मोबाइल फोन और लैपटॉप आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन मीटिंग हो या मनोरंजन, ज्यादातर लोग दिन का बड़ा हिस्सा इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ बिताते हैं। कई पुरुषों की आदत होती है कि वे मोबाइल को पैंट की अगली जेब में रखते हैं, जबकि लैपटॉप को टेबल पर रखने के बजाय सीधे गोद में रखकर काम करते हैं। सामान्य तौर पर इन आदतों को लेकर कोई खास चिंता नहीं की जाती, लेकिन सवाल यह है कि क्या लंबे समय तक ऐसा करना पुरुषों की स्पर्म हेल्थ यानी शुक्राणुओं की सेहत को प्रभावित कर सकता है? क्या मोबाइल से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा और लैपटॉप से पैदा होने वाली गर्मी का संबंध फर्टिलिटी से है? इस विषय पर अलग-अलग समय में कई वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोधों में संभावित जोखिमों की ओर इशारा किया गया है, लेकिन उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि मोबाइल जेब में रखने या लैपटॉप गोद में चलाने से हर पुरुष की प्रजनन क्षमता निश्चित रूप से प्रभावित होती है।
फर्टिलिटी से जुड़ी चिंताओं के पीछे क्या है वजह?
पुरुषों की प्रजनन क्षमता का संबंध केवल शुक्राणुओं की संख्या से नहीं होता। स्पर्म की गति, उनकी बनावट, जीवित रहने की क्षमता और अंडाणु तक पहुंचने की योग्यता भी गर्भधारण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा हार्मोन, जीवनशैली, उम्र, कुछ बीमारियां और पर्यावरणीय परिस्थितियां भी प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से मोबाइल और लैपटॉप के संभावित प्रभावों का अध्ययन करते समय वैज्ञानिक कई पहलुओं को ध्यान में रखते हैं।
इस विषय में मुख्य रूप से दो संभावित कारणों पर चर्चा होती है। पहला, लैपटॉप इस्तेमाल करने के दौरान शरीर के निचले हिस्से के आसपास तापमान बढ़ना और दूसरा, मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा के संपर्क में रहना। इन दोनों स्थितियों को लेकर शोध हुए हैं, लेकिन इनके संभावित प्रभावों को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि अध्ययन वास्तव में क्या बताते हैं और उनकी सीमाएं क्या हैं।
अंडकोष का तापमान क्यों है महत्वपूर्ण?
पुरुषों के शरीर में अंडकोष यानी टेस्टिकल्स की स्थिति ऐसी होती है कि उनका तापमान शरीर के अंदरूनी तापमान से सामान्यतः कुछ कम बना रहता है। शुक्राणुओं के सामान्य विकास के लिए तापमान का यह अंतर महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि अंडकोष लंबे समय तक अधिक गर्मी के संपर्क में रहें, तो शुक्राणुओं के निर्माण और उनकी गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो सकती है।
लैपटॉप को गोद में रखकर काम करने के दौरान उपकरण की गर्मी और पैरों को लंबे समय तक पास रखकर बैठने से अंडकोष के आसपास का तापमान बढ़ सकता है। हालांकि, तापमान में वृद्धि दर्ज होना और उससे वास्तविक रूप से प्रजनन क्षमता कम होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी व्यक्ति की फर्टिलिटी पर कितना असर पड़ेगा, यह जानने के लिए शुक्राणुओं की गुणवत्ता, संपर्क की अवधि और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों का भी मूल्यांकन करना जरूरी होता है।
इसीलिए विशेषज्ञ आम तौर पर लंबे समय तक लगातार गर्मी के संपर्क में रहने से बचने और लैपटॉप का इस्तेमाल उचित सतह पर करने की सलाह देते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि कभी-कभार गोद में लैपटॉप रखने से ही बांझपन की समस्या पैदा हो जाएगी। चिंता मुख्य रूप से नियमित आदतों, लंबे समय तक संपर्क और संभावित जोखिमों को कम करने की है।
लैपटॉप पर हुए अध्ययनों में क्या सामने आया?
लैपटॉप के इस्तेमाल और अंडकोष के तापमान के बीच संबंध जानने के लिए शोधकर्ताओं ने अलग-अलग परिस्थितियों में तापमान मापने वाले अध्ययन किए हैं। एक अध्ययन में 29 स्वस्थ पुरुषों को शामिल किया गया था। इसमें लैपटॉप इस्तेमाल करते समय बैठने की अलग-अलग स्थितियों में अंडकोष के तापमान में होने वाले बदलावों का आकलन किया गया।
शोध में पाया गया कि लैपटॉप का उपयोग करते समय तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। पैरों को सामान्य स्थिति में रखकर बैठने पर भी बदलाव दर्ज किया गया, जबकि पैरों को पास रखकर लैपटॉप के नीचे पैड रखने की स्थिति में भी तापमान बढ़ा। रिपोर्ट में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 11 मिनट के इस्तेमाल के बाद अलग-अलग परिस्थितियों में अंडकोष का तापमान करीब 2.1 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा।
ये निष्कर्ष इस बात की ओर ध्यान दिलाते हैं कि लैपटॉप के इस्तेमाल के दौरान बैठने की मुद्रा और गर्मी के संपर्क को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, इस तरह के तापमान संबंधी अध्ययन अपने आप में यह साबित नहीं करते कि लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के शुक्राणुओं की संख्या घट जाएगी या उसे गर्भधारण कराने में परेशानी होगी। इसके लिए लंबे समय तक लोगों का अध्ययन करने और उनकी प्रजनन क्षमता से जुड़े नतीजों की तुलना करने की जरूरत होती है।
मोबाइल फोन की रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा पर क्या कहती है रिसर्च?
लैपटॉप के साथ-साथ मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है। मोबाइल फोन वायरलेस नेटवर्क से जुड़ने के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल करते हैं। जब फोन को पैंट की अगली जेब में रखा जाता है, तो वह शरीर के निचले हिस्से के करीब रहता है। इसी कारण वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि लंबे समय तक इस तरह के संपर्क का शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं।
इस विषय पर प्रकाशित एक समीक्षा में मोबाइल फोन के इस्तेमाल और पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई अध्ययनों का उल्लेख किया गया है। इनमें से कुछ शोधों में फोन के अधिक इस्तेमाल और शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति, जीवित रहने की क्षमता तथा सामान्य आकार में कमी के बीच संबंध देखा गया। एक नैदानिक अध्ययन में प्रजनन क्षमता की जांच करा रहे 361 पुरुषों को उनके मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के तरीके और अवधि के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। इसमें लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने वाले कुछ समूहों में स्पर्म से जुड़े मानकों में गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, इस तरह के निष्कर्षों को समझते समय सावधानी बरतना जरूरी है। किसी अध्ययन में दो चीजों के बीच संबंध मिलने का अर्थ यह नहीं है कि एक चीज दूसरी समस्या का सीधा कारण है। मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले लोगों की जीवनशैली, नींद, तनाव, काम का प्रकार और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां भी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए केवल इन अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि जेब में मोबाइल रखने से पुरुषों की प्रजनन क्षमता निश्चित रूप से घटती है।
क्या मोबाइल की गर्मी और रेडिएशन दोनों खतरनाक हैं?
मोबाइल फोन और लैपटॉप के संभावित प्रभावों पर चर्चा करते समय गर्मी और रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। लैपटॉप से पैदा होने वाली गर्मी के कारण अंडकोष के आसपास का तापमान बढ़ सकता है। दूसरी ओर, मोबाइल फोन के मामले में मुख्य सवाल रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा के संपर्क और उसके संभावित जैविक प्रभावों का है।
इन दोनों स्थितियों के पीछे अलग-अलग प्रक्रियाएं होती हैं और इनके बारे में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण भी एक जैसे नहीं हैं। लैपटॉप के इस्तेमाल से अंडकोष के तापमान में बदलाव होने के प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन इससे लंबे समय में फर्टिलिटी पर कितना असर पड़ता है, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मोबाइल फोन के संबंध में भी कुछ अध्ययनों में स्पर्म की गुणवत्ता पर संभावित प्रभाव सामने आए हैं, जबकि अन्य शोधों में परिणाम एक जैसे नहीं रहे हैं।
इसलिए किसी भी एक अध्ययन के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि मोबाइल का रेडिएशन पुरुषों को बांझ बना देता है। इसी तरह यह कहना भी उचित नहीं है कि इन आदतों का कोई संभावित प्रभाव हो ही नहीं सकता। वैज्ञानिक शोध का उद्देश्य जोखिमों को बेहतर ढंग से समझना है, ताकि उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर व्यावहारिक सावधानियां अपनाई जा सकें।
स्पर्म हेल्थ को बेहतर रखने के लिए किन आदतों में करें बदलाव?
प्रजनन स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जरूरी नहीं कि व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से मोबाइल और लैपटॉप को पूरी तरह हटा दे। कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर गर्मी के अनावश्यक संपर्क को कम किया जा सकता है और काम करने का तरीका भी बेहतर बनाया जा सकता है।
1. मोबाइल को हमेशा पैंट की जेब में रखने से बचें: अगर आप दिनभर फोन अपने साथ रखते हैं, तो जरूरत के अनुसार उसे बैग या डेस्क पर रखना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इससे फोन शरीर के निचले हिस्से के बिल्कुल करीब लगातार नहीं रहेगा। हालांकि, यह बदलाव फर्टिलिटी बढ़ाने की गारंटी नहीं है।
2. लैपटॉप का इस्तेमाल टेबल पर करें: लैपटॉप को सीधे गोद में रखने के बजाय डेस्क या मजबूत सतह पर रखकर काम करें। इससे उपकरण की गर्मी और शरीर के बीच सीधा संपर्क कम होगा। साथ ही गर्दन, कंधों और पीठ की मुद्रा बेहतर रखने में भी मदद मिल सकती है।
3. लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें: लगातार कई घंटों तक बैठकर काम करने के बजाय बीच-बीच में उठें और थोड़ी देर चलें। लैपटॉप गर्म हो रहा हो, तो उसे गोद में रखने से बचें। उपकरण के वेंटिलेशन को भी बाधित न होने दें, ताकि उसकी गर्मी आसानी से बाहर निकल सके।
4. अत्यधिक गर्मी के संपर्क पर ध्यान दें: बार-बार सॉना, हॉट टब या अन्य अधिक गर्म वातावरण में लंबे समय तक रहने से शरीर के तापमान पर असर पड़ सकता है। पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर इसका प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता, लेकिन यदि कोई व्यक्ति गर्भधारण की योजना बना रहा है और उसे स्पर्म की गुणवत्ता को लेकर चिंता है, तो अत्यधिक गर्मी के संपर्क को सीमित करना उपयोगी सावधानी हो सकती है।
5. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं: धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य सहित समग्र स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इन आदतों से बचना और संतुलित जीवनशैली अपनाना बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
6. खानपान, व्यायाम और नींद को प्राथमिकता दें: संतुलित आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, पर्याप्त प्रोटीन और पौष्टिक वसा शामिल करें। नियमित शारीरिक गतिविधि करें और पर्याप्त नींद लें। वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना भी उपयोगी है। किसी विशेष सप्लीमेंट या दवा को स्पर्म काउंट बढ़ाने का निश्चित उपाय मानकर इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि किसी दंपती को नियमित असुरक्षित यौन संबंध के बावजूद गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है, तो केवल मोबाइल या लैपटॉप को इसका कारण मानकर नहीं चलना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी है। आम तौर पर 12 महीने तक गर्भधारण न होने पर फर्टिलिटी मूल्यांकन की सलाह दी जाती है। महिला साथी की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक होने पर छह महीने बाद जांच कराने की सलाह दी जाती है। पहले से कोई प्रजनन संबंधी समस्या या अन्य जोखिम मौजूद हो, तो इससे पहले भी डॉक्टर से संपर्क किया जा सकता है।
पुरुषों में जरूरत पड़ने पर सीमेन एनालिसिस यानी वीर्य की जांच की जाती है। इससे शुक्राणुओं की संख्या, गति और बनावट जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन किया जा सकता है। जांच के नतीजों के आधार पर डॉक्टर आगे की प्रक्रिया तय करते हैं।
क्या है पूरी रिसर्च का निष्कर्ष?
मोबाइल फोन को पैंट की जेब में रखना और लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है या नहीं, इस सवाल का जवाब अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लैपटॉप के इस्तेमाल के दौरान अंडकोष के तापमान में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि मोबाइल फोन के अध्ययन में भी स्पर्म की गुणवत्ता से जुड़े कुछ संभावित संबंध सामने आए हैं। लेकिन इन निष्कर्षों से यह साबित नहीं होता कि इन उपकरणों का सामान्य इस्तेमाल सीधे बांझपन का कारण बनता है।
सबसे व्यावहारिक तरीका यह है कि लैपटॉप को टेबल पर रखकर इस्तेमाल किया जाए, अनावश्यक गर्मी से बचा जाए और मोबाइल को लगातार शरीर के बिल्कुल करीब रखने की आदत में बदलाव किया जाए। इसके साथ स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। यदि स्पर्म की गुणवत्ता या गर्भधारण को लेकर कोई चिंता है, तो इंटरनेट पर उपलब्ध दावों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। वैज्ञानिक प्रमाणों को समझकर और संतुलित सावधानियां अपनाकर ही प्रजनन स्वास्थ्य की सही देखभाल की जा सकती है।
(Photo : AI Generated)




