दिवाली पर दीये जलाने से पहले जरूर करें ये काम, तेल की बर्बादी होगी कम और देर तक रोशन रहेगा घर!

दिवाली पर दीये जलाने से पहले जरूर करें ये काम, तेल की बर्बादी होगी कम और देर तक रोशन रहेगा घर!

दिवाली का पर्व नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस त्योहार की सबसे खास पहचान मिट्टी के दीये हैं, जिनकी रोशनी से घर-आंगन जगमगा उठता है। बाजारों में भी इन दिनों अलग-अलग आकार और डिजाइन के दीयों की खूब खरीदारी होती है। हालांकि, दीये खरीदने के बाद उन्हें सीधे तेल या घी से भरकर जलाना हमेशा सही तरीका नहीं माना जाता। पुराने समय से चली आ रही एक छोटी-सी परंपरा आज भी काफी काम की साबित हो सकती है। इसके मुताबिक, नए मिट्टी के दीयों को इस्तेमाल करने से पहले कुछ घंटों तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए।

कई घरों में दिवाली से एक दिन पहले ही दीयों को पानी से भरे बर्तन में डाल दिया जाता है। इसके बाद उन्हें निकालकर सुखाया जाता है और फिर पूजा के समय इस्तेमाल किया जाता है। देखने में यह एक सामान्य घरेलू प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन इसके पीछे मिट्टी की बनावट से जुड़ी एक वजह बताई जाती है। माना जाता है कि इस तरीके से नए दीयों द्वारा तेल सोखने की मात्रा कम हो सकती है। इससे तेल या घी का इस्तेमाल बेहतर तरीके से होता है और दीये की बाती को जलने के लिए पर्याप्त ईंधन मिल पाता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि पानी में भिगोने से दीये के पूरी रात जलने की गारंटी नहीं मिलती। दीये का आकार, मिट्टी की गुणवत्ता, बाती की मोटाई, तेल की मात्रा और हवा जैसी परिस्थितियां भी उसके जलने के समय को प्रभावित करती हैं। आइए जानते हैं कि इस पारंपरिक तरीके को क्यों अपनाया जाता है, इसे करने का सही तरीका क्या है और इसके दूसरे फायदे क्या हो सकते हैं।

नए मिट्टी के दीये इस्तेमाल करने से पहले क्यों जरूरी है तैयारी?

मिट्टी से बने दीये देखने में भले ही मजबूत दिखाई दें, लेकिन उनकी बनावट में बहुत छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। मिट्टी को आकार देने और भट्ठी में पकाने के बाद भी उसकी सतह पूरी तरह से कांच जैसी चिकनी और बंद नहीं होती। इसी वजह से मिट्टी में कुछ मात्रा में तरल पदार्थ सोखने की क्षमता बनी रहती है।

जब बाजार से नया दीया खरीदकर उसमें सीधे सरसों का तेल, तिल का तेल या घी डाल दिया जाता है, तो मिट्टी उसका कुछ हिस्सा अपने अंदर खींच सकती है। ऐसे में शुरुआत में डाला गया पूरा तेल बाती तक नहीं पहुंचता। नतीजतन, दीये में मौजूद ईंधन का एक हिस्सा मिट्टी में समा जाता है और बाती के आसपास तेल का स्तर कम हो सकता है।

इसी समस्या को कम करने के लिए दीयों को पहले पानी में रखने की परंपरा प्रचलित है। पानी सोखने वाली मिट्टी के छिद्रों में नमी भर जाती है। इससे दीया इस्तेमाल करते समय तेल के मिट्टी में समाने की मात्रा कम हो सकती है। यही इस घरेलू उपाय का मुख्य उद्देश्य है।

पानी में रखने से तेल की खपत कम करने में मिल सकती है मदद

दिवाली पर कई घरों में दर्जनों या सैकड़ों दीये जलाए जाते हैं। ऐसे में हर दीये में तेल या घी भरने पर काफी मात्रा में ईंधन खर्च हो सकता है। खासकर जब छोटे दीयों का इस्तेमाल किया जाता है, तब बार-बार उनमें तेल डालने की जरूरत पड़ सकती है।

यदि नए दीये सूखे हों, तो उनमें डाला गया कुछ तेल मिट्टी सोख सकती है। पानी में पहले से भिगोने पर मिट्टी के अंदर नमी मौजूद रहती है, जिससे शुरुआती तेल का कुछ हिस्सा मिट्टी में जाने से बच सकता है। इस तरह तेल का बेहतर उपयोग हो सकता है।

इस तरीके का फायदा उन लोगों को अधिक महसूस हो सकता है, जो दिवाली पर घर के मुख्य दरवाजे, बालकनी, छत, पूजा स्थल और आंगन में बड़ी संख्या में दीये सजाते हैं। हालांकि, तेल की बचत कितनी होगी, यह दीये की मिट्टी और उसकी सोखने की क्षमता पर निर्भर करता है।

दीये की बाती को मिलता है तेल, बढ़ सकता है जलने का समय

दीये के लंबे समय तक जलने के लिए केवल तेल की मात्रा ही नहीं, बल्कि बाती तक लगातार ईंधन पहुंचना भी जरूरी होता है। अगर दीये की मिट्टी शुरुआती तेल को ही सोख लेती है, तो बाती के आसपास तेल कम हो सकता है। इससे लौ कमजोर पड़ने या दीया जल्दी बुझने की आशंका रहती है।

पानी में भिगोए गए दीये में मिट्टी की शुरुआती नमी तेल के अवशोषण को कुछ हद तक कम कर सकती है। ऐसे में तेल का अधिक हिस्सा दीये के भीतर उपलब्ध रह सकता है और बाती को ईंधन मिलने में मदद मिल सकती है।

यही कारण है कि कई लोग दिवाली से पहले दीयों को पानी में रखने की सलाह देते हैं। इससे दीये के लंबे समय तक जलने की संभावना बढ़ सकती है। फिर भी यह जरूरी नहीं कि हर दीया पूरी रात बिना किसी रुकावट के जलता रहे। इसके लिए सही आकार की बाती और पर्याप्त तेल का होना भी जरूरी है।

मिट्टी की सफाई के लिए भी उपयोगी है यह तरीका

नए दीये जब बाजार से घर लाए जाते हैं, तो उन पर मिट्टी की अतिरिक्त परत, धूल या अन्य गंदगी लगी हो सकती है। कई बार दीयों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर बेचा जाता है, जिससे उनकी सतह पर धूल जमा हो जाती है।

ऐसे में पानी में कुछ समय तक रखने से दीयों की सतह पर लगी सामान्य धूल और मिट्टी को साफ करना आसान हो जाता है। इसके बाद उन्हें साफ पानी से निकालकर कपड़े पर रखा जा सकता है। इससे पूजा और सजावट के लिए दीयों को तैयार करने में भी आसानी होती है।

ध्यान रखें कि दीयों को साफ करते समय बहुत ज्यादा रगड़ना नहीं चाहिए। मिट्टी के दीये नाजुक होते हैं और अधिक दबाव पड़ने पर टूट सकते हैं। उन्हें सावधानी से उठाना और रखना बेहतर रहता है।

क्या पानी में भिगोने से दीये टूटने से बचते हैं?

अक्सर यह भी कहा जाता है कि पानी में रखने से मिट्टी के दीये ज्यादा मजबूत हो जाते हैं और जलाते समय उनके चटकने की आशंका कम हो जाती है। हालांकि, इसे पूरी तरह सही मानना ठीक नहीं होगा। पानी में भिगोने से मिट्टी में नमी आती है, लेकिन इससे हर दीये की मजबूती बढ़ने की गारंटी नहीं होती।

दीये की मजबूती मुख्य रूप से उसकी मिट्टी, निर्माण प्रक्रिया और पकाने के तरीके पर निर्भर करती है। यदि दीये में पहले से दरार है या उसे ठीक से नहीं पकाया गया है, तो पानी में रखने के बावजूद वह टूट सकता है।

इसलिए दीये खरीदते समय उनकी बनावट और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। जिन दीयों में दरारें दिखाई दें या किनारे टूटे हुए हों, उन्हें जलाने से बचना चाहिए। इस्तेमाल से पहले हर दीये को अच्छी तरह जांच लेना भी जरूरी है।

जानिए दीयों को पानी में भिगोने का सही तरीका

अगर आप भी इस पारंपरिक उपाय को दिवाली पर अपनाना चाहते हैं, तो इसके लिए किसी खास सामग्री की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद बाल्टी, टब या किसी बड़े बर्तन की मदद से यह काम आसानी से किया जा सकता है।

सबसे पहले बाजार से लाए गए मिट्टी के नए दीयों को अलग-अलग करके देख लें। अगर किसी दीये में दरार या टूट-फूट है, तो उसे अलग रख दें। इसके बाद एक साफ बाल्टी या टब में सामान्य तापमान का पानी भरें।

अब सभी दीयों को धीरे-धीरे पानी में डाल दें। कोशिश करें कि वे पूरी तरह पानी में डूबे रहें। इन्हें लगभग 2 से 4 घंटे तक पानी में रखा जा सकता है। कुछ लोग इन्हें रातभर भिगोकर रखने की परंपरा भी अपनाते हैं। हालांकि, हर तरह के दीये के लिए एक निश्चित समय जरूरी नहीं है।

पानी से निकालने के बाद दीयों को किसी सूखे कपड़े या अखबार पर रख दें। उनकी बाहरी सतह पर मौजूद अतिरिक्त पानी को हल्के हाथों से साफ कर लें। इसके बाद उन्हें हवा में अच्छी तरह सूखने दें। जब दीयों के बाहर पानी न रहे, तब उनमें तेल डालकर बाती रखी जा सकती है।

एक बात का विशेष ध्यान रखें कि दीये को जलाने से पहले उसकी सतह पर मौजूद अतिरिक्त पानी सूख जाना चाहिए। गीले दीये में सीधे तेल डालकर जलाने की कोशिश न करें।

पुराने दीयों को दोबारा इस्तेमाल करने में भी हो सकती है आसानी

दिवाली के बाद कई लोग इस्तेमाल किए गए मिट्टी के दीयों को फेंक देते हैं, जबकि अच्छी स्थिति में मौजूद दीयों को अगली बार भी काम में लिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए उन्हें सही तरीके से साफ और सुरक्षित रखना जरूरी है।

जलने के बाद दीयों में तेल के अवशेष, कालिख और बाती के जले हुए हिस्से जमा हो जाते हैं। इन्हें सावधानी से हटाकर दीये को साफ किया जा सकता है। अगर मिट्टी का दीया सही हालत में है और उसमें कोई दरार नहीं है, तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने पर विचार किया जा सकता है।

पानी में रखने से धूल और कुछ सामान्य गंदगी साफ करने में मदद मिल सकती है, लेकिन पुराने दीयों से जमे हुए तेल और कालिख को हटाने के लिए अलग से सफाई करनी पड़ सकती है। साफ करने के बाद उन्हें पूरी तरह सुखाकर ही स्टोर करें।

दीये जलाते समय इन सावधानियों को न करें नजरअंदाज

दिवाली पर घर को रोशन करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। दीयों को पर्दों, कागज, लकड़ी के सामान और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। इन्हें ऐसी समतल जगह पर रखें, जहां इनके गिरने का खतरा न हो।

दीयों में जरूरत से ज्यादा तेल न भरें और बाती को इस तरह लगाएं कि वह स्थिर रहे। बच्चों की पहुंच से दीयों को दूर रखें और जलते हुए दीयों को लंबे समय तक बिना निगरानी के न छोड़ें। यदि घर में पालतू जानवर हैं, तो ऐसी जगह दीये रखें जहां वे गलती से उन्हें गिरा न सकें।

मिट्टी के नए दीयों को इस्तेमाल से पहले पानी में भिगोना एक पुराना घरेलू तरीका है, जिसका उद्देश्य मिट्टी द्वारा शुरुआती तेल सोखने की मात्रा कम करना है। इससे तेल का उपयोग बेहतर हो सकता है और दीये को जलाने में सुविधा मिल सकती है। इस दिवाली आप भी दीये तैयार करते समय इस तरीके को आजमा सकते हैं, लेकिन अच्छी गुणवत्ता वाले दीये चुनना और उन्हें सुरक्षित तरीके से जलाना सबसे ज्यादा जरूरी है।