मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर हुए समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। समझौते की घोषणा के बाद ईरान ने इसे अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत करार दिया है। तेहरान का कहना है कि इस समझौते के जरिए उसने न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा की है, बल्कि अमेरिका और इजरायल के सामने अपनी ताकत भी साबित की है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों देशों के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का मसौदा तैयार कर लिया गया है। ईरानी मीडिया में इस समझौते को लेकर कई बड़े दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। अमेरिका और ईरान दोनों में से किसी ने भी अब तक समझौते का आधिकारिक और अंतिम दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया है।
आर्थिक राहत पर सबसे ज्यादा जोर
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक प्रतिबंधों में राहत है। दावा किया जा रहा है कि वर्षों से विभिन्न प्रतिबंधों के कारण प्रभावित ईरानी अर्थव्यवस्था को इस समझौते के बाद बड़ी राहत मिल सकती है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की संपत्तियों का एक हिस्सा जल्द जारी किया जाएगा। बाद के चरणों में इस प्रक्रिया का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक दोबारा व्यापक पहुंच मिलने की बात भी कही जा रही है। मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, समझौते के तहत ईरान को चरणबद्ध तरीके से अपने अरबों डॉलर के फंसे हुए धन का उपयोग करने की अनुमति मिल सकती है। इससे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
300 अरब डॉलर के फंड का दावा
समझौते से जुड़ा एक और बड़ा दावा 300 अरब डॉलर के मुआवजा फंड को लेकर किया गया है। ईरानी मीडिया का कहना है कि युद्ध और उससे जुड़े नुकसान की भरपाई के लिए यह विशेष फंड तैयार किया जाएगा। हालांकि इस दावे की अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि से जुड़े किसी भी प्रावधान की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही की जा सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चर्चा तेज
समझौते के सबसे चर्चित पहलुओं में होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है। रिपोर्टों में कहा गया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के संचालन और प्रबंधन में ईरान की भूमिका को मान्यता दी जाएगी।
दावा यह भी किया जा रहा है कि भविष्य में यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूली की व्यवस्था बनाई जा सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है और वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र से जुड़ा कोई भी फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
परमाणु कार्यक्रम पर क्या कहा गया?
ईरानी मीडिया की रिपोर्टों में देश के परमाणु कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है। बताया जा रहा है कि समझौते में संवर्धित यूरेनियम और परमाणु सुविधाओं को लेकर विशेष प्रावधान शामिल हैं।
दावों के अनुसार, ईरान के परमाणु संसाधन और सुविधाएं देश के भीतर ही बनी रहेंगी। यह मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ विवाद का प्रमुख कारण रहा है। ऐसे में यदि इस संबंध में कोई नई व्यवस्था बनाई गई है तो उसका क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर बड़ा महत्व होगा।
अरबों डॉलर की तत्काल रिहाई का भी दावा
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि समझौते के प्रारंभिक चरण के दौरान लगभग 24 अरब डॉलर की राशि जारी किए जाने का प्रावधान है। इसके तहत कथित तौर पर 12 अरब डॉलर अंतिम दौर की बातचीत शुरू होने से पहले ही ट्रांसफर किए जाने की बात कही गई है।हालांकि इन दावों की पुष्टि अभी तक किसी आधिकारिक दस्तावेज से नहीं हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक स्थिति समझौते का अंतिम टेक्स्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
युद्धविराम को लेकर बड़ा ऐलान
समझौते से जुड़ी जानकारी में यह भी कहा गया है कि विभिन्न मोर्चों पर तत्काल और पूर्ण युद्धविराम लागू किया जाएगा। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय के अनुसार, सैन्य गतिविधियों को स्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है।
रिपोर्टों में दक्षिणी लेबनान का भी उल्लेख किया गया है, जहां से इजरायली सेना की वापसी की बात कही जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे अन्य सैन्य अभियानों को समाप्त करने का दावा भी किया गया है। यदि ये प्रावधान लागू होते हैं तो मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की संभावना बढ़ सकती है।
नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात
ईरानी पक्ष का कहना है कि समझौते के तहत उसके खिलाफ लागू समुद्री प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। तेहरान इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा निर्यात के लिए यह कदम ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति समझौते की आधिकारिक शर्तों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ईरान ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान का आभार व्यक्त किया है और कहा है कि बातचीत को आगे बढ़ाने में इस्लामाबाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईरानी अधिकारियों ने मध्यस्थता के प्रयासों के लिए पाकिस्तान को धन्यवाद दिया है। इससे क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान की सक्रियता को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
शहबाज शरीफ ने सबसे पहले दी जानकारी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सबसे पहले इस समझौते की घोषणा की। सोमवार तड़के जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान ने विभिन्न मोर्चों पर जारी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरे मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। शरीफ के अनुसार, इससे क्षेत्रीय तनाव कम होगा और बातचीत के नए रास्ते खुलेंगे।
19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर
रिपोर्टों के अनुसार, समझौता ज्ञापन पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को किए जाने की संभावना है। तब तक दोनों पक्ष प्रारंभिक शर्तों पर अमल की दिशा में काम करेंगे। बताया जा रहा है कि अंतिम और व्यापक समझौते पर आगे की बातचीत तब होगी, जब दोनों देश एमओयू में तय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में संतोषजनक प्रगति दिखाएंगे।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान इस समझौते के आधिकारिक दस्तावेज में किन शर्तों को शामिल करते हैं। क्योंकि अभी तक सामने आई अधिकांश जानकारी ईरानी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम टेक्स्ट जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में इस समझौते से ईरान को कितने और किस प्रकार के लाभ मिलने वाले हैं तथा क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।




