पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध? मृत्यु की तारीख मालूम है तो पंचांग से ऐसे खोजें सही तिथि

पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। मान्यता के अनुसार परिवार में जिस व्यक्ति का निधन जिस हिंदू तिथि को हुआ हो, उसी तिथि पर पितृ पक्ष के दौरान उसका श्राद्ध किया जाता है। यही वजह है कि श्राद्ध के लिए अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख से ज्यादा महत्वपूर्ण उस दिन की हिंदू तिथि मानी जाती है। कई परिवारों में ऐसी स्थिति भी होती है जब किसी बुजुर्ग या परिजन के निधन की तारीख तो परिवार को याद रहती है, लेकिन यह जानकारी नहीं होती कि…

इस दिन से शुरू होगा पितृपक्ष, जानिए क्यों खास माने जाते हैं ये 16 दिन

हिंदू धार्मिक परंपरा में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष समय माना जाता है। यह अवधि उन दिवंगत परिजनों को याद करने से जुड़ी है, जिनके प्रति परिवार अपनी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करता है। पितृपक्ष के दौरान लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और भोजन कराने जैसे कर्म करते हैं। हर साल पितृपक्ष की तिथियां हिंदू पंचांग के आधार पर निर्धारित होती हैं। वर्ष 2026 में भी इस अवधि को लेकर लोगों के बीच तारीखों को जानने की उत्सुकता है। कई लोग यह समझना चाहते हैं…

पितृपक्ष 2026: गया जी में ही क्यों किया जाता है पिंडदान? जानिए पितरों के मोक्ष से जुड़ी धार्मिक मान्यता

पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक महत्वपूर्ण अवधि मानी जाती है। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के दौरान आने वाले इन 15 दिनों में लोग अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पितरों को संतुष्टि प्रदान करता है। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान देशभर में लोग अपने पूर्वजों के निमित्त अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। हालांकि, पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांडों में बिहार के गया धाम का विशेष स्थान माना जाता है। यहां पिंडदान करने के…

पितृ पक्ष 2026: 27 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध के दिन, जानें प्रतिपदा श्राद्ध की तारीख, कुतुप मुहूर्त और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान परिवार के लोग अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों को संतुष्टि मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है। हर साल पितृ पक्ष भाद्रपद या आश्विन मास के कृष्ण पक्ष से जुड़ी तिथियों के अनुसार आता है। इस अवधि में अलग-अलग तिथियों पर उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता…