चंडीगढ़ में कमर्शियल निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन! लीजहोल्ड व्यवस्था खत्म करने की तैयारी, केंद्र को भेजा गया बड़ा प्रस्ताव

चंडीगढ़ में कमर्शियल निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन! लीजहोल्ड व्यवस्था खत्म करने की तैयारी, केंद्र को भेजा गया बड़ा प्रस्ताव

चंडीगढ़ प्रशासन शहर के रियल एस्टेट और व्यावसायिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी में जुट गया है। लंबे समय से खाली पड़े करोड़ों रुपये मूल्य के कमर्शियल और औद्योगिक प्लॉट्स की बिक्री को गति देने के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर शहर की व्यावसायिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने की मांग की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो चंडीगढ़ के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में देश के अधिकांश शहरों में व्यावसायिक संपत्तियां फ्रीहोल्ड आधार पर उपलब्ध हैं, जबकि चंडीगढ़ ऐसा दुर्लभ शहर है जहां कमर्शियल प्रॉपर्टी अभी भी लीजहोल्ड व्यवस्था के अंतर्गत आती है। यही कारण है कि निवेशक और कारोबारी अक्सर पड़ोसी शहरों मोहाली और पंचकूला को प्राथमिकता देते हैं।

निवेशकों की पहली पसंद बन रहे हैं मोहाली और पंचकूला

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि चंडीगढ़ में कमर्शियल संपत्तियों की लीजहोल्ड व्यवस्था निवेश के लिए बड़ी बाधा साबित हो रही है। निवेशक ऐसे शहरों में पूंजी लगाना पसंद करते हैं जहां संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व मिलता हो।

मोहाली और पंचकूला में फ्रीहोल्ड कमर्शियल प्रॉपर्टी उपलब्ध होने के कारण वहां व्यापारिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके विपरीत चंडीगढ़ में कई प्रीमियम लोकेशन पर स्थित कमर्शियल प्लॉट्स वर्षों से खाली पड़े हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि फ्रीहोल्ड व्यवस्था लागू होने के बाद इन संपत्तियों की मांग बढ़ेगी और निवेशकों का रुझान दोबारा चंडीगढ़ की ओर होगा।

नीलामी की पुरानी योजना को बदलना पड़ा

प्रशासन ने पहले एक व्यापक योजना तैयार की थी जिसके तहत प्रत्येक तीन महीने बाद रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों की संयुक्त ई-नीलामी आयोजित की जानी थी। इसका उद्देश्य नियमित अंतराल पर संपत्तियों की बिक्री सुनिश्चित करना और राजस्व बढ़ाना था।

हालांकि, कमर्शियल प्लॉट्स को लेकर निवेशकों की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण प्रशासन को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, कमर्शियल प्रॉपर्टी की लीजहोल्ड प्रकृति संभावित खरीदारों के लिए प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई थी। इसी वजह से संयुक्त नीलामी की योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।

फिलहाल रिहायशी प्लॉट्स पर फोकस

कमर्शियल संपत्तियों के लिए केंद्र से मंजूरी मिलने तक प्रशासन ने फ्रीहोल्ड रिहायशी प्लॉट्स की नीलामी पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में जून के अंतिम सप्ताह से आवासीय प्लॉट्स की ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

एस्टेट कार्यालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार इच्छुक खरीदारों को निर्धारित तिथि तक आवेदन जमा करने के साथ अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) भी जमा करवानी होगी। केवल वही व्यक्ति या संस्था ऑनलाइन बोली प्रक्रिया में भाग ले सकेगी जिसने समय रहते आवेदन और आवश्यक राशि जमा करवाई होगी।

27 जून से शुरू होगी ई-नीलामी

प्रशासन ने शहर के विभिन्न प्रमुख सेक्टरों में स्थित 10 आवासीय प्लॉट्स की ऑनलाइन नीलामी का शेड्यूल जारी कर दिया है। आवेदन और ईएमडी जमा करने की अंतिम तिथि 23 जून शाम 5 बजे निर्धारित की गई है।

इसके बाद 27 जून से 29 जून तक तीन दिनों के दौरान ई-ऑक्शन आयोजित किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से संचालित होगी, जिससे अधिक से अधिक खरीदार भाग ले सकेंगे।

शहर के प्रमुख सेक्टरों में उपलब्ध हैं प्लॉट

इस बार जिन रिहायशी प्लॉट्स को नीलामी के लिए रखा गया है, वे शहर के विकसित और मांग वाले इलाकों में स्थित हैं। इनमें सेक्टर-15बी, सेक्टर-20, सेक्टर-21, सेक्टर-23, सेक्टर-27डी, सेक्टर-30ए, सेक्टर-37ए और सेक्टर-44बी शामिल हैं।

इन प्लॉट्स का आकार 100 वर्ग गज से लेकर लगभग 502 वर्ग गज तक है। अलग-अलग क्षेत्रफल और लोकेशन के अनुसार इनकी आरक्षित कीमतें निर्धारित की गई हैं।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि चंडीगढ़ के इन सेक्टरों में भूमि की उपलब्धता बेहद सीमित है। ऐसे में यहां किसी भी नए प्लॉट की नीलामी निवेशकों और घर खरीदने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाती है।

करोड़ों रुपये तक पहुंची रिजर्व प्राइस

नीलामी के लिए रखे गए बड़े आकार के प्लॉट्स की आरक्षित कीमतें भी काफी ऊंची रखी गई हैं। सेक्टर-21 और सेक्टर-44 में स्थित लगभग 500 वर्ग गज क्षेत्रफल वाले प्लॉट्स की रिजर्व प्राइस 16.58 करोड़ रुपये तक निर्धारित की गई है।

वहीं सबसे छोटे और अपेक्षाकृत कम कीमत वाले प्लॉट सेक्टर-44बी में स्थित हैं। इनका क्षेत्रफल लगभग 100 वर्ग गज है और इनकी शुरुआती कीमत 3.30 करोड़ रुपये तय की गई है।

प्रॉपर्टी बाजार के जानकारों का मानना है कि वास्तविक बोली प्रक्रिया में इन प्लॉट्स की कीमतें रिजर्व प्राइस से कहीं अधिक जा सकती हैं, क्योंकि चंडीगढ़ में जमीन की मांग लगातार बनी हुई है।

पूरे साल के लिए तैयार हुआ बड़ा रोडमैप

प्रशासन ने केवल एक नीलामी तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि पूरे वर्ष के लिए एक विस्तृत रोडमैप भी तैयार किया है। योजना के अनुसार वर्षभर में कुल 120 संपत्तियों की नीलामी की जाएगी।

इनमें 40 आवासीय प्लॉट, 40 व्यावसायिक बूथ एवं दुकानें तथा 40 औद्योगिक प्लॉट शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। पहले चरण में 10 रिहायशी प्लॉट्स को बाजार में उतारा जा रहा है, जबकि कमर्शियल और इंडस्ट्रियल संपत्तियों को लेकर आगे की कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगी।

फ्रीहोल्ड व्यवस्था से बढ़ सकती है मांग

व्यापारिक संगठनों और रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कमर्शियल प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड का दर्जा मिल जाता है तो शहर में निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है।

फ्रीहोल्ड व्यवस्था के तहत खरीदार को संपत्ति का स्थायी स्वामित्व मिलता है, जिससे वह संपत्ति को बेचने, हस्तांतरित करने या विकसित करने में अधिक स्वतंत्रता महसूस करता है। इसके विपरीत लीजहोल्ड मॉडल में कई प्रकार की प्रशासनिक शर्तें और सीमाएं होती हैं।

यही कारण है कि लंबे समय से कारोबारी संगठन प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि नई कमर्शियल संपत्तियों के साथ-साथ पहले से 99 वर्ष की लीज पर दी गई व्यावसायिक संपत्तियों को भी फ्रीहोल्ड में परिवर्तित किया जाए।

ट्राईसिटी में सबसे महंगी जमीन वाला शहर

चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला को मिलाकर बनने वाले ट्राईसिटी क्षेत्र में चंडीगढ़ की जमीन सबसे महंगी मानी जाती है। सीमित भूमि उपलब्धता, बेहतर शहरी नियोजन, उच्च जीवन स्तर और मजबूत बुनियादी सुविधाओं के कारण यहां संपत्तियों की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं।

देश के विभिन्न राज्यों के निवेशकों और एनआरआई समुदाय के बीच भी चंडीगढ़ की प्रॉपर्टी को लेकर विशेष आकर्षण देखा जाता है। कई खरीदार इसे सुरक्षित और दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखते हैं।

प्रशासन को उम्मीद है कि प्रस्तावित सुधारों और नियमित नीलामी प्रक्रिया के जरिए न केवल राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि शहर के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि कमर्शियल संपत्तियों को फ्रीहोल्ड बनाने की मंजूरी मिलने पर चंडीगढ़ के रियल एस्टेट परिदृश्य में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।