अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब और गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक इलाकों में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह हाल के दिनों में चल रहे सैन्य अभियान की तीसरी बड़ी कार्रवाई थी, जिसमें ईरान के अनेक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इन हमलों से ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
इन हमलों के बाद ईरान की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया। ईरानी नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) देश की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसकी रक्षा हर परिस्थिति में की जाएगी। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा कि होर्मुज का महत्व कई परमाणु हथियारों से भी अधिक है। उन्होंने दोहराया कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा ईरान की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान ईरान के विभिन्न हिस्सों में स्थित अनेक ठिकानों पर हमले किए गए। इनमें किश्म, सीरिक, बंदर अब्बास, जास्क, बुशेहर, खोंदाब, बंदर महशहर, बेहबहान, अंदीमेश्क, देजफुल, अहवाज, अबादान और खुर्रमशहर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। इन इलाकों का संबंध ऊर्जा, सैन्य गतिविधियों और सामरिक महत्व से माना जाता है।
CENTCOM ने दावा किया कि पिछले तीन दिनों के दौरान ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उसके रणनीतिक संसाधनों पर दबाव बनाना है। हालांकि ईरान ने अमेरिकी दावों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उसने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इन कार्रवाइयों का जवाब देने की क्षमता रखता है।
इसी बीच ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर जवाबी हमला किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने अमेरिकी सैन्य सुविधाओं से जुड़े कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी दावे के अनुसार हेलिकॉप्टर रखरखाव केंद्र, पी-8 सैन्य विमान के हैंगर और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमले किए गए। हालांकि अमेरिका और बहरीन की ओर से इस दावे की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो जरूर वायरल हो रहे हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
अमेरिका ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान के खुजेस्तान प्रांत में भी हवाई हमले किए। मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अहवाज शहर के आसपास कई स्थानों को निशाना बनाया गया। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
खुजेस्तान ईरान का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र माना जाता है। देश के बड़े तेल और गैस भंडार इसी इलाके में स्थित हैं। अहवाज, मारून, आघाजारी और गचसारान जैसे प्रमुख तेल क्षेत्र भी यहीं मौजूद हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र पर किसी भी प्रकार का हमला ईरान की ऊर्जा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इसके अलावा यह प्रांत इराक की सीमा से सटा हुआ है और 1980 से 1988 तक चले ईरान-इराक युद्ध के दौरान सबसे भीषण लड़ाइयों का गवाह रह चुका है। इसलिए इसका सैन्य महत्व भी बेहद अधिक माना जाता है।
तनाव के बीच ईरान के महशहर शहर में स्थित एक वाटर प्रोजेक्ट भी हमले की चपेट में आ गया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार प्रोजेक्ट पर एक प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है तथा घटना की जांच जारी है।
उधर समुद्री क्षेत्र में भी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ओमान के पास एक नागरिक जहाज पर हुए हमले में भारत के एक नागरिक के लापता होने की जानकारी सामने आई है। ‘GFS गैलेक्सी’ नामक जहाज पर कुल 11 भारतीय मौजूद थे। इनमें से 10 को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि एक व्यक्ति की तलाश अब भी जारी है। भारत सरकार ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर लेबनान तक भी दिखाई दिया। इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह जिले के कफर तेबनित क्षेत्र में गोलीबारी की। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस घटना में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इलाके में तनाव लगातार बना हुआ है।
कुवैत ने भी क्षेत्रीय हालात को लेकर चिंता जताई है। वहां की सेना ने बताया कि हालिया हमलों के दौरान देश के उत्तरी हिस्से में स्थित तीन सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि इन घटनाओं में किसी सैन्यकर्मी के हताहत होने की सूचना नहीं दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी कर रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी तेजी से दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद सोमवार को एशियाई कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 78.49 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व बेहद बड़ा है। वर्ष 2024 के दौरान समुद्री रास्ते से होने वाले वैश्विक कच्चे तेल व्यापार का एक-चौथाई से अधिक हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरा था। वैश्विक पेट्रोलियम खपत का लगभग पांचवां हिस्सा भी इस जलमार्ग से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का परिवहन भी इसी रास्ते से होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है तो सबसे अधिक प्रभाव एशियाई देशों पर पड़ेगा। चीन, भारत, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों की तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024 में होर्मुज से गुजरने वाली लगभग 83 प्रतिशत LNG एशियाई बाजारों के लिए भेजी गई थी। इनमें अकेले चीन, भारत और दक्षिण कोरिया की संयुक्त हिस्सेदारी 52 प्रतिशत के आसपास रही।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहीं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें दोनों देशों की अगली रणनीति पर टिकी हैं, क्योंकि मौजूदा हालात मध्य पूर्व को एक बड़े संकट की ओर ले जा सकते हैं।




