकता है नुकसान

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद ही दवा लेना शुरू कर देते हैं। कभी सिरदर्द होने पर दर्द निवारक गोली खा ली जाती है, तो कभी सर्दी, खांसी या बुखार होने पर मेडिकल स्टोर से दवा खरीद ली जाती है। कई लोगों को लगता है कि पहले इस्तेमाल की गई दवा दोबारा लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं, कुछ लोग इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपने लक्षणों के आधार पर दवाओं के नाम पता करके उनका सेवन करने लगते हैं। शुरुआत में यह तरीका आसान और समय बचाने वाला नजर आ सकता है, लेकिन बिना सही चिकित्सकीय सलाह के दवाइयां लेना सेहत के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

दवा का चुनाव केवल बीमारी के लक्षण देखकर नहीं किया जाता। मरीज की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां, एलर्जी, चल रही दवाइयां और शरीर की स्थिति भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में गलत दवा, जरूरत से अधिक खुराक या लंबे समय तक दवा का इस्तेमाल शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञ भी दवाओं का इस्तेमाल सोच-समझकर और निर्धारित निर्देशों के अनुसार करने की सलाह देते हैं।

खुद से दवा लेने की आदत क्यों बन सकती है परेशानी का कारण?

कई बार सामान्य दिखाई देने वाले लक्षण किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, बार-बार सिरदर्द होना, लगातार पेट में दर्द रहना या लंबे समय तक बुखार बने रहना किसी ऐसी परेशानी से जुड़ा हो सकता है, जिसकी पहचान केवल लक्षणों के आधार पर करना मुश्किल है। यदि व्यक्ति बिना जांच कराए दवा लेकर लक्षणों को दबाता रहता है, तो सही बीमारी का पता लगाने में देरी हो सकती है।

एमएमजी फार्मा के डॉक्टर नरेंद्र शर्मा के मुताबिक, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से कई तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं। किसी दवा से शरीर में रिएक्शन हो सकता है और गलत मात्रा में सेवन करने पर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कुछ मामलों में शरीर के अंगों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

इसके अलावा, हर व्यक्ति पर किसी दवा का असर एक जैसा नहीं होता। एक व्यक्ति को जिस दवा से राहत मिलती है, जरूरी नहीं कि वही दवा दूसरे व्यक्ति के लिए भी सुरक्षित हो। इसलिए किसी परिचित की सलाह पर या पहले इस्तेमाल की गई दवा के आधार पर इलाज शुरू करना उचित नहीं है।

दर्द निवारक गोलियों का बार-बार सेवन कितना सुरक्षित?

सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों की तकलीफ या शरीर में अकड़न होने पर लोग अक्सर दर्द कम करने वाली दवाओं का सहारा लेते हैं। इनमें से कुछ दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के भी उपलब्ध होती हैं। हालांकि, आसानी से मिल जाने का मतलब यह नहीं है कि उनका इस्तेमाल हर परिस्थिति में सुरक्षित है।

दर्द कम करने वाली दवाओं में NSAIDs यानी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स का एक महत्वपूर्ण समूह शामिल है। इनका उपयोग दर्द और सूजन कम करने के लिए किया जाता है। लेकिन इन दवाओं का जरूरत से ज्यादा सेवन, लंबे समय तक इस्तेमाल या कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में उपयोग नुकसानदेह हो सकता है।

इनसे पेट में जलन, अपच और पेट में अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों में पेट या आंतों से रक्तस्राव का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसके अतिरिक्त, कुछ NSAIDs किडनी के कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में हृदय संबंधी जोखिम भी बढ़ा सकती हैं।

जिन लोगों को पहले से किडनी, हृदय या पेट से जुड़ी बीमारी है, उन्हें ऐसी दवाओं का इस्तेमाल विशेष सावधानी से करना चाहिए। बुजुर्गों और कुछ अन्य दवाइयां लेने वाले लोगों के लिए भी अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो सकती है।

इसलिए दर्द होने पर हर बार गोली खाना या लगातार कई दिनों तक दर्द निवारक दवा लेना सही तरीका नहीं है। यदि दर्द बार-बार हो रहा है, लंबे समय तक बना हुआ है या उसकी वजह स्पष्ट नहीं है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

दवा की सही खुराक और सेवन का तरीका जानना क्यों जरूरी?

दवा खरीदते समय केवल उसका नाम जानना पर्याप्त नहीं होता। यह समझना भी जरूरी है कि दवा कितनी मात्रा में लेनी है, कितने अंतराल पर लेनी है और उसका इस्तेमाल कितने समय तक किया जाना चाहिए। कुछ दवाएं भोजन के साथ ली जाती हैं, जबकि कुछ को खाली पेट लेने के निर्देश हो सकते हैं। हालांकि, इसका सही तरीका संबंधित दवा के निर्देशों और चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करता है।

डॉक्टर नरेंद्र शर्मा के अनुसार, दवा के रूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन यानी शरीर में दवा पहुंचाने के तरीके की जानकारी होना भी महत्वपूर्ण है। दवाएं टैबलेट, कैप्सूल, सिरप, इंजेक्शन, क्रीम या अन्य रूपों में हो सकती हैं। हर दवा का इस्तेमाल उसके निर्धारित तरीके से ही किया जाना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति निर्देशों को समझे बिना दवा लेता है, तो उससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। गलत मात्रा लेने से साइड इफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह, निर्धारित समय से पहले दोबारा खुराक लेना या छूटी हुई खुराक की भरपाई के लिए एक साथ अधिक दवा ले लेना भी परेशानी पैदा कर सकता है।

ध्यान रखें कि दवा की खुराक उम्र, वजन, बीमारी और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के लिए निर्धारित मात्रा को अपने लिए सही मान लेना उचित नहीं है।

मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली OTC दवाओं को लेकर न बरतें लापरवाही

OTC यानी ओवर-द-काउंटर दवाएं वे दवाएं हैं, जिन्हें संबंधित नियमों के तहत डॉक्टर के पर्चे के बिना खरीदा जा सकता है। सामान्य दर्द, बुखार या कुछ अन्य हल्की समस्याओं के लिए ऐसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इनके मामले में भी सावधानी बरतना आवश्यक है।

बिना पर्चे के उपलब्ध दवाओं को निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल करना चाहिए। पैकेट या लेबल पर दी गई जानकारी पढ़ना, खुराक की सीमा समझना और एक्सपायरी डेट जांचना जरूरी है। यदि किसी दवा को लेने के बाद असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो उसका इस्तेमाल जारी रखने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

एक अन्य समस्या यह है कि कई दवाओं में एक ही सक्रिय तत्व मौजूद हो सकता है। उदाहरण के लिए, सर्दी-जुकाम की कुछ दवाओं और अलग से ली जाने वाली दर्द या बुखार की दवाओं में समान तत्व हो सकते हैं। ऐसे में दोनों का सेवन करने पर अनजाने में एक ही दवा की कुल मात्रा जरूरत से अधिक हो सकती है।

इसी वजह से एक साथ कई दवाएं लेने से पहले उनके घटकों की जानकारी लेना जरूरी है। यदि किसी दवा के बारे में संदेह हो, तो फार्मासिस्ट या डॉक्टर से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी का इलाज करा रहे लोगों को दवा चुनते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।

पुरानी पर्ची देखकर दोबारा दवा लेना भी सही नहीं

कुछ लोग पहले डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा को संभालकर रखते हैं और बीमारी के लक्षण दोबारा सामने आने पर उसी पर्चे के आधार पर दवा खरीद लेते हैं। उन्हें लगता है कि पहले राहत देने वाली दवा इस बार भी उतना ही फायदा करेगी। लेकिन हर बार लक्षणों की वजह समान हो, यह जरूरी नहीं है।

समय के साथ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति बदल सकती है। इस बीच कोई दूसरी बीमारी विकसित हो सकती है या मरीज नई दवाएं लेना शुरू कर सकता है। ऐसी परिस्थितियों में पहले इस्तेमाल की गई दवा का दोबारा सेवन जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ दवाओं के गलत इस्तेमाल से निर्भरता या लत लगने की आशंका भी होती है। विशेष रूप से नियंत्रित श्रेणी की दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। नारकोटिक या अन्य नियंत्रित दवाओं को बिना उचित चिकित्सकीय निगरानी के लेना गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

डॉक्टर की पुरानी पर्ची को वर्तमान इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। यदि वही परेशानी दोबारा हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करके यह पता लगाना बेहतर है कि पुरानी दवा की जरूरत है या किसी अन्य उपचार की।

इंटरनेट और AI से दवा की जानकारी लेना कितना उचित?

आज इंटरनेट पर स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध है। AI टूल भी सामान्य लक्षणों और दवाओं के बारे में जानकारी दे सकते हैं। इससे लोगों को किसी स्वास्थ्य समस्या को समझने में मदद मिल सकती है, लेकिन इन माध्यमों को डॉक्टर की जांच और सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

ऑनलाइन जानकारी के आधार पर किसी बीमारी की स्वयं पहचान करना या सीधे दवा शुरू कर देना जोखिम पैदा कर सकता है। एक जैसे लक्षण अलग-अलग बीमारियों में दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, इंटरनेट पर उपलब्ध हर जानकारी विश्वसनीय या व्यक्ति की विशेष स्थिति के अनुकूल नहीं होती।

AI से मिली जानकारी में भी गलतियां या अधूरी बातें हो सकती हैं। इसलिए दवा का नाम, खुराक या इलाज तय करने के लिए केवल चैटबॉट, सोशल मीडिया पोस्ट या अनजान वेबसाइट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इन माध्यमों का इस्तेमाल सामान्य जानकारी जुटाने और डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवाल तैयार करने के लिए किया जा सकता है।

दवा लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?

सेहत को सुरक्षित रखने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।

  • डॉक्टर की सलाह के बिना नई दवा शुरू न करें, विशेष रूप से यदि पहले से कोई बीमारी है या दूसरी दवाएं चल रही हैं।
  • दवा की खुराक और सेवन का समय निर्धारित निर्देशों के अनुसार रखें।
  • एक साथ कई दवाएं लेने से पहले उनके घटकों और संभावित आपसी प्रभावों के बारे में जानकारी लें।
  • किसी अन्य व्यक्ति की पर्ची या बची हुई दवाओं का इस्तेमाल न करें।
  • एंटीबायोटिक और नियंत्रित दवाओं का इस्तेमाल केवल उचित चिकित्सकीय निर्देशों के अनुसार करें।
  • दवा लेने के बाद सांस लेने में परेशानी, चेहरे या गले में सूजन, बेहोशी या गंभीर एलर्जी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

सेहत के मामले में खुद डॉक्टर बनने से बचें

छोटी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दवा का चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी है। मेडिकल स्टोर पर दवा आसानी से मिल जाना, पहले उससे राहत मिलना या इंटरनेट पर उसके बारे में सकारात्मक जानकारी पढ़ लेना उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। गलत दवा और गलत खुराक से बचने के लिए बीमारी की वजह समझना और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

यदि कोई लक्षण लगातार बना रहता है, बार-बार लौटता है या समय के साथ गंभीर होता जाता है, तो केवल दवा लेकर उसे दबाने के बजाय उसकी जांच करानी चाहिए। सही दवा, उचित मात्रा और निर्धारित अवधि का पालन करने से इलाज अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। आखिरकार, थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर उन जोखिमों से बचा जा सकता है, जो बिना सोचे-समझे दवा लेने की आदत से पैदा हो सकते हैं।