ईरान ने अपने रक्षा मंत्रालय की कमान मेहरदाद अखलाघी केताबची को सौंप दी है। देश की संसद से मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाली है, जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का सैन्य तनाव लगातार चर्चा में है। अखलाघी को मिसाइल विकास, एयरोस्पेस तकनीक और सैन्य उत्पादन के क्षेत्र में लंबे अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए रक्षा ढांचे को दोबारा तैयार करना, सैन्य उत्पादन को आगे बढ़ाना और देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।
अखलाघी की नियुक्ति को ईरान की रक्षा नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी एक वजह उनका तकनीकी अनुभव है, जबकि दूसरी वजह यह है कि अमेरिका ने पहले ही उनके साथ कई ईरानी रक्षा संस्थानों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसे में उनकी नई भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
संसद की मंजूरी के बाद संभाली रक्षा मंत्रालय की कमान
ईरान की संसद ने रविवार को मेहरदाद अखलाघी केताबची के नाम पर मुहर लगाई। मतदान के दौरान 237 सांसदों ने उनके समर्थन में वोट दिया, जबकि 15 सांसदों ने उनके खिलाफ मतदान किया। 68 वर्षीय अखलाघी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब ईरान को अपनी सैन्य क्षमताओं और रक्षा प्रतिष्ठानों को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रक्षा मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल सैन्य योजनाओं तक सीमित नहीं होगी। उन्हें रक्षा मंत्रालय से जुड़े संगठनों के कामकाज, हथियारों के निर्माण, तकनीकी अनुसंधान और सैन्य जरूरतों के अनुरूप उत्पादन व्यवस्था को आगे बढ़ाना होगा। इसके अलावा, युद्ध के दौरान प्रभावित हुए सैन्य-औद्योगिक ढांचे की स्थिति का आकलन करना और उसे दोबारा व्यवस्थित करना भी उनके कार्यभार का हिस्सा होगा।
अखलाघी की नियुक्ति को लेकर पहले ही वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति आयोग की ओर से समर्थन मिलने की जानकारी सामने आई थी। इससे संकेत मिलता है कि उनके नाम पर फैसला करने से पहले रक्षा क्षेत्र में उनके अनुभव और प्रस्तावित योजनाओं पर विचार किया गया।
युद्ध के बाद रक्षा ढांचे को दोबारा खड़ा करने की चुनौती
ईरान के नए रक्षा मंत्री के सामने सबसे अहम काम देश की सैन्य उत्पादन क्षमता को मजबूत करना होगा। अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रक्षा से जुड़े ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे हालात में हथियार निर्माण से संबंधित संस्थानों की कार्यक्षमता बहाल करना और रक्षा उत्पादन की निरंतरता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
ईरान के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र में मिसाइलों, रॉकेटों, एयरोस्पेस प्रणालियों और अन्य सैन्य उपकरणों का विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अखलाघी का अनुभव इन्हीं क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। इसलिए उनकी नियुक्ति को रक्षा मंत्रालय के तकनीकी और औद्योगिक कामकाज के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, किसी भी रक्षा ढांचे के पुनर्निर्माण में केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए आर्थिक संसाधन, कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन इकाइयों की क्षमता और विशेषज्ञ कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण ईरान की रक्षा कंपनियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना और जरूरी संसाधन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऐसे में अखलाघी को सैन्य जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के बीच तालमेल स्थापित करना होगा। उनके कार्यकाल में रक्षा उत्पादन की दिशा और मंत्रालय की प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है।
बैलिस्टिक मिसाइलों और एयरोस्पेस तकनीक में विशेषज्ञता
ईरानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मेहरदाद अखलाघी को बैलिस्टिक मिसाइलों, सॉलिड-फ्यूल प्रोपल्शन, एयरोस्पेस तकनीक और सैन्य-औद्योगिक उत्पादन का विशेषज्ञ माना जाता है। रक्षा क्षेत्र में उनका अनुभव चार दशक से अधिक पुराना बताया गया है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के अनुसार, अखलाघी रक्षा मंत्रालय और उससे संबंधित संगठनों में 42 साल से अधिक समय तक काम कर चुके हैं। इतने लंबे अनुभव के कारण उन्हें मंत्रालय की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ रक्षा अनुसंधान और उत्पादन से जुड़े विषयों की भी जानकारी है।
मिसाइल तकनीक ईरान की रक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में प्रणोदन प्रणाली, मार्गदर्शन तकनीक, संरचनात्मक डिजाइन और परीक्षण जैसी कई जटिल प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इसी तरह एयरोस्पेस क्षेत्र में अनुसंधान और रॉकेट प्रौद्योगिकी का उपयोग अंतरिक्ष कार्यक्रमों के साथ-साथ कई रक्षा परियोजनाओं में भी किया जाता है।
अखलाघी का अनुभव इन क्षेत्रों से जुड़ा होने के कारण रक्षा मंत्रालय में तकनीकी परियोजनाओं की समीक्षा और औद्योगिक क्षमता को व्यवस्थित करने में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के बाद इन परियोजनाओं में किस तरह के बदलाव किए जाएंगे, इस बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
शाहिद बघेरी समेत कई रक्षा संस्थानों में कर चुके हैं काम
मेहरदाद अखलाघी इससे पहले ईरान के कई प्रमुख रक्षा और एयरोस्पेस संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। इनमें शाहिद बघेरी इंडस्ट्रियल ग्रुप, एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन और डिफेंस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन शामिल हैं।
इन संस्थानों का संबंध ईरान के रक्षा उत्पादन, सैन्य उपकरणों और तकनीकी विकास से रहा है। इन संगठनों में काम करने के दौरान अखलाघी को रक्षा क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों और संबंधित परियोजनाओं का अनुभव मिला।
लेकिन इन संस्थानों और अखलाघी का नाम अमेरिकी प्रतिबंधों से भी जुड़ा हुआ है। अमेरिका ने इन पर प्रतिबंध लगाए हैं और अखलाघी पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी लागू बताए गए हैं। प्रतिबंधों के इस पहलू के कारण उनकी नियुक्ति को केवल ईरान की आंतरिक प्रशासनिक नियुक्ति के रूप में नहीं देखा जा रहा।
अमेरिकी प्रतिबंधों का उद्देश्य संबंधित व्यक्तियों और संगठनों की वित्तीय गतिविधियों तथा अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर रोक या सीमाएं लगाना होता है। ऐसे प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव उनके दायरे, संबंधित नियमों और अलग-अलग देशों में लागू व्यवस्थाओं पर निर्भर करता है।
अखलाघी की नियुक्ति के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया और ईरान के रक्षा मंत्रालय के साथ उसके संबंधों पर भी ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, उनकी नियुक्ति से अमेरिका की ओर से कोई नई कार्रवाई होगी या नहीं, इसका निश्चित अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है।
सेज्जील और जोलफाघार मिसाइल परियोजनाओं से जुड़ा नाम
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े समाचार संगठन तस्नीम की रिपोर्टों के अनुसार, अखलाघी कई दशकों तक विभिन्न मिसाइल विकास परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। रिपोर्टों में सेज्जील और जोलफाघार बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ अलमास मिसाइल तथा यासीन गाइडेड बमों के विकास में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है।
ये नाम ईरान के रक्षा कार्यक्रमों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मिसाइल और निर्देशित हथियार प्रणालियों का विकास किसी भी देश की सैन्य योजना, तकनीकी अनुसंधान और रक्षा उत्पादन से जुड़ा होता है। इन प्रणालियों के निर्माण में कई संस्थानों और विशेषज्ञ टीमों की भूमिका रहती है।
हालांकि, किसी परियोजना से जुड़े अधिकारी की भूमिका और उसके अंतिम परिणामों का आकलन अलग-अलग विषय हैं। इसलिए अखलाघी के अनुभव को समझने के लिए उनके पूर्व पदों और उनसे जुड़ी रिपोर्टों को ध्यान में रखना जरूरी है।
रक्षा मंत्री बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी पहले की परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों के अनुसार मंत्रालय की जरूरतों, संसाधनों और रक्षा उत्पादन से जुड़े फैसलों पर काम करना होगा।
अंतरिक्ष कार्यक्रम और रॉकेट तकनीक का भी अनुभव
अखलाघी की विशेषज्ञता केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं बताई जाती। ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों, अनुसंधान रॉकेटों और सेमनान स्थित इमाम खुमैनी स्पेस सेंटर से संबंधित बुनियादी ढांचे की भी जानकारी है।
ईरान का अंतरिक्ष कार्यक्रम लंबे समय से उसके वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं का हिस्सा रहा है। इसमें रॉकेट प्रौद्योगिकी, उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता और संबंधित अनुसंधान सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, अंतरिक्ष प्रक्षेपण तकनीक और सैन्य मिसाइल कार्यक्रमों के उद्देश्य अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ तकनीकी क्षेत्रों में इनके बीच समानताएं भी पाई जाती हैं।
इसी कारण ईरान के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों को लेकर अमेरिका समेत कई देशों की नजर बनी रहती है। दूसरी ओर, ईरान अपने कार्यक्रमों को राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी विकास से जोड़कर देखता है।
अखलाघी का अनुभव इस क्षेत्र में रक्षा मंत्रालय की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। फिर भी उनके नए कार्यकाल में अंतरिक्ष कार्यक्रमों को कितनी प्राथमिकता मिलेगी, इस बारे में फिलहाल किसी विशिष्ट नई योजना की पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी हमले की आशंका के बीच सख्त संदेश
रक्षा मंत्री बनने के बाद अखलाघी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान पर हमला किया गया, तो अमेरिकी सेना के ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
ईरान की ओर से इस तरह की चेतावनियां उसकी घोषित जवाबी रणनीति का हिस्सा रही हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा चिंताएं भी क्षेत्रीय तनाव का एक प्रमुख पहलू रही हैं। ऐसे बयानों का वास्तविक असर संबंधित देशों के फैसलों और घटनाक्रम पर निर्भर करता है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हवाई हमलों में कई वरिष्ठ ईरानी नेताओं और सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। इन मृतकों में तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और पूर्व रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह का नाम भी बताया गया था।
इन घटनाओं के बाद ईरान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हुए। रक्षा मंत्रालय में भी नेतृत्व परिवर्तन इसी व्यापक घटनाक्रम की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
माजिद इब्न-ए-रेजा अब निभाएंगे उप रक्षा मंत्री की भूमिका
पूर्व रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह की मौत के बाद माजिद इब्न-ए-रेजा को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब मेहरदाद अखलाघी की नियुक्ति के बाद माजिद इब्न-ए-रेजा उप रक्षा मंत्री की भूमिका निभाएंगे।
इस बदलाव के साथ रक्षा मंत्रालय में नेतृत्व की नई व्यवस्था सामने आई है। अखलाघी का लंबा तकनीकी और प्रशासनिक अनुभव तथा माजिद इब्न-ए-रेजा की नई भूमिका मंत्रालय के कामकाज में किस तरह का तालमेल बनाएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
फिलहाल ईरान के नए रक्षा मंत्री के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं—युद्ध से प्रभावित रक्षा ढांचे को बहाल करना, मिसाइल और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में सैन्य उत्पादन को बनाए रखना तथा बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच देश की रक्षा जरूरतों का प्रबंधन करना। उनकी नियुक्ति ऐसे दौर में हुई है, जब ईरान की सुरक्षा नीति, सैन्य क्षमता और अमेरिका के साथ संबंध क्षेत्रीय घटनाक्रम के महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।




