श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज: पूजा में इन बातों का रखें ध्यान, जानें व्रत से पारण तक की पूरी जानकारी

आज 4 सितंबर को देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त दिनभर व्रत रखने के बाद रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय यानी निशिता काल में पूजा करेंगे। इस दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार, भोग, आरती और जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अन्न का त्याग करते हैं। कुछ भक्त पूरे दिन केवल फल, दूध और अन्य व्रत की चीजों का सेवन करते हैं, जबकि कुछ लोग…

दही-हांडी सिर्फ मटकी फोड़ने का खेल नहीं, जानिए कृष्ण की लीला से महाराष्ट्र के बड़े उत्सव तक का पूरा सफर

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर देशभर में अलग-अलग तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन्हीं में दही-हांडी का उत्सव खास आकर्षण का केंद्र रहता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है और इसके अगले दिन कई शहरों में दही-हांडी के आयोजन होंगे। खासतौर पर महाराष्ट्र में इस पर्व का उत्साह देखने लायक होता है। मुंबई, ठाणे, पुणे और आसपास के इलाकों में बड़ी-बड़ी हांड़ियां ऊंचाई पर लटकाई जाती हैं और उन्हें फोड़ने के लिए गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर दही-हांडी की यह परंपरा शुरू…

जन्माष्टमी की आधी रात को ही क्यों हुआ श्रीकृष्ण का प्राकट्य, क्या है इस पावन रात की विशेष महिमा?

सनातन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक माना जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी से जुड़ी मान्यताओं में सबसे खास बात भगवान श्रीकृष्ण का मध्यरात्रि में प्रकट होना है। यही वजह है कि जन्माष्टमी की रात को अत्यंत पवित्र और मंगलकारी माना जाता है। शास्त्रों में श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्णावतार और परम पुरुषोत्तम बताया गया है। उनके अवतरण का उद्देश्य केवल कंस जैसे अत्याचारी का अंत करना नहीं था,…

भाद्रपद माह की शुरुआत, 26 सितंबर तक रहें इन बातों का ध्यान; जानें क्या करें, क्या न करें

हिंदू पंचांग में भाद्रपद का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। सावन पूर्णिमा के बाद इस पवित्र महीने का आगमन होता है। इस वर्ष वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की शुरुआत 29 अगस्त से हो गई है और यह 26 सितंबर तक रहेगा। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। भाद्रपद को केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं माना जाता, बल्कि इसे आत्मसंयम, तप, साधना और आत्मशुद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में व्यक्ति को अपने खान-पान से लेकर…

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: 3 या 4 सितंबर, किस दिन रखा जाएगा व्रत? जानें पूजा और पारण का सही समय

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का इंतजार भक्तों को पूरे साल रहता है। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस त्योहार को अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं मंदिरों में भव्य झांकियां सजती हैं तो कहीं आधी रात को कान्हा के जन्म के बाद विशेष अभिषेक और आरती होती है। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस देखने को मिल रहा…

अधिक मास की कालाष्टमी और कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग: व्रत और पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां

सनातन धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह ऐसा विशेष समय होता है जब साधना, पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आत्मचिंतन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण अधिक मास में आने वाले प्रत्येक व्रत, पर्व और धार्मिक तिथि का महत्व सामान्य महीनों की तुलना में अधिक माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास के दौरान कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का…