देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 लागू होने के बाद इसे लेकर लगातार बहस देखने को मिल रही है। कई लोग इसे पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ वाहन मालिक पुराने वाहनों पर इसके असर को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि यदि दुनिया के अन्य देशों की नीतियों पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि इथेनॉल मिश्रण आज की नहीं बल्कि कई वर्षों से अपनाई जा रही वैश्विक रणनीति का हिस्सा है। दुनिया के कई विकसित और विकासशील देश अलग-अलग अनुपात में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर उसका उपयोग कर रहे हैं और भविष्य में इसकी मात्रा बढ़ाने की तैयारी भी कर चुके हैं।
स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ रही है दुनिया
जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से दुनिया के अधिकांश देश वैकल्पिक ईंधनों पर जोर दे रहे हैं। बायोइथेनॉल को पेट्रोल का बेहतर विकल्प माना जा रहा है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलती है। इसी वजह से कई देशों ने अपनी ऊर्जा नीति में इथेनॉल मिश्रण को शामिल किया है और धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया है।
भारत का अगला लक्ष्य E30
भारत फिलहाल E20 तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक E30 यानी पेट्रोल में 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण लागू करना है। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी तेल आयात पर होने वाला खर्च कम होगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और गन्ना, मक्का जैसी फसलों से जुड़े किसानों को भी फायदा मिलेगा। इसके अलावा देश में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में भी यह कदम अहम माना जा रहा है।
ब्राजील बना दुनिया का सबसे बड़ा उदाहरण
इथेनॉल मिश्रण के मामले में ब्राजील दुनिया का सबसे अग्रणी देश माना जाता है। वहां केवल E30 ही नहीं बल्कि E100 यानी 100 प्रतिशत इथेनॉल वाले ईंधन का भी इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी संख्या में वहां फ्लेक्स-फ्यूल वाहन चलते हैं, जो पेट्रोल और शुद्ध इथेनॉल दोनों पर आसानी से चल सकते हैं। यही वजह है कि इथेनॉल आधारित परिवहन के क्षेत्र में ब्राजील को दुनिया का सबसे सफल मॉडल माना जाता है।
दक्षिण अमेरिका में भी बढ़ रहा इथेनॉल का उपयोग
ब्राजील के अलावा दक्षिण अमेरिका के कई देशों ने भी इथेनॉल मिश्रण को अपनाया है।
- पैराग्वे में E30 लागू है।
- बोलीविया ने E25 का लक्ष्य तय किया है।
- अर्जेंटीना में E12 का उपयोग हो रहा है।
- उरुग्वे और कोलंबिया में E10 लागू है।
- इक्वाडोर अपने इकोपैस गैसोलीन के तहत E10 का उपयोग करता है।
- पेरू लगभग E7.8 मिश्रण पर काम कर रहा है।
- कोस्टा रिका और पनामा ने 2027 तक E10 लागू करने का लक्ष्य रखा है।
- ग्वाटेमाला 2026 तक E10 लागू करने की तैयारी में है।
अमेरिका में वर्षों से हो रहा है इथेनॉल मिश्रण
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका लंबे समय से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग कर रहा है। वहां आमतौर पर E10 और E15 ईंधन उपलब्ध हैं। अमेरिका में मकई से बड़े पैमाने पर इथेनॉल तैयार किया जाता है और सरकार बायोफ्यूल उद्योग को लगातार बढ़ावा देती रही है ताकि पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम की जा सके।
यूरोप भी तेजी से बढ़ा रहा है ब्लेंडिंग
यूरोप के कई देशों ने भी इथेनॉल मिश्रण को अपनाया है।
- यूरोपीय संघ के 19 सदस्य देशों में E10 उपलब्ध है।
- ब्रिटेन में भी E10 लागू हो चुका है।
- फिनलैंड ने 2027 तक E22.5 मिश्रण का लक्ष्य तय किया है।
यूरोपीय देशों का मानना है कि इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
कनाडा में हर प्रांत की अलग नीति
कनाडा में इथेनॉल मिश्रण पूरे देश में समान नहीं है। वहां संघीय स्तर पर E5 लागू है, जबकि अलग-अलग प्रांतों में अलग नीति अपनाई गई है।
- ओंटारियो – E11
- क्यूबेक – E12
- ब्रिटिश कोलंबिया – E5
- अल्बर्टा – E5
- सस्केचेवान – E7.5
- मैनिटोबा – E10
यह मॉडल बताता है कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार भी इथेनॉल मिश्रण तय किया जा सकता है।
एशिया में भारत के साथ कौन-कौन से देश आगे हैं?
एशिया के कई देशों ने भी इथेनॉल मिश्रण को अपनी ईंधन नीति का हिस्सा बनाया है।
- नेपाल – E10
- थाईलैंड – E10 अनिवार्य, E20 और E85 वैकल्पिक
- वियतनाम – RON95 में E10 और RON92 में E5
- फिलीपींस – E10 अनिवार्य, E20 पर विचार
- इंडोनेशिया – आयातित पेट्रोल में E3 की अनुमति
जापान ने भी तय किया लंबी अवधि का रोडमैप
तकनीकी रूप से उन्नत जापान भी इथेनॉल मिश्रण को धीरे-धीरे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। देश ने 2030 तक E10 और 2040 तक E20 लागू करने का लक्ष्य तय किया है। इससे साफ है कि विकसित देश भी चरणबद्ध तरीके से उच्च इथेनॉल मिश्रण की ओर बढ़ रहे हैं।
भारत को क्या होंगे बड़े फायदे?
सरकार के अनुसार इथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
पुराने वाहनों को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
जहां सरकार इसे भविष्य का ईंधन मान रही है, वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सभी पुराने वाहन उच्च इथेनॉल मिश्रण के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। इसी वजह से कई वाहन मालिक E20 को लेकर चिंता जता रहे हैं। हालांकि ऑटोमोबाइल कंपनियां ऐसे इंजन विकसित कर रही हैं जो अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
क्या कहता है वैश्विक ट्रेंड?
दुनिया का रुझान साफ संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में इथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग और बढ़ेगा। ब्राजील जहां E100 तक पहुंच चुका है, वहीं कई देश E20, E30 और उससे अधिक मिश्रण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत का E20 अभियान भी इसी वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का हिस्सा है और भविष्य में देश में इथेनॉल आधारित ईंधन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है।
(Photo : AI Generated)




