सिर्फ प्रोटीन पर टिकी डाइट पड़ सकती है भारी, फाइबर की कमी बढ़ा सकती है बीमारी का खतरा

सिर्फ प्रोटीन पर टिकी डाइट पड़ सकती है भारी, फाइबर की कमी बढ़ा सकती है बीमारी का खतरा

आज के समय में जिम, फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। खासकर युवाओं में मसल्स बनाने, शरीर को टोन करने और फिट दिखने की इच्छा के कारण हाई-प्रोटीन डाइट का चलन काफी बढ़ा है। जिम जाने वाले कई लोग अपनी डाइट में अंडे, दूध, पनीर, दाल, सोया, चिकन, मछली और प्रोटीन सप्लीमेंट जैसी चीजों को शामिल करते हैं।

प्रोटीन शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है। यह मांसपेशियों की मरम्मत और विकास के साथ-साथ शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाता है। हालांकि, फिटनेस के प्रति बढ़ते उत्साह के बीच एक समस्या भी सामने आ रही है। कई लोग प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन फाइबर, विटामिन, मिनरल और अन्य जरूरी पोषक तत्वों को अपनी डाइट में पर्याप्त जगह नहीं देते।

डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाते समय यदि फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ कम कर दिए जाएं, तो पाचन से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। कब्ज, पेट फूलना, गैस और अनियमित बाउल मूवमेंट जैसी समस्याएं ऐसे लोगों में देखने को मिल सकती हैं।

इसलिए फिटनेस डाइट का मतलब केवल अधिक प्रोटीन खाना नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, स्वस्थ वसा, विटामिन और मिनरल्स का संतुलित सेवन भी जरूरी है।

प्रोटीन शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

प्रोटीन शरीर के प्रमुख पोषक तत्वों में से एक है। यह मांसपेशियों, त्वचा, बालों और शरीर के कई ऊतकों के निर्माण और मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित व्यायाम करने वाले लोगों के लिए पर्याप्त प्रोटीन लेना मांसपेशियों की रिकवरी और विकास में मदद कर सकता है।

जब कोई व्यक्ति वर्कआउट करता है, तो मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। पर्याप्त प्रोटीन शरीर को इन मांसपेशियों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक अमीनो एसिड उपलब्ध कराने में मदद करता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक से अधिक प्रोटीन खाना हमेशा बेहतर होता है। प्रोटीन की जरूरत व्यक्ति की उम्र, शरीर के वजन, शारीरिक गतिविधि, व्यायाम के स्तर और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

इसलिए किसी एक तय मात्रा को हर व्यक्ति के लिए सही मानना उचित नहीं है। खासतौर पर किडनी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लेनी चाहिए।

फाइबर को क्यों कहा जाता है जरूरी पोषक तत्व?

फाइबर पौधों से मिलने वाला एक ऐसा कार्बोहाइड्रेट है जिसे शरीर पूरी तरह पचा नहीं पाता। इसके बावजूद यह पाचन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

फाइबर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—घुलनशील और अघुलनशील। दोनों के शरीर में अलग-अलग फायदे हो सकते हैं। घुलनशील फाइबर पानी में मिलकर जेल जैसी संरचना बना सकता है, जबकि अघुलनशील फाइबर मल को बढ़ाने और आंतों के माध्यम से उसे आगे बढ़ाने में मदद करता है।

फाइबर की पर्याप्त मात्रा लेने से बाउल मूवमेंट नियमित रखने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, चने, मेवे और बीज जैसी चीजों को संतुलित डाइट का हिस्सा माना जाता है।

हाई-प्रोटीन डाइट में फाइबर की कमी क्यों हो जाती है?

हाई-प्रोटीन डाइट अपनाने वाले कुछ लोग अपनी प्लेट से फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को कम कर देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति प्रोटीन बढ़ाने के लिए अधिक अंडे, चिकन, मछली या डेयरी उत्पाद खाने लगे और साथ में फल, सब्जियां और साबुत अनाज की मात्रा कम कर दे, तो उसकी कुल फाइबर खपत घट सकती है।

मांस, अंडे और डेयरी उत्पाद प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं, लेकिन इनमें आमतौर पर फाइबर नहीं होता। इसलिए हाई-प्रोटीन डाइट में यदि पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों को पर्याप्त जगह नहीं दी जाए तो फाइबर की कमी हो सकती है।

इसी कारण फिटनेस डाइट तैयार करते समय केवल प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान देने के बजाय पूरे आहार की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।

फाइबर की कमी से हो सकती है कब्ज की समस्या

फाइबर कम लेने का सबसे आम असर पाचन तंत्र पर दिखाई दे सकता है। पर्याप्त फाइबर न मिलने पर कुछ लोगों को कब्ज की समस्या हो सकती है।

फाइबर मल में मात्रा बढ़ाने और उसे आंतों के माध्यम से आगे बढ़ाने में मदद करता है। इसके साथ पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। यदि व्यक्ति फाइबर तो बढ़ा दे लेकिन पानी पर्याप्त मात्रा में न पिए, तो कुछ मामलों में पेट से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।

इसलिए फाइबर और पानी दोनों को संतुलित रखना जरूरी है। अगर लंबे समय से कब्ज की समस्या बनी हुई है, तो इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं और डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

गैस और पेट फूलने की समस्या भी हो सकती है

फाइबर की मात्रा अचानक बढ़ाने पर कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फाइबर नुकसानदायक है। अक्सर ऐसा तब होता है जब शरीर को कम फाइबर वाली डाइट की आदत होती है और व्यक्ति अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना शुरू कर देता है।

इसलिए फाइबर का सेवन धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर माना जाता है। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को नियमित भोजन में धीरे-धीरे शामिल किया जा सकता है।

यदि पेट फूलना या गैस लगातार बनी रहती है, तो केवल डाइट को जिम्मेदार मानने के बजाय डॉक्टर से कारण की जांच करवाना उचित हो सकता है।

फाइबर और गट हेल्थ का क्या संबंध है?

हमारी आंतों में बड़ी संख्या में सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जिन्हें आमतौर पर गट माइक्रोबायोटा कहा जाता है। इनमें कुछ ऐसे बैक्टीरिया भी होते हैं जो पाचन तंत्र के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पौधों से मिलने वाले कई प्रकार के फाइबर इन लाभकारी आंतों के बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम कर सकते हैं। इसलिए पर्याप्त फाइबर वाली विविध डाइट गट हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है।

हालांकि, गट हेल्थ केवल फाइबर पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है

जो लोग वजन कम करने या वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। फाइबर पाचन प्रक्रिया को धीमा करने और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है।

इससे बार-बार स्नैकिंग या जरूरत से ज्यादा खाने की आदत को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, वजन घटाने के लिए केवल फाइबर बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। कुल कैलोरी सेवन, शारीरिक गतिविधि, नींद और संपूर्ण डाइट का संतुलन भी महत्वपूर्ण होता है।

ब्लड शुगर को मैनेज करने में फाइबर की भूमिका

कुछ प्रकार के फाइबर भोजन के पाचन और कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इससे भोजन के बाद ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

यही कारण है कि साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियां संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। हालांकि, डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अपनी डाइट में बदलाव डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

क्या 50 से 60 ग्राम प्रोटीन सभी के लिए पर्याप्त है?

प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। यह कहना सही नहीं होगा कि सभी वयस्कों के लिए 50 से 60 ग्राम प्रोटीन ही पर्याप्त है।

एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की प्रोटीन आवश्यकता उसके शरीर के वजन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय होती है। वहीं, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वाले खिलाड़ियों और एथलीट्स की जरूरत इससे अधिक हो सकती है।

उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का लक्ष्य मसल्स बनाना है और वह नियमित रूप से भारी वर्कआउट करता है, तो उसकी प्रोटीन आवश्यकता सामान्य रूप से कम सक्रिय व्यक्ति से अलग हो सकती है।

इसी तरह उम्रदराज लोगों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों के लिए पोषण संबंधी जरूरतें अलग हो सकती हैं।

इसलिए हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करने से पहले व्यक्तिगत जरूरत को समझना जरूरी है।

रोज कितने फाइबर की जरूरत होती है?

फाइबर की जरूरत भी उम्र, लिंग और कुल कैलोरी सेवन के आधार पर अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर कई वयस्कों के लिए प्रतिदिन लगभग 25 से 35 ग्राम फाइबर का लक्ष्य उपयोगी माना जाता है, लेकिन हर व्यक्ति की आवश्यकता अलग हो सकती है।

बहुत से लोगों की डाइट में फाइबर की मात्रा अनुशंसित स्तर से कम होती है। इसका एक कारण यह भी है कि आधुनिक डाइट में रिफाइंड अनाज, पैकेज्ड फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स की मात्रा बढ़ गई है।

फाइबर बढ़ाने के लिए महंगे सप्लीमेंट की जरूरत हमेशा नहीं होती। रोजमर्रा के भोजन में प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को शामिल करना एक आसान तरीका हो सकता है।

फाइबर के अच्छे प्राकृतिक स्रोत कौन से हैं?

फाइबर बढ़ाने के लिए कई सामान्य खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • सेब, नाशपाती और अमरूद जैसे फल
  • पपीता और संतरा
  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • गाजर और चुकंदर
  • दालें और राजमा
  • चना और छोले
  • ओट्स
  • ब्राउन राइस और अन्य साबुत अनाज
  • अलसी और चिया सीड्स
  • बादाम और अन्य मेवे
  • बीन्स और मटर

इन खाद्य पदार्थों को अपनी व्यक्तिगत कैलोरी और पोषण की जरूरतों के अनुसार डाइट में शामिल किया जा सकता है।

जिम जाने वालों के लिए संतुलित प्लेट कैसी हो सकती है?

फिटनेस डाइट को केवल प्रोटीन शेक और सप्लीमेंट पर आधारित रखने के बजाय भोजन में अलग-अलग पोषक तत्वों को शामिल करना बेहतर हो सकता है।

एक संतुलित भोजन में प्रोटीन के स्रोत के साथ सब्जियां, साबुत अनाज या अन्य जटिल कार्बोहाइड्रेट और स्वस्थ वसा का उचित संयोजन रखा जा सकता है।

उदाहरण के लिए, दाल के साथ सब्जियां और साबुत अनाज, या ग्रिल्ड पनीर अथवा चिकन के साथ सलाद और सब्जियां एक संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकते हैं। भोजन का सही संयोजन व्यक्ति के फिटनेस लक्ष्य और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

प्रोटीन सप्लीमेंट लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

प्रोटीन पाउडर या अन्य सप्लीमेंट कुछ लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकते हैं, खासकर जब भोजन से पर्याप्त प्रोटीन लेना मुश्किल हो। लेकिन सप्लीमेंट को संपूर्ण भोजन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

प्रोटीन शेक में फाइबर की मात्रा बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति रोजाना प्रोटीन सप्लीमेंट लेता है, तो उसे अपनी बाकी डाइट में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करने पर ध्यान देना चाहिए।

सप्लीमेंट चुनते समय उसकी सामग्री, प्रोटीन की मात्रा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर विकल्प है।

पानी पीना भी है बेहद जरूरी

हाई-प्रोटीन और हाई-फाइबर डाइट लेने वाले लोगों के लिए पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। शरीर की पानी की जरूरत मौसम, शारीरिक गतिविधि, पसीना निकलने और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदलती रहती है।

फाइबर का सेवन बढ़ाते समय पर्याप्त तरल पदार्थ लेना पाचन को बेहतर तरीके से सपोर्ट कर सकता है। वहीं, जिम में लंबे समय तक व्यायाम करने वाले लोगों को पसीने के जरिए खोए तरल पदार्थ की भरपाई पर भी ध्यान देना चाहिए।

हालांकि, पानी की जरूरत हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होती और किडनी या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों को तरल पदार्थ की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

फिटनेस का मतलब केवल मसल्स बनाना नहीं

फिटनेस को केवल मसल्स का आकार या शरीर का वजन कम करने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। एक स्वस्थ शरीर के लिए मजबूत मांसपेशियों के साथ अच्छा पाचन, पर्याप्त ऊर्जा, बेहतर नींद और संतुलित पोषण भी महत्वपूर्ण हैं।

यदि कोई व्यक्ति केवल प्रोटीन बढ़ाकर फल, सब्जियां और साबुत अनाज को डाइट से हटा देता है, तो उसकी डाइट असंतुलित हो सकती है। लंबे समय तक ऐसी आदतें अपनाने के बजाय अलग-अलग पोषक तत्वों को उचित मात्रा में शामिल करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।

डाइट में बदलाव धीरे-धीरे करें

यदि आपकी वर्तमान डाइट में फाइबर बहुत कम है, तो इसे अचानक बहुत अधिक बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बदलाव करना बेहतर हो सकता है। रोजाना भोजन में एक अतिरिक्त फल, सब्जियों की मात्रा बढ़ाना या रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज चुनना शुरुआत के आसान तरीके हो सकते हैं।

साथ ही, अपने शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है। यदि लगातार कब्ज, पेट दर्द, अत्यधिक गैस, खून आना या पाचन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो, तो इसे केवल डाइट का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

फिटनेस और मसल्स बनाने के लक्ष्य के लिए प्रोटीन महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वस्थ डाइट का आधार केवल प्रोटीन नहीं होता। शरीर को फाइबर सहित कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए जिम और वर्कआउट के साथ ऐसी डाइट अपनाना अधिक उपयोगी हो सकता है जिसमें पर्याप्त प्रोटीन के साथ फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी शामिल हों।