फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेजबान देशों में शामिल कनाडा ने अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ करने की पूरी कोशिश की, लेकिन बोस्निया-हर्जेगोविना ने उसके इरादों पर पानी फेर दिया। टोरंटो में खेले गए ग्रुप-बी के मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला और आखिरकार मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। लंबे समय तक पिछड़ने के बावजूद कनाडा ने शानदार वापसी करते हुए हार टाल ली और टूर्नामेंट का अपना पहला अंक हासिल किया।
इस मुकाबले में दुनिया की 30वीं रैंकिंग वाली कनाडाई टीम को 64वीं रैंक पर मौजूद बोस्निया-हर्जेगोविना से कड़ी चुनौती मिली। मैच के शुरुआती हिस्से में बोस्निया ने बढ़त बना ली थी और ऐसा लग रहा था कि कनाडा अपने घरेलू मैदान पर निराशा के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत करेगा। हालांकि, अंतिम क्षणों में आए एक गोल ने पूरे माहौल को बदल दिया और स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों को राहत की सांस लेने का मौका मिला।
कनाडा की टीम शुरुआत से ही आक्रामक नजर आई। घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का दबाव और जीत की उम्मीद दोनों ही खिलाड़ियों के प्रदर्शन में दिखाई दे रहे थे। शुरुआती मिनटों में कनाडा ने गेंद पर कब्जा बनाए रखा और कई बार बोस्निया के डिफेंस को तोड़ने की कोशिश की। लेकिन बोस्नियाई खिलाड़ियों ने अनुशासित खेल दिखाते हुए कनाडा को आसान मौके नहीं दिए।
मैच का पहला बड़ा मोड़ 21वें मिनट में आया। बोस्निया-हर्जेगोविना को एक कॉर्नर किक मिली, जिसका उसने शानदार फायदा उठाया। कप्तान सियाद कोलासिनाच की मौजूदगी में तैयार हुए इस मूव को जोवो लुकिच ने हेडर के जरिए गोल में बदल दिया। गेंद सीधे नेट में पहुंची और बोस्निया को 1-0 की बढ़त मिल गई। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में यह लुकिच का पहला गोल था, जिसने इसे उनके करियर का यादगार पल बना दिया।
गोल खाने के बाद कनाडा ने खेल की रफ्तार बढ़ा दी। टीम लगातार हमले करती रही और बराबरी हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास किया। पहले हाफ के बाकी समय में कनाडा ने कई बार गोल करने की कोशिश की, लेकिन बोस्निया की रक्षापंक्ति बेहद मजबूत साबित हुई। गोलकीपर ने भी कुछ महत्वपूर्ण बचाव किए, जिसके कारण कनाडा को सफलता नहीं मिल सकी।
पहले हाफ की समाप्ति तक स्कोर 1-0 रहा और बोस्निया बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। दूसरी ओर, कनाडा के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। घरेलू मैदान पर वर्ल्ड कप के पहले मैच में पिछड़ना टीम के लिए किसी झटके से कम नहीं था।
दूसरे हाफ में कनाडा ने पूरी ताकत झोंक दी। मैदान पर उसकी रणनीति साफ थी, ज्यादा से ज्यादा आक्रमण और जल्द से जल्द बराबरी। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बढ़ाया और बोस्निया के हाफ में लगातार दबाव बनाया। हालांकि, बोस्निया भी जवाबी हमलों के जरिए खतरा पैदा करता रहा।
54वें मिनट में कनाडा को बराबरी का बेहतरीन अवसर मिला। रिची लारिया ने शानदार शॉट लगाया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। गेंद क्रॉसबार से टकराकर बाहर चली गई। अगर यह प्रयास सफल हो जाता तो मैच का नतीजा शायद अलग हो सकता था। इस मौके के बाद कनाडा का आत्मविश्वास और बढ़ गया तथा टीम ने हमलों की गति तेज कर दी।
कनाडाई टीम को इस मैच में अपने सबसे बड़े सितारे अल्फोंसो डेविस की कमी भी महसूस हुई। हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वह मुकाबले में हिस्सा नहीं ले सके। डेविस की अनुपस्थिति ने टीम के आक्रमण को कुछ हद तक प्रभावित किया, क्योंकि उनकी गति और रचनात्मकता कनाडा की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। बावजूद इसके, टीम ने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष जारी रखा।
समय बीतने के साथ बोस्निया की उम्मीदें जीत की ओर बढ़ने लगी थीं। 70 मिनट के बाद भी स्कोर 1-0 था और कनाडा को बराबरी के लिए किसी चमत्कार की जरूरत महसूस होने लगी थी। इसी दौरान कोच ने बदलाव करते हुए साइल लारिन को मैदान पर उतारा। यह फैसला बाद में मैच का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ।
76वें मिनट में मैदान पर आने वाले लारिन ने केवल दो मिनट के भीतर अपना प्रभाव दिखा दिया। 78वें मिनट में उन्हें एक शानदार मौका मिला और उन्होंने बिना कोई गलती किए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। स्टेडियम में मौजूद दर्शक खुशी से झूम उठे, क्योंकि इस गोल ने कनाडा को हार से बचा लिया था। स्कोर 1-1 हो गया और मुकाबला फिर से पूरी तरह खुल गया।
लारिन का यह गोल कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। यह न केवल कनाडा के लिए बराबरी दिलाने वाला गोल था, बल्कि टीम के वर्ल्ड कप इतिहास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि भी बन गया। कनाडा ने इससे पहले वर्ल्ड कप में बहुत कम सफलता हासिल की है और ऐसे में यह गोल उसके समर्थकों के लिए बेहद खास बन गया।
मुकाबले के अंतिम मिनटों में दोनों टीमों ने जीत हासिल करने की कोशिश की। कनाडा ने घरेलू दर्शकों के समर्थन के साथ आगे बढ़कर हमला किया, जबकि बोस्निया ने जवाबी आक्रमणों के जरिए अवसर तलाशे। हालांकि, दोनों टीमों को निर्णायक गोल नहीं मिला और रेफरी की अंतिम सीटी के साथ मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हो गया।
इस परिणाम के बाद ग्रुप-बी की अंक तालिका में कनाडा और बोस्निया-हर्जेगोविना दोनों ने एक-एक अंक हासिल किया। बेहतर स्थिति के आधार पर कनाडा फिलहाल समूह में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया, जबकि बोस्निया दूसरे नंबर पर है। टूर्नामेंट की शुरुआत को देखते हुए दोनों टीमों के लिए यह अंक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कनाडा के लिए यह ड्रॉ भले ही जीत जैसा महसूस हुआ हो, लेकिन टीम जानती है कि आगे के मुकाबलों में उसे और बेहतर प्रदर्शन करना होगा। खासकर तब, जब वह अपने घरेलू मैदान पर खिताब की दौड़ में बने रहने की उम्मीद कर रही है। कोचिंग स्टाफ को उम्मीद होगी कि अगले मैच तक अल्फोंसो डेविस की फिटनेस को लेकर अच्छी खबर मिले और टीम अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान पर उतरे।
अब कनाडा की नजर अपने अगले मुकाबले पर होगी, जहां उसका सामना 18 जून को कतर से होना है। दूसरी ओर, बोस्निया-हर्जेगोविना उसी दिन स्विट्जरलैंड के खिलाफ मैदान में उतरेगा। दोनों टीमें जीत दर्ज कर नॉकआउट चरण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने की कोशिश करेंगी।
फिलहाल टोरंटो में खेला गया यह मुकाबला वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती रोमांचक मैचों में शामिल हो गया है, जहां एक टीम ने बढ़त बचाने की पूरी कोशिश की और दूसरी टीम ने आखिरी समय में शानदार वापसी कर हार को ड्रॉ में बदल दिया। साइल लारिन के देर से आए गोल ने कनाडा के अभियान को जीवित रखा और घरेलू प्रशंसकों को उम्मीद दी कि उनकी टीम आने वाले मैचों में और बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।




