Friendship Day: आखिर दोस्ती के नाम पर एक दिन मनाने की शुरुआत कैसे हुई? जानिए अमेरिका से भारत तक का दिलचस्प सफर

Friendship Day: आखिर दोस्ती के नाम पर एक दिन मनाने की शुरुआत कैसे हुई? जानिए अमेरिका से भारत तक का दिलचस्प सफर

दोस्ती ऐसा रिश्ता है, जिसे किसी खून के रिश्ते की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसका महत्व अक्सर परिवार से कम नहीं माना जाता। जीवन के हर पड़ाव पर एक सच्चा दोस्त इंसान का सबसे बड़ा सहारा बनता है। यही वजह है कि दुनियाभर में इस रिश्ते का सम्मान करने के लिए हर साल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग अपने खास दोस्तों को शुभकामनाएं देते हैं, फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, उपहार देते हैं और साथ बिताए यादगार पलों को दोबारा जीते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि इस खास दिन की शुरुआत आखिर कब हुई और इसके पीछे किसका विचार था। आइए जानते हैं फ्रेंडशिप डे के इतिहास और इसकी दुनिया भर में लोकप्रिय होने की पूरी कहानी।

भारत में कब मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे?

भारत में फ्रेंडशिप डे हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को मनाने की परंपरा है। चूंकि यह दिन रविवार को आता है, इसलिए स्कूल, कॉलेज और नौकरी करने वाले लोगों को छुट्टी मिल जाती है। यही कारण है कि दोस्त एक-दूसरे से मिलकर इस दिन को खास अंदाज में सेलिब्रेट करते हैं। कई लोग घूमने जाते हैं, पार्टी करते हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी दोस्ती से जुड़े संदेश, तस्वीरें और वीडियो साझा कर इस रिश्ते का जश्न मनाया जाता है।

दोस्ती के नाम पर एक दिन रखने का विचार कहां से आया?

फ्रेंडशिप डे का विचार करीब 100 साल पहले अमेरिका में सामने आया था। मशहूर ग्रीटिंग कार्ड कंपनी हॉलमार्क के संस्थापक जॉयस हॉल ने महसूस किया कि जैसे परिवार, माता-पिता और अन्य रिश्तों के लिए विशेष अवसर होते हैं, उसी तरह दोस्तों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए भी एक खास दिन होना चाहिए। उनका मानना था कि इस दिन लोग अपने मित्रों को कार्ड भेजकर या उनसे मिलकर अपने संबंधों को और मजबूत बना सकते हैं।

हालांकि, उस समय लोगों ने इस पहल को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। कई लोगों का मानना था कि यह केवल ग्रीटिंग कार्ड की बिक्री बढ़ाने का एक व्यावसायिक प्रयास है। इसी वजह से शुरुआती वर्षों में इस विचार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया और यह व्यापक स्तर पर लोकप्रिय नहीं हो सका।

पैराग्वे ने दी इस सोच को नई पहचान

समय के साथ यह विचार दक्षिण अमेरिका के देश पैराग्वे पहुंचा, जहां इसे एक नई दिशा मिली। वर्ष 1958 में वहां के सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने दोस्ती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फ्रेंडशिप डे मनाने की शुरुआत की। उनका मानना था कि मित्रता केवल दो व्यक्तियों के बीच का रिश्ता नहीं होती, बल्कि यह समाज, संस्कृतियों और देशों के बीच भी विश्वास और सहयोग की भावना पैदा कर सकती है।

पैराग्वे में इस पहल को लोगों का अच्छा समर्थन मिला और धीरे-धीरे यह परंपरा अन्य देशों तक भी पहुंचने लगी। इसके बाद कई देशों ने अपने-अपने तरीके से दोस्ती का उत्सव मनाना शुरू कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र ने भी दी आधिकारिक मान्यता

फ्रेंडशिप डे को वैश्विक पहचान तब मिली, जब संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2011 में 30 जुलाई को आधिकारिक तौर पर “अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस” घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मित्रता का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के बीच शांति, सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करना भी था।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मित्रता समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक प्रभावी माध्यम हो सकती है। अगर लोग एक-दूसरे को समझें, सम्मान दें और सहयोग की भावना रखें, तो दुनिया में कई तरह के विवाद और तनाव कम किए जा सकते हैं।

अलग-अलग देशों में अलग तारीख

हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने 30 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस घोषित किया है, लेकिन सभी देश इसी दिन फ्रेंडशिप डे नहीं मनाते। कई देशों ने अपनी परंपराओं और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तारीखें तय कर रखी हैं।

भारत, नेपाल, बांग्लादेश और कुछ अन्य देशों में यह दिन अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। वहीं, कुछ देशों में 30 जुलाई को ही आधिकारिक रूप से इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस वजह से हर साल सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग तारीखों पर फ्रेंडशिप डे से जुड़े संदेश देखने को मिलते हैं।

भारत में कैसे बढ़ी इसकी लोकप्रियता?

भारत में फ्रेंडशिप डे को असली पहचान 1990 के दशक में मिली। उस समय स्कूल और कॉलेजों में फ्रेंडशिप बैंड बांधने का चलन तेजी से बढ़ा। बाजारों में रंग-बिरंगे बैंड, ग्रीटिंग कार्ड और छोटे-छोटे गिफ्ट्स की बिक्री बढ़ने लगी। युवाओं के बीच यह दिन बेहद लोकप्रिय हो गया और धीरे-धीरे बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इसे मनाने लगे।

समय के साथ इंटरनेट और स्मार्टफोन के दौर ने इस उत्सव को और भी बड़ा बना दिया। अब लोग व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपने दोस्तों को शुभकामनाएं भेजते हैं। वीडियो कॉल, डिजिटल कार्ड, ऑनलाइन गिफ्ट और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से भी दोस्ती का जश्न मनाया जाता है।

दोस्ती का महत्व समय के साथ और बढ़ा

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोग अपने काम और जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं, वहां फ्रेंडशिप डे लोगों को अपने पुराने दोस्तों से जुड़ने का अवसर देता है। कई लोग इस दिन वर्षों बाद अपने स्कूल या कॉलेज के दोस्तों से संपर्क करते हैं। कुछ लोग पुराने फोटो साझा करते हैं, जबकि कई दोस्त साथ मिलकर पुरानी यादों को ताजा करते हैं।

मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि अच्छे दोस्त मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कठिन समय में दोस्तों का साथ व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाता है और तनाव कम करने में मदद करता है।

इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे और भारत का फ्रेंडशिप डे अलग क्यों?

अक्सर लोग 30 जुलाई और अगस्त के पहले रविवार को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। वास्तव में दोनों अवसर दोस्ती को समर्पित हैं, लेकिन उनका उद्देश्य अलग-अलग है।

30 जुलाई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस वैश्विक स्तर पर शांति, भाईचारे और देशों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने का संदेश देता है। दूसरी ओर भारत समेत कई देशों में अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाने वाला फ्रेंडशिप डे व्यक्तिगत रिश्तों और दोस्तों के साथ खुशियां साझा करने का अवसर माना जाता है।

बदलते समय के साथ बदला जश्न मनाने का तरीका

पहले जहां लोग हाथ से लिखे पत्र, ग्रीटिंग कार्ड और फ्रेंडशिप बैंड के जरिए अपने जज्बात व्यक्त करते थे, वहीं अब डिजिटल युग में यह तरीका काफी बदल चुका है। सोशल मीडिया पोस्ट, रील, स्टोरी, वीडियो संदेश और ऑनलाइन गिफ्ट्स ने इस उत्सव को नया रूप दे दिया है। बावजूद इसके, इस दिन का मूल उद्देश्य वही है अपने दोस्तों को यह एहसास दिलाना कि वे जीवन का अनमोल हिस्सा हैं।

दोस्ती का संदेश हमेशा रहेगा खास

फ्रेंडशिप डे केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन रिश्तों को सम्मान देने का अवसर है जो बिना किसी स्वार्थ के जीवनभर साथ निभाते हैं। अमेरिका में शुरू हुआ यह विचार आज दुनिया के अनेक देशों में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। चाहे तारीख अलग हो या जश्न मनाने का तरीका, इस दिन का संदेश एक ही है दोस्ती विश्वास, सहयोग, अपनापन और जीवनभर साथ निभाने का सबसे खूबसूरत रिश्ता है। यही कारण है कि हर साल लाखों लोग इस दिन अपने दोस्तों को धन्यवाद कहते हैं और इस अनमोल रिश्ते को और मजबूत बनाने का संकल्प लेते हैं।