सावन के पहले सोमवार पर भोलेनाथ की पूजा कैसे करें? जानें जलाभिषेक की सही विधि, जरूरी सामग्री और व्रत का महत्व

भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना शुरू होते ही देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगती है। इस वर्ष 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है, जिसे शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक, व्रत और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि सावन के सोमवार का इंतजार पूरे वर्ष श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ करते हैं। अगर आप भी इस…

सावन में क्यों निकलती है कांवड़ यात्रा? जानिए इसकी पौराणिक कथा, धार्मिक महत्व और जलाभिषेक की पूरी परंपरा

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। जैसे ही इस महीने की शुरुआत होती है, देश के अलग-अलग हिस्सों में शिवभक्तों की आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। लाखों कांवड़िये पवित्र नदियों से जल भरकर कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। हर साल यह दृश्य करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बन जाता है। हालांकि अधिकांश लोग कांवड़ यात्रा में शामिल होते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि आखिर इस परंपरा की शुरुआत…

सावन का पावन आरंभ आज: जानिए शिव आराधना की संपूर्ण विधि, शुभ समय, मंत्र, भोग और धार्मिक मान्यता

भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले सावन मास का शुभारंभ आज, 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हो गया है। यह पावन महीना 28 अगस्त 2026, शुक्रवार तक चलेगा। सावन की शुरुआत होते ही देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। सुबह से ही मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव मंत्रों के जाप का सिलसिला जारी है। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी शिवलिंग की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं।…

सावन सोमवार के इन उपायों से दूर हो सकती हैं विवाह में आ रही रुकावटें, शिव-पार्वती की पूजा से बनते हैं शुभ संयोग

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की कई परेशानियाँ दूर होने की मान्यता है। खासतौर पर सावन के सोमवार का दिन शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। कई लोगों के जीवन में विवाह को लेकर लगातार परेशानियाँ बनी रहती हैं। रिश्ता तय होते-होते टूट जाता है या फिर किसी न किसी कारण से शादी में देरी होती रहती है। ज्योतिष शास्त्र…

सावन में कांवड़ यात्रा पर नहीं जा पा रहे हैं? घर बैठे भी पा सकते हैं शिव कृपा, जानिए पूजा का संपूर्ण तरीका

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे माह में देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज, देवघर और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करते हैं और अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संयम, तपस्या, सेवा, अनुशासन और अटूट श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु कई दिनों तक कठिन मार्ग…

कालसर्प दोष से मिल सकती है राहत, सावन शिवरात्रि पर शिव आराधना के साथ करें ये ज्योतिषीय उपाय

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में भक्त शिव पूजा, व्रत, जलाभिषेक और मंत्र जाप के माध्यम से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इन्हीं विशेष दिनों में आने वाली सावन शिवरात्रि का महत्व और भी अधिक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान शिव की आराधना, ग्रह दोषों की शांति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन किए गए कुछ विशेष उपायों को प्रभावी माना गया है,…

सावन 2026 में प्रदोष व्रत की दो अहम तिथियां, जानिए पूजा का सही समय, महत्व और व्रत से जुड़े नियम

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस पूरे माह में शिव भक्त विशेष श्रद्धा के साथ भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और व्रत-उपवास करते हैं। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धापूर्वक की गई शिव पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सावन के दौरान आने वाले प्रत्येक सोमवार का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन इसके साथ ही प्रदोष व्रत भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह दो बार त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है…

चातुर्मास 2026: भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद किस देवता के हाथों में रहती है सृष्टि की कमान? जानिए पौराणिक रहस्य

सनातन परंपरा में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह वह पवित्र अवधि होती है जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए प्रस्थान करते हैं और चार महीने तक विश्राम करते हैं। चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवशयनी एकादशी से होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान भगवान विष्णु सृष्टि के नियमित संचालन से कुछ समय के लिए अलग हो जाते हैं। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि जब पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, तो पूरे संसार की व्यवस्था कौन संभालता…

कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, छोटी सी चूक भी कर सकती है आपकी तपस्या अधूरी

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और पवित्र नदियों से जल लाकर अपने आराध्य भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों और गांवों की ओर पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन, श्रद्धा और तपस्या का प्रतीक भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता…

सावन 2026: इस दिन से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना, जानें चारों सावन सोमवार की तिथियां, व्रत का महत्व और संपूर्ण पूजा-विधि

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे मास में देशभर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और श्रद्धालु बड़ी संख्या में भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सावन के दौरान सच्चे मन से की गई शिव भक्ति व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। यही कारण है कि इस महीने का इंतजार शिव भक्त पूरे वर्ष करते हैं। सावन के आते ही मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और कांवड़ यात्रा जैसी…

कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था लिपुलेख दर्रा पार कर पहुंचा चीन, श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। शुक्रवार को यात्रा के पहले जत्थे ने उत्तराखंड स्थित लिपुलेख दर्रा पार करते हुए चीन की सीमा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया। जैसे ही श्रद्धालुओं ने सीमा पार की, पूरे क्षेत्र में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष गूंज उठे। लंबे समय से इस आध्यात्मिक यात्रा का इंतजार कर रहे यात्रियों के चेहरे पर खुशी, उत्साह और आस्था साफ दिखाई दी। सीमा पार करने के बाद सभी यात्रियों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और भगवान शिव का स्मरण करते हुए आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान किया।…

इस तारीख से शुरू होगी कांवड़ यात्रा, जानिए कब भरेंगे गंगाजल और कब होगा जलाभिषेक

भगवान शिव के भक्त पूरे वर्ष जिस पवित्र महीने का सबसे अधिक इंतजार करते हैं, वह है श्रावण मास, जिसे आमतौर पर सावन भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, व्रत और गंगाजल से जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस पूरे महीने देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। सावन की शुरुआत के साथ ही उत्तर भारत में सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ हो…

Amarnath Yatra 2026: बाबा बर्फानी के दर्शन क्यों माने जाते हैं सौभाग्य की निशानी? जानिए अमरनाथ गुफा का धार्मिक रहस्य

अमरनाथ यात्रा 2026 का शुभारंभ होने जा रहा है और इसके लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पहला जत्था ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ रवाना हो चुका है। इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होने वाली यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी। करीब 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा पहुंचेंगे और बाबा बर्फानी के दर्शन का प्रयास करेंगे। अमरनाथ यात्रा को हिंदू धर्म की सबसे कठिन और पवित्र तीर्थ यात्राओं में गिना जाता है। ऊंचे पहाड़, बर्फ से ढके रास्ते, बदलता मौसम और…

4 जुलाई से फिर खुलेगा आस्था का मार्ग, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 10 जत्थों की तैयारी पूरी

भगवान शिव के पवित्र धाम कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। वर्ष 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ 4 जुलाई से होने जा रहा है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के समन्वय में आयोजित इस वर्ष की यात्रा के लिए तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN), जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, आईटीबीपी और अन्य संबंधित एजेंसियां यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटी हैं। इस बार भी श्रद्धालु उत्तराखंड…

अधिक मास का विशेष शुक्र प्रदोष व्रत आज, शिव-आराधना से मिलेगा पुण्य फल; जानें शुभ समय, पूजा नियम और महत्वपूर्ण मंत्र

सनातन परंपरा में भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष स्थान माना गया है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत भक्तों को आध्यात्मिक शांति और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। जब त्रयोदशी शुक्रवार के दिन पड़ती है, तब इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास के दौरान आने वाला यह व्रत कई शुभ योगों के कारण और भी खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को सायं 7 बजकर 36 मिनट…

पूजा में परिक्रमा का नियम: हर देवी-देवता के लिए अलग है संख्या, जानिए सही विधि

सनातन धर्म में पूजा-पाठ केवल भगवान के सामने प्रार्थना करने तक सीमित नहीं माना जाता। मंदिर में प्रवेश करने से लेकर दर्शन, आरती, प्रसाद ग्रहण करने और परिक्रमा करने तक हर धार्मिक क्रिया का अपना अलग महत्व बताया गया है। इनमें परिक्रमा को विशेष स्थान प्राप्त है। श्रद्धालु जब किसी देवी-देवता या मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर घूमते हैं, तो इसे भगवान के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आस्था की अभिव्यक्ति माना जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में यह मान्यता प्रचलित है कि मंदिर में स्थापित देवता को जीवन का केंद्र मानकर उनके चारों ओर परिक्रमा करने से मन में…

गंगा सप्तमी 2026: जानिए मां गंगा के अवतरण की पौराणिक कथा और इस दिन का महत्व

भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का प्रतीक माना गया है। इनमें मां गंगा का स्थान सबसे ऊंचा है। गंगा को हिंदू धर्म में मोक्षदायिनी, पवित्र और जीवन प्रदान करने वाली नदी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि मां गंगा के जल का स्पर्श व्यक्ति के तन और मन को शुद्ध करता है। हर वर्ष वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी का पवित्र पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह शुभ तिथि 23 अप्रैल, गुरुवार को पड़ रही है।…