रेड मड से रेयर अर्थ निकालने की तैयारी, भारत में बड़ा प्लांट लगाने पर विदेशी कंपनी की नजर; वेदांता, हिंडाल्को और नालको से हो सकती है साझेदारी

भारत में रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में एक बड़ा औद्योगिक निवेश देखने को मिल सकता है। कनाडा की क्लाइमेट टेक्नोलॉजी कंपनी Enervoxa देश में ऐसा प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की संभावनाएं तलाश रही है, जहां एल्युमीनियम उत्पादन के दौरान निकलने वाले औद्योगिक अवशेष यानी रेड मड से रेयर अर्थ एलिमेंट्स निकाले जा सकें। इस दिशा में कंपनी निजी और सरकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर विचार कर रही है। चर्चा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए वेदांता, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और सरकारी कंपनी नालको (NALCO) के साथ बातचीत हो सकती है। अगर यह परियोजना आगे…

क्या आप जानते हैं? भारत आखिर क्यों देना चाहता है इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल, चीन क्यों है परेशान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से तीन देशों—इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया—की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरे में सबसे अधिक नजरें इंडोनेशिया पर टिकी हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। माना जा रहा है कि यह साझेदारी सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक तस्वीर को भी प्रभावित कर सकती है। भारत और इंडोनेशिया पिछले कुछ वर्षों से अपने संबंधों को नई दिशा देने में जुटे हैं। व्यापार, रक्षा, समुद्री सहयोग और…

क्वाड बैठक में इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर जोर: होर्मुज संकट, ऊर्जा सप्लाई और समुद्री निगरानी पर बनी सहमति

नई दिल्ली में आयोजित क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों एवं वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक की अध्यक्षता की। क्वाड समूह का उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बढ़ावा देना है। हाल के वर्षों में समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, उभरती तकनीकों, जलवायु सहयोग, साइबर सुरक्षा और मानवीय सहायता जैसे…