धनतेरस पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 खास उपाय, जानें किस दिन है धनत्रयोदशी और क्यों खास है प्रदोष काल

धनतेरस पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 खास उपाय, जानें किस दिन है धनत्रयोदशी और क्यों खास है प्रदोष काल

दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और खरीदारी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली महापर्व का आगाज धनतेरस से होता है। हिंदू धर्म में इस दिन को बेहद खास माना गया है। मान्यता है कि धनतेरस के अवसर पर विधि-विधान से भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। यही वजह है कि इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ नई वस्तुएं खरीदने की भी परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन और दूसरी शुभ वस्तुएं खरीदकर घर लाते हैं। हालांकि, इस बार धनतेरस की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि यह पर्व 5 नवंबर को मनाया जाएगा या 6 नवंबर को? आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार धनतेरस की सही तारीख, इसका धार्मिक महत्व और उन सात चीजों के बारे में जिन्हें इस दिन घर लाना शुभ माना जाता है।

6 नवंबर को मनाया जाएगा धनतेरस का त्योहार

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से ही दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। इस साल त्रयोदशी तिथि को लेकर तारीखों में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में पर्व की सही तिथि जानने के लिए तिथि के साथ-साथ प्रदोष काल का महत्व समझना जरूरी है।

वैदिक पंचांग की गणना के मुताबिक, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर आरंभ होगी। वहीं, इसका समापन 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा। उदयातिथि के हिसाब से देखा जाए तो 7 नवंबर को त्रयोदशी तिथि मौजूद रहेगी, लेकिन धनतेरस का मुख्य पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

दरअसल, धनतेरस की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। इस वजह से केवल सूर्योदय के समय तिथि की मौजूदगी को आधार नहीं माना जाता। 6 नवंबर को शुक्रवार होने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। ऐसे में धनतेरस और शुक्रवार का संयोग भक्तों के लिए विशेष शुभ माना जा रहा है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का क्या है महत्व?

धनतेरस का संबंध केवल धन-दौलत और खरीदारी से नहीं है, बल्कि इस त्योहार का गहरा जुड़ाव स्वास्थ्य और आयुर्वेद से भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। यह घटना कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को संध्या के समय हुई थी। इसी कारण इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी बताया गया है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। यही वजह है कि धनतेरस पर लोग अपने परिवार की सेहत और खुशहाली के लिए भगवान धन्वंतरि से प्रार्थना करते हैं।

इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना का भी विशेष विधान है। जहां माता लक्ष्मी को धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है, वहीं कुबेर देव को धन का संरक्षक कहा गया है। इसलिए धनतेरस पर इन तीनों देवी-देवताओं की पूजा करके परिवार की उन्नति और आर्थिक खुशहाली की कामना की जाती है।

सूर्यास्त के बाद पूजा करना क्यों माना जाता है फलदायी?

धनतेरस के दिन पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद शुरू होने वाली अवधि को प्रदोष काल कहा जाता है। इस समय को भगवान शिव की उपासना के लिए भी विशेष माना जाता है, जबकि धनतेरस पर माता लक्ष्मी की पूजा के लिहाज से भी इसका महत्व है।

पौराणिक मान्यताओं में कहा गया है कि प्रदोष काल के दौरान माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। इस समय वह उन घरों में प्रवेश करती हैं जहां स्वच्छता, सकारात्मक वातावरण और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया जाता है। इसलिए धनतेरस से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करने, मुख्य द्वार को सजाने और दीप जलाने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। भक्त इस दौरान दीपक जलाते हैं और परिवार की उन्नति के लिए प्रार्थना करते हैं। माना जाता है कि शुभ समय में की गई पूजा से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।

हालांकि, पूजा करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। घर के पूजा स्थल को साफ करके देवी-देवताओं के सामने दीपक, फूल और प्रसाद अर्पित किया जाता है। इसके अलावा परिवार के सदस्य मिलकर आरती करते हैं और सुखी जीवन की कामना करते हैं।

धनतेरस पर जरूर खरीदें ये 7 शुभ चीजें

धनतेरस का नाम आते ही सबसे पहले खरीदारी का ख्याल आता है। इस दिन बाजारों में सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर बर्तनों और घर की सजावट के सामान तक की खूब बिक्री होती है। वास्तु शास्त्र और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं में कुछ वस्तुओं को इस दिन घर लाना विशेष शुभ बताया गया है। माना जाता है कि इन चीजों की खरीदारी से घर में सकारात्मकता और समृद्धि का आगमन होता है।

1. सोना खरीदना माना जाता है शुभ

धनतेरस के अवसर पर सोना खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। इस दिन लोग सोने के सिक्के, आभूषण या अन्य वस्तुएं खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोने को समृद्धि, वैभव और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि धनतेरस पर सोना घर लाने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। हालांकि, सोना खरीदते समय अपने बजट और जरूरत का ध्यान रखना भी जरूरी है।

2. चांदी की वस्तुएं घर लाएं

सोने के अलावा चांदी की खरीदारी को भी धनतेरस पर शुभ माना जाता है। इस दिन चांदी के सिक्के, बर्तन, पूजा के सामान या आभूषण खरीदे जा सकते हैं। कई परिवारों में चांदी के सिक्कों पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आकृति बनी होती है। इन्हें दीपावली के दिन पूजा में शामिल करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चांदी को शुभता और शीतलता का प्रतीक माना जाता है।

3. तांबे के बर्तन खरीदें

धनतेरस पर धातु के बर्तन खरीदने का विशेष महत्व है। इनमें तांबे के बर्तनों को भी शुभ माना जाता है। लोग तांबे के लोटे, थाली, गिलास या पूजा में इस्तेमाल होने वाले दूसरे बर्तन खरीदते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, तांबा धार्मिक कार्यों में उपयोग की जाने वाली पवित्र धातुओं में शामिल है। इसलिए इस दिन तांबे की कोई वस्तु घर लाना अच्छा माना जाता है।

4. झाड़ू खरीदना न भूलें

धनतेरस की खरीदारी में झाड़ू का भी खास स्थान है। आमतौर पर लोग इसे घर की सफाई का साधन मानते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसका संबंध माता लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है। माना जाता है कि झाड़ू घर से गंदगी और नकारात्मकता को बाहर करने का प्रतीक है। इसलिए धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना शुभ समझा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।

5. गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियां लाएं

दीपावली की पूजा में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का विशेष स्थान है। ऐसे में धनतेरस के दिन इनकी मूर्तियां खरीदना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी पसंद और परंपरा के अनुसार मिट्टी, धातु या अन्य सामग्री से बनी प्रतिमाएं खरीद सकते हैं। इसके बाद दीपावली के दिन विधि-विधान से इनकी स्थापना करके पूजा की जाती है। मान्यता है कि गणेश जी विघ्न दूर करते हैं और माता लक्ष्मी धन-वैभव का आशीर्वाद देती हैं।

6. धनिए के बीज खरीदना भी है शुभ

धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनिए के बीजों को खुशहाली, उन्नति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कुछ परिवार धनिए को माता लक्ष्मी की पूजा में अर्पित करते हैं। इसके अलावा दीपावली की पूजा के बाद इसे शुभ मानकर घर में सुरक्षित रखने की परंपरा भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में धन-धान्य की कमी नहीं होती।

7. नमक खरीदना भी माना जाता है मंगलकारी

धनतेरस की खरीदारी में नमक को भी शामिल किया जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार, नमक का इस्तेमाल घर की नकारात्मकता दूर करने और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के प्रतीक के रूप में किया जाता है। इसलिए इस दिन नमक का नया पैकेट खरीदकर घर लाना शुभ समझा जाता है। कई लोग दीपावली के आसपास घर की सफाई में भी नमक का इस्तेमाल करते हैं।

दीपावली पर इन वस्तुओं की पूजा करने की भी है परंपरा

धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तुओं को केवल घर लाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि कई परिवारों में इन्हें दीपावली की पूजा में भी शामिल किया जाता है। सोने-चांदी के सिक्कों, गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं और दूसरी शुभ वस्तुओं को साफ करके पूजा स्थल पर रखा जाता है। इसके बाद दीप जलाकर विधि-विधान से आराधना की जाती है।

धार्मिक विश्वास है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य, सुख-शांति तथा खुशहाली बनी रहती है। हालांकि, इन परंपराओं का आधार धार्मिक आस्था और मान्यताएं हैं। इसलिए खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही करनी चाहिए। धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल नई वस्तुएं खरीदना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करना भी है।

इस बार 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में श्रद्धालु इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करके दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ कर सकते हैं।

(Photo : AI Generated)