भारत के अलग-अलग राज्यों में हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली और हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में वांछित गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को अमेरिका में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने उसे हिरासत में लिया है। हिमांशु भाऊ लंबे समय से भारतीय जांच एजेंसियों के निशाने पर था। दिल्ली और हरियाणा पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी उसकी तलाश कर रही थी। अब अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और भारत प्रत्यर्पण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हिमांशु भाऊ पर दिल्ली, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कही जाती है। इनमें हत्या, जानलेवा हमले, कारोबारियों से रंगदारी मांगने और अवैध हथियारों से जुड़े आरोप शामिल हैं। उसकी गिरफ्तारी को भारतीय एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, हालांकि भारत लाने की प्रक्रिया को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।
इस मामले में एक अन्य फरार आरोपी नीरज फरीदपुरिया को भी पकड़े जाने की खबर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह जमानत पर बाहर आने के बाद अपने टखने में लगा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी ट्रैकर हटाकर अधिकारियों की नजर से बचने की कोशिश कर रहा था। दोनों आरोपियों से संबंधित कानूनी कार्रवाई के अगले चरण पर अब निगाहें टिकी हुई हैं।
लास वेगास में छिपकर रह रहा था हिमांशु भाऊ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमांशु भाऊ अमेरिका के लास वेगास में अपना ठिकाना बनाकर रह रहा था। उसकी तलाश में भारतीय पुलिस की कई टीमें जुटी हुई थीं। जांच से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया गया कि दिल्ली और हरियाणा की पुलिस टीमें उसकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं।
जांच एजेंसियों ने तकनीकी निगरानी और मुखबिरों से मिली सूचनाओं की मदद से उसके संभावित ठिकाने का पता लगाया। इसके बाद संबंधित जानकारी अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा की गई। बताया गया है कि इसी सूचना के आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने कार्रवाई की और गुरुवार शाम उसे गिरफ्तार कर लिया।
हिमांशु भाऊ लंबे समय से भारत से बाहर रहकर अपना नेटवर्क संचालित करने के आरोपों के कारण जांच एजेंसियों की चिंता बना हुआ था। विदेश में मौजूद होने की वजह से उसे पकड़ना भारतीय पुलिस के लिए आसान नहीं था। ऐसे मामलों में आरोपी की लोकेशन का पता लगाने, दूसरे देश की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने और स्थानीय कानूनों के तहत कार्रवाई कराने की जरूरत पड़ती है।
फिलहाल गिरफ्तारी से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक जानकारी और आगे की प्रक्रिया के बारे में संबंधित एजेंसियों की पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है। किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे भारत लाने के लिए संबंधित कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
17 साल की उम्र से शुरू हुआ आपराधिक सफर
रिपोर्ट्स के अनुसार, 24 वर्षीय हिमांशु भाऊ हरियाणा के रोहतक जिले के रिटौली गांव का रहने वाला है। उसका नाम कम उम्र में ही आपराधिक गतिविधियों से जुड़ने लगा था। बताया जाता है कि उसने करीब 17 साल की उम्र में रोहतक की सब्जी मंडी के आसपास जबरन वसूली से अपराध की दुनिया में कदम रखा।
शुरुआत में स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहने वाला हिमांशु धीरे-धीरे दूसरे अपराधियों के संपर्क में आया। उसके खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस से जुड़ी रिपोर्टों में समय के साथ गंभीर आरोप जुड़ते गए। बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा कर लिया और उसके नेटवर्क के हरियाणा तथा दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न इलाकों तक फैलने की बात सामने आई।
हिमांशु भाऊ का नाम वर्ष 2020 में भी चर्चा में आया था। स्थानीय युवक सनी की हत्या के बाद उसे हिसार के बाल सुधार गृह में रखा गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी दौरान वह करीब 20 अन्य लड़कों के साथ वहां से फरार हो गया। इस घटना के बाद उसकी तलाश शुरू हुई और उसके आपराधिक नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई।
बताया जाता है कि बाद के वर्षों में उसके संपर्क जेल में बंद गैंगस्टर नीरज बवाना से भी जुड़े। इसके बाद व्यापारियों और कारोबारियों को धमकाकर पैसे वसूलने जैसी गतिविधियों में उसके गिरोह का नाम सामने आने लगा। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं में किसी व्यक्ति की भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत में उपलब्ध सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।
2022 में एक दिन के भीतर तीन हत्याओं के बाद बढ़ी चर्चा
हरियाणा में वर्ष 2022 के दौरान 24 घंटे के भीतर हुई तीन हत्याओं के बाद हिमांशु भाऊ का नाम व्यापक रूप से चर्चा में आया। इन घटनाओं ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन का ध्यान उसकी गतिविधियों की ओर खींचा। इसके बाद उसके कथित गिरोह और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच तेज होने की खबरें सामने आईं।
हिमांशु पर व्यापारियों, शराब ठेकेदारों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों को निशाना बनाकर रंगदारी मांगने के आरोप हैं। आरोपों के मुताबिक, कुछ मामलों में धमकी देने के लिए गोलीबारी का सहारा लिया जाता था। इस तरह की घटनाओं का उद्देश्य कारोबारियों में डर पैदा करना और उनसे पैसे वसूलना बताया गया है।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या और हत्या की कोशिश के कई आरोप शामिल होने की बात कही जाती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में हत्या तथा हत्या के प्रयास से जुड़े 16 मामलों का उल्लेख किया गया है, जबकि कुल आपराधिक मामलों की संख्या 30 से अधिक बताई जाती है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में मामलों का वर्गीकरण अलग हो सकता है और सभी आरोपों को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
हिमांशु की गतिविधियों का दायरा केवल रोहतक तक सीमित नहीं बताया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके गिरोह का नेटवर्क हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के अलावा अन्य राज्यों तक फैला होने की आशंका रही है। इसी वजह से कई पुलिस इकाइयां और केंद्रीय एजेंसियां उससे जुड़े मामलों की जांच करती रही हैं।
एल्विश यादव के घर के बाहर गोलीबारी में भी आया नाम
हिमांशु भाऊ के कथित गिरोह का नाम मनोरंजन जगत से जुड़ी एक चर्चित घटना में भी सामने आया था। वर्ष 2025 में यूट्यूबर एल्विश यादव के गुरुग्राम स्थित आवास के बाहर गोलीबारी हुई थी। इस घटना की जिम्मेदारी हिमांशु भाऊ के नाम से जुड़े गिरोह द्वारा लेने की खबरें सामने आई थीं।
इस मामले ने सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में काफी चर्चा बटोरी थी। हालांकि, किसी घटना की जिम्मेदारी लेने संबंधी दावा अपने आप में किसी आरोपी की भूमिका का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं होता। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और अदालत में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करती है।
इसके अलावा, दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके में स्थित बर्गर किंग आउटलेट पर हुई हत्या और एक कार शोरूम के बाहर गोलीबारी जैसी घटनाओं में भी उसके कथित नेटवर्क का नाम जोड़े जाने की खबरें आई थीं। इन घटनाओं ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय संगठित अपराध और रंगदारी के मामलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई थी।
व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर गोलीबारी और कारोबारियों को धमकाने के मामलों में पुलिस आमतौर पर सीसीटीवी फुटेज, फोन रिकॉर्ड, डिजिटल संपर्कों और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों की जांच करती है। हिमांशु भाऊ से जुड़े मामलों में भी उसके नेटवर्क, सहयोगियों और कथित वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस और पुलिस का इनाम
हिमांशु भाऊ की तलाश केवल राज्य पुलिस तक सीमित नहीं रही। रिपोर्टों के मुताबिक, इंटरपोल ने वर्ष 2023 में उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। इस नोटिस का उद्देश्य सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच किसी वांछित व्यक्ति की पहचान और संभावित गिरफ्तारी के लिए सहयोग आसान बनाना है। यह अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता; संबंधित देश अपने कानूनों के अनुसार आगे की कार्रवाई करते हैं।
हिमांशु की गिरफ्तारी के लिए हरियाणा पुलिस ने उस पर 2.5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जबकि दिल्ली पुलिस की ओर से एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था। इनाम की घोषणा से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय एजेंसियां उसकी तलाश को गंभीरता से ले रही थीं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी, हरियाणा पुलिस की विशेष कार्यबल (STF) और दिल्ली पुलिस समेत कई इकाइयां उससे जुड़े मामलों पर काम कर रही थीं। विदेश में छिपे आरोपियों तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसियों को दूसरे देशों के अधिकारियों के साथ जानकारी साझा करनी पड़ती है। इस मामले में भी अमेरिकी एजेंसियों के साथ सूचना का आदान-प्रदान गिरफ्तारी तक पहुंचने वाला अहम कदम बताया जा रहा है।
लॉरेंस गोल्डी बराड़ गैंग से दुश्मनी के दावे
हिमांशु भाऊ के संबंधों को लेकर भी कई तरह की रिपोर्टें सामने आती रही हैं। उसे नीरज बवाना और बंबीहा गैंग से करीबी रखने वाला बताया गया है, जबकि लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े गिरोहों के साथ उसकी दुश्मनी की चर्चा होती रही है। इन कथित प्रतिद्वंद्विताओं को दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में कुछ आपराधिक घटनाओं के संदर्भ में देखा जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमांशु कुछ समय पुर्तगाल में भी रह चुका है और विदेश में रहते हुए अपने गिरोह का संचालन करने के आरोपों का सामना कर रहा है। उसके नेटवर्क के सदस्य कथित तौर पर वर्चुअल फोन नंबरों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर कारोबारियों से संपर्क करते थे। डिजिटल माध्यमों से धमकी देने और रंगदारी मांगने के मामलों की जांच में तकनीकी साक्ष्य अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, गिरोहों के बीच संबंधों और आपसी दुश्मनी से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों के आधिकारिक रिकॉर्ड तथा अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
अब भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर नजर
अमेरिका में हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि उसे भारत कब और किस प्रक्रिया के तहत लाया जाएगा। किसी विदेशी देश में गिरफ्तार व्यक्ति को भारत सौंपने के लिए लागू कानूनों, संबंधित समझौतों और न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ सकता है। इसलिए गिरफ्तारी के तुरंत बाद प्रत्यर्पण पूरा हो जाना जरूरी नहीं है।
भारतीय एजेंसियों के लिए आगे की कार्रवाई में उसके खिलाफ दर्ज मामलों का रिकॉर्ड, गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेज और आवश्यक कानूनी अनुरोध महत्वपूर्ण हो सकते हैं। भारत लाए जाने की स्थिति में उससे जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ सकती है और संबंधित अदालतों में कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई गिरफ्तारी की खबर ने लंबे समय से फरार चल रहे गैंगस्टर की तलाश से जुड़े मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, प्रत्यर्पण की समयसीमा, भारत में संभावित हिरासत और आगे की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। आने वाले दिनों में अमेरिकी अधिकारियों और भारतीय जांच एजेंसियों की ओर से मिलने वाली जानकारी इस मामले की अगली दिशा स्पष्ट कर सकती है।




