अमेरिका-ईरान समझौते की अटकलें तेज, कतर टीम तेहरान पहुंची; परमाणु कार्यक्रम से लेकर तेल कारोबार तक कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति

अमेरिका-ईरान समझौते की अटकलें तेज, कतर टीम तेहरान पहुंची; परमाणु कार्यक्रम से लेकर तेल कारोबार तक कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति

मध्य पूर्व की राजनीति में इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। इसी बीच कतर की मध्यस्थता भी तेज हो गई है और रविवार को उसका एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच गया। माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच जारी बातचीत को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं, लेकिन ईरान ने इस समयसीमा की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद तेहरान ने संकेत दिए हैं कि वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और दोनों पक्ष पहले की तुलना में समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं।

पाकिस्तान की 24 घंटे वाली भविष्यवाणी सही नहीं निकली

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अप्रत्यक्ष भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा था कि अगले 24 घंटे के भीतर समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद किसी औपचारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।

इसके बावजूद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और कुछ तकनीकी तथा राजनीतिक बिंदुओं पर सहमति बनते ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

कतरी प्रतिनिधिमंडल ने संभाली मध्यस्थता की कमान

रविवार को कतर का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस टीम का उद्देश्य हाल के दिनों में हुई वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा करना और दोनों पक्षों के बीच बचे हुए मतभेदों को दूर करने की कोशिश करना है।

बताया जा रहा है कि प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी के वरिष्ठ सलाहकार कर रहे हैं। कतर पिछले कई वर्षों से क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी वह अमेरिका तथा ईरान के बीच पुल बनाने का प्रयास कर रहा है।

मसौदा समझौते में शामिल हैं कई बड़े आर्थिक प्रावधान

वार्ता से जुड़े एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के बीच तैयार किए गए प्रारंभिक समझौता ज्ञापन में आर्थिक और वित्तीय राहत से जुड़े कई अहम बिंदु शामिल किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने अंतिम व्यापक समझौता होने तक ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाने का आश्वासन दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अतिरिक्त अमेरिका सीमित अवधि के लिए ईरानी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत देने पर भी सहमत हुआ है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल निर्यात करने और उससे राजस्व अर्जित करने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है।

फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति भी मिल सकती है

वार्ता से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अमेरिका ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने के विकल्प पर भी सहमत हुआ है। इस प्रक्रिया में प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण, क्षेत्रीय साझेदार देशों के सहयोग से वित्तीय व्यवस्था और विशेष ऋण सुविधाओं जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।

यह कदम ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसकी बड़ी मात्रा में विदेशी संपत्ति वर्षों से विभिन्न देशों में फंसी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी सहमति

मसौदा समझौते का एक और अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए इस समुद्री मार्ग को तुरंत खोलने पर सहमत हुआ है। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू अपनी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाने की दिशा में कदम उठाएगा।

यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है और वैश्विक व्यापार को भी राहत मिल सकती है।

परमाणु कार्यक्रम सबसे संवेदनशील मुद्दा

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सबसे जटिल विषय परमाणु कार्यक्रम रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कई वर्षों से इसी मुद्दे को लेकर सबसे अधिक टकराव देखने को मिला है।

मसौदा समझौते के अनुसार ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही ऐसे हथियार हासिल करने का प्रयास करेगा। इसके अलावा अंतिम समझौते तक अपनी वर्तमान परमाणु नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करने का आश्वासन भी दिया गया है।

इसका मतलब है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों का विस्तार नहीं करेगा और नई परमाणु सुविधाओं के निर्माण से भी परहेज करेगा। बदले में अमेरिका ने ईरान के साथ आगे की तकनीकी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।

यूरेनियम भंडार पर आगे होगी विस्तृत चर्चा

सूत्रों के अनुसार ईरान के पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने के लिए भी एक तंत्र विकसित किया जाएगा। हालांकि इस विषय पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

दोनों पक्षों ने तय किया है कि प्रारंभिक शांति समझौते के बाद 60 दिनों के भीतर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और एक ऐसा ढांचा तैयार किया जाएगा जो दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को संतुलित कर सके।

अंतिम समझौते के लिए 60 दिन का रोडमैप

प्रारंभिक समझौते के मसौदे में यह भी प्रावधान रखा गया है कि शांति ज्ञापन पर सहमति बनने के बाद दोनों देश अगले 60 दिनों के भीतर व्यापक और अंतिम समझौते पर बातचीत करेंगे।

इस अवधि के दौरान परमाणु गतिविधियों, आर्थिक प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों और वित्तीय सहयोग जैसे विषयों पर विस्तृत वार्ता होगी। माना जा रहा है कि यही चरण भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगा।

अभी औपचारिक घोषणा का इंतजार

हालांकि बातचीत में प्रगति के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष ने औपचारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि नहीं की है। अमेरिका और ईरान दोनों ही अंतिम घोषणा से पहले सावधानी बरत रहे हैं।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान वार्ताएं सफल रहती हैं तो यह समझौता न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में बड़ा बदलाव ला सकता है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें तेहरान और वाशिंगटन पर टिकी हुई हैं, जहां आने वाले दिनों में इस बहुप्रतीक्षित समझौते को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।