माता-पिता की इन बदली आदतों को सिर्फ बुढ़ापे का असर न समझें, डिमेंशिया का हो सकता है शुरुआती संकेत

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में बदलाव आना स्वाभाविक है। याददाश्त पहले जैसी तेज न रहना, किसी चीज को थोड़ी देर से याद करना या कभी-कभार सामान रखकर भूल जाना आम बात हो सकती है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब बदलाव केवल भूलने तक सीमित न रहकर रोजमर्रा के काम, व्यवहार, बातचीत और फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित करने लगें। ऐसे संकेतों को परिवार के लोग अक्सर बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यही वह जगह है जहां परिवार को थोड़ा ज्यादा सजग होने की जरूरत होती है। फोर्टिस अस्पताल,…

40 की उम्र से पहले स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ रहा है? इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

आज से कुछ साल पहले अगर 30 या 40 साल की उम्र के किसी व्यक्ति को स्ट्रोक होने की खबर मिलती थी, तो परिवार और आसपास के लोगों के लिए यह बेहद चौंकाने वाली बात होती थी। आम धारणा यही थी कि स्ट्रोक बुजुर्गों की बीमारी है। लेकिन अब कम उम्र में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें व्यक्ति अचानक बोलने, चलने या शरीर के किसी हिस्से को हिलाने में परेशानी महसूस करने लगता है। कई बार मरीज और परिवार को शुरुआती तौर पर यह समझ ही नहीं आता कि मामला कितना गंभीर है। कम उम्र में स्ट्रोक…

रोजाना 6.4 से 7.8 घंटे की नींद क्यों मानी जा रही है सेहत के लिए अहम, जानिए क्या कहती हैं रिसर्च

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग काम, तनाव और डिजिटल स्क्रीन की वजह से अपनी नींद से समझौता कर रहे हैं। कई बार देर रात तक मोबाइल चलाना, ऑफिस का दबाव या अनियमित दिनचर्या पर्याप्त आराम नहीं लेने देती। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत केवल अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे शरीर की कार्यक्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकती है। हाल के वर्षों में प्रकाशित कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने संकेत दिए हैं कि रोजाना लगभग 6.4 से 7.8 घंटे की संतुलित नींद शरीर के लिए फायदेमंद…

देर रात तक जागना बन सकता है सेहत का दुश्मन, नींद की कमी से बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा; एक्सपर्ट्स ने दी बड़ी चेतावनी

आज के डिजिटल दौर में देर रात तक जागना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। काम का दबाव, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, वेब सीरीज और लगातार स्क्रीन टाइम ने लोगों की नींद का समय काफी बदल दिया है। कई लोग रात के घंटों को अपना निजी समय मानकर सोने में देरी करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से सिर्फ थकान और चिड़चिड़ापन नहीं बढ़ता, बल्कि दिमाग और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट्स…

रोज चिप्स और पैकेट फूड खाने की आदत से दिमाग पर पड़ सकता है असर, रिसर्च में सामने आई ये चिंता

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास खाना बनाने और सही डाइट लेने का समय कम होता जा रहा है। काम के बीच भूख लगने पर या खाली समय में लोग अक्सर चिप्स, बिस्किट, नमकीन, इंस्टेंट फूड और दूसरी पैकेट वाली चीजों का सहारा लेते हैं। ऑफिस में काम करते हुए, टीवी देखते समय या सफर के दौरान अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स खाना एक आम आदत बन चुकी है। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस आदत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन में दावा किया गया है कि ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन दिमाग…

रात में बार-बार खुल जाती है आंख? कहीं यह नींद की बीमारी आपके दिमाग को तो नुकसान नहीं पहुंचा रही

कई लोग रात में बार-बार नींद टूटने, तेज खर्राटे आने या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस होने को सामान्य मान लेते हैं। लेकिन कई बार ये संकेत शरीर में छिपी एक गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। अगर सोते समय सांस रुकने की वजह से बार-बार नींद खुलती है, तो यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) का लक्षण हो सकता है। यह नींद से जुड़ी ऐसी समस्या है जिसमें सोने के दौरान सांस की नली बार-बार संकरी या बंद हो जाती है, जिससे शरीर और खासकर दिमाग तक ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा नहीं पहुंच पाती। स्लीप एपनिया…

कम नींद से बढ़ सकता है दिमाग पर दबाव, नई रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बातें

नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए किसी दवा से कम नहीं मानी जाती। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ दिमाग को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है। लेकिन आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक जागना, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों की नींद लगातार प्रभावित हो रही है। अब एक नई स्टडी में सामने आया है कि लंबे समय तक नींद पूरी न होने या बार-बार नींद टूटने का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिमाग की अंदरूनी कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर…

मौसम बदलते ही क्यों बढ़ जाता है माइग्रेन का खतरा? जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के असरदार तरीके

मौसम में बदलाव कई लोगों के लिए सिर्फ तापमान का उतार-चढ़ाव नहीं होता, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआत भी बन सकता है। खासतौर पर माइग्रेन से जूझ रहे लोगों को मौसम बदलते ही तेज सिरदर्द, मतली और रोशनी या आवाज से परेशानी जैसी शिकायतें होने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द समझने की भूल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को काफी प्रभावित कर सकती है। अक्सर देखा गया है कि बारिश आने से पहले, तेज गर्मी पड़ने पर या ठंडी हवाएं…

मोबाइल की ओवरयूज से बढ़ रहा मानसिक दबाव, डॉक्टरों ने दी स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह

लगातार मोबाइल चलाना और देर रात तक स्क्रीन देखना क्यों बन रहा है दिमाग के लिए खतरा? विशेषज्ञों ने बताया मानसिक थकान, नींद और फोकस पर पड़ने वाला असर स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। काम, पढ़ाई, मनोरंजन, बैंकिंग, खरीदारी और सामाजिक संपर्क जैसे अधिकांश कार्य अब डिजिटल माध्यमों से पूरे होने लगे हैं। तकनीक ने जीवन को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके बढ़ते उपयोग ने मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को लेकर नई चुनौतियां भी पैदा की हैं। आज अधिकांश लोगों…

रोजाना कॉफी पीना बन सकता है सेहत का कवच: जानिए किन खतरनाक बीमारियों से मिल सकती है राहत

कॉफी पीने के फायदे: स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है यह पेय कॉफी आज की तेज रफ्तार जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सुबह की शुरुआत हो, ऑफिस में काम के बीच छोटा सा ब्रेक या दोस्तों के साथ बातचीत का समय, एक कप कॉफी लोगों को ताजगी और ऊर्जा का एहसास कराती है। दुनिया भर में करोड़ों लोग कॉफी का सेवन करते हैं और इसके स्वाद के साथ-साथ इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों को भी महत्व देते हैं। हालांकि कॉफी को लंबे समय तक केवल कैफीन वाले पेय के रूप में देखा जाता…