E20 से E100 तक: दुनिया में इथेनॉल मिश्रण कितनी तेजी से बढ़ रहा है, भारत की क्या है स्थिति और भविष्य की तैयारी?

E20 से E100 तक: दुनिया में इथेनॉल मिश्रण कितनी तेजी से बढ़ रहा है, भारत की क्या है स्थिति और भविष्य की तैयारी?

देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) लागू होने के बाद यह विषय लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ वाहन मालिक पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव, माइलेज और इंजन की अनुकूलता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

हालांकि यदि वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण कोई नई अवधारणा नहीं है। पिछले कई दशकों से दुनिया के अनेक विकसित और विकासशील देश विभिन्न अनुपात में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर उसका उपयोग कर रहे हैं। कुछ देशों में E10 और E20 सामान्य ईंधन बन चुके हैं, जबकि ब्राजील जैसे देशों में E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) तक का उपयोग किया जाता है।

जलवायु परिवर्तन, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा के स्वदेशी स्रोत विकसित करने की दिशा में इथेनॉल आधारित ईंधन आज वैश्विक ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

इथेनॉल मिश्रण क्या होता है?

इथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ना, मक्का, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।

जब पेट्रोल में निर्धारित प्रतिशत के अनुसार इथेनॉल मिलाया जाता है, तो उसे इथेनॉल मिश्रित ईंधन कहा जाता है।

उदाहरण के लिए—

  • E10 = 10% इथेनॉल + 90% पेट्रोल
  • E20 = 20% इथेनॉल + 80% पेट्रोल
  • E30 = 30% इथेनॉल + 70% पेट्रोल
  • E85 = 85% इथेनॉल
  • E100 = 100% इथेनॉल

ईंधन के नाम में “E” का अर्थ Ethanol होता है, जबकि उसके बाद लिखा गया अंक मिश्रण का प्रतिशत दर्शाता है।

दुनिया स्वच्छ ईंधन की ओर क्यों बढ़ रही है?

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के अधिकांश देशों ने जलवायु परिवर्तन और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को गंभीर चुनौती के रूप में स्वीकार किया है।

साथ ही कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भरता कई देशों के लिए आर्थिक चुनौती भी बनती रही है।

इसी कारण अनेक देशों ने अपनी ऊर्जा नीति में जैव ईंधनों को शामिल किया है।

इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के पीछे प्रमुख कारण हैं—

  • कार्बन उत्सर्जन कम करना।
  • प्रदूषण घटाना।
  • आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना।
  • किसानों की आय बढ़ाना।
  • घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना।

भारत कहां खड़ा है?

भारत ने हाल के वर्षों में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में तेज़ प्रगति की है।

सरकार ने पहले E10 लक्ष्य हासिल किया और अब कई क्षेत्रों में E20 की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है।

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2030 तक E30 की दिशा में आगे बढ़ना है।

इसका उद्देश्य केवल स्वच्छ ईंधन अपनाना नहीं बल्कि—

  • पेट्रोल आयात कम करना,
  • विदेशी मुद्रा की बचत करना,
  • कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना,
  • किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना,

भी है।

ब्राजील बना पूरी दुनिया के लिए उदाहरण

यदि इथेनॉल मिश्रण की बात की जाए तो ब्राजील दुनिया का सबसे सफल उदाहरण माना जाता है।

ब्राजील में—

  • E30 व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • E100 भी उपलब्ध है।
  • बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल (Flex Fuel) वाहन चलते हैं।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन वाले वाहन होते हैं जो—

  • पेट्रोल,
  • इथेनॉल,
  • या दोनों के मिश्रण

पर आसानी से चल सकते हैं।

ब्राजील ने कई वर्षों पहले गन्ने से इथेनॉल उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया था, जिसका परिणाम आज दुनिया के सामने एक सफल मॉडल के रूप में दिखाई देता है।

दक्षिण अमेरिका के अन्य देश भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं

ब्राजील के अलावा दक्षिण अमेरिका के कई देशों ने भी इथेनॉल मिश्रण को अपनी ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

कुछ प्रमुख उदाहरण—

देशवर्तमान स्थिति
पैराग्वेE30
बोलीवियाE25 लक्ष्य
अर्जेंटीनाE12
उरुग्वेE10
कोलंबियाE10
इक्वाडोरE10
पेरूलगभग E7.8

इसके अतिरिक्त—

  • कोस्टा रिका
  • पनामा
  • ग्वाटेमाला

ने भी आने वाले वर्षों में E10 लागू करने की योजना बनाई है।

अमेरिका में वर्षों से हो रहा है इथेनॉल मिश्रण

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका लंबे समय से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग कर रहा है।

वहां आमतौर पर—

  • E10
  • E15

उपलब्ध हैं।

अमेरिका में बड़ी मात्रा में मकई (Corn) से इथेनॉल तैयार किया जाता है।

सरकार लंबे समय से बायोफ्यूल उद्योग को प्रोत्साहित कर रही है ताकि पेट्रोलियम आधारित ईंधनों पर निर्भरता कम हो सके।

यूरोप भी तेजी से बढ़ा रहा है इथेनॉल मिश्रण

यूरोप के कई देशों ने भी इथेनॉल मिश्रण को अपनी ऊर्जा रणनीति में शामिल किया है।

वर्तमान स्थिति—

  • यूरोपीय संघ के अधिकांश सदस्य देशों में E10 उपलब्ध है।
  • ब्रिटेन ने भी E10 लागू कर दिया है।
  • फिनलैंड ने 2027 तक E22.5 का लक्ष्य तय किया है।

यूरोपीय देशों का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है।

कनाडा में अलग-अलग प्रांतों की अलग नीति

कनाडा में पूरे देश में एक समान इथेनॉल मिश्रण लागू नहीं है।

संघीय स्तर पर E5 लागू है, जबकि अलग-अलग प्रांतों में अलग प्रतिशत अपनाया गया है।

प्रांतमिश्रण
ओंटारियोE11
क्यूबेकE12
ब्रिटिश कोलंबियाE5
अल्बर्टाE5
सस्केचेवानE7.5
मैनिटोबाE10

यह मॉडल दर्शाता है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग नीति अपनाई जा सकती है।

एशिया में कौन-कौन से देश आगे हैं?

एशिया में भी कई देशों ने इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

नेपाल

  • E10

थाईलैंड

  • E10 अनिवार्य
  • E20 उपलब्ध
  • E85 भी उपलब्ध

वियतनाम

  • RON92 में E5
  • RON95 में E10

फिलीपींस

  • E10 अनिवार्य
  • E20 पर विचार

इंडोनेशिया

  • आयातित पेट्रोल में E3 की अनुमति

इन देशों का अनुभव बताता है कि इथेनॉल मिश्रण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।

जापान ने भी बनाया दीर्घकालिक रोडमैप

तकनीकी रूप से अत्यधिक विकसित जापान ने भी इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में स्पष्ट योजना बनाई है।

देश का लक्ष्य है—

  • 2030 तक E10
  • 2040 तक E20

इससे स्पष्ट होता है कि विकसित देश भी धीरे-धीरे उच्च इथेनॉल मिश्रण की ओर बढ़ रहे हैं।

भारत को क्या होंगे संभावित लाभ?

सरकार के अनुसार इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

1. कच्चे तेल के आयात में कमी

भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

यदि पेट्रोल में अधिक इथेनॉल मिलाया जाता है तो पेट्रोल की खपत कम होगी और आयात पर निर्भरता घट सकती है।

2. विदेशी मुद्रा की बचत

कम तेल आयात का सीधा प्रभाव विदेशी मुद्रा खर्च पर पड़ेगा।

इससे दीर्घकाल में देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है।

3. किसानों को अतिरिक्त आय

इथेनॉल उत्पादन के लिए—

  • गन्ना
  • मक्का
  • अन्य कृषि उत्पाद

का उपयोग किया जाता है।

इससे कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार मिलने की संभावना रहती है।

4. ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी

घरेलू स्तर पर जैव ईंधन उत्पादन बढ़ने से भविष्य में वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

5. पर्यावरण को लाभ

इथेनॉल आधारित ईंधन को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।

पुराने वाहनों को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

E20 लागू होने के बाद सबसे अधिक चर्चा पुराने वाहनों को लेकर हुई है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • सभी पुराने इंजन उच्च इथेनॉल मिश्रण के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे।
  • लंबे समय तक उपयोग से कुछ वाहनों में रखरखाव संबंधी चुनौतियां आ सकती हैं।
  • विभिन्न वाहन मॉडलों की अनुकूलता अलग-अलग हो सकती है।

हालांकि वाहन निर्माता कंपनियां अब ऐसे इंजन विकसित कर रही हैं जो अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

उपभोक्ताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने वाहन निर्माता द्वारा जारी ईंधन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

भविष्य में क्या हो सकता है?

वैश्विक रुझानों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में इथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत कई देशों में बढ़ सकता है।

ब्राजील पहले ही E100 तक पहुंच चुका है।

कई देश E20 और E30 की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

भारत भी चरणबद्ध तरीके से इसी दिशा में काम कर रहा है।

आने वाले समय में—

  • फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बढ़ सकते हैं।
  • जैव ईंधन उत्पादन का विस्तार हो सकता है।
  • कृषि आधारित ऊर्जा उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है।
  • स्वच्छ ईंधन के उपयोग में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

भारत की ऊर्जा नीति में बढ़ती भूमिका निभा सकता है इथेनॉल

इथेनॉल मिश्रण केवल ईंधन में बदलाव नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। दुनिया के कई देश वर्षों से विभिन्न स्तरों पर इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं और भविष्य में इसकी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

भारत का E20 अभियान इसी वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा सकता है। यदि इथेनॉल उत्पादन, वाहन तकनीक और आवश्यक अवसंरचना का विकास समान गति से आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। साथ ही, इसके प्रभावों का आकलन तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लगातार किया जाना भी आवश्यक होगा, ताकि उपभोक्ताओं, किसानों और उद्योग—तीनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।